श्र ग श्री गणे यह मैंने आवेश में आकर क्या कर दिया अपने ही कठोर वचनों से माता को आहत कर दिए जगत कल्याण का कारण बना देती है मेरी क्रोधाग्नि में मेरे पत्नी के भस्म होने के बाद भी मां ने मेरे भीतर प्रे जगाकर मुझे शक्ति दी कि मैं उस भस्म को जगत कल्याण के लिए पौष्टिक फल में परिवर्तित कर सकूं यह माता का अपने पुत्र के प्रति असीम स्नेह और कृपा का उदाहरण है मुझे पूर्ण विश्वास है कि महादेव और माता के प्रति मेरे कठोर वचन में भी जगत कल्याण का कोई कारण छिपा [संगीत] है किंतु इसमें कौन सा जगत कल्याण छुपा है हमें तो यह भी ज्ञात नहीं है कि मां और पिताश्री कहां चले गए हैं जो भी होता है उसके पीछे अवश्य कोई कारण होता है पुत्र ऋषि दुर्वासा उचित कह रहे हैं उनका महादेव और देवी पार्वती के प्रति कठोर शब्दों का प्रयोग और महादेव और देवी पार्वती का अंतरध्यान होना इसमें अवश्य उनकी ही कोई लीला छुपी है पुत्र कार्तिके पुत्र गणेश समय के साथ-साथ सब स्पष्ट हो जाएगा किंतु सर्वप्रथम हमें यह ज्ञात करने की आवश्यकता है कि महादेव और देवी पार्वती गए कहां है आपको भक्तो की चिंता ही नहीं यदि ऐसा है तो आप किसी निर्जन स्थान पर वास क्यों नहीं करते गणेश क्या हुआ कुछ दिखाई दिया तुम्हें हां भैया तो शीघ्र बताओ गणेश क्या दिखा तुमने शमशान शमशान शमशान [प्रशंसा] शमशान हां [संगीत] पुत्र महादेव और माता पार्वती शमशान में वास करने चले गए िकार है मुझे मेरे कठोर वचनों का ऐसा परिणाम हुआ महादेव और माता पार्वती शमशान निवासी होने पर विश हो [संगीत] ग हमें शमशान जाकर मां और पिता श्री को पुन वापस लाने का प्रयत्न करना चाहिए [संगीत] [संगीत] भैया गणेश तुम्हें पूर्ण विश्वास तो है ना कि मां और पिताश्री यही है इसी शमशान में हां भैया मुझे ऐसा ही आभास हुआ था कि मां और पिता श्री यही कहीं [संगीत] है ये यह तो मां का ही स्वर [संगीत] है किंतु पिताश्री और मां है कहां [संगीत] [संगीत] गणेश [संगीत] वो देखिए भैया वो रहे मां और पिता श्री पिताश्री और मां को ढूंढने उच स्थान पर पहुंचे हैं हम वो यही [संगीत] है माता प्रभु मां पिता [प्रशंसा] [संगीत] श्री [प्रशंसा] मां और पिता श्री मेरा स्वर क्यों नहीं सुन रहे हैं ब्रह्मदेव महादेव और देवी पार्वती सामान्य नहीं प्रतीत हो रहे हैं हा नारायण मुझे भी उनमें कुछ भिन्नता का आभास हो रहा है भैया हमें जाकर मां और पिता श्री से भेंट करनी चाहिए कदाचित उन्हें ज्ञात नहीं कि हम यहां पर है उचित कहते हो अनुज गणेश आओ चलो हम उनके निकट चलते हैं मां मामा जी य यह क्या है मां और पिताश्री य किस रूप में है पुत्र महादेव और देवी पार्वती ने मातंग और मातंगी का रूप धारण किया [संगीत] है भगवान तो भक्तों से होते हैं आप एक दूसरे में इतने रमे है कि आपको अपने आप की अपने भक्तों की और अपने कर्तव्य की कोई चिंता ही नहीं यदि ऐसा है तो ऐसा ही हो जाए मात और मात की ये मैंने क्या कर दिया [संगीत] आ [संगीत] मातम मातंगी मातम मातंगी हे मातम मातंगी मात मातंगी हे विषधर हे मसान बिहारी भस्म में रंजित अद्भुत होरी [संगीत] [संगीत] हे मातम मातंगी मातम मातंगी हे विषधर हे मसान बिहारी भस्म में रंजित अद्भुत होरी दूस कैसी हा होरी भस्म में रंजित कैसी ये होरी हे मातम मातंगी मातम मातंगी हे मातम मातंगी मातंग मातंगी काल विकराल रूप रंग नेत्र लाल है भाल गाल भस्म रमे सर्प छोड़े हाल है प्रेत गले मुंड झुंड भूत और पिशाच है होरिया अंधक है ना रंग ना गुलाल है रूब भयंकर धारे अघोरी भम में रंजित अद्भुत होरी हे मातम मातंगी मातम मातंगी जय मातम मातंगी मातम मातंगी हे मातम मातंगी मातम मातंगी मां और पिता श्री चिता भस्म से होली की क्रीड़ा कर रहे हैं हां पुत्र महादेव की होली सबसे विशेष है सबसे भिन्न सबसे भिन्न हां पुत्र महादेव होली की क्रीड़ा शमशान में दिगंबर रूप में करते हैं क्योंकि शमशान ही एकमात्र व स्थान है जहां धन समृद्धि सभी संबंध यहां तक कि तन रूपी चोला भी पीछे छूट जाता है सृष्टि के अंत में तो केवल भस्म ही शेष रहती है इसलिए भस्म ही वास्तविक रूप से ऐश्वर्य का प्रतीक है गुलाल से भी श्रेष्ठ है क्योंकि गुलाल का लाल रंग रचना का प्रतीक है किंतु महादेव रंग रहित श्वेत वर्णी भस्म से होली की क्रीड़ा करते हैं क्योंकि श्वेत वर्ण सृष्टि से भी उच्चतम [संगीत] है पिता श्री और मां के प्रत्येक कृत्य में उनकी अनुपम लीला निहित है उनकी होली के पीछे भी कितना गुण अर्थ छिपा है हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेवर हर हर महादे महादेव महादेव और माता मातंगी की होली का प्रत्यक्ष दर्शी बनना तो उनका दिव्य आशीष [संगीत] है हे मातम मातंगी मातम मातंगी हे मातम मातंगी मातंग मातंगी हे विषधर है मसान बिहारी भस्म में रंजित अद्भुत [संगीत] होरी भूत पिसाच संग कैसी हा होरी भस्म में रंजित कैसी ये होरी हे मातम मातंगी मातम मातंगी हे मातंग मातंगी मातंग मातंगी काल विकराल रूप रंग नेत्र लाल है भाल गाल भस्म रमे सर्प छोड़े हाल है प्रेत गले मुंड झुंड भूत और पिशाच है होरिया अंधक है ना रंग ना गुलाल है रूब भयंकर धारे अघोरी भसम में रंजित अद्भुत होरी हे मातम मातंगी मातम मातंगी जय मातम मातंगी मातम मातंगी मातम मातंगी अद्भुत दिव्य है ये दृश्य यह भूत प्रेत और पिशाच जिनको सभी नकारते हैं मां और पिता श्री उनके साथ होली मना रहे हैं यह दिव्य होली देखकर हम कृतार्थ हो गए भैया महादेव और देवी पार्वती की लीला है यह जिनका सभी तिरस्कार करते हैं उन्हें भी जगत पिता और जगत माता स्वीकार करते हैं आपके स्वरूप का दर्शन पाके मैं तो धन्य हो गया [संगीत] हर हर हर महादेव हर हर महादेव महादे ह हर महादेव [संगीत] महादेव भैया यह नागराज वासुकी जी क्या क्रोधित हो गए हैं नहीं पुत्र यह होली की क्रीड़ा है महादेव के गले से लिपटे नागराज के द्वारा छोड़ी गई विष की पहारी उनकी पिचकारी [संगीत] है जिस विष को सभी विनाशकारी मानते हैं महादेव और माता मातंगी उसका भी सम्मान करते हैं और उसी से होली की क्रीड़ा करते हैं वि से होली की क्रीड़ा अद्भुत भूत पिशाच संग कैसी हा होरी भस्म में रंजित कैसी ये होरी हे मातम मातम की मातम मातंगी हे मातंग मातंगी मातंग मातंगी काल विकराल रूप रंग नेत्र लाल है भाल गाल भस्म रमे सर्प छोड़े हाल है प्रे गले मुंड झुंड भूत और पिशाच है होरिया अंधक है ना रंग नागू लाल है भयंकर धारे अघोरी भस्म में रंजित अदभुत होरी मातंग मातंगी मातंग मातंगी मा मा मातंगी मातम मातंगी ज मातम मातंगी मा पिता श्री और मा तो इस दिव्य भस्म से घेरे जा रहे हैं मां और पिता श्री तो अभी यही थे अब अकस्मात कहां चले गए वे कहीं नहीं गए पुत्र वे तो वही है जहां तुमने उन्हें देखा [संगीत] था कदाचित मां और पिता श्री को यहां हमारी उपस्थिति का आभास भी नहीं है भैया और मुझे उनसे भेंट करनी चाहिए हां गणेश उचित कहते हो गणेश जी कुमार का के जी यदि अनुमति हो तो मैं भी आपके साथ चलू क्योंकि यह जो कुछ भी हुआ है मेरे ही कारण हुआ है मैं भी जाकर महादेव और माता पार्वती से क्षमा याचना करना चाहता हूं हां यह भी उचित होगा हम सभी एक साथ चलते हैं जैसे ही मां और पिता श्री हमें देखेंगे वह अपने सौम्य स्वरूप में अवश्य ही लौट आएंगे देही सौभाग्य आरोग्यम देही में परमम सुखम देही जयम देही यशो देही दशो जही देही सौभाग्य आरोग्यम देही में परमम सुखम रूपम देही जयम देही यशो देही दशो जही देही सौभाग्य आरोग्यम देही में परमम सुखम तपम देही जयम देही यशो देही दशो जही देही सौभाग्य आरोग्यम देही में परमम सुखम रूपंदेही जयम देही यशो देही विशो जही ऋषि मारकंडे यहां ऋषि मारकंडे कौन है यह यह वही ऋषि मार्कंडेय बाल्यकाल में महामृत्युंजय मंत्र की रचना की थी और महादेव और देवी आदि शक्ति का विशेष आशीष पाया था और ऋषि मारकंडे यह महादेव और देवी पार्वती के पुत्र गणेश हैं नारायण ब्रह्मदेव प्रणाम नारायण प्रणाम ब्रह्मदेव क्षमा करें मैंने आपको देखा नहीं प्रणाम ऋषिवर प्रणाम ऋषि मारकंडे आप यहां इस शमशान में स्वयं को यहां पाकर तो मैं भी चकित हूं ऋषिवर मैं तो ध्यान में मग्न था पुत्र मारकंडे मेरे पास आओ अचानक मुझे आभास हुआ कि माता पार्वती ने मुझे पुकारा है तो मैं उनका स्वर सुनकर चल पड़ा उनका स्वर मेरा मार्गदर्शन करता रहा और जैसे ही मैं यहां इस स्थान पर पहुंचा तो मैं भाव समाधि में चला गया मेरे मुख से स्वतः मंत्र ही प्रस्फुटित होने लगे मैं तो यहां खिंचा चला आया किंतु नारायण यह तो शमशान है माता पार्वती ने मुझे पुकारा है तो मुझे तो कैलाश पर होना चाहिए था फिर मैं यहां पर क्यों और आप सभी भी यहां पर क्यों है मां ने ऋषिवर को बुलाया है यहां इस शमशान भूमि पर ऋषिवर माता ने आपको यहां इसीलिए बुलाया है क्योंकि मां और पिता श्री दोनों यही [संगीत] है महादेव और माता पार्वती यहां है इस निर्जन शमशान में महादेव और माता पार्वती मातंग और मातंगी के रूप में सबसे विरक्त यह सब क्या घटित हो रहा है क्या कारण है इसका ऋषि मारकंडे के प्रश्न का हम क्या उत्तर श्वर की जिज्ञासा है तो यह मेरी भी जिज्ञासा है कि क्या कारण हो सकता है माता और पिता श्री के मातंग और मातंगी रूप में इस प्रकार शमशान में प्रकट होने का ईश्वर की लीला और उनके रूप में जगत का कल्याण छिपा होता है यह रहस्य ईश्वर स्वयं ही समय आने पर उजागर करते हैं
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