Tuesday, 6 January 2026

सुग्रीव ने वानर सेना को क्या आदेश दिया था Sankat Mochan Mahabali Hanuman 368 Pen Bhakti

[संगीत] [संगीत] प्रभु प्रभु प्रभु प्रभु हनुमान आइए प्रभु चलिए [संगीत] आइए [संगीत] प्रणाम प्रणाम महाराज यह वानर भालू आदि करोड़ों की संख्या में हनुमान तुम्हारी एक श ध्वनि के आहवान पर इतने वानर भालू आदि ये तो अद्भुत है प्रभु हनुमान तो मात्र माध्यम है इन असंख्य वानरों और भालु को एकत्रित करने का श्रेय तो भ्राता सुग्रीव को है यह सब यहां अपने महाबली राजा सुग्रीव से मिलने एकत्रित हुए हैं इन्हीं के अधीनस्थ है यह सब प्रभु मेरे अधीनस्थ यह विशाल वानर भालू समूह अब आपके अधीनस्थ [संगीत] है लंकेश रावण ने सीता माता को कहीं भी छुपाया हो किंतु अब संसार की कोई भी शक्ति हमें उन्हें ढूंढने से नहीं रोक पाएगी [संगीत] जय श्रीम श्रीम कल्पना से भी परे है यह सब राम भैया काका महाराज हमारे विभिन्न क्षेत्रों के समस्त वानर प्रमुख एवं बड़े योद्धा यहां आपके समक्ष उपस्थित [संगीत] हैं मेरे प्रिय वानर योद्धाओं हमारे मित्र प्रभु श्री राम की अर्धांगिनी माता सीता का उस दुष्ट रावण ने छल से हरण कर लिया है उस मायावी राक्षस ने माता सीता को किसी अज्ञात स्थान पर छुपा कर रखा हुआ है अतः हम सबका कर्तव्य है कि हम उन्हें ढूंढने में प्रभु श्री राम की सहायता करें वरो तुम्हारे अधिपति सुग्रीव का आदेश है तुम सबको चारों दिशाओं में फैल [संगीत] जाओ संसार में ऐसा कोई स्थान ना बचे जहां तक तुम सब में से कोई पहुंच ना पाए एक माह का समय है तुम्हारे पास ढूंढो माता सीता को एक माह के अंत तक यदि तुम सब माता सीता को ढूंढने में असमर्थ रहे तो मैं तुम सबको मृत्यु दंड दूंगा मृत्युदंड यह क्या कह रहे हैं महाराज सुग्रीव वानर प्रमुख महाबली विनता तुम अपने वीर वानरों के साथ उस दिशा में जाओगे जहां से प्रतिदिन मेरे पिता सूर्यदेव अपनी यात्रा आरंभ करते हैं अर्थात पूर्व दिशा में आपकी आज्ञा का सहर्ष पालन होगा महाराज नगर हो वन हो बीहड़ हो या सरिता हमारी दृष्टि से कोई नहीं बच पाएगा संपूर्ण क्षेत्र में भली भाति ढूंढकर एक माह के भीतर लौटाए हम प्रणाम महाराज श्री रामम चलो मेरे वीर वानरों हमें सीता माता का पता लगाना है जय श्री राम जय श्री रामम जय श्री राम श्री राम जय श्री राम ज जय श्री रामम मेरे शसुर श्री महाबली वानर राज सुषेण जी आज्ञा दे महाराज सुग्रीव आप योद्धा चि शमान और अचर माल के साथ वीर वानरों को लेकर मेरे पिता सूर्यदेव के [संगीत] अस्थांकिंड नरका सुर का क्षेत्र [संगीत] है किंतु आप सबको उसे भयभीत होने की कोई आवश्यकता नहीं है रावण उस असुर की सहायता से सीता माता को वहां भी चुपा सकता है अत वहां का कोना कोना देख डालिए ऐसा ही होगा महाराज सुग्रीव हमारा सौभाग्य होगा यदि हम देवी सीता के बारे में ज्ञात कर सके आज्ञा दीजिए महाराज जय श्री रामम श्रम जय श्रीराम शीराम श्रम मुझे उत्तर दिशा में स्थित दिव्य तपोभूमि हिमालय क्षेत्र में जाने के लिए कोई वीर और समर्थ योद्धा चाहिए जो हिम क्षेत्र के दुर्गम स्थल पर जाकर माता सीता के बारे में ज्ञात कर सके काका श्री कदाचित रावण उत्तर दिशा में नहीं गया होगा क्योंकि प्रभु श्री राम ने उस क्षेत्र को पहले ही असुरों और राक्षसों से विहीन कर दिया है अंगत निसंदेह प्रभु ने उत्तर दिशा के असुरों का अंत कर दिया है किंतु असुरों की मायावी शक्ति और छल कपट हमारी कल्पना से भी परे है और माया में तो रावण सर्वोत्कृष्ट है इसीलिए हमें पूर्ण सजगता और सतर्कता के साथ हर दिशा में माता सीता के बारे में ज्ञात करना चाहिए हां अंगत मायावी राक्षस कहीं भी कुछ भी कर सकते हैं तो वे रेच योद्धा शत बली उत्तर का दायित्व आप संभालेंगे मेरा सौभाग्य है कि इस अभियान में मैं अपना योगदान दे पा रहा हूं मैं हिमालय पर्वत के शिखर तक जाकर भी एक माह के भीतर माता को ढूढ कर [संगीत] लाऊंगा जय श्री राम श्री राम श्री राम जय श्री [संगीत] राम युवराज अंगद आज्ञा दीजिए काका महाराज सुग्रीव दक्षण दिशा के तीनों सागरों से घिरी भूमि का उत्तरदायित्व मैं तुम्हें सपता हूं रावण के दक्षिण दिशा की ओर जाने की सर्वाधिक संभावना है अतः मेरी तुमसे सर्वाधिक आशा रहेगी जाकर दक्षिण क्षेत्र के सूक्ष्म से सूक्ष्म भाग में सीता माता को ढूंढो एक माह के भीतर कार्य को संपन्न करके लौटना है तुम्हें किंतु स्मरण रहे असफलता का अर्थ है मृत्यु दंड मृत्यु दंड मृत्यु दंड मृत्युदंड काका महाराज असफल नहीं काका श्री आपके प्रभु श्री राम जी के आशीर्वाद से सफल होकर ही लौटूंगा [संगीत] अंगद मैं तुम्हें अपने सर्वश्रेष्ठ पांच योद्धा प्रदान करता हूं अतुलित शौर्य संपन्न गंध मादन उलका मुख अनंग विश्वकर्मा एवं अग्निपुत्र नल और नील और यही नहीं ब्रह्मदेव के पुत्र महाबली एवं नीति निपुण जाम वंज भी तुम्हारे साथ [संगीत] होंगे और तुम्हारे साथ होंगे मेरे सबसे प्रिय मित्र मेरे हित चिंतक हम सबसे महान वानर कुल के गौरव महा ज्ञानी महाबली हनुमान हनुमान [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] हनुमान [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] महाराज काका श्री जब आपका वरद हस्त हो प्रभु श्री राम जी की कृपा हो अनेक शूरवीर योद्धाओं और महाबली हनुमान जी का साथ हो तो सफलता तो अवश्य ही प्राप्त होगी मुझे आशीर्वाद दीजिए आशीष दीजिए [संगीत] प्रभु जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम श्री राम जय श्री राम ज श्रीराम श्रम श्रीम ज श्र श्रीम जय श्री राम चले हनुमान जी प्रभु जय हनुमान जय श्री राम [संगीत] महा बली हनुमान जय हनुमान जय रघुवर राम जय हनुमान जय रघुवर राम जय हनुमान जय रघुवर राम प्रभु श्रीम जय हनुमान प्रभु श्री राम जय हनुमान प्रभु श्री राम जय हनुमान प्रभु श्री राम जय हनुमान राम बिना हनुमान अधूरे हनुमान बिना श्री राम प्रभु श्री राम जय हनुमान आज्ञा दीजिए भ्राता लक्ष्मण जय हनुमान [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] ध [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] क्या हुआ हनुमान जी रुक क्यों [संगीत] गए [संगीत] प्रभु कुछ विशेष बात है हनुमान तो निसंकोच [संगीत] कहो प्रभु यदि हम माता सीता तक पहुंच गए तो उन्हें कैसे विश्वास होगा कि आप ही के आदेश पर हम उन्हें ढूंढने आए हैं और आपके दूत हैं [संगीत] हम तुम्हारी विवेक शलता प्रशंसनीय हनुमान जहां विवेक और बल एक साथ हो वहां तो सफलता निश्चित ही [संगीत] है ये लो ह [संगीत] मेरी यह मुद्रिका जब तुम देवी सीता से मिलोगे तो इसे देखकर व शीघ्र पहचान जाएंगे और उन्हें विश्वास हो जाएगा कि मैंने ही तुम्हें भेजा है [संगीत] जब तुम सीता से मिलो तो उन्हें बताना कि उनके बिना राम अथरे है [संगीत] और राम शीख री उन्हें रावण से मुक्त कराने आएंगे हां [संगीत] प्रभु [संगीत] मैं शीघ्र विश्वास दिलाता हूं माता सीता [संगीत] को [संगीत] प्रणाम प्रभु मैं शीघ्र ही माता सीता के बारे में ज्ञात करके आऊंगा [संगीत] [संगीत] प्रभु [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] [संगीत] स [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] ज इतने दिवस हो गए चारों ओ वानर सेना फैल चुकी है किंतु अभी तक माता सीता के बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं हुआ है ना जाने माता सीता कहां होंगी किस दशा में [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] होंगी [संगीत] बहुत ही निर्जन स्थान है यह यहां मनुष्य तो क्या एक पक्षी एक जीवधारी तक दिखाई नहीं दे रहा है यहां यहां कहां मिलेंगी सीता माता हा नल भैया भूख भी बहुत लग रही है अब किंतु यहां भोजन तो दूर जल की बूंद भी दिखा नहीं दे रही है कहीं सच कहा गंद मादन कितने दिनों से यूं ही भूखे प्यासे भटक रहे हैं हम ऐसे हम और कितने दिनों तक ढूंढ पाएंगे हम माता सीता को किंतु हम बीच में ही ढूंढना तो नहीं रो सकते ना मित्रों एक माह के भीतर ही हमें यह कार्य पूर्ण करना है अन्यथा हमें मृत्यु दंड से कोई नहीं बचा [संगीत] पाएगा किसी भी कार्य को सफलता पूर्वक पूर्ण करने के लिए बल के साथ बुद्धि भी आवश्यक है

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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