हता श्री गणे श्री गणे संसार में कुछ भी अकारण नहीं होता ऋषिवर की जिज्ञासा है तो यह मेरी भी जिज्ञासा है कि क्या कारण हो सकता है माता और पिता श्री के मातंग और मातंग की रूप में इस प्रकार शमशान में प्रकट होने का [संगीत] अवश्य य मां की ही कोई लीला है जिसे देख और समझ पाना हमारे लिए असंभव है किंतु यह जो हो रहा है उसके पीछे क्या कारण है अगर हमें यह कोई बता सकते हैं तो वह एकमात्र परम ब्रह्म ही है श्री महागणपति कृपया मुझे दर्शन दीजिए महागणपति जी जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा हो जय गे जय गणेश जय जय गणेश जय गणेश जय गणेश जय गणेश ज गणेश जय गणेश [संगीत] गणेश प्रणाम श्री महागणपति जी गणेश तुम्हारा मन बहुत विचलित हो रहा है तुम्हारी व्याकुलता को तो मैं भी अनुभव कर सकता हूं श्री महागणपति जी आप तो स सर्व ज्ञाता है ब्रह्मांड का कोई रहस्य आपसे छिपा नहीं तो आप ही मेरी जिज्ञासा शांत कीजिए प्रभु मां में परिवर्तन आने लगा है मैंने उन्हें देवी काली के रूप में देखा तब पिता श्री ने मुझे समझाकर मेरी चिंता दूर की जगत कल्याण के लिए हम सभी की एक अद्भुत लीला होती ही रहती है किंतु फिर वसंत उत्सव पर ऋषि दुर्वासा का कैलाश आकर कठोर वचनों का प्रयोग करना मां और पिता श्री का यहां इस रूप में आना सबसे विरक्त हो जाना और फिर ऋषि मारकंडे का यहां आकर यह कहना कि स्वयं मां ने उन्हें यहां बुलाया है यह सब हमारी समझ से परे है प्रभु गणेश जो रूप तुमने देखे वो देवी काली रूप से कहीं अधिक थे भिन्न झलक थी श्री महाकाली की जिनका संसार में आविर्भाव हो रहा है आविर्भव प्रभु हां परम ब्रह्म अर्थात पराशक्ति का एक और रूप जो श्री महाकाली अवतार में प्रकट होगा श्री महाकाली गणेश जैसे तुमने मेरे परम ब्रह्म रूप के दर्शन किए और महादेव के भी परम ब्रह्म रूप को देखा वैसे ही अब समय आ गया है जब तुम जगत जननी का परम ब्रह्म स्वरूप अर्थात पराशक्ति का रूप देखोगे उनसे जुड़े वो रहस्य जानोगे जिनसे आज तक संसार परिचित नहीं और इसी लीला के प्रत्यक्ष दर्शी बनने के लिए ऋषि मार्कंडेय का भी यहां आगमन हुआ है किंतु मां की देवी महाकाली के महा स्वरूप का दर्शन कब होगा गणेश वो दिव्य समय आ गया है अभी है अभी किंतु कैसे मां तो यहां शमशान में माता मातंगी के रूप में हमसे पूर्णत विरक्त है तो ऐसे में वो श्री महाकाली का रूप कैसे धारण करेंगी यह कर्तव्य तो तुम्हारा है इसका सूत्रधार तो तुम्हें ही बनना होगा तुम्हें ही इस परिवर्तन का प्रेरक होना होगा गणेश जिससे यह लीला प्रारंभ हो सके यह रहस्य उजागर हो सके मैं प्रस्तुत हूं मेरा मार्गदर्शन कीजिए महागणपति जी जगत जननी की इस लीला का आरंभ जल से होगा तुम किसी भी उपाय से देवी मातंगी को पावन गंगा के जल में प्रविष्ट कराओ वही श्री महाकाली का आविर्भाव होगा गणेश आपको कोटि कोटि धन्यवाद श्री महागणपति जी आपने जो मुझे मार्ग सुझाया है मैं उसी पर चलूंगा कल्याण [संगीत] हो मैं यहां निष्क्रिय रहकर अब और प्रतीक्षा नहीं कर सकता चलो अनुज गणेश हम वहां जाकर मां और पिताश्री को स्मरण कराते हैं अनुज गणेश कुछ कहते क्यों नहीं तुम ऐसे स्थिर क्यों खड़े हो चलो गणेश गणेश विपरीत दिशा में क्यों जा रहा है य य अचानक प्रथम पूज्य गणेश जी को क्या हो गया गणेश क्या कर रहे हो तुम कहां जा रहे हो कहां जा रहे हो [संगीत] गणेश [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] मां गंगा को मेरा [संगीत] नमन गणेश मां गंगा के पर क्यों चला आया क्या है उसके मन में क्या करना चाहता है व हमें मां को मां गंगा तक लाना होगा यही यही मां श्री महाकाली का आविर्भाव होगा च चर चर [संगीत] च यह क्या कह रहे हो तुम गणेश विस्तार से कहो मां श्री महाकाली का अविर भाव अर्थात हां भैया महागणपति जी ने स्वयं मुझे बताया जगत जननी की इस लीला का आरंभ जल से होगा तुम किसी भी उपाय से देवी मातंगी को पावन गंगा के जल में प्रविष्ट कराओ वही श्री महाकाली का आविर्भाव होगा गणेश मां श्री महाकाली का अवतार धारण करने वाली है आगे हमारा मार्गदर्शन भी वही करेंगी किंतु प्रथम पूज्य गणेश जी हम हम माता मतंग की को यहां तक लाएंगे कैसे क्योंकि वो तो सबसे विरक्त और अनभिज्ञ है और वो हमारा निवेदन सुनेंगे भी [संगीत] कैसे हां देवराज उसका तो एक ही उपाय है हम एक पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करेंगे शिवलिंग पिता श्री के अरूप रूप है अब हम उनकी पूजा और उनका जलाभिषेक करेंगे तो मां को भी उनका आभास होगा और उनके भीतर भी शिवलिंग के जलाभिषेक करने की प्रबल इच्छा जागृत होगी और वह स्वयं यहां आ जाएंगी उत्तम युक्ति है गणेश एक भक्त को केवल उसकी भक्ति ही खींच सकती है गणेश सर्वता उचित कह रहे कार्तिके देवी पार्वती अपने उग्र तत्त्व युक्त परम रूप को धारण करने जा रही हैं इसीलिए तुम्हें अपने अनुज की सहायता करनी चाहिए जिसका परिणाम तुम्हें शीघ्र प्राप्त [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] होगा [संगीत] आ रे सा नि रे सा नि प सा नि प सा नि प म म म नि सा नि म सा सा रे सा नि रे सानि सा सा सा [संगीत] स रे रे सा सा सा नमकम चमकम एक कस्य नमस्कारा शंकराय महात्म स्वचा दौ च वर्णांटे वाक्य काले भवे दिति नमकम चमकम चैव पुरुषोत्तम तु नित्य स प्रविश महादेव गृहे गृह पति जथा रुद्रा दय स्व कंडिका दस केन तो ततो वाक्यम प्रकर वित रचाते सोड़ साक्षर अब हमें शिवलिंग का जलाभिषेक करना चाहिए भैया आप जलाभिषेक आरंभ कीजिए रुद्रा दय स्वरण व कंडिका दस केन तो ततो वाक्यम प्रकर वित रचाते सोड साक्षर नमकम चमकम एक कस्य नमस्कारा शंकराय महात्म स्वचा दौ च वर्णांटे वाक्य काले भवे दिति नमकम चमकम चैव पुरुषोत्तम तु नित्य स प्रविश महादेव गृहे गृह पति जथा रुद्रा स्वामी के जलाभिषेक करने से तो परम सुख का अनुभव होता है मुझे भी प्रभु का जलाभिषेक करना चाहिए हे प्रभु महादेव हे आदिशक्ति य जो भी हो रहा है उसका रहस्य हमें समझाइए श्री महाकाली का रूप लीजिए माता और जगत जननी की शक्ति का रहस्य उजागर कीजिए ्र स्व कंडिका दस केन ततो वाक्यम प्रकर वित रचाते सड़ साक्षर स्वचा द च वर्णा वाक्य काले भवे दिति नमकम चमकम चैव पुरुषोत्तम पिताश्री तो वहा अकेले रह गए हैं मा कहा चली गई देव गृहे गृह पति जथा रुद्रा स्व कंडिका दस केन तो ततो वाक्यम प्रकर वित रचाते सोड साक्षर पुत्र कार्तिकेय गणेश की युक्ति सफल हो रही है तुम्हारी मां पावन गंगा की ओर ही आ रही [प्रशंसा] [संगीत] है [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] अद्भुत है वो श जिसकी हमें प्रतीक्षा थी मां अब जल में प्रवेश करेंगी और हमारे सभी प्रश्नों का उत्तर देंगी मैं कोई जल कलश तो लाई [संगीत] नहीं तो मैं जल लेकर कैसे जाऊंगी मैं जाकर कलश ले आती हूं मां रुक क्यों [संगीत] गई गणेश मां तो लौट कर जा रही है अब क्या करेंगे गणेश जी माता को लौटा कर यहां कैसे लाएंगे पुत्र कार्तिकेय उस और देखो पुत्र [संगीत] गणेश हां यह जल कलश उचित [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] होगा चिंता की कोई बात नहीं मां तो मात्र एक जल के लिए पात्र लेने गई [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] थी [संगीत] अरे कलश छूट गया मेरे हाथों से [संगीत] उचित है यही उचित [संगीत] समय [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] माता तो जल में समाहित हो गई वह बाहर क्यों नहीं आ रही है कदाचित मुझे ही जाकर उन्हें बाहर निकालना होगा हां कुमार कार्तिक हम सब भी आपके साथ चलते हैं चलिए रुक [संगीत] गणेश क्यों रोक रहे हो हमें मां संकट में है भैया कठिनाई और संकट तो मां के निकट भी नहीं क्योंकि मां तो वही है जहां उन्हें होना चाहिए हां भैया इस जल से ही माता के इस रूप का सत्य निकलकर उजागर होगा यह सब मां की ही लीला है इसीलिए हमें चिंता से मुक्त रहना होगा धैर्य धारण करना होगा क्योंकि धैर्य का फल सुखदाई होता है अब हमें मा मातंगी से प्रार्थना करनी चाहिए कि वह जगत जननी का रहस्य उजागर करें [प्रशंसा] मां मातंगी हमें हमारा उचित पद दिखाइए हमारा मार्ग दर्शन कीजिए श्यामाम शुभ्रम [संगीत] शुभलाभ प्रदा कर करा सेव्य कंजाम युग माम लाम भोजा सुकांति निचर करा अन्य दवा निरूपा पाम खड़ गम चतुर वर कमल खेद कम चाक शम [संगीत] च मा दुख निवा सर्व मंगल धारण चक मु विदारण ु शुभ [संगीत] संभार [संगीत] [संगीत] या देनी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण सता नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नमः यह देवी तो श्री महाकाली नहीं फिर यह कौन सा रूप है माता का और महाकाली का आविर्भाव कैसे होगा पुनः दुविधा में हो ईश्वर यदि परीक्षा के लिए मार्ग को कठिन बनाते हैं तो उसको सरलता से पार करना भी वही बताते हैं
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