महोट विनायक की जय प्रभु महोट विनायक की [संगीत] जय शीलाल च अ को लाल बरा सु गौरी हर कोलिए गु लडू साई सुर को महिमा क जाए लाग पर जय देव जय देव श्र गणराज दर्शन मेरा ममता जय देव जय [संगीत] [संगीत] देव [संगीत] [संगीत] काशी नरेश मेरे यहां आने का उद्देश्य संपन्न हुआ संसार इन दोनों के आतंक से मुक्त हुआ इसलिए अब मेरे विदा लेने का समय आ गया है हे परम भक्त शुक्ल शर्मा आपके साथ में अपने सभी भक्तों को आशीष देता हूं कि आज के बाद जो कोई भी मुझ में शुक्ल शर्मा के समान अटूट विश्वास रखेगा और हे राजन जो भी भक्त आपके समान निश्छल भक्ति से संकटनाशन स्त्रोत का उच्चारण करेगा उसके सभी संघर्ष मेरे हो जाएंगे मैं स्वयं उसके सभी संकटों को अपना मानकर उन्हें दूर करूंगा और जो भक्त मेरे स्त्रोत का उच्चारण छ मास तक दिन में तीन बार भी करेगा उसे मन वांछित आशीष प्राप्त होगा विद्यार्थी को विद्या धना को धन संतान की इच्छा रखने वाले को संतान और मोक्ष की कामना करने वाले को मुक्ति प्राप्त होगी और जो पूर्ण विश्वास से एक संपूर्ण वर्ष मेरे स्त्रोत का गायन करेगा उसकी सभी इच्छाएं स्वतः पूर्ण होंगी किंतु अभी मेरे लिए माता की इच्छा को पूर्ण करना सबसे अधिक आवश्यक है जब तुम्हारे अवतार का प्रयोजन पूर्ण हो जाए बस एक बार अपनी माता से भेंट करने अवश्य आना पुत्र अतः अब मैं प्रस्थान करूंगा किंतु मेरी कृपा दृष्टि सदा आप लोगों पर बनी रहेगी प्रभु फिर तो विनायक सीधे माता आदिति के पास गए होंगे माता और पुत्र का ममता और वात्सल्य तो अपूर्व रहा होगा ना [संगीत] वचन पाल कर्तव्य निष्ठा के [संगीत] नायक माता से मिलने चले प्रभु श्री [संगीत] विनायक माता प्रसन्नता से बौराई जाए मार्ग तक रह रह विनायक नाए माता प्रतीक्षा में ऐसी अधीरा मस्य कोई आतुर हो पाने को नीरा जय गणेश जय गणेश जय मुझे पता था पुत्र तुम अवश्य आओग तो से भला कैसे दूर रह सकता [संगीत] हूं ओम सिद्धि बुद्धि सहित प्रणाम प्रभु श्री महा गणाधीश [संगीत] पूर्ण हो चुका है इसलिए अब तुम्हारे लौटने का समय है तुम्हें अपनी माता से मिलने की अनुमति नहीं तु अपनी माता से मिलने की अनुमति नहीं देवी अदिति विनायक के अवतार का प्रयोजन सिद्ध हुआ इसलिए अब उसके वहां रुकने का कोई औचित्य नहीं उसे लौटना होगा आपसे नहीं मल [संगीत] सकेगा किंतु प्रभु मैंने माता को वचन दिया है प्रभु मुझे बस एक बार माता से मिलने की अनुमति दे दीजिए बस एक बार मुझे अपने पुत्र को अपने आंचल में भर लेने दीजिए प्रभु बस एक बार देवी वात्सल्य प्रेम क्या होता है इसका अनुभव अब मुझे हो चुका है इसलिए मैं समझ सतां एक दूसरे से भट करने की ल वन देता दे विनायक अपने भविष्य के एक अवतार में आपसे भेट करने अवश्य आएगा माता को दिया अपना वचन तुम अवश्य पूर्ण करोगे किंतु अपने भविष्य के [संगीत] अनरो से मकल है मा पुत्र दोनों ही व्याकुल है मा और पुत्र दोनों ही व्याकुल [संगीत] है यदि मेरे भाग्य में प्रतीक्षा लिखी है तो अब वही करूंगी मैं जब तक तुम नहीं आ जाते पुत्र इस मां के मन को संतुष्टि नहीं मिलेगी पुत्र नहीं मिलेगी उस दिन तो माता और पुत्र नहीं मिल सके थे परंतु उस दिन से लेकर आज तक माता प्रतिदिन अपने पुत्र विनायक की प्रतीक्षा करती हैं इस आशा के साथ कि वह एक बार उनसे मिलने अवश्य आएगा देखो पुत्र तुम्हें अपने हाथों से लड्डू खिलाने की आशा में मैंने आज फिर अपने हाथों से तुम्हारे लिए लड्डू बनाए हैं तुम आओगे ना पुत्र आऊंगा माता अवश्य आऊंगा आप बुलाएंगे तो भला आपका यह पुत्र कैसे नहीं आएगा विनायक का दिया वचन मैं अवश्य पूर्ण करूंगा जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा देवी लक्ष्मी वह माता युगों से अपने पुत्र की प्रतीक्षा कर रही है उसे अपने सामने पाकर उसे इतना प्रेम देंगी कि उस वात्सल्य से निहाल होकर कहीं मेरा पुत्र वही ना रुक जाए [प्रशंसा] ऐसा नहीं हो सकता देवी पार्वती य असंभव है नहीं देवी ममता की शक्ति असंभव को भी संभव बना देती [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] है गणेश युगों की आस पूर्ण करेगा एक माता की उसे देख निहाल हो जाएगी उनकी ममता किंतु उनकी प्रतीक्षा का अंत कहीं मेरी प्रतीक्षा का आरंभ ना बन जाए एक माता का सुख कहीं दूसरी माता के हृदय की टीस ना बन [संगीत] जाए माता मैं आ गया युग भले ही बीत जाए स्मृतियां भले ही धुंधली पड़ जाएं किंतु माता के आचल की छाया तो पुत्र के लिए वैसी ही है जैसे तप्त धरती के लिए वर्षा के मेघ जैसे बंजर भूमि के लिए जल की धारा माता जब कभी भी मेरे आंखों से अश्रु छलक जाता था तो मुझसे अधिक पीड़ा तो आपके हृदय को होती थी मेरे रूठने पर आप अधीर हो जाती थी अपने हाथों के लड्डू खिलाकर उनमें अपने मीठे मीठे बोलों की मिठास घोलकर मुझे मनाती थी मुझे सब स्मरण हो आया मेरा वह बचपन मेरा यहां से जाना और मेरा वचन आ जाओ ना पुत्र यह देखो यह लड्डू मैंने तुम्हारे लिए ही तो बनाए [संगीत] हैं देवी अदिति का अपार स्नेह कहीं गणेश को उनकी ममता में खोने पर विवश ना कर दे अपने मन को शांत कीजिए देवी पार्वती गणेश जब अपनी पूर्व अवतार की माता को नहीं बुला सका तो आप तो उसकी इस अवतार की मां है वह आपको भला कैसे भूल सकता है पुत्र विनायक अब और विलंब ना करो पुत्र और मत सताओ अपनी माता को आ जाओ ना पुत्र [संगीत] आपका विनायक ही गणेश के रूप में आया है क्या आप पहचान सकेंगी मुझे [संगीत] माता [संगीत] [संगीत] माता युगों बीत गए पुत्र किंतु आज भी आज भी तुम्हारी स्मृतियां धुंधली नहीं पड़ी है मेरी दृष्टि को हर पर केवल तुम ही दिखाई देते हो मेरे कानों में हर पल तुम्हारे ही मधुर शब्द सुनाई पड़ते हैं तुम्हारे आने की आस में मैं कई बार बार बार आश्रम के द्वार तक दौड़कर पहुंच जाती हूं नहीं पुत्र अब केवल मैं ही नहीं मेरे नेत्र मेरे कान मेरा हृदय सब अधीर हो रहे हैं पुत्र देखिए ना देवी अतिथ को देखने पर से ही मेरे पुत्र की आंखें नम हो गई कितना भावुक हो उठा है मेरा पुत्र येय ये कैसी भूल हो गई मुझसे क्यों जाने दिया मैंने अपने पुत्र को क्यों जाने दिया किंतु किंतु मैं रोकती भी तो कैसे रोकती एक मां ही तो दूसरी मां का दुख समझ सकती है मैं समझ सकती हूं देवी पार्वती मुझे क्षमा कीजिए देवी किंतु आप नहीं समझ सकती एक मां की दुविधा एक मां की चिंता ममता की शक्ति को आप नहीं समझ सकती दे की शक्ति को आप नहीं समझ सकती दे को आप नहीं समझ सकती को आप नहीं समझ स देखिए वो उस माता के पास गया है जिन्होने युगों से अपनी ममता को सहेज कर रखा है किंतु एक बात का तो सुख है मुझे इस सारी ममता का भागी मेरा पुत्र गणेश बनेगा किंतु फिर किंतु फिर क्या होगा भोलेनाथ के ही समान भोला है मेरा पुत्र गणेश यदि वो उनकी ममता में रम गया तो वो वो वही रुक गया तो ये कैसी परीक्षा है मेरी ममता [संगीत] की एक मां के मन की पीड़ा आप नहीं समझ सकती देवी लक्ष्मी नहीं सम स इसलिए अब मैं तुम्हारे आने का विश्वास तभी करूंगी पुत्र जब तुम मेरा आंचल पकड़कर अपनी मधुर वाणी से मुझे आवाज दोगे [संगीत] माता माता माता [संगीत] माता माता मैं आ गया [संगीत] माता वचन पाल कर्तव्य निष्ठा के नायक माता से मिलने चले प्रभु श्री [संगीत] विनायक माता प्रसन्नता से बौराई जाए मार्ग तक रह रह विनायक ना आए माता प्रतीक्षा में ऐसी अधीरा मस्य को कोई आतुर हो पाने को [संगीत] नीरा [संगीत] विनायक जति भर उठे नैन रीते [संगीत] रीते सम्मुख है पुत्र दिन प्रतीक्षा के बीते अश्रु बहत नैन पुत्र को निहारे गजानंद भी इस प्रेम पर वारे वारे यह देख पार्वती मां भी अकला बाह पसार ममता पुत्र को बुला रुकिए देवी पार्वती यह आप क्या कर रही है कहां जा रही है आप देवी वही देवी अतिथि के आश्रम जहां मेरा पुत्र गणेश अपने पुत्र को लौटाने उसकी मां हूं मैं यह अधिकार है [संगीत] मेरा दूरी चाहे कितनी भी हो लेकिन मां की ममता की डोर पुत्र को उसके पास खींच ही ले आती है मुझे विश्वास था पूर्ण विश्वास था अपनी ममता पर अपने पुत्र विनायक पर मुझे ज्ञात था कि तुम आओगे अपनी मां से मिलने अवश्य आओगे तुम यह पुष्प कंगन तुम माता आदिति को भेंट करना यह उन्हें अवश्य ही भाए [संगीत] [संगीत] माता यह आपके लिए पुत्र की छोटी सी भेंट लीजिए तुम्हें स्मरण था पुत्र इतने समय बाद भी तुम्हें स्मरण था कैसे भूलता माता आप भी तो मेरे लिए लड्डू बनाना नहीं भूली मेरा [संगीत] पुत्र कैसे भूल जाती पुत्र अपने प्रिय पुत्र के प्रिय लड्डू कैसे भूल जाती तुम्हारी मां चलो मैं स्वयं तुम्हें अपने हाथों से लड्डू [संगीत] खिलाऊंगी [संगीत] [संगीत] अब तो मैं आ गया हूं ना माता तो अब आप क्यों रो रही है आप मुझे मत रोकिए देवी मुझे जाने दीजिए नहीं तो मैं अपने पुत्र को खो दूंगी इतना विचलित मत हुई देवी पार्वती आप अपने पुत्र को खोएी नहीं अीत देवी अदिति की ममता से गणेश के साथ आपका संबंध और प्रगर होगा मेरा पुत्र किसी अन्य को माता पुकार ही नहीं रहा उन्हें ममता का वो सुख दे रहा है जिस पर केवल मेरा और मेरा अधिकार है और मैं यह सब देखने के लिए विवश हो रही हूं देवी इससे एक मां के मन पर क्या बीती है आप नहीं समझ सकती देवी लक्ष्मी आप कभी नहीं म सकती इसलिए मुझे जाने दीजिए मत रोकिए मुझे जाने दीजिए इससे एक मां के मन पर क्या बीती है आप नहीं समझ सकती देवी लक्ष्मी आप कभी नहीं समझ सकती आप कभी नहीं समझ सकती कभी नहीं समझ [संगीत] सकती [संगीत] अंतत गणेश अपनी माता से बेट करने आ ही गए आज तो शुभ दिन है तो पिता को भी पुत्र का स्नेह मिलना चाहिए या उसका अधिकार भी केवल माता को ही दोगे पुत्र स्वामी देखा आपने कौन आया है मैंने आपसे कहा था ना कि मेरा पुत्र अवश्य आएगा कल्याण हो पुत्र देखिए ना मैं आ भी गया फिर भी माता की आंखों में आंसू है पुत्र तुम्हें यहां देखकर तो मेरे अश्रु भी नहीं रुक रहे तो इस मां को क्या [संगीत] समझाओ माता मेरा मन भी भर गया और पेट भी अभी से तुमने अभी खाया ही कहां है यह लो मेरे हाथों एक और [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] लो अब तृप्त हुआ है मेरा पुत्र गणेश को लड्डू नहीं मोदक प्रिय है और सदैव रहेंगे यह बात मुझसे उसकी माता से अधिक और कौन जान सकता [संगीत] है आज मुझे समझ आ गया स्वामी कि ममता का भाव जब किसी मां के हृदय में तो उसे अपनी संतान के समक्ष कुछ भी दिखाई नहीं देता मैं चाहकर भी देवी पार्वती को ना रोक [संगीत] सकी पुत्र अपनी मां की जिज्ञासा तो शांत करो यह तो बताओ इतने समय से कहां थे तुम क्या कर रहे थे और रांत और देवात का कैसे किया तुमने तुम ने तो कहा था कि तुम लौटते ही मुझे सब कुछ विस्तार से बताओगे तो अब बताओ ना माता को अभी भी लगता है कि मैं उनका विनायक ही हूं उन्हें तो जैसे यह आभास ही नहीं है कि मैं गणेश के रूप में नया अवतार ले चुका हूं बोलो ना पुत्र शांत क्यों हो तुम्हारी मधुर वाणी सुनकर मेरे मन को शांति मिल जाएगी बताओ ना पुत्र अवश्य बताऊंगा क्यों नहीं बताऊंगा किंतु कथा सुनने के नियम के साथ जो आपने ही बनाए थे तो नियम यह है कि आपको भी मेरी गोद में सर रखकर उसी प्रकार विश्राम करना होगा जैसे आप मुझे अपनी गोद में लिटा करर कथा सुनाया करती थी मुझे ज्ञात है माता मेरे जाने के आप ठीक से सोई भी नहीं है इसलिए आज यह आपके पुत्र का सौभाग्य होगा कि मैं आपकी सेवा कर सकूं तभी वास्तव में तृप्त होंगा मैं किंतु पुत्र नहीं माता आप संकोच मत कीजिए आपने मेरा कितना दुलार किया है तो अब मेरा भी तो अधिकार बनता है आपकी सेवा का नहीं नहीं ऐसे नहीं माता पूरे स्वागत के साथ भीतर लाऊंगा आपको पहले कुछ पुष्प लाता हूं मुझे स्मरण है माता आपके प्रिय पुष्प कहां है पुत्र देखिए ना स्वामी मैं चाहती हूं कि मेरा विनायक एक पल के लिए भी मेरी आंखों से ओझल ना हो य व भाग रहा है वो आपकी ममता है देवी जो उसे अपने पास बिठाए रखना चाहती है और यह इसका माता के प्रति प्रेम है जो उसे आपके लिए कुछ विशेष करने के लिए प्रेरित कर रहा [संगीत] है [संगीत] पुत्र गणेश की दृष्टि मुझ पर पड़ेगी तो वह मेरी ओर खींचा चला [संगीत] आएगा [संगीत] मेरा पुत्र गणेश अपने पूर्व के अवतार की माता की सेवा में इतना लीन हो गया कि उसकी दृष्टि मुझ पर पड़ी ही [संगीत] नहीं माता माता देखिए मैं पुष्प ले आया देखिए माता यह पुष्प आपको प्रिय है [संगीत] [संगीत] ना अब आप भीतर प्रवेश कीजिए माता आइए ना [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] माता माता और पुत्र का संबंध तो जन्म जन्मांतर का होता है जो सुख माता की सेवा में है वह सुख और कहां अवतार कोई भी हो युग कोई भी हो गणेश पुत्र रूप में अपनी किसी भी माता की ममता को मुरझाने नहीं देगा [संगीत] [संगीत] कितनी भाग्यशाली होती है वह संतान जिन्हें अपनी माता की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त होता है गणेश तो परम भाग्यशाली है जिन्हे एक नहीं दो मांओं की सेवा करने का आनंद मिला है दोनों माताएं भी ऐसे पुत्र को धन्य मां के प्रति ऐसा अद्भुत समर्पण ऐसा अद्भुत प्रेम मां की ममता को सार्थक ही नहीं पूर्ण भी करता है मैंने उचित कहाना [संगीत] [प्रशंसा] प्रिय रुकिए माता पुत्र को अपना कर्तव्य निभाने दीजिए आइए माता आप इस शैया पर विश्राम कीजिए मैं पहले आपके चरण दबाकर आपकी थकान मिटांग और साथ में ही कथा भी सुनाऊंगा फिर शेष कथा आपका सर अपनी गोद में रखकर आपको सुलाते सुलाते सुना दूंगा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] माता मेरी प्रतीक्षा में आपकी थकी आंखें विश्राम करना चाहती है थोड़ी देर उन्हें बंद कर लीजिए मैं तो यही हूं कहीं नहीं जा रहा हूं अब जब तक आप अपने नेत्र बंद नहीं करेंगी मैं आगे की कथा नहीं सुनाऊंगा किंतु उसके लिए तुम्हें मेरे पास आकर बैठना होगा [संगीत] पुत्र [संगीत] बड़े से बड़े सत्कर्म की तुलना माता-पिता की सेवा जैसे पुण्य कर्म से नहीं की जा सकती
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