Tuesday, 6 January 2026

श्रीधर की भक्ति से माता रानी प्रसन्न थी Sumbul Romiit Vighnaharta Ganesh Episode 839 PenBhakti

माता रानी मुझ कृपा कीजिए माता रानी मेरी गुहार सुनिए मेरी ग सुनिए माता रानी मेरी भी गोद भर दीजिए [संगीत] माता सुलोचना कहां है आई तो अवश्य होगी किंतु दिखाई क्यों नहीं दे रही है मुझे आशीष दीजिए मा मेरा अभिमान हो कोई मुझे देखना अशुभ ना माने कृपा कीजिए मां कृपा कीजिए मुझ पर कृपा कीजिए माता मुझ पर कृपा कीजिए मुझ पर कृपा कीजिए [संगीत] माता रानी की जय बोलो शेरावाली माता की जय साचे दरबार की [संगीत] जय आहा हाहा आनंद ही आनंद आ गया नैन सुख जी धन्यवाद धन्यवाद सेठ जी अब आगे से श्रीधर जी से ही पाठ करवाइए कितना मधुर स्वर है इनका हां हां सब कुछ मेरा ही सिखाया हुआ है अन्यथा श्रीधर को आता ही क्या [संगीत] है [संगीत] यह लीजिए पंडित जी आप ही अपने शुभ हाथों से प्रसाद बांट [संगीत] दीजिए अपना स्थान भी नहीं संभाल सके पिताजी घर चलिए मां आपको सिखाएगी और मैं आनंद लूंगा भाग्यवान प्रसाद तो ग्रहण करो तू भी ले बेटा बापू हम तो प्रसाद ले लिए लेकिन प्रसाद आपको भी घर पर मिलेगा वो भी विशेष प्रसाद प्रसाद लेने के लिए तैयार है ना नान सुख जी चलो लला घर में मिलते [संगीत] बा यह लीजिए श्रीधर जी आप संभावना प्राप्त कीजिए यह भी लीजिए वरिष्ठ पंडित मैं हूं और संभावना इसे मिल रही है वाह श्रीधर मुझको छोटा दिखाकर खुद को बड़ा ना चाहते हो सब समझ रहा हूं मैं मैं तो आपका सम्मान करता हूं आप मेरे वरिष्ठ वरिष्ठ वरिष्ठ तो ऐसे बोल रहा है जैसे अपशब्द बोल रहा है वरिष्ठ को गिराने में समय नहीं लगाया तुमने समय बीता जा रहा था सब देख रहे थे मुझे लगा आप मंत्र भूल गए इसीलिए आपकी सहायता के लिए क्या कहा तुमने सहायता सहायता तुमने अपने लिए की है मुझको छोटा दिखा करके बड़ी संभावना प्राप्त की ना तुमने यही तो चाहते थे [संगीत] तुम जय माता की जय माता [संगीत] दी जय माता की जय माता दी देखो अब ये संभावना बाट करके मुझे नीचा दिखाना चाहते हो सुख जी इसमें क्या है श्रीधर तो ऐसा प्रतिदिन करता है एक दिन का भोजन रखता है अपने लिए और भाभी सुलोचना के लिए बाकी सब बांट देता है इसमें कोई महान बात नहीं है माता रानी की कृपा से मिली दान दक्षिणा मैं उन्हीं के भक्तों को दे देता हूं हां तुम तो बांट सकते हो क्योंकि बचाने का कोई लाभ भी तो होना चाहिए अरे बचाना तो उनको पड़ता है जिनकी कोई संतान होती है भरा पूरा परिवार होता है तुम्हारे तो ना कोई आगे है और ना कोई पीछे तुम तो कुछ भी कर सकते [संगीत] [प्रशंसा] हो सुलोचना सुलोचना देवी सुलोचना आज आप क्यों नहीं आई आज पता है मुझे हि सब पाठ करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ हां इसी कारण नयन सुख जी बहुत अपसंद थे आप रो रही [संगीत] थी सब कुशल तो है सुलोचना आ धम केगी उसकी कोई संतान भी नहीं है तो शुभ कार्य में मैं उसके साथ क्यों जाऊं जब भी उसका मुंह देख लेती हूं तो कोई कार्य सफल ही नहीं [संगीत] होता जिसे संतान का सुख प्राप्त नहीं वो शुभ कार्यों में भला कैसे भाग ले सकती [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] यह कैसा विचार है भक्ति करना हमारा कर्तव्य है और फल देना माता का माता रानी की लीला कौन जानता है वो कब हम पर कृपा करेंगे संभावना नहीं तो भोजन भी नहीं आज रात्र आप भूखे ही सोएंगे भूखे पेट निद्रा भी कैसे आएगी मुझे [संगीत] मेरे इस कष्ट का कारण दुष्ट श्रीधर है आनंद ही आनंद आ गया नन जी अब आगे से श्रीधर जी से ही पाठ करवाइए कितना मधुर स्वर है इनका आज तुमने जो कार्य किया है ना श्रीधर उसका परिणाम तुम्हें अतिशीघ्र भुगतना पड़ेगा माता के दरबार में देर हो सकती है अंधेर नहीं जो हुआ है और जो होगा सभी में माता की इच्छा नियत [संगीत] है संभव है हमें अभी कुछ अत्यंत महत्त्वपूर्ण कर्तव्यों का निर्वहन करना हो और तभी संतान की प्राप्ति [संगीत] होगी बस माता रानी पर विश्वास रखिए माता भक्त श्रीधर को आप पर अटूट श्रद्धा है और उसके साथ वह अपनी पत्नी के विश्वास को भी खंडित नहीं होने देगा माता महान है उन दोनों की भक्ति और उनका विश्वास और इसी विश्वास के कारण वह मेरे प्रथम चमत्कार का अनुभव करने वाला है किंतु गणेश जी अब क्या होने वाला था भक्त श्रीधर के साथ एक बहुत बड़ा चमत्कार कैसा चमत्कार प्रभु माता क्या आप भक्त श्रीधर को अपने दर्शन का सौभाग्य देने जा रही [संगीत] हैं सर्व मंगल मांगल सर भगवान को पाने का एक ही मार्ग है सच्ची भक्ति और जब एक भक्त अपने भगवान की भक्ति में रम जाता है तो फिर उसके भगवान उससे दूर कैसे रह सकते हैं अब श्रीधर को भी उसकी भक्ति का फल शीख मिलने वाला है प्रणाम माता [संगीत] रानी भूखे पेट भक्ति में कैसे ध्यान लगे ओम सूर्याय नमः ओम सूर्याय नमः ओ स न सुख के नैन चल रहे हैं तुम्हें देखकर श्रीधर जितना भूख से मैं तड़पा हूं और तुम्हें भी उतना ही तड़पना होगा ओम सूर्याय नम ओम सूर्याय नमः ओम सूर्याय [संगीत] नमः ज मा य क्रोध में जल रहा हूं और य मुस्कुरा रहा [संगीत] है जय माता की जानता प्रता का का मुझे नी दिखाया जय माता की सूर्यदेव उधर हैं तो नयन सुख चल किसे अर्पित कर रहे हैं नयन भटक रहे हैं नयन सुख जी दिशा गलत है तो दशा भी गलत ही रहेगी आपकी चलो मैं ही इस जल बहाव का लाभ उठा [संगीत] लू तु अधिक दिन प्रसन्न नहीं रह सकोगे श्रीधर मेरे अपमान का परिणाम तुम्ह भुगतना ही पड़ेगा बुद्धि कम है तो अधिक प्रयोग मत कीजिए ना जी कहीं आपका मस्तिक इस जल कलश के समर ली ना हो जाए जल कलश तो जल से रिक्त हो गया और यह दुष्ट इसने मुझे बताया तक नहीं ू घेरा डाल कर के बैठे हैं मुझ पर एक वो घर के बाहर और एक ये दुष्ट घर के [संगीत] भीतर [संगीत] प्रेय तुम इतनी उदास क्यों बैठी हो आज अभी तक एक भी नौता नहीं आया ना पूजा पाठ के लिए ना ही जागरण के लिए और यदि आए भी तो कल की घटना के बाद नैनसुख भैया आपको तो नहीं ले जाएंगे ना नैन सुख अपने नैन खोलकर विचार करो कोई उपाय करो उसे अपनी टोली से बाहर करने का हां बाहर ही जाइए आप भोजन करने क्योंकि आपको इस घर में तो भोजन मिलने से रहा आपसे अच्छा तो उस निसंतान सुलोचना का पति श्रीधर है आप भोजन तभी पाएंगे जब अपने पाठ में सुधार [संगीत] करेंगे कुछ तो करना ही होगा आज मेरी पत्नी उसे मुझसे श्रेष्ठ मान रही है तो कल पूरा संसार मानेगा नहीं नहीं नन सुख ऐसा कदापि नहीं हो सकता कदापि नहीं चलो ये माना तो सही कि श्रीधर काका आपसे श्रेष्ठ है चुप जरा सोचने दे मुझे नयन सुख जी आपके सुख के दिन गए ना ही आप स्वास भीतर ले सकते हैं ना ही बाहर छोड़ सकते हैं क्योंकि श्रीधर काका को आपने निकाला तो गांव वाले आपको मन से निकाल देंगे लेकिन अगर ना निकाला तो आपको पता ही है क्या होगा मां धमका कर डराती है और यह पुत्र काला भविष्य दिखाकर अब तो कुछ जोड़ तोड़ करना ही पड़ेगा कुछ तो खिचड़ी पकानी ही पड़ेगी लला ला भैया आए हैं बाहर आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं अच्छा है ना भाग्यवान किसी की पूजा पाठ का आया होगा [संगीत] ना कुछ भी हो जाए श्रीधर को साथ नहीं ले जाऊंगा यदि नैनसुख भैया साथ लेकर नहीं गए तो हम खाएंगे क्या बचत हम करते नहीं प्रतिदिन संभावना में जो मिलता है उसी से हमारी रसोई चलती है चिंता मत करो पिए कर्म करना मेरा कर्तव्य है मैं से पीछे नहीं हटूंगा शेष सा मा पर छोड़ दूंगा वो स्वयं देखेंगी मुझे संभावना कैसे और कहां से मिलेगी माता भक्त श्रीधर ने तो अपनी सभी चिंताएं आपी पर छोड़ दी है मनुष्य का अधिकार कर्म और कर्तव्य निभाने का है वही फल का अधिकार भगवान का होता है उचित कर रहा है श्रीधर इतनी भर क्या क देने के लिए आ गए हो एक दुविधा है पंडित जी कैसी दुविधा दो स्थानों से नते आए हैं आज माता के जागरण के लिए अब किसे स्वीकार करूं हमारा नियम क्या है पहला नता जहां से आता है हम वही जाएंगे अर्थात अर्थात आप मेरे यहां आएंगे जो स्वयं दूसरो के दान पर पलती है वो भला क्या संभावना देगी इसके यहां गए तो खाली हाथ ही लौटना होगा पंडित जी न्योता पहले कौन लाया है इससे क्या अंतर पड़ता है अंतर तो इस बात से पड़ता है कि न्योता लाया कौन है क्यों पंडित जी आप तो समझदार हैं और ज्ञानी भी सेठ जी उचित कह रहे हैं पंडित जी और वैसे भी सेठ जी समय-समय पर माता की सेवा में पूजा पाठ जगराता करवाते रहते हैं आप विचार कर लीजिए अवसर है बहुत बड़ा अवसर है माता की सेवा का हां मेरे यहां आएंगे तो सब पाएंगे सेवा कर उचित मेवा पाएंगे धन धान्य फल आदि सब मिलेगा आपको आपकी पूजा को देख मेरे मन में भी माता का जगराता कराने की इच्छा उत्पन्न हुई बस मृत्यु से पहले मेरी य इच्छा पूर्ण हो जाए क इस वृद्धा की आस है पंडित जी इच्छाओं के लिए साधन है तुम्हारे पास नहीं ना केवल बोल देने से नहीं होगा तुम्हारे सामर्थ्य से बाहर है माता का जगराता उसका स्वप्न देखना छोड़ दो जाओ अपने घर जाओ निर्धन लगती है ये वृद्धा पर पता नहीं कितना धन छुपा के रखा है एक बार पूछ तो लो ब्रद माता आपके वहां संभावना में क्या मिलने की संभावना है क्योंकि अगर वो नहीं मिली तो आपको पूजा का पुण्य प्राप्त नहीं होगा आपके प्रश्नों का उत्तर तो इनके शांत रहने से मिल ही गया किंतु अब मेरे प्रश्नों का उत्तर दीजिए क्या आपको मेरा निता स्वीकार है हा हा हा सेठ जी हम अवश्य आएंगे किंतु नियम भंग करना उचित नहीं है प्रथम निमंत्रण जहां से आया है हमें वहां जाना चाहिए जगराता का अधिकार वृद्ध माता को है हमें इनकी अंतिम इच्छा पूरी करनी चाहिए मैं आपसे गुहार लगाती हूं मेरे घर में माता का जगराता रा के मेरी य इच्छा पूर्ण कीजिए पंडित जी नन सुख जी आपको वृद्ध माता का नता स्वीकार करना चाहिए बहुत उदार बनने का दिखावा कर रहे हो ना तुम अब देखो कैसे मैं तुम्हें तुम्हारे इस उदारता के जाल में उलझा [संगीत] हूं ईर्ष्या और लालच व्यक्ति की सुंदरता को नष्ट कर देते हैं

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...