[संगीत] महाभारत कैसे हो मित्र दुर्योधन आओ मित्र प्रणाम मामा श्री मामाश्री आपके इस मुख मंडल पर विश्वास का जो प्रकाश हुआ करता था कहां चला गया इन्होंने उसकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसे गंधार भेज दिया है अरे मामा श्री हंसिए हंसिए इतने वर्षों से हम जिस युद्ध की प्रतीक्षा कर रहे थे वह सामने खड़ा है इसीलिए नहीं हस राहा भांजे श्री इसीलिए नहीं हंस रहा क्योंकि जब युद्ध उस पार खड़ा हो तो हसना नहीं चाहिए सोचना चाहिए सोचना उस दिन हरी सभा में उस वासुदेव कृष्ण ने जो चमत्कार दिखाया था उसके प्रभाव के विषय में सोचो प्रभाव के विषय में उस मायावी ने उस दिन ना जाने कितनी ही आत्माओं के आलो में अपनी भक्ति के दीपक चलाती होंगे ये जो श्रद्धा होती है ना भांजी ये एक अचूक अस्त्र है और कवच भी है इससे सदैव सावधान रहना चाहिए तुम्हारे ना जाने कितने ही काठ के योद्धाओं को उसकी माया दीमक की भाति चा चुकी है अब तक और यदि चाट नहीं झुकी तो चाट रही होगी इसलिए अपने महारथियों को कसके पकड़ने का प्रयत्न करो भांजे कसके पकड़ने का प्रयत्न करो एक एक से पूछो कि वह तुम्हारे पक्ष में युद्ध करेगा या नहीं मुझसे पूछो इन महारथी अंगराज से पूछो पूछो भांजे मुझसे भी माम श्री मैं तो स्वयं अपने से भी पूछने को कह रहा हूं आज निष्ठा बड़े दबाव में है अंगराज जो निष्ठा दबाव में आ जाए मामाश्री वो निष्ठा नहीं केवल निष्ठा का भ्रम है मैं एक धनुर्धर हूं जिस लक्ष्य भेदन का संकल्प कर लिया सो कर लिया मेरा लक्ष्य अर्जुन वत था अर्जुन वध है और अर्जुन वध रहेगा आप अपने आप से पूछिए यदि चीता अपने बूटे बदलना भी चाहे तो नहीं बदल सकता अंगराज मैं तो पांडवों को कुशल देख ही नहीं सकता कभी नहीं देख सकता तो फिर चिंता का कारण प्रश्न यह है मित्र कि हम अपनी सेना का प्रधान सेनापति किसे नियुक्त करें तुम किसे चाहते हो मैं तो तुम्हें चाहता हूं मित्र और मेरे विचार में यही उचित है अरे मूर्खों के सिर पर सी नहीं होते दुर्योधन मामा श्री मामा श्री ठीक कह रहे हैं दुर्योधन तुम क्या समझते हो कि क्षत्रिय किसी सूत पुत्र को प्रधान सेनापति स्वीकार कर लेंगे क्या मैं क्षत्रिय नहीं हूं और यदि मैं तुम्हें प्रधान सेनापति स्वीकार कर सकता हूं तो किसी और क्षत्रियो को भला तुम्ह प्रधान सेनापति स्वीकार करने में क्या आपत्ति हो सकती है अरे ये युद्ध जीतने के लक्षण नहीं है भांजे दुर्योधन मैं पितामह को प्रधान सेनापति नियुक्त नहीं कर सकता क्योंकि वे पांडवों के शुभचिंतक है मित्र दुर्योधन प्रधान सेनापति बनने का अधिकार तो केवल गंगापुत्र भीष्म को ही है हा और राजनीति के साथ-साथ युद्ध नीति की भी यही मांग है कुंती का कौन सा ऐसा पुत्र है जो गंगापुत्र की ओर वाण चला पाएगा क्या उस सर्वश्रेष्ठ धनुर के वाण में गंगापुत्र भीष्म की छाती वेने की शक्ति है नहीं अरे आधि विजय तो उन्हें प्रधान सेनापति नियुक्त करने के साथ साथ ही हो जाएगी बाकी बची आधी सो उसका प्र बंद करने के लिए तुम्हारे साथ अनेक मारथी है रणभूमि में उनके ध्वज का दर्शन ही पांडवों के नैतिक पतन के लिए बहुत है और वह वसुदेव पुत्र भी गंगापुत्र भीष्म के विरोध में कुंती पुत्रों को कोई पट्टी नहीं पढ़ा पाएगा कोई पट्टी नहीं पढा पाएगा बाजे और यह भी तो सोचो मित्र दुर्योधन कि महारथियों का अहम हर योद्धा को तो प्रणाम नहीं करता किंतु गंगापुत्र की बात और है उन्हें तो मेरा अहम भी प्रणाम करता रहता है तो यदि किसी और को प्रधान सेनापति नियुक्त कर दिया तो मित्र हमारी सेना में फूट पड़ सकती है हां दुर्योधन फूट पड़ सकती है महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत [संगीत]
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