[संगीत] क्या का रहा है [संगीत] और तुम उन्हें जानकारी रहे हो [प्रशंसा] भक्ति की भक्ति तभी पूर्ण होती है जब वो अपने भगवान को माने के साथ पहचाना पहने भी यह भक्ति मुझे मां तो रहा है किंतु पहचान नहीं का रहा मेरा हाथ थमना छह रहा है [संगीत] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] जगन्नाथ नहीं हो शक्ति [संगीत] मेरे बचपन से मुझे अपने पास बुलाया [संगीत] है [संगीत] [संगीत] उनकी महिमा को स्वीकार नहीं कर सकते हो वैसे भी अब मंदिर के पट बैंड करने का समय हो गया [संगीत] मैं नहीं मां सकता [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] क्या हुआ प्रभु [संगीत] से दूर जान पर हो गया था क्या आप प्रभु क्या वो समझ गया था जिन्हें ढूंढते ढूंढते कोई यहां तक पहुंच था वही प्रभु जगन्नाथ जी मंदिर के भीतर थे नहीं अभी नहीं क्योंकि भक्ति जब एक बार अपने मां मंदिर में प्रभु की छवि बस लेट है तो सर्वत्र वो इस छवि के दर्शन पन चाहता है और उन्हें की भक्ति करता है और जब प्रभु किसी अन्य रूप में ए भी जैन तो उन्हें नहीं पहचान पता और यही माधव दास के साथ भी हो रहा था वह तो प्रभु का हाथ थमना चाहता था वही उसकी भक्ति का देर था इसलिए प्रभु जगन्नाथ की बिना हाथ की प्रतिमा को देख वह उन्हें उसे रूप में स्वीकार ही नहीं कर का रहा था [संगीत] भगवान श्री जगन्नाथ की शरण में जो कोई भी जाता है तुम्हारा तुम चिंता मत कर मत करो आज नहीं तो कर लो तुम्हें अपनी नियति का ज्ञान [संगीत] मिलेगी [संगीत] [संगीत] कहां है आप कहां यार प्रभु आपका यह भक्ति आप से मिलने यहां तक पहुंच गया अब आपको मुझे मिलने आना ही होगा आपने उचित है [संगीत] इस वक्त [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [हंसी] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] शाखा माधव तुम्हें कष्ट होते देख मुझे भी कष्ट होता है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] किंतु भक्ति की परीक्षा में भगवान सदैव उसके साथ उसके सहायक बनकर वही रहते हैं किंतु प्रभु का यह भक्ति माधव दास उसे प्रकार भूख प्यासा कब तक बैठा र सकता था उसने निर्णय लिया था वहीं बैठने का जब तक उसके प्रभु स्वयं जगन्नाथ जी उसके पास नहीं पहुंच जाते प्रभु निरंतर उसकी सहायता कर रहे थे किंतु वो उन्हें पहचान को अस्वीकार कर उनकी सहायता को जानकारी रहा था मौला [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] बहुत प्यास लगी है [संगीत] [प्रशंसा] चाहे कुछ भी हो जाए चाहे मुझे कितना भी दुख क्यों ना सहाना पड़े परंतु जब तक प्रभु स्वयं आकर मेरे सहायता नहीं करते मैं किसी की सहायता स्वीकार नहीं करूंगा इसे अपना है जगन होगा हमें इसे समझना होगा यह जो कर रहा है यह भूल है इसकी तुम्हारा परिचय देना होगा इसे इसे बताना होगा की तुम्हारे जगन्नाथ स्वरूप को स्वीकार एन कर बहुत बड़ी भूल कर रहा है मैं ही जाकर समझता हूं [संगीत] क्या देख रहे हो क्या लगता है [संगीत] किंतु आप तो देख ही राखी रहे मेरा भक्ति माधव दास बहुत खट्टी है और यदि उसकी है से आपका क्रोध जागृत हो गया [संगीत] इसलिए कथा चित आपको नहीं जाना चाहिए था तो तुम्हें लगता है की तुम्हारे इस वक्त को संभल नहीं सकता मैं किंतु दो कन्हैया मैं तुम्हारा दोस्त जब मैं बालिका से तुम्हें समझते आया हूं तो तुम्हारे इस वक्त को भी समझा ही दूंगा मेरे शब्दों से माधवदास की आंखें खुला जाएगी [संगीत] [संगीत] [संगीत] ए साधारण से ग्वाले को जगन्नाथ जी कहकर क्यों पुकार रहे हो मुझे लगा जैसे हो और मेरे पास कुछ अतिरिक्त [संगीत] तुम्हारी दशा देखकर और कैसे ये लोग [संगीत] मुझे नहीं चाहिए मैं यह दूध नहीं ले सकता है [संगीत] तुम क्या कहना चाहते हो [संगीत] तुम्हें लगता है जगन्नाथ जी की दृष्टि से कुछ भी छिपा हुआ है [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] और तुम्हें कैसे पता की वह तुम्हारी सहायता नहीं कर रहे हैं हो सकता है उन्होंने ही मुझे भी भेजो हो वह तो कुछ भी सकता है किंतु [संगीत] जिनकी प्रतीक्षा कर रहे हो वो वही हैं [संगीत] जो उनके दर्शन करो मां की दृष्टि से देखा उन्हें और पहचानो वही [प्रशंसा] [संगीत] कहा था जगन्नाथ जी जिनका भी हाथ थमते हैं उन्हें कभी अकेला नहीं छोडूंगा [संगीत] [संगीत] फिर क्या हुआ प्रभु क्या प्रभु बलराम जी क्रोधित हो गए क्या उनकी क्रोध की वर्षा हो गई हकीकत माधव दास पर जैसा प्रभु श्री कृष्णा ने कहा एक और हत्था तो दूसरी और क्रोध था जिससे संकट उत्पन्न होने की पुरी संभावना थी इसलिए माधव दास की भक्ति की परीक्षा अब स्वयं प्रभु बलराम जी के लिए परीक्षा बन गई थी वह गए तो थे भक्ति को समझने किंतु स्वयं को समझने में ही कठिनाई का अनुभव करने लगे थे तो कोई बात नहीं किंतु परमेश्वर है [संगीत] क्या हुआ तुम्हारी पत्नी ने उनका परिचय तो दिया ही होगा [संगीत] [संगीत] [संगीत] जरा सोचो उसने तुम्हें पुरी धाम ही क्यों भेजो [संगीत] कोई बात नहीं चिंता ना करो मैं तुम्हें जगन्नाथ जी के बड़े में सब कुछ बताऊंगा [संगीत] की उनके दर्शन कैसे होंगे [संगीत] तभी तुम्हें परम ब्रह्म परमेश्वर के दर्शन हो सकेंगे [संगीत] [संगीत] और उनका पुरी धाम प्रभु के प्रमुख धमौन में से जी तरह प्रभु आदि और अंत से पैर हैं वैसे ही पुरी का अस्तित्व सदा से था और अनंत कल तक रहेगा [संगीत] [संगीत] रामेश्वरम और पुरी सृष्टि के पहले से ही स्थित [संगीत] है [संगीत] [संगीत] [संगीत] दुख हरण प्रभु श्री हरि नारायण से जुड़े यह चारों धाम बद्रीनाथ द्वारका रामेश्वरम और पुरी अपनी अलौकिक स्वरूप में भी स्थिर थे जहां प्रभु श्री हरि नारायण साहब जाते हैं [संगीत] [संगीत] [संगीत] प्रभु आपकी दैनिक कर धाम यात्रा में विलंब हो रहा है [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] बद्रीनाथ के अलौकिक धाम के कुंड में स्नान से करते हैं [संगीत] फिर वहां से प्रभु द्वारका के अलौकिक धाम की यात्रा करते हैं जहां पर वो अपने वस्त्र बदलते हैं [संगीत] और नए वस्त्र धरण करने की पश्चात प्रभु भजन के लिए अगले धाम जाते हैं [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] सर्वे भद्राणि पश्यंतु मां कश्यप भाग भावे और फिर भजन संपन्न करने के पश्चात प्रभु संध्या वंदन और विश्राम हेतु रामेश्वरम के अलौकिक धाम को जाते हैं [संगीत] बावदेव असलम [संगीत] [संगीत] इस प्रकार से प्रभु की दिनचर्या आरंभ होती थी और रामेश्वरम के धाम में संपन्न होती थी [संगीत] जिससे समस्त जगत को इन धमौन की यात्रा का [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] प्रभु यही विराजमान है तो उनके दर्शन भी प्राप्त किया होंगे [संगीत] [संगीत] श्री जगन्नाथ स्वरूप की ही हैं [संगीत] यह प्रतिमाएं पूर्ण होते हुए भी तुम्हें अपूर्ण दिखाई दे रही हूं इसका भी एक करण है और जब वह करण तुम्हें ज्ञात होगा तो इनकी पूर्णता का आभास तुम्हें स्वत ही हो जाएगा [संगीत] [संगीत] प्रभु के उठाते ही उनकी दृष्टि मुझमें पर ही पढ़नी चाहिए और उनके श्री मुख से मेरा ही नाम निकालना चाहिए मैं उनके मधुर स्वर में रुक्मणी सुनने को [संगीत] [संगीत] राधे राधे राधे [संगीत] [संगीत] [हंसी] [प्रशंसा] [संगीत] क्या करण है जिसने कृष्णा की पटरानियों को आज मेरे सामने उपस्थित होने पर विवश कर दिया माता आपको तो स्वामी के बड़े में सब ज्ञात होगा ना मेरे हृदय में बलराम और कृष्णा में कोई भेद नहीं है दोनों ही मेरे पुत्र है तुम क्या जानना चाहती हो मेरी भाभियों को किस बात में विचलित किया है तनिक सुभद्रा को भी तो पता चले मां आज हमारे मां में एक ही प्रश्न है हम दोनों प्रभु की जीवन संगिनी सदा उनके साथ रहती है [संगीत] वह जीवन पूर्ण स्वार्थ था कुछ संबंधों से परिभाषित नहीं था वो केवल और केवल निस्वार्थ प्रेम था [संगीत] यदि ऐसा था मां तो हमें भी प्रभु की दिव्या कथाओ को सुना है [संगीत] मां बताइए ना [संगीत] [संगीत] [संगीत] जिज्ञासा व्यक्ति के विकारों का ही अंत नहीं करती अपितु उसकी अज्ञानता का भी अंत करती है
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