Friday, 2 January 2026

महादेव ने मार्केंडय को आशीर्वाद दिया Triyug Amit Mahabali Hanuman Episode 253 Pen Bhakti

[संगीत] मैं तो माता-पिता की सेवा एवं जगत कल्याण के लिए आयु प्राप्त करना चाहता था किंतु यदि मेरी आयु जगत के विनाश का कारण बनने लगे तो मुझे ऐसी आयु नहीं चाहिए मृत्यु शिकार है कालदेव आप दोनों महा शक्तियों के युद्ध से मैं जगत का विनाश होते नहीं देख पाऊंगा मेरे प्राण हर लीजिए मैं प्रस्तुत हूं नारायण नारायण पूत के पांव पालने में ही दिखते हैं कालदेव इस 10 वर्ष की नन्नी आयु में इतने उच्च विचार ऐसी आत्म त्याग की भावना कालदेव देवेश्वर महादेव ने ही आपको कालदेव के पद पर सुशोभित किया यदि महादेव को चिरंजीवी होने का वरदान देना चाहते हैं तो इसमें आपको कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए जगत कल्याण के लिए ही वरदान दिया गया है इसे रोककर आप जगत कल्याण के कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं किंतु यम के नियमों का क्या यदि आप अपने नियम सर्वोपरि मानते हैं तो मैं प्रस्तुत हूं र लीजिए मेरे प्राण किंतु मेरे कारण कोई युद्ध नहीं होना चाहिए [संगीत] रेना क्षमा करें [संगीत] महादेव आज मारकंडे ने मुझे अन्याय करने से रोक लिया धर्म का पालन तो करना चाहिए किंतु जगत कल्याण एवं परोपकार के मूल्य पर [संगीत] नहीं पर पीड़ा से बड़ा कोई अधर्म नहीं है और सुख से बड़ा कोई धर्म नहीं नारायण नारायण अंत तो सब भला महादेव आपका यह वरदान जगत का बहुत बड़ा कल्याण करेगा महादेव की जय महादेव की जय महादेव की जय महादेव की महादेव की जय महादेव आपके भक्त की तेजस्विता एवं आपकी भक्ति की महिमा है जो यह प्रथम बार होने जा रहा है कि काल देव रिक्त हाथ अपने धाम लौटने वाले [संगीत] हैं मेरे कृत्य के लिए मैं आप सभी से क्षमा प्रार्थी हूं मुझे आज्ञा दे [संगीत] महादेव [संगीत] प्रणाम अंत भला तो सब भला अंतत मार् केंडे जी अपनी मृत्यु डालने में सफल हो ही गए हा हनुमान शिव भक्ति और माता-पिता की सेवा का पुरस्कार मिला उन्हे और फिर कालदेव के जाने के पश्चात महादेव मारकंडे को आशीर्वाद देते हुए बोले मरक तुमने जिस मंत्र को जपक अल्प समय में मुझसे वरदान प्राप्त किया तथा अपनी मृत्यु को टाला है अब से जगत में उस मंत्र को महामृत्यु जय मंत्र के नाम से जाना जाएगा इस मंत्र को श्रद्धा के साथ विधि पूर्वक जपने वाला मेरा भक्त मेरी कृपा का अधिकारी हो उसकी समस्त संकटों यहां तक कि काल मृत्यु से भी उसकी रक्षा हो जाएगी हे भोलेनाथ आपने मुझे जीवन दान देकर मुझ पर बड़ा उपकार किया है आपको कोटि कोटि नमन महादेव आपको कोटि कोटि प्रणाम महादेव मृत्युंजय महादेव की जय महाकाल महादेव की जय जगत हितकारी महादेव की जय हे प्रभु आपकी कृपा से अब मैं अपने माता पिता की सेवा भी करूंगा एवं जगत कल्याण के लिए सदा तत्पर रहूंगा आपकी जय हो [संगीत] भोलेनाथ आपको कोटि कोटि धन्यवाद प्रभु [संगीत] आप सभी देव गणों को भी मेरा प्रणाम तुम्हारा कल्याण हो [संगीत] बस मां पिता श्री मारकंडे पुत्र तो बालको सुनी कथा मारकंडे ने सिखाया श्रद्धा और भक्ति के साथ मृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाए तो आसन मृत्यु को भी टाला जा सकता है हां ऋषिवर मारकंडी जी की यह भक्ति के कारण ही कालदेव को रिक्त हाथ लौटना पड़ा सत्य है हनुमान अन्यथा कालदेव कभी नियम नहीं तोड़ते हैं अभी तो नियम तोड़ने वालों को दंड देते हैं हनुमान को नियम तोड़ने का दंड मैं अवश्य दूंगा सृष्टि का नियम ही है यह जैसी करनी वैसी भरनी तो हनुमान तुमने क्या सीखा इस कथा से सीख हां ऋषिवर मुझे यह सीख मिली कि मनुष्य चाहे तो अपने कर्मों से अपने भाग्य को बदल सकता है जिस प्रकार मारकंडे जी ने अपनी मृत्यु को टाला हां मित्र हां ऋषिवर मैं भी मारकंडे तीर्थ जाकर महादेव के लिए महा मृत्युंजय मंत्र का जाप करूंगा हां मित्र पूरी श्रद्धा आराधना के साथ पूजा करना हो सकता है कि मार्कंडेय भी दंड के स्थान पर क्षमा प्रदान कर दें उन्हें मुझे क्षमा प्रदान करनी ही होगी मैं उस मंत्र का जाप करके मेरे सारे परिवार की संकट से रक्षा करूंगा किंतु हनुमान यह तभी संभव होगा जब तुम पूरे परिवार के साथ मारकंडे तीर्थ जाकर इस मंत्र का जाप करोगे और ध्यान रखना पुत्र कार्तिक मास के अंतिम सोमवार को तुम्हें वहां पहुंचना होगा यदि कार्ति मास के अंतिम सोमवार को तुम परिवार के साथ वहां नहीं पहुंच पाए तो तुम्हारी समस्या हल नहीं हो पाए ऋषिवर मतंग मैं अभी जाकर मां और पिताश्री को वहां जाने के लिए मनाऊंगा किंतु मेरा आपसे एक निवेदन है अवश्य हनुमान कहो ऋषिवर आप मेरे उस दु स्वप्न और काल दंड के बारे में मां और पिताश्री को मत बताइएगा अन्यथा वो बहुत चिंतित हो जाएंगे तुम इसकी चिंता मत करो हनुमान [संगीत] किंतु क्या हुआ ऋषिवर आप कुछ कहते कहते रुक क्यों गए किंतु तुम्हें सावधान रहना होगा हनुमान ऋषिवर मतंग आपका मेरा मार्गदर्शन करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद मैं सावधान रहूंगा प्रणाम ऋषिवर कल्याण हो ऋषिवर हमें प्रस्थान करने की आज्ञा [संगीत] दे [संगीत] अब क्या हुआ मित्र रुक क्यों गए मित्रों एक दुविधा है सबको तीर्थ जाने के लिए कैसे मनाओ यदि किसी को भी ज्ञात हो गया मेरे उस दुश स्वप्नों के बारे में और काल दंड के बारे में तो सब चिंतित हो जाएंगे विशेष रूप से मेरी मां हां मित्र दुविधा तो बड़ी है लेकिन समय पर पहुंचना भी तो आवश्यक है ना [संगीत] मित्र हां कैसे भी करके मां और पिताश्री को मनाना ही होगा चलो देवाय नमः ओम ब्रह देवाय नमः ओम ब्रह देवाय नमः ओम ब्रह देवाय नमः ओ ब्रहम देवाय नम अच्छा हुआ लंकेश ने मेरी बात मान ली अब लंकेश की यह विधिवत स्या अमृत की प्र अवश्य [प्रशंसा] कराई कहो पुत्र तुम कुछ कहना चाहते हो पिता श्री हनुमान के कुछ इच्छा है व आप पूर्ण करेंगे ना इसमें संकोच कैसा पुत्र हो तुम हमारे और पुत्र की हर उत इच्छा को पूर्ण करना पिता का कर्तव्य होता है बताओ क्या इच्छा है तुम्हारी पिता श्री हनुमान की यह इच्छा है कि आप मां नानी और मार्जरी का मौसी कंडे तीर्थ जाकर मृत्युंजय महादेव की पूजा करना चाहता है ऋषिवर मतंग के पास गया था मैं उन्होंने ही ऐसा करने का सुझाव दिया है आप सब चलेंगे ना मार्कंडेय [संगीत] तीर्थ अवश्य पुत्र अच्छा पिता वह होता है जो अपने पुत्र की उचित इच्छा का सम्मान करे पिता तो पुत्र के लिए कुछ भी करता है और फिर जब पुत्र तुम्हारे जैसा हो तो उसकी इच्छा के लिए मैं कुछ भी कर जाऊंगा मेरे अच्छे पिता श्री सबसे अच्छे हनुमान तुमने मेरे मन की बात कह द मेरी भी बहुत दिनों से इच्छा थी कि तीर्थ यात्रा पर जाऊ सबके साथ बहुत ही उत्तम सुझाव है हनुमान [संगीत] का परंतु पिताश्री हमें वहां जाने के लिए प्रातः काल में ही प्रस्थान करना होगा ऋषिवर मतंग ने कहा है कि कार्तिक मास के अंतिम सोमवार को हमें वहां पूजा करनी होगी तुम्हारी इच्छा अवश्य हो हनुमान प्रातः काल तक हम सब व्यवस्था कर देंगे जाने की मतंग ऋषि ने अवश्य ही कुछ सोच कर यह सुझाव दिया होगा ऋषिवर मतंग सदैव हमारे परिवार के शुभचिंतक रहे हैं उन जैसे ऋषि हमारे परिवार एवं राज्य के कल्याण के लिए मार्गदर्शन करते रहे हैं यह तो हमारे लिए सौभाग्य की बात होगी मैं अभी मंत्री से यात्रा की सारी व्यवस्था करने के लिए कहता हूं हम भी मार् के लिए भोजन आदि की व्यवस्था करवा लेते हैं चलो माजका हां मां चलिए हनुमान मैं भी सबके लिए वस्त्र आदि की पोटिता लगवा देती हूं प्रातकाल होते ही निकलना है ना सब इतनी सहजता से मान जाएंगे यह तो हनुमान ने सोचा भी नहीं था आपका बहुत-बहुत धन्यवाद प्रभु अब तो हमारी यात्रा प्रातः काल को ही आरंभ होगी प्रभु आपके कारण हमारे सारे संकट दूर हो जाएंगे जय हो भोले बाबा की लो पुत्र इन्हे दान [संगीत] करो प्रणाम मेरे सारे मित्र भी आ गएन हनुमान हमें विलंब तो नहीं हुआ मित्र नहीं मित्रों तुम सब समय से ही आ गए हो दा श्री आपकी अनुमति हो तो मेरे सारे मित्र भी आ सकते हैं मेरे साथ हां हां पुत्र हनुमान वैसे भी तीर्थ यात्रा बंधु बांधव के साथ ही पूर्ण करने का विधान है अब हमें शीघ्र ही निकलना चाहिए जिससे कि समय रहते हम अपनी यात्रा सफलता पूर्वक पूर्ण कर सके संभव है निश्चित समय के भीतर ही मैं यह तीर्थ यात्रा पूर्ण कर लूं [संगीत] सफल नहीं हो पाएगी केसरी की तीर्थ यात्रा ना ही जीवन यात्रा परंतु महाराज कालदेव केसरी का परिवार भी है केसरी के साथ कहीं परिवार की पीड़ा से ही जुड़ी है हनुमान की पीड़ा चित्रगुप्त जी केसरी के प्राण हरने की व्यवस्था कीजिए भेजिए यम दूतों को जी प्रभु आज्ञा दे ऋषिवर प्रणाम कल्याण हो पुत्र स्वजन हेतु चिंतित हनुमान महामृतुंजय तीर्थ प्रया सभी साथ जाते हनुमत के भाव विभोर नेत्र मारुती के क्रूर काल रच योजना परिवर्तित कर अपनी गणना जन्म मरण है जीवन यात्रा हनुमत कृपा बने जय [संगीत] [प्रशंसा] यात्रा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] नानी अब क्लांत प्रतीत हो रही है क्या मैं आपको कांधे पर बिठाकर ले चलूं हनुमान तुम तो एक ही क्षण में सबको अपने कंधे पर उठाकर ले जा सकते हो पुत्र किंतु तीर्थ याता अपने पांव पर चलकर पूर्ण करने में ही उत्तम फल की प्राप्ति होती [संगीत] है अच्छा आप सब क्लांत प्रतीत हो रहे हैं क्यों ना कुछ विश्राम किया जाए अवश्य पुत्र [संगीत] हनुमान आगे पर्वत श्रंखला है यदि उसे पार करना है तो हमारा विश्राम करना आवश्यक है उसके पश्चात हम नई स्फूर्ति से आगे [संगीत] [प्रशंसा] बढ़ेंगे किंतु पिताश्री हमें समय पर यात्रा पूर्ण करने का ध्यान भी रखना होगा चिंता मत करो पुत्र सब कुछ समय अनुसार ही [संगीत] होगा अनुमान तुम ही नहीं सारा संसार जान जाएगा कि काल के कार्य में हस्तक्षेप करने पर काल का क्या दंड होता है और प्रकृति के विपरीत कार्य करने पर काल कैसे दंड देता है विधान ही काल की पहचान यम के नियम जितने कठोर उतनी ही कठोरता से पालन करवाते हैं कालजन आने वाले संकटों से सतर्क रहकर अब मुझे हर क्षण अपने परिवार जनों के साथ रहना होगा

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...