तेरी भुजाएं भी युद्ध के लिए बड़बड़ा रही है अब और विश्राम नहीं मैं तुम दोनों माता और पुत्र को एक साथ युद्ध के लिए चुनौती देता [संगीत] हूं [संगीत] आज से संसार मां और पुत्र के एक नए रूप से परिचित होगा उनके कलो चंडी विनायक रूप [संगीत] से आनंद आएगा बहुत आनंद आएगा माता और पुत्र को एक साथ पराजित करने [संगीत] [प्रशंसा] में तुम्हारा कोई प्रहार सफल नहीं [संगीत] [संगीत] होगा [संगीत] आ दब नहीं शराब नहीं सबका विनाश माता रुकिए मुझे आक्रमण करने [संगीत] दीजिए [संगीत] [संगीत] कौन सी शक्ति इसका कवच बन रही है जिसके कारण हमारे शस्त्र इसे आहत करना तो दूर इसका स्पर्श भी नहीं कर पा रहे हैं रेखा तुमसे सुरक्षित रहने के लिए मुझे अस्त्र शस्त्र की आवश्यकता नहीं नित्र ं मैं मुझ पर वार करो मैं भी तो देखू क्या तुम दोनों मुझे नेश मात्र भी पीड़ा पहुंचा सकते हो या [संगीत] [प्रशंसा] नहीं [संगीत] क्या हुआ पुन विश्राम की आवश्यकता है या प स्वीकार कर [संगीत] ली माता पीड़ा से स्मरण हुआ जब मशक जी के स्वेत की एक बूंद इसके तन पर गिरी थी तो इसकी त्वचा भस्म होही थी इसलिए जो इसने सृष्टि से छीना है वही जल इसे दुर्बल बनाता है मैं इसके अंत के लिए पृथ्वी के गर्भ से जल निकाल सकता हूं किंतु यह तब तक संभव नहीं जब तक यह दुष्ट हमारे निकट [संगीत] है क्यों विचार करने में समय व्यत कर रहे हो मुझे पराजित करने का कोई उपाय नहीं कहीं तुम्हारे विचार करते करते यह धरती अकाल से कंकाल में ना बदल जाए ताप नहीं शराप हूं मैं सब का विनाश हूं मैं विनाश ह मैं स्थिति बहुत गंभीर होती जा रही है संपूर्ण धरती और उसके बासी अब कष्ट में है पुत्र हमारे पास अब अधिक समय शेष नहीं है पुत्र तुम्हारा उपाय उत्तम तुम अपना कार्य करो पुत्र मैं तब तक इसे तुमसे दूर रखती अमर हूं मैं मेरे तपो बल की शक्ति और असुर गुरु शुक्राचार्य के आशीर्वाद मुझे अमर बना दिया इसीलिए मेरे अंत का सन देना छोड़ और अप पराज स्वीकार कर चली जाओ य से अभी भी समय है असर गुरु शुक्राचार्य उ तो मैंने ससर के साथ दे था मुझे किसी प्रकार य बात गजानंद तक पहुंचाने होगी हमारे अस्त्रों से तुम अवश्य ही सुरक्षित किंतु तुम्हारे अस्त्र तो तुम्ह आघात दे ही स नम [प्रशंसा] नम यह तो गजा सुर द्वितीय की चित्कार थी हा उसके चित्कार के साथ महेंद्रपुरी के असुरों के चित्कार भी बढ़ती जा रही है यदि व असफल हुआ तो महेंद्रपुरी के प्रत्येक घर से रोने की ध्वनि सुनाई देगी किंतु तुम्हारी मां माया सुरा से उसे असफल नहीं होने देगी मैं इस दुष्ट असुर को कदापि सफल नहीं होने दूंगा सफल तो माता और माता पार्वती नंदन होंगे किंतु मुझे उन तक पहुंचना होगा उन्हें बताना होगा कि इस दुष्ट की भेंट असुर गुरु शुक्राचार्य से हुई थी और गुरु शुक्राचार्य ने उस गजा सुर तूती को कुछ दिया मां और गणेश इस संकट को टालने का जो भी उपाय कर रहे हैं उसम उने शीघ्रता करनी होगी शी रही कुछ करो गणेश कुछ करो [संगीत] मां माता मैं शीघ्र अतिशीघ्र जल निकालने का उपाय करता हूं नस्त नस्त नस्तम सव भूते माता नमस्तय नमस्तय नम सर्व भूते चेतन नम नम नम नमो नम मैं स्वयं को रोक क्यों नहीं पा [संगीत] रहा और ये कैसी परछाई देरा पीछा कर ही है प्रभु जल मिला आपको बताइए ना मिला क्या नहीं कठिनाई कितनी भी हो किंतु मुझे गणेश जी तक पहुंचना ही होगा एक बूंद भी नहीं है कदाचित गजा सुर के कारण जल का स्तर बहुत नीचे चला गया है मुझे अपनी सून और गहराई में ले जानी होगी अपना संतुलन लौटाने में सफल [संगीत] हुआ कदाचित भूल हुई मुझसे मैंने तुम्हें जो अवसर दिया तुम कदाचित उसके योग्य ही नहीं मेरी योग्यता पर संदेह करना आपकी भूल है तो प्रमाणित करो अपनी योग्यता को विनाश करो देवताओ का मेरी महेंद्र पुरी का नहीं अब मैं इन देवताओ को कोई असर नहीं दूंगा क्या हुआ कैसी दशा है उसकी कुशल है और इस कुशलता का आभास मुझे तब होगा जब वो इस कार्य को संपन्न करेगा जिसके लिए हमने उसे बुलाया था माता ऋषि [संगीत] पुलस ऋषिवर आप तनिक भी चिंता मत कीजिए नहीं गणेश जी कदाच ये संभव नहीं है क्योंकि असुर गुरु शुक्राचार्य ने गजा सुर द्वितीय को कुछ दिया [संगीत] था सावधान देवी सावधान रजासर द्वितीय आ रहा है तुम्ह दंड देने के लिए तुम दोनों का नाश करने के लिए माता ऋषिवर का अनुमान उचित है असुर गुरु शुक्राचार्य ने उस दुष्ट को कुछ ऐसा अवश्य दिया है जिससे उसकी शक्तियों में वृद्धि हो जाती है तभी तो यहां से दूर होने पर भी उसका प्रभाव कम नहीं हुआ तब तो हमें उसकी सुरक्षा के उस आधार को भी ढूंढना होगा इस सृष्टि में जो कुछ भी हो रहा है वह मुझसे छुपा हुआ नहीं है क्योंकि यह सृष्टि और कोई नहीं स्वयं मैं ही सृष्टि हूं [संगीत] धरती के अत्यंत निकट हूं मैं और अपनी विजय की [संगीत] भी [संगीत] यह कैसा विवश था जिसने महेंद्र पुरी को भी कंपित कर [संगीत] दिया [संगीत] [संगीत] नहीं यह कैसे संभव उन्होने मेरा महास्त्र कैसे ढूंढ लिया उसे धरती से बाहर कैसे निकाल लिया यही था ना वो महा अस्त्र दुष्ट जिस पर तुम्हें अहंकार था जिसके कारण तुम सुरक्षित थे तो लो स्वयं इसे नष्ट होते [संगीत] देखो जाय वि य जामुंडा विय ओ शी जामुंडा विय ओम मा श्रीम श्री जामुंडा विजय ओम मम श्रीम जामुंडा विजय इस महा अस्त्र की यह विशेषता है इसको क्रियान्वित करने के बाद इसे तभी रोका जा सकता है जब कोई इसे नष्ट कर दे महास्त्र नष्ट हुआ मेरा मैं अभी भी जीत और मेरा तप ही मेरा अस्त्र बनेगा तुमने मेरा अस्त्र गंडित किया इसका दंड तुम्हें अवश्य मिलेगा देवी प्रभु आपको जल मिला मशक जी जब तक मैं जल ढूंढता हूं आप उस असुर को रोकिए मैं मैं कैसे प्रभु क्यों क्यों नहीं अब तो उसका महास्त्र नष्ट हो गया है तो आप अकेले ही पर्याप्त है उसके लिए क्यों अनेकों बार मुझे युद्ध में विजय तो दिला चुके हैं ना आप उचित कहा प्रभु आपने मेरे अपार उत्साह और साहस के आगे ये दुष्ट गजा सुर दती कदा प नहीं टिक [संगीत] [संगीत] सकेगा तो चम हट जाओ मेरे सामने से तू तो क्या ना तेरी देवी ना तेरा वो स्वामी मुझे रोक पाएगा जिस प्रकार उन्होंने मेरा अस्त्र नष्ट किया है मैं की सृष्टि नष्ट कर दूंगा पहले मेरा सामना तो कर लो मैं किसी तुच्छ कीट का सामना नहीं करता उे मसल के रख देता पप नहीं श्राप हूं मैं ताप हो या श्राप मशक से जो टकराता है चोर चोर हो जाता है उता मशक अब अपने अंत के लिए तैयार हो जा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] अब तुम पर मृत्यु का वार [संगीत] होगा तुम्हें जत नहीं नहीं हूं मैं सबका सर्वनाश हूं मैं दैत्य जी आपका भी बाप हूं [संगीत] मैं कहीं तो जल मिलेगा [संगीत] मुझे बशक आज तुम कुछ ले [संगीत] जाओगे ऐसे घूमो मत पूषक साहस है तो स्थिर रहकर दिखाओ लो रुक गया मैं स्थिर हो [संगीत] गया प्रभु अब मैं इसे और नहीं छका सकता थक गया मैं कुछ तो कहिए जल मिला आपको थक गए आप कैसे [संगीत] भागोगे मिल गया जल मिल गया जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा जय गण जय गणेश जय गण आप मेरी सुरक्षा हो [संगीत] गई मु य जर कहां से मिल गया वस का बाव मेरी ओर क्यों आ रहा है उन्ह ये रहस्य कैसे जद हुआ कि चल से हो सकता हूं मैं [संगीत] [संगीत] आइए ऋषिवर हम दोनों अपने प्यास बुझाते [संगीत] हैं ये क्या हमें अकाल से मुक्ति मिलती इसका अर्थ क्या हा पुत्र इसका अर्थ है कि गजा सुर द्वितीय पराजित हो [संगीत] गया जब प्रकृति पुनः एक बार अपने वास्तविक रंग रूप में खिल खिलाने लग तो इसका अर्थ स्पष्ट है कि सब कुछ सामान्य है और इसका एक अर्थ यह भी है कि मां और गणेश सफल हो गए [संगीत] हैं भूल होना प्रकृति है मान लेना संस्कृति है और उसे सुधार लेना प्रगति है और तुम्हारी प्रगति मां की शरण में ही जाकर होगी यदि तुम्हें यह स्वीकार नहीं तो तुम्हारे तप की शक्ति भी तुम्हें जीवित नहीं रख सकेगी क्यों क्यों नहीं इतना कठोर त किया है मैंने तो उसकी शक्ति मेरी रक्षा क्यों नहीं करेगी मेरे तप और ऋषि के तप में भला क्या भेद है जो आप इसकी पुकार सुनकर मेरा वध करने चली आई क्या हम असूर का तप तप नहीं होता फिर हमें उसका उचित फल क्यों नहीं मिलता न्याय और धर्म के पालक है ना आप तो कहां है आपका न्याय कहां है आपका धर्म जो मेरे तप का फल देने में इतना संकोच कर रहा है जबक मुझे अभी इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है यह कैसा न्याय है यह कैसा धर्म है आपका तुम्हारे प्रश्न का उत्तर देकर मैं तुम्हे धर्म और अधर्म का भेद अवश्य समझाऊ गजा सुर द्वितीय किंतु ज्ञान को आत्मसात करने के पूर्व उसको पाने वाले को अपने मन को शांत करना आवश्यक होता [संगीत] है अपने चित को शांत और स्थिर कर अपना आसन ग्रहण [संगीत] करो मैं कहां हूं और यह सब क्या हो रहा है तुम्हें तुम्हारे तप के फल स्वरूप वो ज्ञान प्राप्त हो रहा है जिसे तुम पाना चाहते थे ज्ञान चाहिए मुझे नहीं मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है समझ आएगा जब तुम्हारे ज्ञान की भूख मिटेगी किंतु उसके पूर्व अपने पेट की भूख मिटाओ आओ भोजन करो [संगीत] संकोच मत करो अपना आसन ग्रहण करो और भोजन करो [प्रशंसा] शरा संकोच तो आप कर रही भोजन देने य तो त तुम्हारे तप और कर्मों से अर्जित भोजन तो तुम्हारी पोलियो में है उसे निकालो और खा लो [संगीत] ये पटली मेरे पास कैसे आ [संगीत] गई ओम उत्पति हेम रुचि राम रविचंद्र बहिन इसमें तो कुछ भी नहीं है माता मेरी पोटली में तीन पूरिया है मुझे सर्वाधिक मिले पाच पाच साथ में भोजन करने बैठे हो तो किसी का पात्र भोजन से रिक्त ना हो इस धर्म का पालन तो असुर भी करते हैं इसम कैसा धर्म अधर्म ये तो अपना अपना भाग्य है इसके भाग्य में भोजन नहीं तो इसमें मेरा क्या दोष धर्म उचित तो यह है कि यदि किसी के पास भोजन ना हो तो उससे भोजन बाट लो नहीं धर्म उचित हो या ना हो मैं अपना भोजन नहीं बाटू इस युद्ध में मैंने बहुत श्रम किया है मुझे भूख लगी है मैं खाऊंगा गजा असुर द्वितीय यदि तुम यह समझना चाहते हो कि इतने तप के बाद भी धर्म के अनुसार तुम मृत्यु के भागी क्यों बने तो सर्वप्रथम अपना भोजन बांटने का धर्म [प्रशंसा] निभा मन तो नहीं कर रहा किंतु समझना भी चाहता उचित है बाट लेता हूं अपना भोजन किंतु परियों को तीन भाग में कैसे [संगीत] बांटेंगे प्रत्येक पूरी को तीन भागों में बांट ले तो हमारे पास 24 भाग होंगे और सभी को आठ आठ भाग मिल जाएंगे देखा यदि इच्छा हो तो समाधान मिल ही जाता है अब विलंब मत करो और बांट लो अपनी पूरियां [संगीत] को [संगीत] अब आप तीनों आठ आठ भाग लेकर भोजन [संगीत] करो गजा सुल द्वितीय संकोच मत करो जाओ देवी सर्व भूतेषु शक्ति रूपे संता नस्त नमस्तय नमस नमो नम सर्व भूते मा ता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु तनत विजयते नम तस नम तस नम तस नमो [संगीत] नमः ज देवी सर्व भूते काण ससता नम तस नम तस नम तस नमो तो अब जब तुम्हारा पेट भरा है तुम निश्चिंत हो तो तुम यह समझ सकोगे कि धर्म किस प्रकार न्याय करता है मुझे तो लग रहा है आप उलझा रही हैं यहां क्या हो रहा है मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा ष पुलस से इन दोनों ने आपके साथ अपना भोजन बांटा तो क्या आप इन्हे कुछ नहीं देंगे किंतु मैं क्या दूं माता मेरी पोटली तो बिल्कुल रिक्त है देवी सर्वभूतेषु बुद्धि रूपेण संता नमस्तस्ये सर्व भूतेषु शक्ति रूपेण संता [संगीत] नमस्तस्ये यह लीजिए आप दोनों आपस में समान रूप से बांट लीजिए समान क्यों मैंने अधिक पूरिया दी है तो इन स्वर्ण मुद्राओं में मेरा भाग भी अधिक ही होगा यही धर्म है जितनी पूरी उतनी मुद्राएं संख्या से अधिक भाव महत्त्वपूर्ण है मैंने भी आपके समान अपना भोजन बांटा है गजा असुर द्वितीय जी तो इन स्वर्ण मुद्राओं का बंटवारा ऐसा होना चाहिए कि हम दोनों को समान भाग मिले चार मुद्राएं आपकी और चार मेरी हो ओ हो तो एक और छलावा तुम देवताओं का अधिक पूलिया मैंने दी थी तो अधिक स्वर्ण मुद्राए मेरी ई यही धर्म है चलिए ना मेरी रही ना आपकी इस विवाद का निर्णय माता पर छोड़ देते हैं अब आप ही बताइए माता किसको कितना भाग मिलना चाहिए गजा असुर द्वितीय को साथ और गणेश को मात्र एक स्वर्ण मुद्रा मिलनी चाहि किंतु माता यह आपका कैसा निर्णय है जगत के कल्याणा अपने सीमित साधनों में से भी जो व्यक्ति दान देता है वही सच्चे अर्थों में जगत से कुछ प्राप्त करने का अधिकारी होता है
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