[संगीत] [संगीत] मित्रों तुम सब खाओ मैं सुग्रीव भैया के पास होकर आता हूं अभी नहीं बस लड्डू की एक थाल और फिर तुम चले जाना सुग्रीव भैया के पास अच्छा ठीक [संगीत] है अरे यह क्या हो रहा है हम निरंतर लड्डू बनाते जा रहे हैं और लड्डू की थाली बढ़ ही नहीं रही [संगीत] है कहीं हनुमान तो [संगीत] नहीं किंतु हनुमान तो इधर है ही [संगीत] नहीं मेरे भाई बहुत बड़ी भूल हो गई है मुझसे बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी मेरी जो मैंने किसी और के कहने पर अपने ही अनुज को इतनी पीड़ा दी लज्जित हू मैं अपने कृत पर नहीं नहीं सुख दृष्टि भी नहीं मिला पाऊंगा मैं तुमसे ना मैं भाई कहलाने के योग्य रहा और ना ही पुत्र इन पापी हाथों से मैंने अपने ही पिता श्री को बंदी गृह में डालकर बंदी बना दिया अपनी मां को इतना दुख पहुंचाया महापाप है ये हाथ इन्हीं हाथों से मैंने तुम पर वार किया है ऐसे हाथों को तो नष्ट ही हो जाना चाहिए ऐसे हाथों का तो नष्ट हो जाना ही अच्छा है भैया ऐसा मत करिए भैया इन्हीं हाथों ने तो मुझे स्नेह दिया है कितने संकटों से बचाया है मुझे नहीं सुग्रीव नहीं मेरी करनी ने मुझे अकेला कर दिया है बहुत अकेला कर दिया है मुझे सुग्रीव मेरा भाई मेरी माता मेरे पिता श्री सबके होते हुए भी कोई नहीं है मेरे साथ ऐसे जीवन से तो मृत्यु अच्छी है नहीं भैया ऐसा मत कहिए भैया सत्ता के लोभ का आवरण पड़ गया था मेरे नेत्रों पर कौन मित्र है कौन शत्रु कौन अपना है कौन पराया इन सब का भेद ही नहीं कर पा रहे थे मेरे नेत्र लंकेश जैसे राक्षस राज को अपना हिद श मान बैठा मैं और हनुमान जैसे सबके संकट हरने वाले को अपना शत्रु और परिणाम देखो पूर्णत खाकी हो गया हूं मैं सुग्रीव मुझे अपने हृदय से लगाकर मेरे अश्रु पोच कर संतप्त हृदय की पीड़ा कम करने वाला कोई नहीं है सुग्रीव कोई नहीं बचा आज बस भैया बस [संगीत] यदि सत्य में आपका हृदय परिवर्तन हो गया है तो भैया मैं क्या हम सभी आपके साथ हैं भैया कौन हो तुम तु मेरे वाली भैया नहीं हो मैं जो भी हूं तुम्हें तुम्हारे वाली भैया के पास ही ले जाने आया हूं तुम मुझे इस प्रकार यहां से नहीं लेकर जा सकते मैं असुर शिल्पी मा का पुत्र मायावी हूं मायावी की माया से कोई पार ना पाया मायावी मायावी को कोई कुछ भी करने से रोक नहीं सकता तुम्हारा वोह हितेश वानर भी नहीं मां ं यह क्या हुआ अच्छा तो अब तुमने अदृश्य होना भी सीख लिया है मां अदृश्य होने का क्या लाभ आपने तो फिर भी हनुमान को पकड़ लिया मां मां हूं मैं तुम्हारी पुत्र अदृश्य हो या कहीं छुपा हुआ हो मां को उसकी उपस्थिति का ज्ञात हो ही जाता [संगीत] है और मैं तुमसे पहले भी कह चुकी हूं ना अपनी दिव्य शक्तियों का प्रयोग तभी किया करो जब बड़ी आवश्यकता हो ऐसी क्रीड़ा के लिए नहीं पुत्र अच्छा अच्छा ठीक है अब कान तो छोड़िए माता मन अंतर अखियानी सुत कर लीला वह पहचानी दे उपदेश सजग जग हीता राम काज लगी शक्ति पुनीता करत मारुती क्षमा याचना लीलाधर की सुहावन महिमा ज देखे यह पावन लीला माता भावन जग प्रिय सीला नई शक्ति क्या मिली तुम्हारे उपद्रव आरंभ हो गए मां क्षमा कर दीजिए ना हनुमान ने यह अपने मित्रों के लिए किया अच्छा अच्छा इस बार तो छोड़ देती हूं पुनः ऐसा किया तो कड़ा दंड दूंगी अच्छा आप अपने हनुमान को दंड देंगी अपने पुत्र को दंड देंगी मां हनुमान हनुमान मैंने [संगीत] रु मां कुछ लड्डू तो दे दीजिए हा सुग्रीव भैया को भी भूख लगी होगी [संगीत] ना चलो मुझ महानतम वाली के अनुज चलो तुम मुझे इस प्रकार बलपूर्वक ले जाने का प्रयास मत करो तुम्हारा परिचय अभी तक हनुमान के साथ हुआ नहीं है यदि मैंने उसे पुकार लिया और वह यहां आ गया तो तुम यहां से जा भी नहीं पाओगे तुम्ह मुझसे वो वानर भी नहीं बचा सकता चलो अच्छा हनुमान हनुमान हनुमान चलो हनुमान सुग्रीव भैया पुकार रहे हैं हनुमान अवश्य वो किसी संकट में होंगे उस वानर कहने से पूर्व मैं तुम्हे यहां से लेकर चला जाऊंगा माया भी की माया कोई पार नहीं पाया सुग्रीव भैया सुग्रीव भैया सुग्री भैया सुग्रीव भैया सुग्रीव भैया कहां चले गए सुग्रीव भैया मैं उन्हें अभी तो यहां छोड़कर गया था विचित्र बात है कहां गया सुगरी धरती में समा गया या वायु में विलीन हो गया सुगरी उसका तो कोई चिन्ह तक नहीं दिखाई दे रहा कहा है मेरा पुत्र क है मेरा पुत्र सुग्रीव हनुमान तुमने तो उसकी रक्षा का दायित्व लिया था ना सुग्रीव की सुरक्षा का उत्तरदायित्व मैं लेता हूं अत मेरे जीवित रहते सुग्रीव का कोई अत नहीं कर पाएगा और पिता श्री के वचन की रक्षा करने के लिए हनुमान कोई भी संकट का सामना करने के लिए प्रस्तुत है और सूर्यदेव की शक्ति का सुरक्षा कवच भी बनाया था उसके चारों [संगीत] ओर तोर व कहा जा सकता है महारानी मां यही तो मैं भी सोच रहा हूं मेरा यह बनाया गया सुरक्षा चक्र तो अभेद्य है सुग्रीव भैया की स्वेच्छा के बिना उन्हें कोई यहां से बाहर नहीं ले जा [संगीत] सकता फिर वह कहां चले गए मायावी मायावी की माया कोई पार ना [संगीत] पाया हनुमान मैं तुम्हारे सुरक्षा चक्र के भीतर नहीं जा सकता था तो मैंने अपने असुरी शल से सुग्रीव को बाहर आने के लिए वाद्य कर दिया अब वो मेरा बंदी है सुग्री मायावी कहां ले जा रहे हो मेरे भैया सुग्रीव को किष्किंदा और कहां महाराज वाली के पास यदि सुग्रीव को जीवित देखना चाहते हो तो महाराज वाली के पास आकर क्षमा याचना करो वो सुग्रीव पर दया कर इसे प्राण दंड ना दे [संगीत] सुग्रीव महारानी मां मुझे क्षमा कर दीजिए यदि मुझे उस आसुरी छल का तनिक सा भी आभास होता तो मैं सुग्रीव भैया को एक क्षण के लिए भी एकाग छोड़कर नहीं जाता और तब वसर मेरे सुरक्षा चक्र से सुग्रीव भैया को कदा भी बाहर नहीं निकाल पाता परंतु अब मैं क्या [संगीत] कर इतनी अभागिन मा हूं [संगीत] मैं मेरा एक पुत्र दूसरे पुत्र के साथ शत्रु वत व्यवहार करके उसके प्राण हरना चाहता [प्रशंसा] [संगीत] है और वाली ने कहा था कि वो सुग्रीव को जीवित नहीं रहने देगा यदि उसे नहीं रोका गया तो अवश्य ही व सुग्रीव का सहार कर देगा हनुमान अब कैसे रक्षित होगा सुग्रीव कैसे रक्षित होगा चिंता मत कीजिए महारानी जी सुग्रीव को कुछ नहीं होगा महारानी अंजना आप तो स्वयं एक मां है आप मेरा और एक मां का दुख समझ सकती है जब सुग्रीव हनुमान द्वारा बनाए गए सुरक्षा चक्र में सुरक्षित नहीं रह सका महा मालि के क्रोध से उसकी रक्षा कौन करेगा महारानी महाराज केसरी जी ने वचन दिया था मुझे कि यहां मेरे पुत्र को किसी प्रकार की कोई हानि नहीं होगी गरीब की सुरक्षा का उत्तरदायित्व मैं लेता हूं मैं वाली के चरणों में अपना राज मुकुट रख दूंगा किंतु सुग्रीव को कुछ नहीं होने दूंगा आप तो जानती ही है कि वानर राजा अपने प्राण त्याग देगा किंतु अपना मुकुट किसी के चरणों में नहीं रखेगा अतः मेरे जीवित रहते सु गरीब का कोई त नहीं कर [संगीत] पाएगा खंडित हो गया मेरा विश्वास इतनी कड़ी सुरक्षा को भेद करर फसर मेरे पुत्र को यहां से ले गया हनुमान तुम तो संकट मोचन हो सबके संकट रते हो किंतु तुम भी मेरे पुत्र अपने अग्रज समान सुग्रीव को सब कुशल नहीं रख पाए भंग हो गया महाराज केसरी जी का वचन महारानी मां हनुमान आपको विश्वास दिलाता है कि सुग्रीव भैया को कोई क्षति नहीं पहुंचेगी हनुमान अभी किष्किंदा जाकर सुग्रीव भैया को सुरक्षित लौटा लाएगा नहीं हनुमान मैं तुहे बाली के पास जाने की आज्ञा नहीं दे सक बाली की बुद्धि पूर्णत भ्रष्ट हो चुकी सारे संसार तुम संकट मोचन हो हनुमान किंतु इस मां के लिए तु मात्र उसके लाल हो मुझे तुम्हें स्वयं को संकट में डालने से रोकने का अधिक मां मुझ पर विश्वास कर पिता श्री ने महारानी मां को सुग्रीव भैया की सुरक्षा का वचन दिया था हनुमान इस विश्वास को कैसे झुट सकता है परंतु हनुमान सुग्रीव की रक्षा करने का क्या और कोई मार्ग नहीं है मां यदि कोई और मार्ग होता तो हनुमान आपकी आज्ञा मानकर अवश्य रुक जाता परंतु यदि आज मैं नहीं गया तो सुग्रीव भैया के प्राण संकट में पड़ जाएंगे आपकी आज्ञा के बिना हनुमान कुछ नहीं करेगा मां आप मेरा विश्वास कीजिए मां संकट कैसा भी हो मां परंतु जो उचित है धर्म उचित है उसका साथ देने के लिए संकटों से संघर्ष कर उन पर विजय पाने की शक्ति मुझे आपसे ही प्राप्त होती है मां जब मां का आशीर्वाद साथ है तो आपका यह पुत्र कैसे असफल हो सकता [संगीत] है हनुमान को आशीर्वाद दीजिए मां कि मैं शीघ्र ही सुग्रीव भैया के साथ आपके पास लौट आऊ [संगीत] प्रणाम [संगीत] माता प्रणाम नानी [संगीत] हे प्रभु पुत्र हनुमान और पुत्र सुग्रीव की रक्षा कीजिए अवश्य वाली हनुमान को क्ति पहुंचाने की चेष्टा करेगा मुझे उसको लेकर भी उतनी ही चिंता हो रही है जितनी सुग्रीव को लेकर पता नहीं वाली के कु विचार उसको क्या करने के लिए प्रेरित कर दे मेरा हृदय भावी अनिष्ट की कल्पना से आतंकित असुरों की शक्ति प्राप्त बाली की शक्तियां और भी बढ़ [संगीत] गई मां संभव है कि वहां हनुमान को हमारी सहायता की आवश्यकता हो हमें भी केसरी जी को लेकर यथाशीघ्र किष्किंदा की ओर प्रस्थान करना [संगीत] चाहिए मैं इतनी स्वार्थी कैसे हो गई उत्र मो में विवश होकर मैं ये क्या कर बैठी युद्ध की अवस्था में हनुमान वाली का वध नहीं करेगा इस वचन से बांधकर मैंने हनुमान को वाली के समक्ष भेजकर हनुमान के जीवन को एक बड़े संकट में डाल दिया
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