Tuesday, 6 January 2026

सुरापदमन के क्रोध का कारण क्या था Basant Bhatt Vighnaharta Ganesh Episode 703 Pen Bhakti

सिहम मुख माया सुरा सई और ऋषि कश्यप का पुत्र है उसका वध करने के लिए प्रभु कार्तिकेय को अपना विराट देव सेनापति स्वरूप धारण करना होगा देव सेनापति प्रभु कार्तिकेय की जय देव सेनापति प्रभु कार्तिकेय की जय देव सेनापति प्रभु कार्तिकेय की जयमा जय द जय सदानंद जय जय जय परमात्मा जिस प्रकार शक्ति गतिमान होकर शिव को संसार के प्रति उनके हृदय में भाव जगाती है उसी प्रकार मेरे सहयोग से स्वामी की पूजा भी पूर्ण हो रही है पुत्री तुमने ना केवल शिव शक्ति के दिव्य बंधन को समझाया है अीत इस अंतिम परीक्षा में भी पुत्र कार्तिकी को सफल बनाया है मेरी और इस संपूर्ण सेना की शक्ति तो आप ही है देवसेना आपकी सहायता के बिना मैं यह कार्य पूर्ण नहीं कर [संगीत] पाऊंगा [संगीत] ना जय जय गंगा श्री सत [संगीत] चराया शर जन्मा कुमार श्री देव देव सुजय नम नमः परमेश महा से भजना जता शक्ति रूप कार्तिक देवा सेनानी योगेश्वर देव देव शक्ति धरा जोरा ेश्वरा पर ब्रह्म जय स्वामीनाथ शी हरा महा से [संगीत] जरा श्री श्री परब्रह्मा विना अखंड शी शिवा श्रीमुख पुत्र स्वामी [संगीत] [संगीत] मूर्ख सी मुख कुछ किए बिना उसका अ भी अंत हो गया नहीं नहीं यह अंत नहीं है युद्ध का यह युद्ध का अंत कल मैं स्वयं करूंगा निर्णायक युद्ध होगा कल जहां देवताओं की पराजय और असुरों की विजय होगी प्रतिशोध लूंगा अपने पुत्रों का अपने भ्राता का शमा नहीं दया नहीं बस क्रोध बस अब हमारे क्रोध का सामना करना होगा असुर माता सुरास को संपन्न होने को है मेरा यज्ञ जो मृत है वो भी जीवित हो उठेंगे कैसा है ये युद्ध जो एकएक करके सारे कुलदीप कों को बुझाता चला जा रहा है मेरे पुत्र अब कैसे वापस बुलाऊ तुम्हें स्वामी आपने कहा था विजय होंगे आप तो क्यों चले गए मुझे छोड़कर लौट आइए स्वामी अपनी विभूति के निकट ना ही यह अनावश्यक युद्ध होता और ना ही हमारे स्वजनों का इस प्रकार वध होता और ना ही उन्हें जीवित करने हेतु यज्ञ करना पड़ता इनका यह रोना धोना मां के ध्यान को भंग करेगा रुक जाओ मां के यज्ञ में अवरोध उत्पन्न मत करो हमें मत रोकिए एक एक अंतिम बार अपने पुत्र को देख लेने दीजिए ना बस बंद करो अपना रोना यहां पर कोई मृत नहीं है मां का यज्ञ संपूर्ण होते ही यह दोनों ही नहीं किंतु सभी असुर योद्धा जीवित हो जाएंगे इसलिए उनके यज्ञ में मत बनो जाओ यहां से कल के युद्ध के लिए मेरा कवच तैयार करो [संगीत] जाओ सफल हो रहा है मां का [संगीत] यज्ञ आप सभी मेरी बात ध्यान से सुनिए अपने सभी योद्धा खो चुका है सुरा बमन इसका अर्थ स्पष्ट है कि कल रणभूमि में वह स्वयं उतर ने के लिए विवश हो जाएगा किंतु इस बार इस बार वह बिना तैयारी के कदा भी नहीं [संगीत] आएगा गणेश का ध्यान कहां [संगीत] है [संगीत] माया सुरास मृत संजीवनी यज्ञ कर रही है अर्थात सभी मृत असुरों को कल के युद्ध के लिए पुन जीवित कर रही है कल इस युद्ध का अंत होगा और विजय हम असुरों की होगी और एक नवीन इतिहास की रचना होगी सुरा सई का यह यज्ञ यदि सफल हो गया तो घोर अनिष्ट होगा और जो असुर पहले ही अपने प्राण खो चुके हैं उन्हें भला कैसे आहत किया जा सकता है इसलिए समय रहते हमें इस यज्ञ को रोकना ही होगा हे सुब्रह्मण्यम स्वामी कार्तिके यदि आपका यह भक्त इस अनैतिक यज्ञ को रोक सकता तो अवश्य इसे रोककर आपका सहायक बनता हां अनुज गणेश इस यज्ञ का रुकना अनिवार्य है हमें कुछ भी करके इस यज्ञ को रोकना ही होगा तो प्रभु मुझे अनुमति दीजिए मैं भी जाकर इसे रोक देता हूं नहीं नहीं वीर बाऊ जी माता सुरास के यज्ञ को रोकना कदाचित आपके लिए संभव नहीं है इस यज्ञ के लिए उन्हे वरदान प्राप्त है जिसके अनुसार धरती पर माता आदि शक्ति के वर्तमान अवतार द्वारा ही मां माया के इस मृत्य संजीवनी व्रत को खंडित किया जाना संभव है और वो भी तब जब दिन में भी रात जैसा अंधकार होगा इसी कारण जब तक यह यज्ञ पूर्ण नहीं हो जाता माता सुरास महेंद्रपुरी के आकाश में रात नहीं होने देंगी इस समय तो धरती पर माता का कोई भी वर्तमान अवतार नहीं क्या माया सुरा सही सफल हो जाएगी क्या उसके अधर्म यज्ञ को रोका नहीं जा सकता यदि उसे रोकेंगे भी तो उसे रोकने में सामर्थ्य रखने वाला वो कौन होगा संकट है यह मानता हूं किंतु संसार में ऐसा कोई संकट नहीं जिसका समाधान नहीं समस्या का हल भी समस्या की जड़ में ही छिपा होता है इसका हल अवश्य महेंद्रपुरी में ही [संगीत] होगा मुझे अनुमति दे भ्राता अवश्य [संगीत] गणेश ओ सुब्रमण्यम स्वामी प्रभु कार्तिके ॐ सुब्रमण्यम कार्तिके [संगीत] स्वामी यह दिव्य शीतल पवन प्रभु का संकेत [संगीत] है प्रभु गणेश [संगीत] जी प्रभु प्रभु अभी तो यही थे तो फिर कहां चले गए ओ श्री गणेशाय नमः ओम गम श प्र प्रसाद नाय नमः मेरे प्रभु मेरे प प्रदर्श तो फिर मुझे क्या [संगीत] चिंता महेंद्रपुरी में वहा कौन है जो हमारा साथ देगा और कौन है व जो इस कठिन कार्य को संपन्न करेगा जयंत वहां तो मेरा पुत्र जयंत [संगीत] किंतु वो तो बंदी है और एक अकेले बालक के लिए इस यज्ञ में बाधा उत्पन्न करना कठिन होगा फिर ऐसा कौन है प्रभु जो माया सुरा सही को रोक सके जयंत अकेला नहीं है उसके साथ कोई और भी है आपकी पुत्री देवी पद्म कोमल और यमराज की देवी [संगीत] विभूति माताओं [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] स्वामी को जयंत कारागार के बाहर यहां नहीं दिखना चाहिए आप दोनों को ही सास करना होगा प्रभु पर विश्वास रख आगे बढ़ना होगा इस यज्ञ को रोकना होगा जयंत यहां कैसे स्वामी ने तुम्हे देख लिया तो भयंकर संकट उत्पन्न हो जाएगा तुम यहां क्यों आए पुत्र क्या तुम स्वामी के क्रोध से परीक्षित नहीं प्रश्न यह नहीं माताओं कि मैं यहां क्यों और यहां मेरी सुरक्षा कैसे होती है प्रश्न तो यह है कि असुर सैनिकों से सुरक्षित उस कारागार से निकल के मैं यहां पहुंचा कैसे स्वयं प्रभु श्री गणेश जी ने मेरी सहायता की उन्होंने ही मुझे यहां पहुंचाया किंतु इस प्रकार यदि किसी ने यहां तुम्हें देख लिया तो अनर्थ हो जाएगा नहीं माताओं अनर्थ तो तब होगा यदि यह यज्ञ पूर्ण हो गया कदाचित इसलिए प्रभु श्री गणेश जी ने मुझे आपके निकट भेजा है क्योंकि आप दोनों ही यज्ञ को रोक सकती है हम दोनों वो दोनों ऐसा कैसे कर सकते हैं वो माता आदि शक्ति नहीं है उन दोनों में ही नहीं अजा मुखी जी प्रत्येक नारी में माता आदि शक्ति का अंश है इसलिए वह दोनों ही नहीं अपितु आप भी माता आदि शक्ति की स्वरूप [संगीत] है मैं मैं तो असुर कन्या हूं मैं भी नारी आसुरी देवीय या साधारण हो माता उनमें कोई भेद नहीं करती उनकी कृपा दृष्टि सभी पर समान रूप से रहती है सत्य तो यह है कि नारी रूप प्राप्त होना बहुत बड़ा सौभाग्य है क्योंकि प्रत्येक नारी माता आदि शक्ति की प्रतिरूप है रूप भिन्न हो सकते किंतु शक्ति एक है माता आदि शक्ति की शक्ति आपी माता आदि शक्ति की अवतार है यदि तुम्हारे यह वचन सत्य भी है तो भी हम इस यज्ञ को क्यों रोके जिसकी सफलता से मुझे मेरे पुत्र मिलेंगे जिन्ह मैंने युद्ध में खो दिया है और मुझे मेरे सुहाग का सौभाग्य अवैध यज्ञ से जो भी प्राप्त होगा वो प्राकृतिक नहीं होगा मृत्यु से भी भयंकर जीवन होगा उनका प्राण हीन भावना विहीन शून्य देह होगी उनकी अत्यंत विकृत भयंकर वह बस भक्षण करेंगे अन्य सभी का ही नहीं एक दूसरे का भी भक्षण ना ही वह आपको मां पुकारेंगे ना आपके स्नेह के लिए लालायित होंगे यदि यज्ञ हुआ तो फिर आपके इन प्रियजनों को वह भी प्राप्त नहीं होगा जिसके अब यह अधिकारी है मुक्ति के मोक्ष के नहीं हम उनकी पीड़ा का कारण नहीं बन [संगीत] सकती आप उनकी सहायता कीजिए तुम दोनों को जाने का आदेश दिया था मैंने जाने का आदेश दिया था ना मैंने फिर भी यहां रुकने का दुस्साहस कर रही हो किसे छुपा रही हो अपने पीछे सुना नहीं तुम दोनों हटो मेरे सामने [संगीत] से यहां पर तो कोई नहीं [संगीत] [संगीत] है ॐ सुब्रमण्यम कार्तिके स्वामी [संगीत] [प्रशंसा] यह क्या हुआ था हमें निद्रा कैसे आ गई श्र देखो कारागार में सब उचित तो है ना ओम सुब्रमण्यम कार्तिके स्वामी ओम सुब्रमण्यम कार्तिके स्वामी ओ सुब्रमण्यम कार्तिके स्वामी ओ सु कार्तिके स्वामी ओम सुब्रमण्यम कार्तिके [संगीत] स्वामी मेरा आदेश ठीक से सुना नहीं तुमने जाओ कल के युद्ध के लिए मेरा कवच तैयार करो जाओ क्योंकि कल जो युद्ध में होगा उसकी तो कल्पना भी किसी ने नहीं की होगी पुत्र सुरा पदम पुत्र सुरा पद कल का युद्ध तुम्हें करना है किंतु पूरी तैयारी के साथ ताकि तुम अपनी मां का मान रख सको उस कार्तिके ने मेरे आंचल से तुम्हारे पुत्र मेरे पुत्रों को छीनकर मेरे हृदय को छन्नी कर दिया इसलिए के पुत्र जाओ तुम्हारी मृत्यु स्वीकार कर लूंगी [संगीत] मैं किंतु पराजय होकर लौटे तो तुम्हारा मुख भी ना देखूंगी विजय होकर ना लौटो तो जीवित ना लौट राज भवन का सुख त्यागा कठोर परिश्रम कर गुरु शुक्राचार्य से माया की शिक्षा प्राप्त की किसी राजा की पत्नी ना बनकर एक वृद्ध ऋषि को अपना पति बनाया किसके लिए तुम सबके लिए ताकि उसके तपो बल से तुम जैसी संतान प्राप्त हो जो अत्यंत बलशाली हो जिन्ह किसी के भी सामने झुकने पर कभी विवश ना होना पड़े मां की इच्छा पूर्ण करना तो हर बेटे का कर्तव्य होता है फिर मैं तो असुर सम्राट सुरा पद्मन हूं जिस मां ने हमारे लिए इतने त्याग कर इतने कष्ट से उन पे और कष्ट नहीं होने दूंगा मैं मर जाऊंगा मैं किंतु पराजित होके कदापि नहीं लू जाने से पहले मैं शिव आराधना करूंगा स्मरण कराऊंगा महादेव को कि उन्होंने अजय होने का वरदान दिया था अजय होने की अनुमति दीजिए हमें तो अब यज्ञ रोकने का दायित्व दोनों देव पुत्रियां ही निभाएंगे और हम सब यहां इस युद्ध की तैयारी करेंगे और इस युद्ध पर जाने से पूर्व मैं पिता श्री महादेव की पूजा करूंगा उन्हीं की कृपा और आशीर्वाद से उन्हीं के तीर्थ स्थलों की यात्रा से हम यहां तक पहुंचने में समर्थ हुए तो आप आगे भी विजय हमें वही [संगीत] [संगीत] दिलवाए च कल प्रवा मालिका डम डम डम मनि नाद म मर्वयू ओम नमः शिवाय ओम नमः [संगीत] शिवाय नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागा महेश्वराय नित्या शुद्ध दिगंबराय तस्मै नकारा नमः शिवाय [संगीत] मंदा किनी सलील चंदन चर्चिता नंदेश्वर प्रम नाथ महेश्वराय मंदार पुष्प बहु पुष्प सु पूजिता तस्मै मकाय नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय जटा कलवल प्रवा स्थले कलेव लता भ जंग तुंग मालिका म म म म मना म मरयम च तांडव कव ओ नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः [संगीत] शिवाय हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर [संगीत] महादेव लड़ रहे हैं धर्म बहादर और है किसी से शक्तिया महान सब प्रयुक्त है प्रभु शया महान सबु है आपका मुक सत्य का असत्य से सत्य का असत्य से नी का अनी से जीवन के बाद भी जो यज्ञ हमारे प्रियजनों के कष्ट का कारण बनेगा उसे रोकने का उपाय हमें करना ही [संगीत] होगा र्म का दूर है और दूर है दोनों ही से [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] के नहीं वो यहां नहीं यह तो मात्र मेरी कल्पना [संगीत] थी वहां मेरे प्रभु वहां [संगीत] है प्रभु मुझे मेरे प्रभु के दर्शन प्रत्येक स्थान पर हो रहे हैं इसका अर्थ है युद्ध का अंत निकट [संगीत] है प्रभु नहीं मैं हूं [संगीत] वल्ली आइए आज हम एक साथ मिलकर पुष्प और बेलपत्र एकत्रित करते हैं वो दृश्य जो बारबार मुझे दर्पण में दिखाई दिया था कहीं वो सत्य तो नहीं होने वाला है कहीं प्रभु के आने पर ये उनके सामने हुई और और आपका ध्यान कहां है देवसेना ओ अब समझी आप प्रभु भक्ति में कुछ अधिक ही लीन है भक्ति में लीन तो मैं सदैव रहती हूं किंतु आज मैं अपनी चिंता दूर करने की चिंता में हू आज की पूजा समाप्त होने तक मुझे इस मन कन्या वल्ली को यहां से जाने के लिए कहना ही [संगीत] होगा किंतु इतनी कठोर कैसे बन जाऊ मैं कैसे कहूं इसे जाने के लिए जाना है ना जाना है वही तो मैं कह रही हूं हमें जाना है पूजा के लिए विलंब हो रहा है देखिए सूर्य उदय भी होने वाला है जाना तो होगा ही इसे जाना होगा यहां से दूर और मुझे इसे भेजना होगा वही एक उपाय इसे मेरे और मेरे प्रभु के बीच में आने से रोकने का स्वामी आपके अस्त्र क्ण नहीं दिवस नहीं मास नहीं रस नहीं उदाहरण मेरे मान अभिमान क्या है मेरे मायावी शक्तिशाली जिससे अंत करूंगा मैं उन देवताओं का शक्तिया महान सब प्रयुक्त है हे शक्ति दन सब प्रयुक्त है हे पशुपतास्त्र से आज के इस युद्ध में मुझे आप दोनों की शक्ति की आवश्यकता होगी युद्ध है नीति का अनीति से युद्ध है जीवन मृत्यु का प्रत्येक निर्णय प्रकृति व्यक्ति के कर्मानुसार नियत करती है और प्रकृति के नियमों में हस्तक्षेप सदैव विनाशकारी होता है

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