होने वाला था गणेश जी तो क्या हनुमान जी भैरव को समझा कर उसे सुधारने के लिए प्रेरित करने वाले थे क्या दोनों ने एक युद्ध होने वाला था झींगरी जिज्ञासा को बढ़नी जा रही है बताइए ना प्रभु फिर क्या हुआ भक्ति और भगवान की ऐसी अनोखी कथा सुनकर भक्ति का भाव तो जगन ही था तो इसका अर्थ ये है की स्वामी अब कहानी नहीं जाएंगे पाप और दोष के कारक भगवान नहीं अपितु प्राणी स्वयं होता है इसीलिए ईश्वर को इसका उत्तरदाई नहीं मानना चाहिए क्योंकि जब कोई अधर्मी व्यक्ति बुरे कर्म करता है तो पाप और दंड का भाग बंता है फिर भी ईश्वर उन्हें सुधारने का अवसर देते हैं यही माता वैष्णवी चाहती थी और वही हनुमान जी कर रहे थे भैरव को अवसर दे रहे थे कौन है तुम्हारे सामने पहचानो उन्हें महाशक्ति है वह तुम जिससे युद्ध करने के लिए उतावले हो रहे हो भैरव ज्वालामुखी के मुख में प्रवेश क्यों करना चाहते हो तुम जो स्वयं ज्वालामुखी हो जिसकी तपाग्नि से धरती थर्राटी हो उसके क्रोध के अलावा का स्पर्श मंत्र किसी को भी भस्म कर सकता है बुद्धिमानी इसी में है की मेरे मार्ग से है जो अन्यथा परिणाम तुम्हें ज्ञात कर रहा है मैं तो प्रभु श्री राम भक्ति हनुमान हो हनुमान कोई भी वानर स्वयं को हनुमान पुकारेगा और मैं मां लूंगा [संगीत] इसलिए तुम शक्ति को समझो और अपने भीतर के अहंकारी रावण को मटकर माता की दिव्यता को पहचानो तुम उनकी शरण में जो तुम्हारा उधर होगा लक्ष्मी माता सरस्वती और माता दुर्गा [संगीत] [संगीत] [संगीत] करने में सक्षम बनती है [संगीत] [संगीत] मैं तुम्हारी अद्भुत भक्ति देख भाव विभोर हूं श्रीधर भैरव आशा है की तुम समझ गए होंगे और अपनी भूल सुधार कर प्रायश्चित करना ही एकमात्र उपाय शेष है तुम्हारे लिए सब समझ गया मैं उचित है फिर यहां तो मेरा कार्य संपन्न हुआ [संगीत] संपन्न है अलौकिक अब तक बस इतना ही समझा था मैंने किंतु अब समझ में आया की वह अति विशेष है [संगीत] और जैसा आपने कहा उससे तो लगता है सर्वोच्च शक्ति पर संसार आधारित और यदि वह सर्वोच्च शक्ति है अति विशेष है तब तो मुझे किसी भी व्यवस्था में पीछे नहीं हटाना चाहिए मैं अपने अधीन कर ही अपनी साधना संपन्न करनी चाहिए क्योंकि शक्ति को अपने अधीन कर सिद्ध करूंगा अपनी साधना को कोई मूर्ख ही होगा जो अब पीछे हटेगा अब शक्ति को अपने अधीन कर ही वापस यहां से जाऊंगा [संगीत] विनाश कल विपरीत बुद्धि शक्ति के लालच ने तुम्हारी दृष्टि और बुद्धि दोनों हर लिए तुम्हारे सोने समझना की शक्ति छन ली है और यह समझ नहीं का रहे हो तुम जो माता के सामने शीश झुकते हैं शक्ति का वरदान भी वही प्राप्त करते हैं और जो अपने अहंकार का मुकुट पहनकर माता के सामने धर्म के पद पर बढ़ते हैं उनका अहंकारी जाता है ना तुम्हारी माता वैष्णव देवी के आगे देता है शक्तिशाली को दुर्बल बना देता है और निरंतर स्वयं सर्वनाश की और बढ़ता जाता है [संगीत] जय श्री राम [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] दूंगा इसका दंड अवश्य दूंगा दंड के पत्र तो तुम बन रहे हो भैरू किंतु उसकी आवश्यकता नहीं तुम अभी भी दूसरा चुनाव कर सकते हो माता की भक्ति में जो शक्ति है वह और कहानी नहीं ओम श्री वैष्णवी नमः ओम श्री वैष्णवी नमः ओम श्री वैष्णवी नमः [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] इस प्रकार भैरव बार-बार हनुमान जी पर वार करता जा रहा था और हनुमान जी हर बार उसे बार को ताल रहे थे और इसी तरह यह युद्ध कई प्रहार तक चला जिसका अंत किसी को दिखाई नहीं दे रहा था हनुमान जी के समक्ष इतनी डर टीका कैसे उसकी शक्ति का स्रोत क्या था भैरव तांत्रिक सड़क था तंत्र मंत्र की साधना का अभ्यस्त और ऐसे ही निकॉन वर्षों तंत्र की साधना कर भैरव ने स्वयं को इतना शक्तिशाली बना लिया था इसलिए हनुमान जी की वार भी सा का रहा था वो किंतु इन सब से पैर माता का ध्यान तो अपने परम भक्ति श्रीधर पर था जिसकी भक्ति से एक और चमत्कार होने वाला था और भैरव एक और भूल करने जा रहा था [संगीत] [संगीत] मुझे और उसका क्या उत्तर देना है वह भी मुझे छिपा नहीं है हा [संगीत] प्यास ग रही है किंतु यहां तो दूर-दूर तक [संगीत] अब और प्रतीक्षा नहीं नहीं यह मेरा भविष्य नहीं हो सकता कहां [प्रशंसा] जय तथा भावना तेरा अद्भुत है आपके लीला मां भक्ति को प्यास लगी थी तो मैन तो नदी ही भा दी [संगीत] इनको गणेश जी महाबली हनुमान को उनके बाल और वीरता के लिए विख्यात का यह युद्ध उन्हें थक कैसे सकता था तूने प्यार ग गई माता की लीला से कुछ भी संभव है हनुमान जी का थकना एवं उनका प्याज लगा माता की लीला के लिए अनिवार्य था [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] माता इस नदी का बहन तो आपके बहते केशन के समाज है भक्ति के लिए इस नदी को उत्पन्न करने हेतु बाल गंगा के नाम से पुकार जाएगा [संगीत] जय माता दी जय माता दी [संगीत] जय माता रानी की जय माता रानी माता का आशीर्वाद तो वही पता है जो उसे पन चाहता है [संगीत] यह दोनों ही अपने पाठ पर अधिक हेमा किंतु मां पृथ्वी और आकाश का भेज दे दोनों में एक और भक्ति के सागर में डूबा श्रीधर है तो दूसरी और यह भैरव यह अधिक है [संगीत] तो आप इसे इतने अवसर क्यों दे रहे हैं माता यदि आपकी इच्छा हो तो मंत्र आप अपनी दृष्टि से ही इसका वध कर शक्ति हैं माता यदि आप मुझे आजा दें तो मैं अभी इसका अंत कर देता हूं नहीं श्री राम भक्ति हनुमान की झलकियां तो दिखाई दे रही थी किंतु वो रुक नहीं रहा अर्थात उसका अंत निकट है किंतु अभी नहीं है [संगीत] [संगीत] [संगीत] एक को दानदाता करते [संगीत] श्री राम तपस्या में लिंग रहूंगी तब तक आपका आदेश ही तो मेरा कर्तव्य है आप निश्चित होकर तपस्या कीजिए मैं भैरव को आपके निकट नहीं पहुंचने दूंगा उसे तो मैं रॉक कर रखूंगा धन्यवाद श्री राम भक्ति हनुमान जी किंतु ऐसा कभी तक संभव है जब तक उसका विनाश कल नहीं [संगीत] प्राप्त होती है जो अहंकार और लालच का त्याग कर केवल भक्ति का मार्ग चुनते हैं
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