[संगीत] किस विचार में मग्न हो हनुमान ओहो समझ गया तुम यही सोच रहे हो ना कि तुमने तो मेरे पिता श्री को किष्किंदा के राज सिंहासन पर पुनः स्थापित कर दिया था तो फिर मैं यहां कैसे आसीन हूं हनुमान मेरे महानतम वाली को मात्र इसी सिंहासन पर नहीं अपितु समस्त वन राज्यों पर अपना वर्चस्व स्थापित करने का अधिकार है जब भी मेरी इच्छा होगी मैं अपनी शक्ति से समस्त वनस के सिंहासन पर स्वयं को स्थापित कर लूंगा और ऐसा करने से मुझे कोई रोक भी नहीं सकता तुम भी नहीं वाली भैया हनुमान को इस समय सुग्रीव भैया की ही चिंता है कृपया बता दीजिए कि वह कहां है हां ज्ञात है मुझे तुम्हे अपने सुग्रीव भैया से बहुत प्रेम है ना वाली भैया आप हनुमान से बड़े हैं हनुमान आपका आदर करता है वाली भैया यदि बड़े कुछ अनुचित कर्म करें तो उनको रोकना हम छोटों का भी कर्तव्य है वाली भैया इस समय आप मेरी बात को नहीं समझेंगे मैं यथा संभव प्रयास करूंगा कि मैं सुग्रीव भैया की रक्षा कर पाऊ हनुमान आपसे विनम्र आग्रह करता है कृपया बता दीजिए सुग्रीव भैया कहां है वह सुरक्षित तो है अपने सुग्रीव भैया को तुम तो सुरक्षित नहीं रख पाए हनुमान तुम्हारा सुरक्षा चक्र भी व्यर्थ हो गया परंतु महानतम वाली के पास पूर्णता सुरक्षित है वाली भैया मेरी सुग्रीव भैया से भेंट करवा दीजिए मैं स्वयं अपने नेत्रों से उन्हें देखना चाहता हूं [संगीत] हां क्यों नहीं इतने अधीर हो ना तुम अपने सुग्रीव भैया से मिलने के लिए पाली तुम्हें उससे अवश्य मिलवा चलो मेरे साथ सुग्रीव भैया सुग्रीव भैया कहां है आप क है सुग भया सकुशल तो है धैर्य रखो हनुमान अपने सुग्रीव भैया से मिलने के लिए इतने व्यग्र क्यों हो रहे हो तुम अभी दर्शन हो जाएंगे तुम्हें उनके वाली भैया शीघ्र बताइए ना मुझे उनकी चिंता हो रही है बताइए ना कहां है वो [संगीत] देखो उस दर्पण को देखो [संगीत] हनुमान हनुमान शुक हनुमान हनुमान तुम यहां क्यों आ गए बाली भैया मेरे साथ तुम्हारा भी अनिष्ट करेंगे मुझे इस मायावी दर्पण में बंधक बनाने का उनका कारण यही है मैं कैसे नहीं आता सुग्रीव भैया आपकी कठिनाई दूर करना हनुमान का कर्तव्य है पिता श्री ने आपकी रक्षा करने का वचन दिया है और उस वचन को पूर्ण करने का मैंने प्रण लिया है वचन दिया है काका केसरी ने हा [संगीत] कोकटूमा मैं अपना राज मुकुट रख दूंगा किंतु सुग्रीव को कुछ नहीं होने दूंगा परंतु जब तुम अपने वचन को अपने ही राज्य सुमेरू में ही नहीं पूर्ण कर सके तो फिर यहां महानतम वाली के किष्किंदा के राज्य में कैसे निभाओगे उसे वाली भैया मैं सुग्रीव भैया को यहां से शीघ्र ही मुक्त कराकर अपने साथ सुमेरू ले जाऊंगा ओ इतना विश्वास है तुम्हें स्वयं पर तो ठीक है प्रयास करके देख लो मुक्त करा लो अपने प्रिय सुग्रीव भैया को [संगीत] नहीं हनुमान नहीं हनुमान हनुमान क्या हुआ हनुमान इस दर्पण को देख के इतने विचलित क्यों हो गए तुम जाओ प्रवेश करो इसमें और रक्षा करो अपने प्रिय सुग्रीव भैया की परंतु उससे पूर्व इतना जान लो कि तुम अपनी वरदानी शक्तियों से इसके भीतर प्रवेश नहीं कर सकते आसुरी शक्तियों से उत्पन्न मायावी दर्पण है ये जिसमें मैंने तुम्हारे प्रिय सुग्रीव भैया को बंधक बना के रखा [संगीत] है नहीं [संगीत] हनुमान सुग्री भया हनुमान यदि तुम हो तो पुनः प्रयास कर सकते हो परंतु इतना स्मरण रखना कि जितनी शक्ति से तुम इस दर्पण से टकरा होगे उतनी ही पीड़ा होगी सुग्रीव को और यदि तुमने अपनी शक्ति से इस दर्पण को तोड़ दिया तो उसके साथ ही सुग्रीव भी अपने प्राणों से वंचित हो जाएगा ली भैया वाली भैया आप ऐसा क्यों कह रहे हैं सुग्रीव भैया को मुक्त कर दीजिए मैं आपसे विनती करता हूं अवश्य मुक्त कर दूंगा परंतु मुझे उसके लिए तुम्हारी विनती नहीं कुछ और चाहिए माली भैया जो आपको चाहिए वह मैं आपको दूंगा परंतु आप सुग्रीव भैया का हित मत कीजिए तो ठीक है यदि तुम मुझसे द्वंद युद्ध करके मुझे पराजित कर दोगे तो मैं सुग्रीव भैया को मुक्त कर दूंगा अन्यथा वो मेरा बंदे रहेगा बोलो करोगे मुझसे युद्ध तुम्हें युद्ध करना ही होगा इसके अतिरिक्त और कोई विकल्प शेष ही नहीं है तुम्हारे पास नहीं हनुमान हनुमान ऐसा मत करना बाली भैया पुनः तुम्हारे साथ छल कर रहे हैं मेरे साथ आहित होने की चिंता से तुम चलत मत होना प्राण चले जाए हनुमान पर इनके साथ युद्ध मत करना ऐसा करने से तुम्हारी आदि शक्ति इनमें पूर्ण रूप से समाहित हो जाएगी और तुम्हारा उन्हें पराजित करना असंभव हो जाएगा हनुमान मर कट मत सुनो उसकी बात मेरी युद्ध की चुनौती स्वीकार करो और अपने प्रिय सुग्रीव भैया को मेरे इस मायावी दर्पण के बंधन से मुक्त कराकर उनके जीवन की रक्षा करो बाली पुत्र वाली बाली तुमने पुत्र सुग्रीव को इस दर्पण में क्यों बंधक बना के रखा है [संगीत] तुम्हारी मां तुमसे अपने पुत्र से तुम्हारे भाई के जीवन की भिक्षा मांग रही है उसे मुक्त कर दो बाली कोई मां नहीं है मेरी जि क्ण आपने मेरे ऊपर उस सुग्रीव का चुनाव कर लिया था उसी क्षण मैंने निश्चय कर लिया था कि मेरी मां नहीं रही बा मात्र त गरीब की मां है मां यह तुम्हारे विवेक को क्या हो गया है पुत्र वाली अपनी मां के पवित्र स्नेह का अपमान कर रहे हो तुम शांत काका केसरी जी आप महाराजा नहीं है यहां मेरे राज्य में खड़े हैं आप और यहां बिना अनुमति के आपको कुछ भी कहने की छूट नहीं है बस बाली बस राज सिंहासन से लगाओ तो वो मैंने तुम्हें सौप दिया किंतु तुम मर्यादाओं की समस्त सीमाओं का उल्लंघन कर रहे हो राज धर्म का निर्वाह ऐसे नहीं होता पुत्र रस्सी जल गई परंतु ठन ना गई इस प्रकार मेरी अवज्ञा कर आप यह भूल रहे हैं पिता श्री कि आपको पुनः कारावास ना भेजकर मैंने आप पर दया की है परंतु यदि आपने महानतम वाली के साथ दृष्ट करने का दुस्साहस किया तो आपको पुन बंदी बनाने में मुझे तनिक भी संकोच नहीं होगा भाली भैया यह आप जो कह रहे हैं व अनुचित है बड़ों का अनादर मत कीजिए अनादर बड़ों का कर रहा हूं मैं और करता रहूंगा परंतु यदि तुम चाहो तो मुझे ऐसा करने से रो सकते हो बोलो करोगे मुझसे युद्ध यही एक मात्र मार्ग उपलब्ध है तुम्हारे पास जिससे तुम सुग्रीव की भी रक्षा कर सकते हो और मुझे अपने बड़ों का अनादर करने से रोक सकते हो बोलो करोगे मुझसे युद्ध मुझे ज्ञात था तुम मुझसे युद्ध करने में सक्षम ही नहीं हो जाओ [संगीत] हनुमान जाओ ओझल हो जाओ मेरी दृष्टि से और अपनी बुद्धि से सु गरीब की रक्षा करने का विचार भी ओझल कर दो भूल जाओ कि वोह यहां इस मायावी बंधन में बंदी है उसकी मृत्यु तो अब निश्चित है और यदि मैंने स्वयं इसको खंडित नहीं किया तो जल और भोजन के अभाव से वो शीघ्र ही काल का ग्रास बनेगा [संगीत] [संगीत] [संगीत] कोकटूमा मैंने तो यह भी सुना था कि काका केसरी जी ने प्रण लिया था कि यदि वह सुग्रीव की रक्षा नहीं कर सके तो वह स्वयं अपने हाथों से अपना यह राज बुकुट उतार कर मेरे चरणों में रख देंगे इसी क्षण की प्रतीक्षा थी महानतम वाली को तो विलंब मत कीजिए उतारिए अपना राज मुकुट अपने मस्तक से और उसे रख दीजिए य महानतम वाली के चरणों में कोक य आओ जी महाराज ले जाओ इन सबको कारागार में और बंद कर दो काका केसरी जी आप तो अपने वचन पर सद स्थिर रहते हैं ना तो फिर इतना सोच विचार क्यों कर रहे हैं आप सुमेरू के राज मुकुट पर आपका कोई अधिकार नहीं है तो फिर उतारिए उसे और रख दीजिए उसे मेरे चरणों पर हां हां आगे बढ़ी है आगे बढ़ी काका केसरी जी प्रतीत होता है जैसे दोनों पिता पुत्र को सर्प सूंघ गया हो क्या हुआ आपको विश्वास नहीं हो रहा है कि आपके पुत्र हनुमान ने मेरे समक्ष घुटने टेक दिए हैं यदि आपका पुत्र मुझसे युद्ध नहीं करेगा तो आपका वचन तो व्यर्थ हो गया अब आप मुझसे सुग्रीव की रक्षा नहीं कर सकते तो फिर इतना संकोच क्यों कर रहे हैं आप उतारिए अपना राज मुकुट अन्यथा मैं पकट से भी यह कार्य करवा सकता हूं यदि आपके हाथों की शक्ति क्षीण हो गई है तो मैं कोकटूमा को आपके मस्तक से उतार दे यह अब आपको शोभा नहीं देता बस बस बस बस बस वाली भैया रुक जाइए आपने हनुमान के समक्ष कोई विकल्प नहीं छोड़ा इसीलिए हनुमान आपसे युद्ध करने के लिए प्रस्तुत है आपसे यु करने के लिए प्रस्तुत है आपसे युद्ध करने के लिए प्रस्तुत है
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