Friday, 2 January 2026

माता अन्नपूर्णा ने की बाल हनुमान की सहायता Ishant Sankat Mochan Mahabali Hanuman 320 Pen Bhakti

[संगीत] [संगीत] आ [संगीत] [प्रशंसा] [प्रशंसा] [हंसी] [संगीत] प्रणाम माता [संगीत] पार्वती प्रणाम माता कल्याण हो [संगीत] बु ऋषि मुनियों की सेवा इस सुहागन ग्रहणी का धर्म है [प्रशंसा] मुझे ज्ञात हुआ है कि यहां एक महान ऋषि और उनके शिष्यों के भोज का आयोजन [संगीत] है मैं भी उसमें सेवा दान देने उपस्थित हुई हूं ऋषिवर और उनके शिष्य भोजन की प्रतीक्षा कर रहे होंगे आरंभ करें माता जो भोजन हमने दुर्वासा ऋषि और उनके शिष्यों के लिए बनाया था वह दूषित हो चुका [संगीत] है हमारा सौभाग्य है कि आप ऋषियों की सेवा करने के इस पवित्र कार्य में हमारी सहायता करने आई किंतु हमारे पास ऋषियों को परोसने के लिए कुछ भी नहीं [संगीत] है निर्मल हृदय से लिया गया शुभ संकल्प अवश्य पूर्ण होता है आपको आपकी समस्या का समाधान अवश्य प्राप्त [संगीत] होगा प्रतीत होता है उस थाल में भी भोजन जो अभी तक शुद्ध और सा थाल को भगवान शिव के भोग के लिए मैंने स्वयं तैयार [संगीत] किया और उस सुरक्षित स्थान पर रख दिया तो विलंब मत [संगीत] कीजिए सर्वप्रथम भगवान शिव को उनका भोग प्रस्तुत कीजिए [संगीत] भगवान महादेव की कृपा से आपके संकट का निदान अवश्य [संगीत] होगा [संगीत] हाल यहां रखकर भगवान महादेव को उनका भोग अर्पित [प्रशंसा] [संगीत] कीजिए [संगीत] हे इन ग्रहणी का विश्वास सत्य हो हे कृपा निधान आपकी कृपा से ऋषि दुर्वासा और उनके शिष्यों को शुद्ध और पर्याप्त भोजन उपलब्ध मेरा हनुमान ऋषि दुर्वासा के रोश से सुरक्षित [संगीत] रहे इतना विलंब कहां है हनुमान मुझे और मेरे शिष्य को भोजन की इतनी प्रतीक्षा कभी नहीं करनी पड़ी गौर अनादर है ये मेरा क्षमा कीजिए ऋषिवर मेरी प्रार्थना है क्षणिक प्रतीक्षा और कीजिए हनुमान भगवान शिव को भोग समर्पित कर यथाशीघ्र ही आप सबके लिए भोजन प्रस्तुत [संगीत] करेगा हे प्रभु यदि सच्चे हृदय से मैंने आपकी भक्ति की है माता-पिता की सच्ची सेवा की है और सभी धर्म कर्तव्यों का पालन किया है तो प्रभु आज मेरी सहायता कीजिए ताकि कोई ऋषि गण हमारे यहां से अतृप्त होकर ना लौटे [संगीत] प्रभु [संगीत] हे प्रभु मेरा हनुमान ऋषि दुर्वासा की सेवा करने का अपना वचन पूर्ण कर [प्रशंसा] सके मेरे परिवार की लाज रह जाए हम पर अतिथि सत्कार के धर्म को खंडित करने का कलंक ना लग मेरे पुत्र को संकट छू भी ना पाए ऐसी कृपा कीजिए [संगीत] प्रभु हे प्रभु यह भोग स्वीकार कीजिए [संगीत] ओम नमो शिवाय नमो [प्रशंसा] नम नम शिवाय हमारे स्वामी भगवान महादेव ने इस थाल को स्वीकार कर इस थाल को अक्षय पात्र बना दिया [संगीत] है अब इस पर आवरण रखकर आप सबको भोजन परोस दीजिए भोजन में कोई कमी नहीं [संगीत] होगी मुझे ज्ञान है आप यही सोच रही है ना कि यह कैसे संभव होगा मुझे भय थाली भर भोजन से इतने लोगों का थाली भर भोजन नहीं स्वयं देवों के देव महादेव का प्रसाद है ये संपूर्ण सृष्टि जिनम समाई है उनकी शुदा तृप्त होने से यहां उपस्थित ऋषि और उनके शिष्य तो क्या संपूर्ण संसार की शुदा तृप्त हो जाती है आप शंका मत कीजिए आइए मेरे साथ भोजन परोस प्रारंभ [हंसी] [संगीत] कीजिए [संगीत] ज [संगीत] [संगीत] इतने विलंब के पश्चात बस एक थाल भोजन लेकर आया है हनुमान ऐसे तृप्त करेगा वो हम सबकी छुदाई प्रणाम [संगीत] ऋषिवर भक्ति सफल करे सब काज आशीष देत मा अन्नपूर्णा आज है बाधा पग पग पर हनुमत सेवा करे निरंतर वाली रावण खल है तत्पर दुर्वासा की सेवा दुष्कर कठिन पड़ी है यह परीक्षा कैसे पूर्ण करे ऋषि इच्छा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महा ह ऋषिवर विल के लिए क्षमा चाहता हूं अब आप भोजन ग्रहण करना आरंभ कीजिए और मेरे शिष्य हां ऋषिवर मैं सभी ष यो को भोजन देता [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] हूं [प्रशंसा] [हंसी] [प्रशंसा] [प्रशंसा] [संगीत] ब ब हो रहा हैल [संगीत] [संगीत] भोजन करना आरंभ कीजिए हनुमान तुम पर माता अन्नपूर्णा की कृपा दृष्टि है तुम अत्यंत भाग्यशाली [संगीत] हो [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] क [संगीत] विल बल बला बल बल बल बला बल बल ये तो अचंभे की बात इतना सारा भोजन कैसे हो गया उत्पन्न बल बला बल बल बल बला बल बल अति बल का झल हो गया सफल बल बला बल बल [प्रशंसा] हे माता हे प्रभु आपने अपने भक्त हनुमान की रक्षा की आपका बहुत-बहुत [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] धन्यवाद दशानन रावण बार-बार हमारे यत्न निष्फल कर मर्कट सुरक्षित कैसे बच जाता है हां महाराज बाली ऋषि दुर्वासा एवं उनके शिष्यों के लिए उसने भोजन प्रस्तुत करने का चमत्कार तो किया ही उसके पश्चात अपनी सेवा भाव से उन्हें मंत्र मुक्त भी कर [संगीत] लिया [संगीत] अब उस रात्रि की घटना लीजिए बल बला बल बल ऋषि दुर्वासा ने उसे जल लाने का आदेश दिया और जब जब वो जल लेकर लौटा बल बला बल बल तब ऋषि सो चुके थे और तब वो पूरी रात्री वही खरा रहा बल बला बल बल निश्चल [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] प्रणाम ऋषिवर यहां क्यों खड़े हो हनुमान क्या तुम संपूर्ण रात्रि यही थे ऋषिवर निद्रा मग्न होने से पूर्व आपको प्यास लगी थी [संगीत] तो मैं तब से यहां लेकर इसीलिए खड़ा हूं कि आपकी निंद्रा भंग ना हो आपको जल पीने की इच्छा हो तो आपको वह प्राप्त हो जाए तुम्हारा सेवा भाव तुम्हारी कर्तव्य निष्ठा अद्वितीय [संगीत] है तुम्हारा कल्याण हो [संगीत] पुत्र बल बला बल बल बल बला बल बल इतने कठोर एवं हटी दुर्वासा को भी उस हनुमान ने प्रभावित कर लिया ऐसा है उसके व्यक्तित्व का बल बल बला बल बल मेरे समक्ष मेरे परम शत्रु उस मर्कट का गुणगान गाने का दुस्साहस करोगे तुम अतिबल नहीं नहीं महाराज अतिबल उस मकद का गुणगान करने नहीं आपको एक अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना देने आया है जिससे आपका प्रयोजन सिद्ध हो सकता है फिर विलंब किस बात का है शीघ्र बताओ आज प्रात काल ऋषि दुर्वासा के समस्त शिष्य उनसे अनुरोध कर रहे थे कि वो हनुमान को कल्प वृक्ष की सुरक्षा के लिए नियुक्त कर दे तब बल बला बल बल महर्षि दुर्वासा ऋषि ने कठोरता से कहा हनुमान की कर्तव्य परायणता पर मुझे कोई संदेह नहीं है परंतु अब मुझे उसकी एक और परीक्षा लेनी है मैं जानना चाहता हूं कि उसमें असंभव को संभव बनाने की शक्ति है या नहीं प्रणाम ऋषिवर आपने मुझे बुलाया कहिए क्या आदेश है मेरे लिए व हनुमान मैं एक हवन का आयोजन करना चाहता हूं परंतु उसके लिए मुझे सप्त दीप की मिट्टी चाहिए आपकी कृपा से हनुमान यह कार्य शीघ्र पूर्ण करेगा ऋषिवर शीघ्र नहीं अति शीघ्र आज दिवस के मध्यान तक य कार संपन्न हो जाना चाहिए हनुमान जी ऋषिवर अर्थात ऋषि दुर्वासा के क्रोध को जागृत करने के लिए दिवस के मध्यान तक सप्त द्वीप की मिट्टी के साथ उस मर्कट हनुमान का सुमेरू लौटना असंभव बनाना [संगीत] होगा

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...