Tuesday, 6 January 2026

श्री हरी की भक्ति Hitanshu Jinsi Gagan Malik Vighnaharta Ganesh Ep 775 Pen Bhakti

[संगीत] श्री हरि अभी भी हरि का नाम जप रहे हो जिन्हें तुम पर तनिक भी दया नहीं आई ना भिक्षा मिली ना कोई सुख मिला तो बस एक फल और अब तो वह भी नष्ट हो चुका है भक्त तो बस भक्ति करना जानता है ब्राह्मण देवता वह मेरा धर्म है और धर्म और भक्ति में स्वार्थ नहीं देखा जाता मैं तो बस हरि भक्त हूं उनको ही जानता हूं और उनको ही मानता हूं प्रभु हरि पर इतना विश्वास है तो प्रभु का वह व्रत क्यों नहीं रखते जिससे सुख और समृद्धि प्राप्त होती [संगीत] है ब्राह्मण देवता तुम मुझे उस व्रत की विधि बताइए ना सुख और समृद्धि से अधिक मैं भक्ति का लाभ पाना चाहता हूं इसलिए मैं प्रभु का व्रत अवश्य रखूंगा और फिर मुझे उन ब्राह्मण देवता ने सत्यनारायण कथा और व्रत के बारे में बताया उसकी संपूर्ण विधि का ज्ञान दिया और यह सुनते ही मैंने बिना कुछ सोचे बचारे यह संकल्प ले लिया मैं संकल्प लेता हूं मैं कल ही श्री सत्यनारायण का व्रत [संगीत] करूंगा प्रण तो ले लिया तुमने किंतु भोग की सामग्री कहां से [संगीत] लाओगे ब्राह्मण देवता आपका प्रश्न तो उचित है अपने बालकों का पेट भरने के लिए मैं पर्याप्त भोजन तो जुटा नहीं सका तो व्रत की सामग्री कैसे जुटा हंगा वो भी उसकी विधि के अनुसार सवाया मात्रा में पूर्ण विषम जो अत्यंत शुभ [संगीत] है मुझे अपने प्रभु पर पूर्ण विश्वास है यदि उन्होंने संकल्प की प्रेरणा दी है तो मेरे प्रभु श्री हरि नारायण उस संकल्प को पूर्ण करने में मेरे सहायक भी बनेंगे तो प्रभु ने अब तक तुम्हारी सहायता क्यों नहीं की मुझे तो लगता है तुम्हें अपने प्रभु पर कुछ अधिक ही विश्वास है प्रभु श्री हरि पर विश्वास रखिए स्वामी य जो हमारे जीवन की डोर उ के हाथ में तो वही इन कष्टों को दूर करने का कोई उपाय अवश्य निकालेंगे विश्वास तो पूर्णता में ही होता है अन्यथा वह अविश्वास हो जाता है ब्राह्मण देवता आपने ही मुझे इस व्रत का ज्ञान दिया है इसलिए सबसे पहले मैं आपको ही उसके लिए आमंत्रित करता हूं निकट ही एक काल पीपल वृक्ष है उसके पीछे मेरी कुटिया है कल ही पूजा का आयोजन होगा आप आने की कृपा अवश्य करें श्री हरि श्री हरि श्री हरि श्री हरि झोली भी खाली है दिन भी समाप्त होने को है किंतु हृदय भक्ति और विश्वास से भरा है ऐसे परम भक्त को निराश होने की आवश्यकता नहीं है हरि ओम नारायण हरि भिक्षम देही भिक्षम देही [संगीत] मेरी आश जगाने के लिए आपको कोटी कोटि धन्यवाद [संगीत] प्रभु हरि ओम नारायण हरि ओम जय नारायण ह हरि ओम नारायण हरि स्वामी जय दिनानाथ हरि सुर नर मुनि सब ध्या सकल कल्याण करे ओम जय नारायण हरे मेघ वर्ण तुम सुंदर पीतांबर राजे स्वामी पीतांबर राजे कमल नयन चतुरा न हाथ चक्र साजे ओम जय नारायण [संगीत] हरे अब तो मेरे बालकों को भर पेट भोजन मिलेगा श्री हरि श्री [संगीत] हरि ये अब परीक्षा की घड़ी है शतानंद देखना यह है कि क्या अब भी तुम अपने संकल्प पर स्थिर रह पाते हो या नहीं हरि ओम नारायण [संगीत] हरि [संगीत] मेरी झोली भरी है आज इन्हें भर पेट भोजन [संगीत] मिलेगा किंतु मेरा संकल्प भी तो है जब भोजन नहीं रहता था तब तो यह संतोष कर लेते थे किंतु अब जब मेरे पास पर्याप्त भोजन है तो मैं इनसे कैसे कहूंगा कि इनके पिता ने तो कल श्री सत्यनारायण व्रत का संकल्प है अब मैं क्या करूं इनका पेट भरू या अपना संकल्प पूरा करो मैं भी तो यही देखना चाहता हूं अब तुम्हारा विश्वास रहेगा या तुम्हारा [संगीत] स्वार्थ [संगीत] यहां कैलाश में सभी दिशाओं में शुभता ही शुभता है श्री सत्यनारायण कथा दिव्यता का ही विस्तार कर रही है किसी संकट का कोई संकेत नहीं फिर भी मेरा हृदय शांत नहीं जैसे यह शांति किसी बवंडर से पहले की शांति हो ऐसा आभास हो रहा है [संगीत] [संगीत] मुझे अभी तक मुझे कोई निमंत्रण नहीं मिला या महादेव के इस परिवार उनकी इस पुत्री का कोई महत्व नहीं [संगीत] सूर्यदेव अपने दिन की यात्रा के चरम पर है कैलाश में पूजा कब की आरंभ हो चुकी होगी फिर भी मुझे लेने कोई नहीं आया अर्थात किसी को भी मेरा स्मरण नहीं रहा धर्मो चित निर्णय लेने वाले ही धर्मा कहलाते किंतु यहां तो सतानंद के बालकों का प्रश्न था इस पर उनका मन तो बड़ा विचलित हुआ होगा तो क्या किया उन्होंने क्या वह अनन अपने बालकों की भूख मिटाने के लिए उन्हें दे दिया अथवा श्री सत्यनारायण की कथा के लिए उसे बजा कर रखा आपने उचित कहा देव सेनापति मैं दुविधा की अवस्था में था और अपने द्वार परत खड़ा रह [संगीत] गया ये इतनी आशा से मेरी प्रतीक्षा करते हैं मैं कभी इनके लिए पर्याप्त भोजन नहीं जुटा पाता फिर भी फिर भी यह कभी मुझे दोष नहीं देते अब क्या कहूंगा इनसे कैसे कहूंगा कि मेरी झोली भरी है किंतु अभी अभी एक दिन और इन्हें भूखा रहना है कल कल श्री सत्यनारायण पूजा के भोग के उपरांत ही ने भोजन प्राप्त [संगीत] होगा ईश्वर अवसर देते हैं उनका लाभ उठाना अपनी भक्ति को और तपाक निखार भक्त पर निर्भर है जो अब शतानंद को भी करना है पिताजी आ गए पिताजी आ [संगीत] [संगीत] गए आज भी कुछ नहीं मिला इसीलिए इतने विचलित है स्वामी स्वामी आप थक चुके हैं कुछ देर विश्राम कर लीजिए आपकी पत्नी और बालक भूख को सहना सीख चुके हैं भोजन के लिए हम और प्रतीक्षा कर लेंगे हां पिताजी आप तनक भी चिंता मत कीजिए हां स्वामी आपने कल प्रभु को भी तो जल भोग ही चढ़ाया था ना तो क्या हम अपनी भूख जल से नहीं भर सकते आप चिंता मत कीजिए मैं अभी कुए से शीतल जल भर कर ले आती हूं पिताजी आप थक गए होंगे भीतर चल तो थोड़ा विश्राम कर लीजिए आज मेरी झोली खाली नहीं है इसमें भोजन की सामग्री है किंतु किंतु किंतु क्या पिताजी मैंने प्रभु श्री सत्यनारायण की पूजा और व्रत का संकल्प लिया है और इस पूजा में प्रभु को सब सवा शेर की मात्रा में ही चढ़ाया जाता है इसलिए आज मुझे जो भी मिला है उससे हम भरपेट भोजन कर सकते हैं या फिर यह भोजन कल प्रभु का प्रसाद [संगीत] बनेगा पिताजी तो इसमें चिंता की क्या बात है आपका संकल्प भी तो हम सबका संकल्प है ना हा स्वामी और भला प्रभु को भोग चढ़ाए बिना हम कैसे भोजन ग्रहण कर सकते हैं हां हा वैसे भी पूजा में बना पकवान और प्रसाद तो बहुत स्वादिष्ट होता है हा बहुत आनंद आएगा यह भक्ति और यह संस्कार अति उत्तम है जब पूजा की तैयारी होगी तो हमें भूख क लगेगी पिताश्री और भोर होती मैं पुष्प लेने चली जाऊंगी और जब मां प्रसाद बना रही होगी तब मैं पूजा का स्थान और घर स्वच कर दूंगी फिर मैं क्या [संगीत] करूंगा तुम तो सब सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य करोगे मेरे पुत्र तुम मेरी पूजा में मेरी सहायता [संगीत] [संगीत] करोगे ऐसी भक्ति ऐसी श्रद्धा इसका पुण्य प्रसाद क्या होगा इतना सुंदर परिवार है इस ब्राह्मण का इनके भाग्य में तो सुख और समृद्धि दोनों होने चाहिए जो कठिनाइयों का सामना करते हुए भी अपने प्रभु पर अडिग विश्वास और आस्था रखे वह भक्ति का ही नहीं भगवान का भी सत्य प्रमाणित करता है प्रणाम आइए [संगीत] [प्रशंसा] प्रणाम और सभी अतिथि तो आ गए किंतु ब्राह्मण देवता अभी तक नहीं [संगीत] पहुंचे कंचना भावरा भयम पद्म धरा मुकुट उज्वला स्मर मुखी शिव पत्नी का स्वागत है ब्रा देवता स्वागत है य आसन ग्रहण कीजिए सता पदम हस्ता कात्यान सुते नमोस्तुते परमान पदम देवी परब्रह्म परमात्मा परम शक्ति परम भक्ति कात्यायन सुति नमोस्तुते पूजा समाप्त होने पर भोग प्रसाद तो प्राप्त होगा मन भर कर [संगीत] खाऊंगा आरती [संगीत] कीजिए ओम जय नारायण हरे स्वामी जय दिनानाथ हरे सुर नर मुनि सब ध्यावे सकल कल्याण करे ओम जय नारायण हरि मेघ वर्ण तुम सुंदर पीतांबर राजे स्वामी पीतांबर राजे एक बार प्रेम से बोलिए श्री सत्यनारायण भगवान की [संगीत] जय पूजा संपन्न हुई अब आप सभी दर्शन और प्रसाद ग्रहण [संगीत] करें भूख भी लगी है और साथ खाने का भी मन [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] है शतानंद प्रसाद बांटना आवश्यक है किंतु अपने बालकों को प्रसाद खिलाना भी उनके लिए कुछ नहीं बचाओगे ब्राह्मण देवता प्रभु का प्रसाद तो प्रभु की कृपा के समान है जो बाटने से ही बढ़ती है फिर आप ही का आदेश था व्रत के आरंभ की कथा के बाद सबको प्रसाद बांटने से ही व्रत और पूजा पूर्ण होंगे और फिर अतिथि तो भगवान होते हैं तो भगवान भूखे रहे और भक्त भोजन करें ये कैसे संभव है आप चिंता ना करें हमारे भाग्य में जो भी होगा वो प्रभु श्री सत्यनारायण की कृपा से हमें अवश्य [संगीत] मिलेगा [संगीत] यह लीजिए ब्राह्मण देवता यह प्रसाद आप ग्रहण [संगीत] कीजिए संकोच मत कीजिए इस पर आप ही का अधिकार है अवश्य किंतु अकेले प्रसाद ग्रहण करना उचित नहीं आप सब भी मेरे साथ प्रसाद ग्रहण कीजिए करते ब्राह्मण देवता किंतु अब जो प्रसाद शेष है वह हम सभी के लिए कहां पर्याप्त होगा क्यों क्यों नहीं जो भोग आपने भगवान को समर्पित किया था वह तो अब भी वही [संगीत] है हरे हरे हरे [संगीत] हरे परमात्मा सर्वेश्वर प्राण पति मेरे स्वामी प्राण पति मेरे अपने हस्त बढ़ाओ आस में हूं [संगीत] ते हे प्रभु यह अवश्य आपका ही चमत्कार है क्या हुआ शतानंद जी आप तो मुझे संकोच करने से रोक रहे थे तो स्वयं संकोच क्यों कर रहे हैं आप सभी लोग प्रसाद ग्रहण करें [संगीत] उस दिन हमें कोई कमी नहीं हुई प्रभु की कृपा जो थी हम पर पूरे परिवार ने भर पेट भोजन ग्रहण किया लंबे समय के बाद हमारा परिवार तृप्त हुआ भरपेट भोजन के पश्चात तो निद्रा भी अच्छी आती है सुदामा जी है ना हां प्रभु किंतु मेरे मन में केवल एक ही इच्छा थी धन स्वर्ण बहुमूल्य वस्त्र मुझे इन सब में कोई रुचि नहीं है मैं तो बस अपने परिवार को भर पेट भोजन कराना चाहता हूं मेरा परिवार भूखा ना रहे निश्चित होकर सो सके बस इतनी ही इच्छा है [संगीत] मेरी वर्षा होने को है यदि जल टपका तो सब जाग जाएंगे [संगीत] [संगीत] यह वातायन भी बंद कर देता [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] हूं ये क्या ब्राह्मण अभी भी य है ब्राह्मण देवता आप अभी भी यही है प्रसाद ग्रहण करने के बाद मैंने सोचा कुछ परल यहां विश्राम कर लू और फिर वर्षा हो गई ब्राह्मण देवता यदि आपको कठिनाई ना हो तो आज रात आप हमारी कुटिया में विश्राम कर लीजिए मैं अधिक सुविधा तो नहीं दे सकूंगा किंतु जो भी मेरे वश में होगा मैं अवश्य करूंगा अतिथि कष्ट में हो तो मैं कैसे सो सकता [संगीत] [प्रशंसा] हूं स्वागत है स्वागत है ब्राह्मण देवता आइए आइए आइए ब्राह्मण [संगीत] देवता आइए आइए ब्राह्मण देवता आइए [संगीत] आइए [संगीत] आप चिंता मत कीजिए ब्राह्मण देवता अब मेरे प्रभु मेरे घर आ गए हैं तो भला दरिद्रता कहां टिक सकती है उसका मिटना तो तय है सत्य कहा आपने प्रभु सत्यनारायण के व्रत और उनकी कथा की अपार महिमा है प्रभु में निष्ठा का परिणाम अवश्य मिलता है आइए प्रभु नहीं नहीं इसकी आवश्यकता नहीं है मैं आपके परिवार को कष्ट में नहीं डालना चाहता मैं तो बाहर उस चबूतरे पर सो जाऊ जहां आपने पूजा की [संगीत] थी मेरे लिए तो उतना ही पर्याप्त है नहीं नहीं ब्राह्मण देवता ऐसा कैसे हो सकता है हम बाहर सोएंगे आप यहां विश्राम कीजिए आइए ब्राह्मण देवता नहीं नहीं मुझे तो अपने सर पर केवल एक छत चाहिए थी वो मुझे मिल गई और आपके परिवार को मैं कठिनाई में डालकर कहां विश्राम कर पाऊंगा [संगीत] मैं बाहर विश्राम कर [संगीत] लूंगा और वैसे भी वर्षा थम ही चुकी है उचित है उचित [संगीत] है [संगीत] आइए आइए ब्राह्मण देवता [संगीत] आइए आप यहां विश्राम [संगीत] कीजिए ब्राह्मण देवता ने मुझे बाहर सोने से रोका है किंतु मैं उनकी सेवा तो कर ही सकता हूं [संगीत] आप सभी यहीं विश्राम कीजिए मैं अतिथि को पंखा झल देता [संगीत] हूं चलो विश्राम करते [संगीत] हैं ब्राह्मण देवता आपके आदेश का पालन मैं अवश्य करूंगा किंतु पंखा लकर अपनी सेवा करने से मुझे ना रोके जब तक आपको निद्रा नहीं आ जाती मैं यही पंखा लता रहूंगा नहीं आपको भी सोना चाहिए मैं अवश्य विश्राम करूंगा यदि आप सो जाएंगे तो मैं भी सो [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] जाऊंगा [संगीत] श्री सत्यनारायण भगवान की जय राधा जब मेरी आंख खुली तो मैंने पाया ब्राह्मण देवता वहां नहीं [प्रशंसा] [संगीत] थे ये नया कैसे हो गया [संगीत] प्रभु यह आप ही की कृपा है ओम जय नारायण हरि स्वामी जयनाथ ह चमत्कार देखो चमत्कार हो गया कर प्रभु चमत्कार [संगीत] प्रभु [संगीत] प्रभु मुझे ऐसा आभास क्यों हो रहा है जैसे कुछ अधूरा रह गया हो एक पहर और प्रतीक्षा करूंगी मैं यदि तब भी कोई मुझे लेने नहीं आया तो मैं सु स्वयं जाऊंगी वहां पर पूछूंगी सबसे कि मैंने ऐसा कौन सा दोष किया है जिसके कारण एक पुत्री का ऐसा तिरस्कार किया गया एक पुत्री का ऐसा तिरस्कार किया [प्रशंसा] गया अच्छे व्यक्तियों की ईश्वर बहुत परीक्षा लेते हैं

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