Friday, 2 January 2026

माता रानी ने प्रसन्न होकर राजा हरिश्चंद्र को आशीर्वाद दिया Vighnaharta Ganesh Ep 847 Pen Bhakti

[संगीत] वचन का महत्व प्राणों से भी अधिक होता है यह आज तुमने प्रमाणित कर दिया है व हरिश्चंद्र किंतु ऐसा त्याग जिससे किसी की जीवन में कोई संकट आए उसकी ना तो कोई आवश्यकता है और ना ही वह धर्म के अनुसार है क्योंकि भगवान पीड़ा से नहीं भक्ति और प्रेम के भाव से प्रसन्न होते हैं और उन्हे पाने का एक मात्र यही उपाय होना चाहिए माता ने फिर जगत को भक्ति और त्याग का सही अर्थ बताया धर्मानुसार त्याग विकारों का करना चाहिए बुराइयों का करना चाहिए जिससे किसी को कष्ट हो ऐसे प्रत्येक कर्म का त्याग करना चाहिए क्योंकि किसी के प्राण अथवा तन को कष्ट पहुंचाना धर्म संगत कैसे हो सकता है भला भक्ति और प्रेम भाव से भगवान प्रसन्न होते हैं तभी वरदान भी मिलते हैं और चमत्कार भी होते हैं गणेश जी मैं तो यह जानना चाहता हूं कि फिर राजा हरिश्चंद्र को क्या मिला माता ने अपने वचनों से उन पर कृपा वर्षा की उन्हें एक और सीख दी और स्मरण रहे राजा का धर्म होता है अपने सभी प्रजा जनों को समानता के भाव से देखना कोई भेदभाव ना करना यही राजा की सर्वोच्च मर्यादा है ा हो या रंग ईश्वर के सामने सब एक ही समान है इस समानता के भाव का सम्मान ना करने के कारण ही तुम्हें यह परीक्षा देनी पड़ी क्योंकि धन संपत्ति सब नष्ट हो जाते हैं या सब पीछे छूट जाते हैं किंतु अच्छे कर्म उनसे अर्जित पुण्य मनुष्य के साथ रह जाते हैं और ये जीवन सबसे बड़ा सत्य है इसलिए शुभ कार्य में किसी निन के घर जाना किसी मर्यादा का उल्लंघन करना नहीं हो [संगीत] सकता कीजिए मा फिर ऐसी भूल में कदा भी नहीं करूंगा बस हरिश्चंद्र तुम ऐसे महान सत्यवादी होने का उदाहरण प्रस्तुत करोगे जो निद्रा में स्वपन में दिए गन भी करो और उसे सत्य प्रमाणित भी करोगे भविष्य में तुम्हारी दृष्टि निर्धन धनवान जाति धर्म किसी में भेद नहीं होगा सभी प्रजा जनों को एक समान मानने वाले सत्य और न्याय के प्रति समर्पित तुम सभी प्रजा जनों के हित में निरंतर कर्म करने वाले वो राजा होंगे जिसके लिए मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं होगा स का पर्याय हो जब जब सत्य की चर्चा होगी तुम्हारा नाम अवश्य लिया जाएगा सत्यवादी हरिश्चंद्र सत्यवादी [संगीत] हरिश्चंद्र और पुत्री तारा मेरे प्रति तुम्हारी भक्ति मुझ पर तुम्हारा अटूट विश्वास [संगीत] तुम और मेरे भक्तो के समी ही र मन से शब्दों से मेरे भक्त मेरे साथ सदा तुम्हारा भी स्मरण करेंगे तुम्हारी कथा कहे बिना मेरा जगरा नहीं [संगीत] होगा रूप भयंकर गले मुंडमाला माता काल रात्रि है संता हत्री रुक्म तुम्हारी बहन तारा के समान मैं तुमसे भी प्रसन्न हूं तुमने अपनी इच्छाओं से दूर रहकर धर्म कर्म को समझकर पूर्ण विश्वास से उस पर चलकर भक्त के उत्तम गुणों का परिचय दिया है ऐसा करने से ना केवल पूर्व जन्म के अप इस जन्म के भी पाप भल जाते इसलिए मैं तुम्ह वरदान देती हूं रुक्मण तारा के साथ मेरे जगराते में तुम्हारी कथा भी अवश्य कही जाएगी और आयु समाप्त होने पर धरती के सभी सुखों को भोगने के पश्चात तुम तीनों को मोक्ष प्राप्त होगा जयकारा शेरा वालिदा बोल साचे दरबार की जय और यह थी कथा देवी तारा रानी की और देवी रुक्मण की सच्ची भक्ति की यह कथा हमें सिखाती है कि अगर हमसे कोई गलती या फिर कोई अपराध हो जाए तो हमें उसे छुपाना या फिर उससे भागना नहीं चाहिए बल्कि भक्ति की शक्ति से उसे सुधारने का प्रयास करना चाहिए तो क्या प्रभु जैसे रुक्मण को मुक्ति मिली मोक्ष प्राप्त हुआ तो क्या मुझे भी अवश्य पुष्पदंत जी इसलिए तो मैं आपको भक्तों की कथाएं सुना रहा हूं भक्त श्रीधर ने सत्य कहा था भक्ति पापों से मुक्ति का उपाय है रुक्मण ने भक्ति में जागरण किया और माता रानी की कृपा प्राप्त कर ली अच्छा तो उन वृद्धा माता को भी श्रीधर द्वारा जगराता कराने का फल मिला होगा फल तो सभी को मिलता है जो जगराता कराते हैं उन्हें भी और जो करते हैं उन्हें भी एवं जो सच्ची श्रद्धा से सुनते हैं उन्हें भी क्या हुआ श्रीधर जी आपका उत्साह इतना क्षीण क्यों हो गया झगरा आता संपन्न जो हो रहा है माता यह तो उनमें से हैं जो चाहते हैं जगराता कभी समाप्त ना हो निरंतर चलता रहे और यह माता रानी की भक्ति और सेवा करते [संगीत] रहे क्या बात है न जी इतना प्रसन्न क्यों है अरे प्रसन्नता की तो बात है ना भोला जगराता समाप्त हो गया है अब संभावना का और दान दक्षिणा प्राप्त करने का समय [संगीत] है आपके वहां संभावना में क्या मिलने की संभावना है क्योंकि अगर वह नहीं मिली तो पूजा का पुण्य उसको प्राप्त होगा जो पूजा कराएगा मैं श्रीधर महाराज को संभावना में क्या दूंगी एक खूटे कौड़े भी तो नहीं है मेरे पास और इन्हें कुछ ना दे सकी तो फिर जागरण का पुण्य कैसे प्राप्त होगा मुझे मेरी य इच्छा अपूर्ण रह जाएगी देखो देखो चढ़ावे की थाल तो देखो अरे झूलिया भर जाएंगी हमारी और उधर वह श्रीधर उस वृद्धा के घर से खाली हाथ [संगीत] लौटेगा जग जननी जय जय मां जग जननी जय जय भय हारिणी भव तारिणी भय हारिणी भव तारिणी भव भामिनी जय जय मां जग जननी जय जय जग जननी जय जय मां जग जननी जय जय भय हारिणी भव तारिणी भय हारिणी भव कारि भव भामिनी जय जय जय जग जननी जय जय आदि अनादि अना मय अविचल अविनाशी अविचल अविनाशी अमल अनंत अगोचर अमल अनंत अगोचर अज आनंद राश जय जग जननी जय ज अविकारी अहारी अकल कलाधारी मैया अकल कलाधारी करता विधि भरता हरि रता विधि भरता हरि हर संहार कारी मां जग जननी जय जय जग जननी जय जय मां जग जननी जय मेवा मिठन चढ़ावा सब होंगे मेरे मिलेगी खूब संभावना दिन फिर जाएंगे तेरे बोल साचे दरबार की जय बोलो माता रानी की जय जयकारा शेरा वालिदा बोल दरबार की जय दुर्गा मैया की जय दुर्गा मैया की [संगीत] जय क्या हुआ माता आप इतनी चिंतित क्यों है क्षमा कीजिए अधिक कुछ दे ना सकूंगी मैं हो तो आप संभावना को लेकर विचलित [संगीत] हैं आप चिंता ना करिए माता आपके घर में जो होगा मुझे स्वीकार [संगीत] है जगराते के पुण्य को प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है अन्यथा यह नहीं भी होता तो भी पूजा संपन्न है किंतु इस निर्धन वृद्धा के पास तो माता आप चिंता मत कीजिए आपके घर में चावल का एक दाना भी होगा तो वह भी मुझे स्वीकार [संगीत] है भोला तैयार हो जाओ भाग्य के द्वार खुलने वाले हैं संभावना के रूप में वारे न्यारे हो जाएंगे और हम यहां से अधिक धनवान हो कर के निकलेंगे [संगीत] जी जयकारा शेरा वाली द बोल साचे दरबार की जय जगराता संपन्न हुआ जजमान जय माता की जय माता की जय माता की क्षमा कीजिए मैं समझ गया मैं अभी आपकी संभावना की व्यवस्था करता हूं स्मरण है ना भोला शेठ जी निमंत्रण लेकर के जब आए थे तो क्या बोला था शेठ जी ने निश्चिंत रहिए मुझे सब स्मरण है जो दूंगा मैं दूंगा उस वृद्ध माता के यहां आपको कुछ नहीं मिलेगा यही ना [संगीत] मेरे पास तो धान का एक दाना भी नहीं फिर क्या करूं मैं क्या दूं कैसे दूं मां अब तो आप ही कृपा कीजिए स्वामी क्या हुआ वृद्ध माता चिंता में है लगता है उनके पास देने के लिए कुछ नहीं है और मैं नहीं चाहता कि वह चिंता करें किंतु मुझे बस इतना चाहिए कि इस पूजा का पुण्य उन्हें प्राप्त [संगीत] हो इससे आगे मुझे और कुछ नहीं चाहिए मैं तो बस माता की सेवा का अवसर चाहता था जो मुझे मिल चुका है माता रानी कृपा कीजिए सहायता कीजिए फल है अच्छा किया ला इधर दे दीजिए भोला तो अकेला है इसका परिवार तो तीर्थ पर गया है ये इतने सारे फल अकेले नहीं खा पाएगा लाइए इधर दे दीजिए हां हां उचित कहते हैं आप यह लीजिए [संगीत] आप हे करुणामई माता हे कृपा काणी संभावना में कुछ देने के लिए इनकी सहायता [संगीत] कीजिए माता बहुत भोला है आपका यह भक्त बहुत पावन है इसका भक्तिमय हृदय इसने यजमान की पूजा भी करवाई और अब स्वयं ही य प्रार्थना भी कर रहा है कि यजमान को संभावना रूप में देने के लिए कुछ प्राप्त हो जाए ऐसे भक्त भक्ति का जीवन भी बनते हैं और प्राण वायु भी उनकी पुकार तो आप अवश्य सुनती है ना [संगीत] माता और इसी विश्वास के कारण वह मेरे प्रथम चमत्कार का अनुभव करने वाला है वह चमत्कार अब होने ही वाला है ना माता जो इस भक्त को भगवान के और भगवान को इस भक्त के और निकट ले आएगा [संगीत] माता ने कुछ कहा नहीं और प्रस्थान भी कर गई अब अवश्य ही कोई अद्भुत चमत्कार [संगीत] होगा तो क्या भक्त श्रीधर को माता के दर्शन प्राप्त होने वाले हैं [प्रशंसा] तो क्या उन्हें वास्तव में माता के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होने वाला था भगवान जब भक्तों की परीक्षा लेते हैं तो उससे उनकी भक्ति और निखरती है और भगवान एवं भक्त के बीच का संबंध और दृढ़ता पाता है ऐसा ही कुछ वहां भी होने वाला [संगीत] था [संगीत] क्या हुआ स्वामी आप अचानक उधर द्वार की ओर क्यों देखने लगे मुझे ऐसा लगा जैसे हमारी पुकार सुनकर त माता की सहायता करने के लिए स्वयं माता रानी पधारी [संगीत] है ऐसा पावन पवित्र अनुभव मुझे पहले कभी नहीं हुआ माता रानी अदृश्य है किंतु उनका आवास हो रहा है मुझे हे माता रानी इस भक्त का प्रणाम स्वीकार कीजिए हे माता रानी मेरा प्रणाम स्वीकार कीजिए माता कभी अपने भक्त को अपनी कृपा से वंचित नहीं करती किंतु उनकी लीला के रहस्य को समझना सरल नहीं मां मां मेरा प्रणा स्वीकार कीजिए अपने भक्त का प्रणाम स्वीकार कीजिए क्षमा [संगीत] कीजिएगा मैं लज्जित हूं कुटिया का हर स्थान न लिया मैंने इस वृद्ध के पास कुछ नहीं तो कदाचित माता की कृपा से वंचित रहना उसका पुण्य प्राप्त ना कर पाना ही मेरा भाग्य है क्योंकि मुझ में तो संभावना देने के योग्यता भी [संगीत] नहीं ओ यह बक्सा तो मैंने देखा ही नहीं कदाचित मेरे पति के इस बक्से में कुछ मिल जाए [संगीत] [संगीत] हा [संगीत] व्यक्ति के भीतर संतोष सादगी और सच्चाई हो तो ईश्वर सभी मनोकामना पूर्ण करते हैं

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...