Friday, 2 January 2026

माता रानी की कृपा से तारा और रुक्मण का मिलन Romiit Vighnaharta Ganesh Episode 843 Pen Bhakti

[संगीत] महारानी तारा और रुको दोनों बहने एक ही राज्य में रहते हुए भी एक दूसरे के परिचय से अनजान थी महारानी तारा यह आपके लिए विवाह का उपहार आशा है कि इससे आप प्रसन्न अवश्य [संगीत] होंगे आपको मेरा उपहार अच्छा लगा हां स्वामी किंतु मेरी इच्छा कुछ और ही पाने की थी कहिए क्या इच्छा है आपकी हम अभी प्रस्तुत करेंगे मुझे आपके राज भवन में माता आदि शक्ति की पूजा का स्थान चाहिए अवश्य इतना ही नहीं मैं आपकी प्रत्येक मनोकामना पूर्ण करूंगा जिसके बदले मुझे आपसे बस एक काम चिंतित ना होए मैं आपसे अधिक कुछ नहीं मांगूंगा आइए हम आपको और अधिक देने में असमर्थ हैं महाराज हरिश्चंद्र के यहां सेवक है हमारे माता-पिता और उनका भी अभी विवाह हुआ है तब तो आपकी महारानी को एक नई सेविका चाहिए होगी मैं उनकी सेवा कर सकती हूं यह देखिए प्रिय हमारा राज्य मर्यादाओं का पालन करना ही हमारे राज्य का आधार है मैं स्वयं किसी भी मूल्य पर उन्हें भंग नहीं करता मेरी आपसे भी यही अपेक्षा है मैं वचन देती हूं मैं सभी मर्यादाओं को समझूंगी भी और उनका आदर कर उनका पालन भी करूंगी क्या आप मुझे उनका परिचय बता सकते हैं उन्हें क्या पसंद है क्या नहीं किंतु सर्वप्रथम आप हमें उनका नाम बताने की कृपा [संगीत] कीजिए क्षमा करना बेटा मैंने तुम दोनों का वार्तालाप सुन लिया लिए आ [संगीत] गई पुत्री तुम्हें राज भवन में कार्य करने की कोई आवश्यकता नहीं महारानी की सेवा मैं कर लूंगी वहां तो सभी सेवक है पर तुम तो इस घर की राजरानी हो से जो भी हमें मिलता है हमारे घर के लिए पर्याप्त है बस तुम हमारे परिवार के लिए नया सदस्य दे देना मैं चाहती हूं हमारे इस घर में शिशु की किलकारियां गूंजे और दोनों अपने परिवार की अपेक्षाएं पूर्ण करने की प्रयास कर रही थी किंतु जो भूल उन्होंने तब की थी उसके कारण वश विवाह के कई वर्षों बाद उन्हें संतान का सुख प्राप्त नहीं हुआ जबकि महारानी तारा एक पुत्र की मां बन चुकी थी राजभवन राजकुमार को पाकर उल्लास और आनंद से भर गया था किंतु पूर्व जन्म के भूलों के कारण कष्ट में थी और उसके परिवार में उसकी स्थिति बदलने लगी थी भूख नहीं है मुझे कुछ नहीं खाना मां कुछ तो खा लीजिए आप जो कहेंगी वह पका दूंगी मैं कहा तो था मुझे क्या चाहिए तुझसे एक बालक वो तो तुम देना सकी फिर और कुछ करने ना करने से क्या लाभ होगा मां पिताजी आप कार्य पर जाने के लिए तैयार हो गए हैं मैं आपके लिए खाना परोस दूं स्वामी स्वामी इस चन्म में कैसी भूल की थी मैंने जिसका यह परिणाम मिल रहा है मुझे मेरी झोली खाली क्यों है व्रत भंग किया है तुमने वो भी माज हरी भोजन खाकर समय समय पर उसे अपनी उस भूल की स्मृतियां आती थी जिसका दंड उसका भाग्य बन गया था लेकिन उसका भाग्य तो करवट लेने वाला था उसकी भेट उसकी बहन के साथ होने जा रही थी कुछ दिन बाद रुको की सांस अस्वस्थ रहने [संगीत] लगी तुमने जगाया नहीं मुझे महारानी प्रतीक्षा कर रही होगी बहुत विल हो गया जाने दो मुझे नहीं मां ऐसी अस्वस्थ अवस्था में मैं आपको कहीं नहीं जाने दूंगी मेरा जाना अ आवश्यक है महारानी ने आज देवी मां की पूजा का आयोजन किया सब प्रबंध मुझे ही करना है वहा किसी को कोई ज्ञान नहीं आप मुझे बता दीजिए मैं सब व्यवस्था कर दूंगी अच्छा सुनो बता द [संगीत] हं सुनिए महारानी का कक्ष कहां है महारानी का कक्ष वहां दाहिनी ओर अंतिम छोर पर है धन्यवाद शीघ्रता करो पुत्र विलम मत करो मां शीघ्रता में आपने अनुव उल्टा कर दिया उचित ही कहा गया है शीघ्रता में सब उल्टा पुल्टा हो जाता है परंतु इतनी शीघ्रता का कारण क्या है महाराज आज मैंने माता रानी की पूजा रखी है और जिस सेविका को सब प्रबंध करने थे उसका स्वास्थ्य कुछ दिनों से ठीक नहीं है और अब आज व आई भी नहीं है तो रुको अपना परिचय दो मैं महारानी की सेविका की बहू हूं महारानी से भेट करनी है नहीं नहीं यह राज भवन का नियम है महारानी से कोई तभी भेंट कर सकता है जब उसे बुलाया गया हो किंतु वह मुझे कैसे बुलाती उन्हें कैसे पता होगा मैं अपनी सासू मां के स्थान पर उनका कार्य करने आई हूं तब जाकर अपना कार्य कीजिए उनसे भेंट करने की आवश्यकता क्या है लेकिन मेरे पास एक सरल उपाय है जाइए आप जाकर पूजा की तैयारी कीजिए पुत्र रोहिताश्व की देखरेख मैं करूंगा किंतु महाराज आपको भी तो नगर भ्रमण के लिए जाना है वह अनिवार्य नहीं है मैं किसी विशेष कार्य से नहीं जा रहा था और अपने प्राणों से भी अधिक प्यारे पुत्र के साथ समय बिताने से अधिक आनंद मुझे कहां आएगा आज मैं इसे अपने साथ भ्रमण पर ले जाऊंगा और मैं स्वयं इसे तैयार करूंगा आप जाइए विलम मत कीजिए अन्यथा पूजा का मुहूर्त निकल जाएगा उचित है किंतु आप भी आरती से पहले आ जाइएगा [संगीत] [संगीत] महाराज [संगीत] [संगीत] हा मंदिर तो व्यवस्थित हो [संगीत] गया यह यह कैसा आभास हुआ मुझे जैसे कोई जाना पहचाना था यहां तो क्या दोनों बहने पहली बार एक दूसरे के आमने सामने आने जा रही थी हां किंतु इससे भी बड़ा प्रश्न यह है कि क्या वह एक दूसरे को पहचानने जा रही थी और यह तो माता रानी की कृपा से ही संभव था यहां खड़ी खड़ी क्या कर रही हो अभी तो बहुत कार्य करने हैं मेरी मुख्य सेविका आई नहीं तो यह सब किसने किया कौन थी वह जिन्होंने अभी पूजा कक्ष में प्रवेश किया ठीक से देख तो नहीं सकी किंतु उनकी एक झलक से पता चल गया कितनी पवित्र है वह दिव्य है कौन है वह आपकी मुख्य सेविका तो नहीं आ सकी किंतु उन्होंने अपनी पुत्र वधु को भेज दिया था उसका नाम रुको है जी वा जिनकी सेवा करने आई हो उन्हें ही नहीं जानती और कौन होंगी महारानी तारा थी वो महारानी तारा थी वो उसका नाम था रुको इसका नाम था रुको मेरी तो बस यही मनोकामना है कि हर जन्म में तुम ही मेरी बहन बनो अब ऐसे ही खड़ी रहोगी या कुछ करोगी भी महारानी पूजा आरंभ करने वाली है उन्हें आवश्यकता होगी उनकी प्रत्येक आवश्यकता ज्ञात है मुझे क्या हुआ महारानी जी कोई कमी रह गई है क्या नहीं नहीं सभी व्यवस्था ऐसी है कि कमी ढूंढने से भी नहीं मिलेगी तुम जाओ कोई और काम करो जी महारानी जी हे माता रानी बचपन से जो दृश्य मेरी आंखों के सामने तैरते रहे हैं वो फिर क्यों दिखाई दिए [संगीत] मुझे रानी तारा का नाम सुनकर वो दृश्य फिर क्यों दिखे मुझे जो मैं जीवन के आरंभ से देख रही हूं इसका क्या कारण है क्या महारानी का उन दृश्यों से कोई संबंध [संगीत] है मां मुझसे इन स्वप्नों का जो भी संबंध है उसे समझने में मेरी सहायता कीजिए महारानी सामग्री तैयार है आप पूजा कर सकती [संगीत] हैं [संगीत] [संगीत] इस ब से पीछे नहीं हटो चचन दे से पीछे नहीं ह वचन [संगीत] दे हम आप दोनों से प्रभावित होकर आपको वरदान देना चाहते हैं आप हमें वरदान देने के इच्छुक है तो हमें अनुमति दीजिए कुछ समय पृथ्वी पर भ्रमण करने की जैसे आप दोनों की इच्छा देवराज आपके वरदान के फल स्वरूप हम यहां है [संगीत] मेरी तो बस यही मनोकामना है कि हर जन्म में तुम ही मेरी बहन बनो इस वत से पीछे नहीं हटो गी और यह व्रत जरूर पूरा करोगी वचन देती हूं दीदी जाओ मैं तुम्ह श्राप देती हूं तुम इसी क् खाने वाली छिपकली बन [संगीत] जाओ बहन रुक्मण मेरी दीदी [संगीत] [संगीत] तारा [संगीत] ऐसा लग रहा है जैसे जन्मों के बाद किसी अपने का प्रेम मिला सत्य कहा बहन [संगीत] [प्रशंसा] रुखन सत्य माता रानी के दरबार में देर है परंतु अंधेर नहीं सच्चे भक्तों पर उनकी कृपा होकी रहती है वही हुआ उन दोनों बहनों के साथ भी उन दोनों का मिलन एक बार फिर से हो ही गया रुक के भाग तो जाग ही गए हो वो तो सेविका से रानी बन गई होगी भाग्य के अधीन रहना आलस्य है क्योंकि भाग्य के द्वार तो कर्म की कुंजी के बिना नहीं खुलते रुको को भी कर्म करना था और अब जो होने जा रहा था उससे दोनों बहनों का ही नहीं अपितु महाराज हरिश्चंद्र का भविष्य भी बदलने वाला था जग जननी जय जय मां जग जननी जय जय भय हारि भव भार भय हारि भव तारि भव भामिनी जय जय जग जननी जय जय यह कोई संयोग नहीं है माता रानी की कृपा का प्रसाद है दो बिछड़ी हुई बहनों को पुन मिलाया उन्होंने सत्य कहा दीदी आप ने किंतु आज आप महारानी है मैं साधारण सेविका हम दोनों को अपने अपने कर्मों का फल मिला है और क्यों ना हो ऐसा व्रत की मर्यादा भंग की थी मैंने उसका परिणाम तो भोगना ही होगा जब अंधकार रूपी कोहरा छाता है तो हमें सिखाता है कि हमें एक एक कदम संभल कर चलना चाहिए उसी प्रकार यदि भूल हो जाए तो उसे स्मरण करने के स्थान पर उसे सुधारने का विचार करना चाहिए मेरी बहन मेरे सामने है और मैं स्वयं को रोक रही हूं नहीं मैं सबके सामने यह घोषणा करूंगी कि तुम मेरी बहन मेरी अपनी प्रिय बहन नहीं दीदी यह उचित नहीं होगा कौन हम पर विश्वास करेगा हम पिछले जन्म की बहने हैं हम जो भी कहेंगे उसे सब हमारी कल्पना ही मानेंगे और आपके पति देव महाराज हरिश्चंद्र मर्यादाओं के प्रति अति निष्ठावान है कहीं मेरे कारण आपके जीवन में कोई पीड़ा उत्पन्न हुई तो मैं सहन नहीं कर [संगीत] पाऊंगी तो फिर हम क्या करें बहन जैसे माता रानी ने हमें मिला उसी प्रकार इसका उपाय उनके दरबार में जाने से ही मिलेगा समय आने पर वह फिर चमत्कार [संगीत] करेंगी परमात्मा कभी भाग्य नहीं लिखते व्यक्ति की सोच और अच्छे बुरे कर्म ही उसका भाग्य लिखते हैं

No comments:

Post a Comment

ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...