Tuesday, 6 January 2026

सुरापदमन ने अजामुखी का अंत क्यों किया Uzair Basar Vighnaharta Ganesh Episode 687 Pen Bhakti

[संगीत] अपनी पुत्री के हाथों उसके होने वाले वर की हत्या करवा दी उन्होंने फिर मुझे अपने स्वार्थ के लिए भोग की एक वस्तु बना दिया जिससे मैं ऋषियों मुनियों को पद भ्रष्ट करती रहूं और इनका साम्राज्य स्थापित रहे कैसी मां ऐसा कर सकती है वाह यह है मेरा दुर्भाग्य कि जिन पुत्रों को मैंने जन्म दिया जिनका साम्राज्य स्थापित किया जिन्हें सिंहासन दिलाया आज वही अपनी मां को दोषी मान रहे हैं अपनी मां पर संदेह कर रहे हैं हज मुखी कैसी पुत्री हो तुम अपनी मां को ही दोषी प्रमाणित कर रही हो हां युद्ध सुर की परीक्षा ली थी मैंने जिसमें वो असफल हुआ जो अपने परिवार को संकट से नहीं बचा सका व भला मेरी पुत्री का ध्यान कैसे रखता तो सभी बताओ क्या बुरा किया अपनी पुत्री का विवाह रोक [संगीत] कर और शुख तुम अपनी बहन के लिए तुम्हारे नेत्र से अश्रु बह रहे हैं किंतु अपनी मां की पीड़ा उसके कष्ट का अनुमान तक नहीं है तुम्हें अपने नेत्रों के सामने अपने पिता की निर्मम हत्या होते हुए देखी है मैंने तभी निर्णय ले लिया था कि अपने पुत्रों को इतना बलशाली बनाऊंगी कि कोई भी शत्रु उनके निकट आने से पहले सहस्त्र बार विचार कर राज भवन का सुख त्यागा कठोर परिश्रम कर गुरु शुक्राचार्य से माया की शिक्षा प्राप्त की किसी राजा की पत्नी ना बनकर एक वृद्ध ऋषि को अपना पति बनाया किसके लिए तुम सबके लिए ताकि उसके तपो बल से तुम जैसी संताने प्राप्त हो जो अत्यंत बलशाली हो जिन्ह किसी के भी सामने झुकने पर कभी विवश ना होना पड़े आज भी सभी सुख सुविधाओं को त्याग कर सदैव माया की साधना करती हूं मैं किसके लिए तुम सबके लिए इतना सब करने के बाद भी भरी सभा में मेरे पुत्रों द्वारा उंगली उठाने से पहले मेरी मृत्यु क्यों नहीं हो गई किंतु अब मैं यही आत्म घात [संगीत] करूंगी माता [संगीत] नहीं मां मृत्यु आपकी नहीं इस सजाम मुखी की होनी चाहिए जिसने आपके लिए हमारे मन में संदेह उत्पन्न किया उचित है पुत्र यदि तुम्हें लगता है कि मैं सही हूं और यह दोषी तो अंत कर दो इसका जिससे ये कभी भी इस मां और उसके पुत्रों के बीच भूत ना डाल सके मा आप की य इच्छा मैं अवश्य पूर्ण करूंगा रुको पुत्र क्षमा कर दो इसे है तो यह मेरी ही पुत्री ना वैसे भी इसका अंत करके क्या मिलेगा हमें सर्वप्रथम हमें अंत तो अपने शत्रु का करना है जिसकी ये भक्त [संगीत] है अब किसी के रोके नहीं रुकेगा सुरा पदम अब तुम्हारे बचाव का कोई मार्ग नहीं तुम्हारा अंत अवश्य होगा [संगीत] मा जेष्ठ से दूर रहकर ही अपना बचाव कर सकूंगी [संगीत] [संगीत] मैं कितना भी भाग लो तुम जाने नहीं दूंगा मैं तुम्हे [संगीत] मेरा पुत्र होकर भी अपने हृदय को कठोर नहीं बना पाया इसीलिए लक्ष्य से चूक गया [संगीत] [संगीत] आ आ [संगीत] [संगीत] हे विघ्नहर्ता गणेश जी आप सभी के विघ्न दूर करते तो मेरा भी दूर करने की कृपा कीजिए मृत्यु का भय नहीं किंतु अपने प्राण त्यागने से पहले बस एक बार मुझे अपने प्रभु के दर्शन करने दीजिए हे विन हता गणेश जी मुझे अपने प्रभु के दर्शन करने दीजिए अजा मुखी [संगीत] [संगीत] [संगीत] एक साधारण पत्र ने मेरे बाण को प्रभावित कर दिया यह कैसे संभव [संगीत] है [संगीत] प्रणाम विघ्नहर्ता गणेश जी कल्याण हो ओ लंबोदराय नमः [संगीत] ओ आइए अजा मुखी [संगीत] उठिए और बाण विफल हुए तो क्या मेरा यह मायावी बाण अवश्य सफल होगा कहां गई वो दुष्टा च की सुरक्षित शत्रु शिविर में पहुंच [संगीत] गई हम आपके सभी निर्देशों का पालन करेंगे प्रभु किंतु हमें अभी भी यह ज्ञात नहीं है कि वह किसे भेजेगा भानु कोपन भानु कोपन भानु कोपन भानु [संगीत] कोपन भानु कोपन प्रणाम [संगीत] प्रभु [संगीत] [संगीत] इस भक्त की पुकार सुन एक ही समय पर यहां भी रहकर और मेरे सहायक भी बनकर आपने मुझ पर बड़ी कृपा की है आप ही के कारण मुझे अपने प्रभु के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ जिसके को को नवाद प्रथम पूज गणेश [संगीत] जी प्रभु जन्म से तो मैं असुर सम्राट सुरा पद्मन की बहन हूं किंतु उससे भी अधिक में आपकी परम भक्त होजा मुखी एक ऐसी भक्त जिसने अपनों की ताड़ना सहकर भी भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा इतना ही नहीं तुमने तो मेरे भक्त जयंत का भी भली भाती ध्यान रखा आइए अजा मुखी भीतर [संगीत] आइए [संगीत] प्रभु [संगीत] ओ सत्पुरुष [संगीत] महावन न शु प्र [संगीत] चोदया प्रभु अपनी इस भक्त पर आपकी कृपा के लिए आपको अनेकों धन्यवाद मैं धन्य हो गई प्रभु देवी मेरी एक जिज्ञासा शांत कीजिए आपने कहा था वह असुरा युद्ध के लिए भानु कोपन को भेजने जा रहे हैं कौन है वह मेरे जेष्ठ असुर सम्राट सुरा पद्मन का सबसे बड़ा पुत्र किंतु वो तो महादेव प्रभु की तपस्या कर रहा है मैंने अपने सभी पुत्रों को यहां बुलाने के लिए कहा था तो फिर भानु कोपन कहां है यहां क्यों नहीं है राज माता सुरास के आदेश से महत्वपूर्ण नहीं है किसी की भी पूजा वो पूजा छोड़कर मां की आज्ञा पालन का चुनाव करेगा किंतु भानु कोपन ही क्यों वो उसे ही क्यों भेजेंगे क्योंकि जयंत का हरण कर उसी ने अपने शक्ति और सामर्थ्य को प्रमाणित किया था तो वो तो मात्र एक हाथ था जिसने हमें पराजित किया था हां देवराज क्योंकि वह जितना चाहे अपना हाथ उतना ही बढ़ा सकता है और इसका प्रत्यक्ष प्रमाण तो आपको भानु कोपन के जन्म के पश्चात ही गया था उस समय महेंद्र पुरी में कोई नहीं था भाभी पूजा कर रही थी और मेरे भ्राता त्रिलोक विजय करने गए थे भानु कोपन अकेला शिशु निद्रा में था और सूर्य की तपती किरने उसकी निद्रा भंग कर रही थी तब उसने अपना हाथ बढ़ाया और सूर्य की किरणों को ही नहीं रोका स्वयं सूर्यदेव को ही रोक दिया [संगीत] तब उससे सूर्यदेव की रक्षा करने के लिए देवराज इंद्र के साथ स्वयं ब्रह्मदेव को आना पड़ा मुझे स्मरण है वो एक बहुत ही हटी बालक था उसने सूर्यदेव को अपनी मुट्ठी में बंद कर लिया था और व उन्हे मुक्त ही नहीं करना चाहता था वह एक असुर था इसलिए असुरी प्रवर्ती उसका स्वभाव था इसलिए हमने उसके साथ छल किया उसे एक लालच दिया हमने तुम मेरा वायु चक्र ले लो बालक किंतु सूर्यदेव को मुक्त कर दो मैं तुम अपना शक्तिशाली जल प्रवाह दूंगा देखो हे बालक आप आप मेरा अग्नि अस्त्र ले लो [संगीत] देखो मान जाओ पुत्र हम आपको अपना वज्र रूपी अस्त्र प्रदान करेंगे यह देखो [संगीत] हे बालक मैं ब्रह्मा तुम्हें अपना ब्रह्मास्त्र देता हूं लो और सूर्यदेव को मुक्त करो ब्रह्मदेव कदाचित व यह चाहता है कि आप पहले उसे ब्रह्मास्त्र प्रदान करें फिर वह सूर्यदेव को मुक्त करेगा [संगीत] [संगीत] [संगीत] जब वो एक मात्र शिशु था बोल तक नहीं स सता था तब भी उसने अपनी अपार शक्ति और बुद्धि का परिचय दिया था उस घटना के बाद माता सुरास ने उसके जले हुए हाथ और ब्रह्मास्त्र को देखकर उसका नाम भानु कोपन रख दिया था अर्थात वह जिसने सूर्यदेव को ही अपना बंदी बना लिया था और तब से ही भानु कोपन ही मां को सर्वाधिक प्रिय है वह अवश्य उसे ही युद्ध के लिए भेजें तो आप यहां पर है मा और शत्रु हमारे द्वार पर युद्ध के इस समय महेंद्रपुरी के बाहर आप इस जलाशय के पास क्या कर रही है मैं कब कहां और क्यों होती हूं यह या तो मैं जानती हूं या मेरी माया तुम बताओ पुत्र तुम मुझे क्यों ढूंढ रहे हो कुछ तो विशेष ही होगा विशेष ही है आपसे अनुमति चाहिए कि कल भानु कोपन के स्थान पर हमारी सेना का नेतृत्व मैं करू या श्रीमुख हमारे होते हुए हम कि कनिषक को क्यों भेजे और मा इससे युद्ध का अंत भी शीघ्र होगा आपका यह बलशाली पुत्र एकही प्रण में उस कार्तिके को और उसकी सेना का अंत कर देगा अंत होगा अवश्य होगा किंतु तुम्हारे और भानु कोकन के जाए बिना पर कैसे मां सुरा पद्मन बड़े दुख की बात है कि तुम ना अपनी मां को समझ पाए और ना ही उसकी माया को अा मुखी ने अब तक देवताओं को बता दिया होगा कि मैं सर्वप्रथम भानु कोपन को भेजने वाली हूं और उन्होंने उसका सामना करने की तैयारी भी कर ली होगी अतः अब मुझे अपनी योजना बदलनी होगी किंतु अब और प्रश्न नहीं मैं जो कह रही हूं उसका पालन करो इस जलाशय में प्रवेश करो [संगीत] गजा सुर द्वितीय गजा सुर [प्रशंसा] [संगीत] द्वितीय ताप नहीं श्राप हूं मैं सबका नाश हूं मैं मा कौन है यह गजा सुर दद महान असुर गजा असुर का पुत्र जिसके भीतर धरती का रक्त सोक लेने की शक्ति है धरती का रक्त हां धरती का रक्त यानी जल जो जीवन है जिसके बिना धरती शून्य है जहां जहां गजा असुर द्वितीय के पग पड़ते हैं वो स्थान जल से रिक्त हो जाता है अकाल पड़ जाता है सूखा पड़ जाता है पेड़ पौधे जीव जंतु कोई भी नहीं बच पाता सहस्त्र गजों का बल जिसमें समाया हो जिसके आने मात्र से सब सूख जाता है ऐसे असुर गजा असुर दुती को बुलाने का दुस्साहस क्यों किया आपने क्या आप अकाल का आनंद लेना चाहती हैं आनंद तो लेना है मुझे युद्ध में विजय का आनंद और इसका कारण तुम बनोगे गजा सुर द्वितीय जिस शत्रु ने महेंद्रपुरी के बाहर अपना डेरा डाला है अपने आ काल से उस शत्रु का काल बनकर किंतु मैं भला ऐसा क्यों करू कठोर तपस्या से अ शक्तियों को मैं आपके लिए क्यों व करू तुमने सत्य कहा कि तुम तुम मेरे लिए अपनी शक्तियां क्यों व्यर्थ करोगे और करनी भी नहीं चाहिए मुझसे तो तुम्हारा कोई संबंध भी नहीं किंतु अपने पिता के संबंधी तो हो ना महान असुर गजा असुर के पुत्र तो हो [संगीत] ना ये जलाशय तो सूखने लगा है इस गजस द्वितीय को शीघ्र मनाना होगा अन्यथा मेरा दाव हम पर ही उल्टा पड़ जाएगा क्या तुम अपने पिता के शत्रु से प्रतिशोध लेने का अवसर मिलने पर भी अपनी शक्तियां बजा कर रखोगे मेरे पिता के शत्रु उनका प्रतिशोध क्या क्या अर्थ है आपका अर्थ यह है कि जिन्होंने तुम्हारे पिता का अनर्थ किया यह बालक कार्तिक देव सेनापति कार्तिक शिव और पार्वती का पुत्र है वही शिव जो तुम्हारे पिता के अंत का कारण बने [संगीत] थे [संगीत] [संगीत] [संगीत] क्या कैसे पुत्र हो तुम जो अपने पिता के वध कों से प्रतिशोध लेने में संकोच कर रहा है महेंद्रपुरी के बाहर खड़ी देवताओं की सेना आई तो है यहां युद्ध करने किंतु मैं तुम्हें इनका संघार करने का अवसर देकर अपने असुरी धर्म का पालन कर रही स्मरण रहे मेरा यह उपकार कभी मत भूलना कदाचित ना ही तुम्ह अपने पिता की मृत्यु का कोई शोक है और ना ही तुम इस प्रतिशोध के सुनहरे अवसर को चाहते हो इसीलिए तुम यहां से चले जाओ मेरी महेंद्रपुरी में अपना अकाल फैलाने से पहले जाओ यहां से देवताओं के लिए तो मेरे पुत्र ही पर्याप्त है पिता का प्रतिशोध मैं अवश्य लूंगा मिटा दूंगा उस शिवपुत्र की सेना को अपने अकाल से कंकाल बना दूंगा उसकी सेना को रुको उसे मत रोख मा अन्यथा शत्रु के शिविर में अकाल बाद में आएगा पहले हम ही उससे त्रस्त हो जाएंगे जाओ किंतु यह सुनिश्चित करना होगा तुम्हें कि तुम्हारे अकाल का प्रभाव मेरी महेंद्र पुरी पर ना पड़े बस वहीं तक रहे जहां तक कार्तिक की सेना है और ऐसा करने में असुर गुरु शुक्राचार्य तुम्हारी सहायता करेंगे जो ऋषि पुलस्त्य के आश्रम के निकट तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे हैं जाओ [संगीत] प्रभु किस विचार में डूबी है आप लीजिए भोजन लाया हूं क्या हुआ प्रभु आप चिंतित है मुझे आभास हो रहा है कि कोई बड़ा कपड़ जाल रच रही है मायास ऐसा जाल जो युद्ध के आरंभ होने के पहले ही उसे विजय कर दे कोई बड़ा ल बड़ा षड्यंत्र कर रही है [संगीत] वह असर गुरु शुक्राचार्य जी को गजा का प्रणाम गुरुवर आपके मार्गदर्शन के लिए [संगीत] आया [संगीत] आओ निकट आओ गजा सुर दत चिंता मत करो तुम्हारी शक्ति मुझे कोई हानि नहीं पहुंचा सकती और जो शक्ति मैं तुम्हें दूंगा उससे कोई तुम्हें कभी हानि नहीं पहुंचा [संगीत] सकेगा [संगीत] [संगीत] हा ये असुर सुरक्षा महास्त्र है वो अस्त्र जिसे भूमि में गाड़ करर जहां तुम खड़े हो गए वहीं से तुम्हारी शक्तिया अनेक गुना बढ़कर चारों दिशाओं में फैलने [संगीत] लगे ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय मेरे ऋषि पुस्त के आश्रम के निकट ये कैसी घटना घट रही [संगीत] है ये कैसा आत्र है असुर गुरु शुक्राचार्य के हाथों में क्या कह रहे हैं वह कुछ सुनाई नहीं दे रहा है इस महास्त्र की सहायता से तुम्हारे तप का प्रभाव और भी बढ़ जाएगा जब तक तुम इसके निकट रहोगे तुम्हारी अकाल शक्तिया तुम्हारे नियंत्रण में रहेगी इतना ही नहीं स्वयं वरुण देव अर्थात जल के देवता भी तुम्हारे आगे विवश हो जाएंगे विजय भवा [संगीत] अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर कुटिलता से प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने वाले व्यक्ति निश्चित ही किसी बड़ी आपदा को आमंत्रण देते हैं

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