Friday, 2 January 2026

माता लक्ष्मी की कृपा से सभी कष्ट कैसे दूर हुए Deblina Vighnaharta Ganesh Episode 762 PenBhakti

शुभ पर्व शरद पूर्णिमा है आपके जन्म और विवाह की तिथि और विधि अनुसार आप और प्रभु श्री हरि नारायण दोनों संसार भ्रमण करते हैं संसार पर आपके आशीष की वर्षा होती है और इस पर्व पर चंद्रदेव भी अमृत वर्षा करने के लिए सदा तत्पर रहते हैं मुझे स्मरण कराने के लिए आपको कोटि कोटि धन्यवाद प्रभु अन्यथा मेरी ममता के उपन में संतान की लालसा में शेष सब कुछ धुंधला हो जाता मैं अन्य सब कुछ भूल जाती आपकी ममता से ओत प्रोत आपका आशीर्वाद आज उन्हें भी मिलेगा जो उससे वंचित रहे हैं वह सभी धन्य हो जाएंगे उनके कष्ट दूर हो जाएंगे उनमें नए प्राण आ जाएंगे प्रभु हमें आगे की यात्रा की अनुमति दे चंद्रदेव हमारी प्रतीक्षा में होंगे उचित है प्रभु नारायण और हां माता आपकी प्रतीक्षा भी अब शीघ्र समाप्त होगी आप जगत भ्रमण कर कल जब बैकुंठ लौटें तो आपकी संतान स्वयं आपके पास आ जाएगी अब आप निश्चिंत होकर जगत भ्रमण के लिए प्रस्थान [संगीत] कीजिए आइए प्रिय शरद पूर्णिमा की इस जगरी रात्रि में रात्रि जागरण कर भजन कीर्तन करने वाले सभी भक्त हमारी संताने ही तो हैं उन्हें भी हमारे आशीर्वाद पाने का अवसर मिलना चाहिए सुनत वंदित सुंदरी माधवी चंद्र सहोदरी है ममय मुनि गण वंदित मोक्ष प्रदाय नि मंजुल भाष निवेदन ते जय जय हे मधुसूदन कामिनी धन लक्ष्मी रूपेण पालयम लो अष्टलक्ष्मी नमस्तुभ्यं वरद काम रूपिणी विष्णु वक्ष स्थला रू भक्त मोक्ष प्रदायिनी लो शंख चक्र गदा हस्त विश्वर रूपण ते जय जगन मात्रे मोहि मंगलम शुभ मंगलम पुत्र गणेश पुत्र गणेश पुत्र यह खीर बाहर अंबर के नीचे रख दो जो आज्ञा [संगीत] माता पुत्र गणेश आज तुम्हें निद्रा का सुख प्राप्त नहीं होगा ज्ञात है ना हां माता आज तो सुख ही सुख है क्योंकि आज तो हम मामी श्री लक्ष्मी और मामा श्री हरि नारायण का भजन कीर्तन करेंगे हां पुत तभी तो तुम्हें उनका आशीष प्राप्त होगा जो आज्ञा माता अर्थात माता आज की रात्रि जो सोएगा व आज सुख प्राप्त करेगा किंतु जो आज जागेगा उसका तो जीवन ही सुखी हो जाएगा हां पुत्र आज देवी लक्ष्मी और भ्राता नारायण के आशीर्वाद के साथ चंद्रदेव अमृत वर्षा करेंगे और सभी भक्तों को फर्श भर के लिए स्वास्थ और समृद्धि प्रदान करेंगे और शीघ्र संसार माता के अनुपम ममतामई स्वरूप के दर्शन करेगा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] शीघ्र मेरे मातृत्व को भी पूर्ण सुख [संगीत] मिलेगा अब तो एक पल भी प्रतीक्षा करना सहन नहीं हो रहा है क्षमा कर दो माता अब तो क्षमा कर दो अपनी इस पुत्री पर दया करो माता मेरा आचल पुन सुना मत करो माता मेरे साथ फिर ऐसा क्यों हो रहा [संगीत] है मैं यह कष्ट कैसे सूंगी माता मेरा कष्ट दूर कर दो माता जबक मैंने अपनी भूल सुधार ली है माता फय सहनी है पीड़ा क्यों सहनी पड़ रही है मुझे माता क्षमा कर दो माता क्षमा कर दो अब तो मुझे क्षमा कर दो मेरा आचल फिर से सुनो मत करो [संगीत] माता माता यह कौन है और इनसे क्या भूल हुई है यह इस नगर के बड़े साहूकार और मेरे भक्त की दो पुत्रियों में से एक है जब दोनों पिता के साथ थी तब पिता ने आनंद से भरकर एकाग्र किया आज का दिन एक पिता के लिए बड़े ही आनंद का दिन है शरद पूर्णिमा के इस पावन पर्व पर मेरी दोनों बेटियां आज मेरे साथ अपने मायके में है आज मैं नियत कर सकता हूं कि मेरी बड़ी पुत्री के साथ छोटी पुत्री भी व्रत करेगी क्यों पिताजी अब मायके में भी व्रत करना होगा ऐसा क्या होगा इससे माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की कृपा प्राप्त होगी पुत्री तुम्हारे माता पिता तुम दोनों तुम्हारी आने वाली संताने सुरक्षित और स्वस्थ रहेंगी विधि न से व्रत रखना पुत्री और चंद्रदेव के दर्शन के पहले व्रत ना तोड़ना एक दाना भी मुख में मत [संगीत] रखना खीर दीदी खीर भगवान को चढ़ेगी ना अच्छी है या नहीं किसी को तो चक्कर देखनी पड़ेगी ना नहीं छोटी याद है पिताजी ने क्या कहा था चंद्र दर्शन से पूर्व एक भी दाना हमें नहीं खाना है दीदी इस घर की तो सदा यही रीत रही है पिताजी उचित अनुचित कुछ भी कह देते हैं और आप उनकी दृष्टि में अच्छी बनने के लिए उनकी बात मान भी लेती हो और वैसे ही करने लगती हो कष्ट मुझे होता है जब मुझे वह बात माननी पड़ती है ताकि मैं बुरी ना दिखू नहीं छोटी पिताजी की आज्ञा का पालन करना तो हमारा कर्तव्य है और भक्ति भाव से पूजा करने को कहक उन्होंने कोई अनुचित आदेश भी तो नहीं दिया है पूजा तक तो ठीक था लेकिन व्रत बिना भोजन खाए कोई कैसे रह सकता है मैं तो नहीं रह सकती और व भी जब इतने मिष्ठान सामने हो बस छोटी कुछ ही देर की तो और बात है थोड़ा धीरज रखो अब चंद्र दर्शन में समय ही कितना है चलो हम दोनों पूजा की तैयारी करते हैं चलो [संगीत] [संगीत] लो अब तुम सात श्रृंगार में लग गई छोटी पूजा की तैयारी कब करोगी यह सब बाद में कर लेना चंद्र आकाश में आ गए तो देर हो जाएगी दीदी आप कर रही हैं ना वैसे भी यह विधि विधान व्रत यह सब आडंबर लगते हैं मुझे नहीं छोटी श्रद्धा और भक्ति आडंबर नहीं है यह तो हमारा जीवन देने वाले ईश्वर के प्रति समर्पण है पूजा तो विधि पूर्वक ही होनी चाहिए अच्छा ठीक है किंतु सब ध्यान रखने पर कोई भूल हो जाए तो अनजाने में कोई भी भूल हो कोई बात नहीं ईश्वर बड़े क्षमाशील हैं क्षमा कर देंगे समझ गई समझ गई किंतु आप भी समझ लो साथ श्रृंगार करने का यही समय है मां बनने के बाद तो समय ही कहां मिलेगा छोटी मुझे सात श्रृंगार में कोई रुचि नहीं है यही तो आप भूल कर रही है दीदी आपको तो मुझसे अधिक साथ श्रृंगार करना चाहिए क्योंकि मेरी सुंदरता के सामने आपकी सुंदरता फी पड़ जाती है का श्रंगार और सौंदर्य तो उसके मातृत्व में ही होता है छोटी चलो अब देर मत करो मैं खीर रखने जा रही हूं [संगीत] बाहर अब उचित है अब पिताजी के सामने अच्छी बेटी बनी रहने के लिए पूजा पूजा करनी होगी चलो कोई बात नहीं पूजा कर लक्ष्मी जी से बहुत सारा धन मांग लूंगी फिर मन भरकर मिष्ठान की पेट पूजा करूंगी और फिर भिन्न भिन्न प्रकार के श्रृंगार का सामान [संगीत] लाऊंगी लड्डू एक लड्डू खा लूंगी तो क्या होगा उससे अनजाने में कोई भी भूल होग कोई बात नहीं ईश्वर बड़े क्षमाशील है क्षमा कर देंगे एक लड्डू खा लूंगी तो क्या प्रभु शमा नहीं [संगीत] करेंगे छोटी य क्या किया कैसा अनर्थ कर दिया तने दीदी आप ही ने तो कहा था छोटी भूल तो प्रभु क्षमा कर देते हैं अनजाने में हुई भूल जानकर की गई भूल नहीं अरे दीदी आप चिंता मत करो व्रत तो कर लिया मैंने अब उसे अब तोडू या कुछ क्षण बाद उससे क्या होगा पिताजी और आपके कहने पर इतना कर लिया वही बहुत है अन्यथा मेरे पति बहुत धनवान है मुझे कुछ मांगने की या फिर व्रत पूजा करने की कोई आवश्यकता नहीं है [संगीत] क्या होगा यह तो पता नहीं पर मैं अवश्य माता लक्ष्मी को मनाऊंगी कि वह तुम्हें क्षमा कर दे तुम्हारा भाग्य तुम्हारे साथ रहे कुछ बुरा ना हो बड़ी ने हृदय से प्रार्थना तो की किंतु तब भी छोटी का भाग्य नहीं बदल सकी जहां एक और बड़ी ने स्वस्थ बालक को जन्म दिया वही दूसरी ओर छोटी के जीवन में एक दुखद घटना हो [संगीत] गई मेरी संतान ईश्वर आपने मुझसे मेरी संतान क्यों छीन ली जो उचित दिशा ज्ञात होने पर भी अंधकार के अनुचित मार्ग पर चले उससे तो उसके भाग्य को रूठना ही था [संगीत] [संगीत] छोटी जो हो गया सो हो गया अब उसको लेकर दुख करने से क्या लाभ उसको लेकर इतना मत सोचो दुखी नहीं रहते मेरी बहन ईश्वर की कृपा तुम पर भी अवश्य होगी देखिए श्वर मेरी पुत्री की एक कैसी दशा हो गई है पता नहीं ईश्वर उसे किस दोष का दंड दे रहे हैं कारण स्पष्ट है शरद पूर्णिमा की व्रत की अवहेलना कर इसने माता लक्ष्मी की कृपा और सुख समृद्धि को ठुकराया है ईश्वर का क्रोध अकारण नहीं होता और उनकी दया दृष्टि भी हमें फिर मिल सकती है यदि हम भूल स्वीकार कर सच्चे मन से प्रश्चित स्वीकार कर [संगीत] ले इसमें मैं तुम्हारी सहायता करूंगी छोटी तुम्हे विधि पूर्वक व्रत करना मैं [संगीत] सिखाऊ मधुसूदन कामिनी लक्षमी सदा पालय [संगीत] पुत्र पुत्र पुत्र पुत्र दीदी पुत्र पिताजी [प्रशंसा] पुत्र [प्रशंसा] दीदी देखिए ना क्या हुआ मेरे पुत्र को यह शवास नहीं ले रहा है हे विधाता कैसी लीला है तुम्हारी मेरा दुर्भाग्य मेरा पीछा क्यों कर रहा है पिताजी मेरे साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है इस बार मैंने कोई भूल नहीं की पूरे भक्ति भाव से पूरे विधि विधान से व्रत किया फिर मुझे यह दंड क्यों मिल रहा है पिताजी दीदी मुझसे तो भूल हुई किंतु आपने तो सदा हृदय से भक्ति की ना माता की आप ही पूछिए माता लक्ष्मी से वो आपकी बहन को इस मां को शमा क्यों नहीं कर रही है इस मां का दुख मैं नहीं सह सकती एक स्त्री हूं मैं इसकी आहत ममता का आभास हो रहा है मुझे आपकी ममता से ओत प्रोत आपका आशीर्वाद आज उन्हें भी मिलेगा जो उससे वंचित रहे हैं वो सभी धन्य हो जाएंगे उनके कष्ट दूर हो जाएंगे उनमें न प्राण आ [संगीत] जाए प्रायश्चित पूर्ण होने पर कोई भी दंड का भागी नहीं रहता अब मैं इस मां की आंखों में आंसू नहीं देख सकती इसकी गोद सुनी नहीं देख [संगीत] सकती माता की कृपा है ना आप पर तो दीदी तो आप ना उनसे मुझे क्षमा कर दे मुझे मेरा पुत्र लौटा [संगीत] दे [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] हो मेरे पुत्र को स्वस्थ करने के लिए कहिए ना आप माता जीी से दीदी दीदी कुछ कीजिए ना आप कुछ तो [संगीत] कीजिए [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] आ [संगीत] छोटी तुमने अभी तक अपने पुत्र को खीर का प्रसाद नहीं खिलाया [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] मेरा मेरा [संगीत] पुत्र मेरा पुत्र मेरा पुत्र जीवित है मेरा पुत्र जीवित है आपने इस मां की ममता का मान रख लिया माता आपको कोटि कोटि धन्यवाद आपका कोटि कोटि धन्यवाद माता आपका आपका बहुत धन्यवाद प्रभु [प्रशंसा] स्वामी इस मां की ममता ने मुझे भाव विभोर कर दिया मैं वरदान देती हूं आज से जो भी भक्त प्रतिवर्ष शरद पूर्णिमा में व्रत कर इन दोनों बहनों की कथा सुनेंगे उन पर मेरी पूरी कृपा होगी जिनकी उनकी संतान को स्वास्थ्य प्राप्त होगा और जिनकी संतान नहीं है उनको संतान सुख का आशीर्वाद [संगीत] मिलेगा चलिए गरुड़ जी [संगीत] माता लक्ष्मी आपकी कृपा पाकर तो मैं धन्य हो गया क्या हुआ प्रिय मां किसी ने मुझे मां पुकारा प्रभु मयुरेश्वर ने जो भी कहा व सत्य ही होगा आपको मां पुकारने वाला बालक शीघ्र ही वैकुंठ में आपके पास होगा वाह वाह यह खीर तो अब और भी स्वादिष्ट हो गई इसमें दो माताओं का आशीर्वाद जो है माता का प्रसाद मैं सभी के साथ बाटू दोनों भाभी मां माता भ्राता जी सभी को माता का आशीर्वाद मिलना चाहिए स्वामी अब भोर हो रही है हमें शे वैकुंठ पहुंचना चाहिए आज हमारे पुत्र का आगमन होने वाला है और मैं उसके स्वागत में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती अवश्य प्रिय गरुड़ जी [संगीत] ओ हो कितना कुछ करना है मुझे कोई कमी ना रह जाए मेरे पुत्र का आगमन किसी भी क्षण हो सकता है स्वामी स्वामी आप इस प्रकार मुख बनकर मत खड़े रहिए मेरा हाथ बटाइए ना वैकुंठ की सज्जा करने में मेरी सहायता कीजिए स्वामी केवल मेरा नहीं आपका भी पुत्र है वो जिसका शुभ आगमन होने वाला है उसके खेलने हेतु एक सुंदर बागीचा होना चाहिए और सोने के लिए सोने के लिए एक बहुत सुंदर कक्ष परंतु अभी तो समय भी नहीं है जो है उसी को सज्जित करना है स्वामी आप इस प्रकार मुझे निहारते रहेंगे अपना कार्य आरंभ भी करेंगे कार्य शुरू कीजिए [संगीत] ना [संगीत] मेरी यह इच्छा तो आपने पूरी कर दी परंतु अभी पुष्पों से वैकुंठ को सचित कर दीजिए उसके खिलौने उसके वस्त्र उसके भोजन इन सभी की व्यवस्था मैं कर [संगीत] लूंगी पुत्र तुम्हें यह पकवान यह खीर बहाएंगे [संगीत] ना स्वामी स्वामी स्वामी प्रतीक्षा में व्याकुल मेरे लिए एक पल भी काटना कठिन हो रहा है और आप आप है कि योग निद्रा का आनंद ले रहे हैं आपने मुझे वैकुंठ की सज्जा करने का कार्य सौंपा वह मैंने किया तो अब तो हम प्रतीक्षा ही कर सकते हैं किंतु कैसे स्वामी मेरे लिए तो बहुत कठिन हो रहा है एक बात फिर देख लीजिए सब ठीक तो है ना उचित कहा आपने स्वामी कोई कमी नहीं छूट चाहिए मैं आती तुम भी तो खीर प्रसाद [संगीत] खाओ आ हाहा आनंद आ गया माता आज तो खीर का स्वाद दुगना हो गया हां पुत्र इसमें दोनों मांओं का योगदान जो है मेरा प्रेम भी है और देवी ल ल का आशीर्वाद भी गणेश के मुख पर इस मुस्कुराहट का क्या अर्थ [संगीत] है स्वामी यह क्या आप फिर योग निद्रा में चले गए अब क्या हुआ प्रिय स्वामी मैंने तो सब देख लिया सब ठीक है भोजन है खिलौने है वस्त्र है अच्छा है तो अब बस हमें प्रतीक्षा करनी होगी वही तो समस्या है ना स्वामी प्रतीक्षा ही नहीं हो पा रही है मुझसे बस मन इसी में लगा हुआ है कि मैं कब उसे अपने हाथों से खिलाऊंगी उसे अपने हाथों से तैयार करूंगी ओहो तैयार से तो स्मरण हुआ आभूषण तो मैंने तैयार ही नहीं किए कुछ अति विशेष बनाइए हमारे पुत्र को बहुत अच्छा लगेगा उचित कहा आपने स्वामी परंतु आप फिर से योग नित्रा में मत चले जाइएगा अकेले में एक एक पल मुझे काटने को दौड़ रहा [संगीत] है स्वामी ने उचित कहा मुझे कुछ अति विशेष बनाना चाहिए उसके लिए मैं मैं पुत्र के लिए स्वर्ण के कंगन [संगीत] बनाऊंगी कंगन भी तैयार है किंतु किंतु मेरा पुत्र कहां [संगीत] है प्रिय मैं योग निद्रा में नहीं गया प्रभु आप परिहास कर रहे हैं मेरे साथ यहां मैं कितनी व्याकुल हूं उसका अनुमान भी नहीं आपको कितनी शंकाएं है मेरे मन में मेरा पुत्र कहां है अभी तक आया क्यों नहीं प्रभु मरेश ने तो कहा था कि हमारी वैकुंठ पहुंचते ही वह हमारे पास होगा किंतु देखिए दिन का दूसरा पहर हो गया किंतु हमारा पुत्र अभी तक नहीं आया मेरी आंखें तो तरस रही है उसे देखने के लिए मामी मामी गणेश है अवश मे पुत्र के साथ आया [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] होगा गणेश तो अकेला है इसके साथ तो कोई [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] नहीं जो व्यक्ति उचित मार्ग ज्ञात हो पर भी अनुचित मार्ग का अनुसरण करते हैं वह निश्चय ही अपने दुर्भाग्य

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...