बस मुझे ज्ञात है माता और पिता श्री में कौन श्रेष्ठ नर्तक है और कौन श्रेष्ठतम प्रणाम पिता श्री प्रणाम माता अच्छा पुत्र मैं भी तो सुनू तुम्हारे अनुसार कौन स विशेष थे यह किस दुविधा में उलझ गया मैं अब मां और पिता श्री सामने है मैं किसे श्रेष्ठ कहूं और किसे श्रेष्ठतम कहो गणेश संकोच कदा भी मत करो तुम्हारी मां को कदा भी बुरा नहीं लगेगा हां पुत्र सत्य अप्रिय हो तो भी तुम्हारे पिता श्री को कदापि बुरा नहीं लगेगा अब तुम्हें हमें यह सत्य बताना है कि हम दोनों में से कौन स विशेष तक है मैं या तुम्हारे पिता श्री हां गणेश स्पष्ट कहो निसंकोच कहो मैं कुछ ऐसा ना कह दूं जिससे मां और पिता श्री क्रोधित हो जाए मुझे कुछ युक्ति सोचनी [संगीत] [प्रशंसा] होगी मां श्रेष्ठता का निर्णय लेने वाला मैं भला कौन हूं इसका निर्णायक तो संपूर्ण जगत को होना चाहिए मैं कैसे कह दूं कौन है सर्वश्रेष्ठ नर्तक पुत तुम्हारे कहने का अर्थ मैं समझ गई और इसका निर्णय तो प्रतिस्पर्धा से ही स्पष्ट होगा स्वामी कदाच इसमें आपको भी कोई आपत्ति नहीं होगी क्योंकि इसके बाद संसार को यह स्पष्ट हो जाएगा कि नृत्य में सर्वाधिक कुशल कौन है यदि आपको स्वीकार है तो भला इस प्रस्ताव को मैं कैसे नकार सकता हूं अतु तो आतुर हूं संसार को नृत्य कला और कुशल मृतक दोनों का परिचय देना चाहता हूं नृत्य के लिए मां के चरण बढ़ाते ही इन योद्धाओं के जन्म का निर्धारण हो गया [संगीत] [प्रशंसा] था [संगीत] [संगीत] माता पार्वती की जय प्रभु महादेव की जय माता पार्वती की जय माता पार्वती की जय फिर वो नृत्य आरंभ हुआ इस नृत्य में पिता श्री शिवशंकर के डमरू के नाद के श्रवण से ऋषि पाणिनी को महेंद्र सूत्र नाम की 14 ध्वनियों की रचना की प्रेरणा प्राप्त हुई जो संस्कृत व्याकरण का आधार बने [संगीत] [प्रशंसा] दन वो अदभुत दिव्य नृत्य तो संपूर्ण सृष्टि के लिए अत्यंत सुखद था सभी दिशाएं शांत और दिव्य स्नेह के भाव से भर गई थी प्रकृति में एक असाधारण उल्लास का संचार हुआ [संगीत] था और फिर ऐसा प्रतीत होने लगा जैसे मां और पिता श्री दो नहीं एक ही [संगीत] [संगीत] है जो होता है वो प्रभु की लीला होती त्य में एक क्ण ऐसा भी आया जब मां की पायल टूट गई और सभी नौ घुंगरू छिटक कर इधर उधर बिखर गए उन दिव्य घुंघरु का भी एक विशेष प्रयोजन था वह बिखरते ही विशाल आकार धारण करने लगे और उन्होंने नौ सुंदर स्त्रियों का रूप धारण [संगीत] किया पिता श्री महादेव अभी भी नृत्य के आवेग में थे तभी उनके मस्तक से स्वेत के कुछ कण गिरे मां के घुंगरु से उत्पन्न उन नौ स्त्रियों ने अपने हाथों में पिता श्री महादेव के स्वेत की बूंदों को स्वीकार [संगीत] किया इस दिव्य घटना के उपरांत उन सभी नौ देवियों ने गर्भ धारण कर लिया किंतु अभी किसी भी अन्य को इसका कोई भान नहीं था स्वामी ने यह प्रमाणित कर दिया कि वह [संगीत] सर्वश्री आप स्वयं नृत कला है शरी हू तो आप आत्मा आपके बिना ना मैं हूं और ना ही मेरी नृत्य [संगीत] कला मां ने सर्वथा उचित ही कहा था वोह दोनों एक दूसरे के पूरक हैं और यही सुंदरता है विवाह के संबंध की अब तो भैया को विवाह के लिए तैयार करने की मेरी इच्छा और भी तीव्र हो गई है गणेश क्या हुआ किस विचार में डूब गए हो तुम पुने अब आगे क्या हुआ वो बताओ आगे आगे यह हुआ कि जब मां की दृष्टि उन स्त्रियों पर पड़ी तो मां के मुख का भाव क्यों बदल रहा है वह अचानक क्रोधित क्यों हो [संगीत] उठी [संगीत] प्रणाम स्वामी स्वामी मेरे स्वामी को अपना स्वामी कैसे कहा आप सभी ने प्रभु महादेव ही हमारे स्वामी है अभी कुछ ही क्षण पहले उन्हें देखते देख देखते ही हमारा जन्म हुआ और उनके स्वेत से उत्पन्न संतानों को हम जन्म देंगी और हमारी मृत्यु के समय भी हमारी दृष्टि मात्र उन्हीं पर टिकी रहेगी यदि आप मेरे स्वामी महादेव से परिचित है तो उनकी शक्ति से भी अवश्य परिचित होंगे और यह सब जानते हुए भी अपनी मर्यादा का उल्लंघन किया है तुमने अपनी सीमा को लांघा है किसी अन्य के स्वामी से संतान की इच्छा रखना सर्वथा अनुचित है और इस बाप के दंड स्वरूप में तुम सभी को श्राप देती हूं और इस बाप के दंड स्वरूप में तुम सभी को श्राप देती हूं और इस बाप के दंड स्वरूप में तुम सभी को श्राप देती हूं कि तुम्हें कैलाश में कभी शरण नहीं प्राप्त होगी और ना ही तुम अपनी इन संतानों को जन्म दे सकोगी और इन्हें ऐसे ही गर्भ में धारण कर तुम्हें कैलाश से दूर रहना होगा मां ने उन नौ देवियों को इतना कठोर दंड दे दिया मन बुद्धि कृति इन तीनों का शुद्धीकरण ही प्रायश्चित है उनका प्रायश्चित तो अनिवार्य था किंतु यह तो माता की लीला भी थी क्योंकि उन्हें यह भली भाति ज्ञात था कि उन नव देवियों के पुत्रों की आवश्यकता संसार को कब होने जा रही थी कैलाश से जाने पर सभी नव देवियों ने अपनी भूल को समझकर गौरी शंकराय नमः का जाप आरंभ कर दिया और फिर उनकी वर्षों की तपस्या आराधना और विनती के फल स्वरूप उन्हें मां और पिता श्री के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त [संगीत] हुआ प्रभु माता माता बहुत बड़ी भूल हुई है हमसे जन्म होते ही माया जंजाल ने हमें ग्रस्त कर लिया हमें क्षमा कर दीजिए माता और अपने शाप से मुक्त करने की कृपा कीजिए प्रश्चित से प्राणी नवजात हो जाता है नवजात अर्थात सभी दोषों से रहित पवित्र तुम सभी का प्रश्चित पूर्ण हुआ किंतु मैं तुम्ह श्राप से मुक्त नहीं कर सकती किंतु तुम भक्ति के कारण मैं उसकी अवधि कम अवश्य कर सकती हूं संसार में घटने वाली कोई भी घटना अकारण नहीं होती उसके पीछे कोई ना कोई उद्देश्य अवश्य छिपा होता है जैसे तुम सभी का उत्पन्न होना श्रापित होना उसके पीछे एक महत्त्वपूर्ण उद्देश था तुम सभी के मुख पर जिज्ञासा का भाव यह बता रहा है कि तुम सब भविष्य जानने के लिए आतुर हो संसार में जब वो परिस्थिति आ जाएगी जब महा असुरों का आतंक अपने चर्म पर होगा तब उनका अंत करने के लिए मेरे पुत्र देव सेनापति कुमार कार्तिके को अकेले युद्ध भूमि में जाना पड़ेगा तब तुम्हारे पुत्र ही जन्म लेकर देव सेनापति के मुख्य सहायक बनेंगे को सार्थक करेंगे धन्य और आज जब उस मायावी आसुरी पर्वत ने देव सेना के साथ देवताओं को निगल लिया तो आप क्षण भर के लिए अकेले रह गए थे भैया तभी इन सभी का जन्म [संगीत] हुआ [संगीत] प्रणाम प्रभु गौरी शंकर प्रभु शिव शंकर आप ही की ऊर्जा ने हमें इनके जन्म का माध्यम बनाया है इसीलिए वास्तव में तो यह आप ही के पुत्र हैं आप इन्हे अपनी सेवा में स्वीकार करें और आप इन्हें इनके जीवन का मार्ग दिखाने की कृपा करें महायोद्धा होंगे आपके पुत्र देवियों वीर योद्धा के नाम से विख्यात होंगे और आप सभी इनकी माताएं नौ रत्नों के नाम से जानी जाएंगी यही है वर बंधुओं के जन्म की कथा और इनमें जेष्ठ है वीर [संगीत] बाहू अर्थात मैंने अपने नौ सिस्त्र से अपने भ्राता पर वार कर दिया भैया मैं समय चक्र को पीछे ले जाकर पुनः इस घटना को यथावत कर दूंगा तब आप अपना अस्त्र लौटाने की कृपा कीजिएगा किंतु [प्रशंसा] गणेश लीजिए भैया मैं समय को पीछे ले जा चुका हूं अब आप यथाशीघ्र अपने नौ सिंहा स्त्र को लौटा लीजिए अनुज गणेश ना मेरे अस्त्र को लौटाया जा सकता है ही उन्ह रोका जा सकता है वीर योद्धा कभी अपने कर्तव्य मार्ग से विचलित नहीं होते चाहे कोई भी चुनौती क्यों ना हो हमें देव सेनापति कुमार कार्तिकेय तक पहुंचना ही होगा एक ऐसा अनर्थ हो रहा है मेरा अस्त्र कभी विफल नहीं होता भैया अपने सामने वाली शिला पर चढ़ जाइए क्यों शीघ्रता कीजिए भैया मेरा विश्वास कीजिए भैया सतगुरु शाय महाय जीवनी [संगीत] प्रचोदय महे महा सेनाय धीमही ु [संगीत] प्रोया स्वामीनाथ की जय मेरे सिंहा स्त्र ने इन पर कोई आघात नहीं किया यह कैसे हुआ यह नौ योद्धा कौन है इस बालक ने अपने रक्षकों को तो नहीं बुला भेजा है भैया य आपके केवल भ्राता ही नहीं भक्त भी है और भक्त की शक्ति प्रभु के अस्त्र को भी उनके आशीर्वाद में बदल देती है किंतु गणेश मेरे इस अस्त्र को लौटाया नहीं जा सकता यदि उस पर प्रति उत्तर में प्रहार नहीं किया गया तो तो मेरा अस्त्र कदापि रुकेगा नहीं और मेरे भक्त मेरे अस्त्र पर प्रहार कदापि नहीं करेंगे तो ऐसे में हमारे पास क्या उपाय शेष रहता है भैया आप अपने इन वीर योद्धाओं को आदेश दीजिए कि वो इस नव से अस्त्र को शत्रु सेना की ओर मोड़ दे उचित है अनुज हे वीर योद्ध अपने सामने अस्त्र का सामना करो और उसे शत्रु सेना की ओर मोड़ [संगीत] दो [संगीत] [संगीत] अद्भुत महा पराक्रमी य ब देव सेनापति कुमार कार्तिके की देव सेनापति कुमार कार्तिके की देव सेनापति कुमार कार्ति की इनका य जयघोष तो शीघ्र इनकी पराजय के स्वर में बदल जाएगा इनका सामना करने दीजिए मैं अभी इह मिटा दूंगा नहीं जिन्होने गज मुखन को चुनौती दी है उन्ह गज मुखन के हाथों ही मृत्यु को प्राप्त चा जब तक मैं आदेश ना दू हमारे बीच में कोई नहीं आएगा उचित है गज मुखन को भत कर सके ना ऐसी कोई माया है ना ऐसी कोई शक्ति और ना ही कोई अस्त्र [संगीत] [संगीत] [संगीत] अब आक्रमण मैं करूंगा और तुम सब अवश्य आहत होगे [संगीत] हमारा पहला प्रहार विफल हो गया नहीं नहीं वीर बंधुओ निराश होने का कोई कारण ही नहीं है अभी तो मात्र एक अस्त्र विफल हुआ है परस्त नहीं हुए हैं अभी हम और देखिए तो असुरों की समस्त सेना नष्ट हो चुकी है कहीं ना कहीं यह हमारी विजय ही आपने सत्य कहा हम पुनः प्रयास करेंगे और शग रही इस असुर को हम आपके चरणों में गिरा देंगे स्वामीनाथ वीर बंधु आप सभी के पराक्रम और सामर्थ्य से मैं अत्यंत प्रभावित हुआ हूं इसीलिए आप सभी को मैं अपनी देव सेना के सेनापतियों के रूप में नियुक्त करता हूं और वीर भाव आप मेरे प्रमुख सेनापति होंगे [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] तैयार हो जाइए यह पुनः आक्रमण की सूचना है सूचना है किंतु आक्रमण की नहीं तुम्हारी मृत्यु [संगीत] की बालक मैं गज मुखन तुम्हारा काल [संगीत] [संगीत] हूं युध के लिए आतुर हो रहा है तभी इसने यहां युद्ध भूमि का निर्माण कर दिया है अब तुम्हारी रक्षा नहीं कर सकता यह दुष्ट गज मुखन मायावी असुरों की सेना उत्पन्न कर रहा है यही उचित समय इस पर आक्रमण कर देव सेना को मुक्त करवाने का और हमारे सैनिकों को लौटा कर लाने का स्वामीनाथ आपने मुझे सेनापति नियुक्त कर हमें कृतार्थ किया अब मुझे उस गज मुखन को परास्त करना है अपने सेनापति को अवसर देने की कृपा कीजिए स्वामीनाथ हम अपने सामर्थ्य से इसे प्रात कर अपनी योग्यता प्रमाणित करने के इच्छुक है हम पर विश्वास कीजिए स्वामीनाथ उचित है किंतु आपको मुझे यह वचन देना होगा कि यदि आप पर कोई कठिनाई छाए गी तो आप यथाशीघ्र सहायता के लिए मुझे पुकारेंगे आपकी आज्ञा का पालन अवश्य होगा प्रभु और हमारा प्रयास होगा कि उस गजमुख को लेकर आपको चिंता करने की कोई आवश्यकता ना [संगीत] [प्रशंसा] पड़े ताओ अपने अस्त्र धारण करो [संगीत] हमें प्रभु के विश्वास का मान रखना है उस दुष्ट गजमुख को पराजित करना [संगीत] है [संगीत] समय रहते व्यक्ति यदि अपने दोष को स्वीकार कर प्रायश्चित कर लेता है तो वह पूर्णतः दोष मुक्त हो जाता है
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