आज भगवान ने नहीं एक भक्त और उसकी भक्ति भगवान को आधार दिया है नौ माह की मेरी तपस्या में तुम्हारे तप ने मुझे स्थान दिया पुत्र श्रीधर आने वाले समय में मैं यही त्रिकुट पर्वत परवास [संगीत] करूंगी मेरे स्वयंभू स्वरूप की स्थापना होगी वही मेरा मंदिर मेरा दरबार कहलाए वही मेरा मंदिर मेरा दरबार [संगीत] कहलाएगा जय माता की जय माता [संगीत] की और भैरव अंत समय में अपने अहम रूपी अपने विकार का त्याग किया और अपने ऊपर छाय कलयुग के प्रपंच की काली मा को मिटा दिया इसीलिए आज के बाद तुम्ह भी पूजा जाएगा और तुम्हे भैरवनाथ के नाम से जाना जाएगा और तुम्ह भैरवनाथ के नाम से जाना जाएगा पुत्र श्रीधर तुमने जो मांगा मैंने तुम्ह दिया तो क्या अब तुम मुझे कुछ देने के लिए तैयार [संगीत] हो माता रानी मैं अपने प्रेम और भक्ति की सुभ और क्या दे सकता हूं आपको मैं तुमसे इतना ही चाहती हूं श्रीधर क्या तुम मेरे मंदिर की देखरेख कर सको उसका ध्यान [संगीत] रखोगे ये ये तो मेरा परम सौभाग्य होगा मां मैं तुम्हें आशीर्वाद देती हूं पु तुम्हारे बाद तुम्हारे वंशज मेरे मंदिर में मेरी पूजा करेंगे और तुम्हारा नाम सदा के लिए मेरे नाम से जुड़ा रहेगा मां वंशज तो क्या मैं अपनी संतान को जन दूंगी मां तुम भक्ति के प्रत्येक पग पर श्रीधर के साथ रही हो इसलिए मैं तुम्हे एक तेजस्वी संतान का वरदान [संगीत] देतीं जो कोई भी तुम्हारे समान अक विश्वास लेकर मेरे मंदिर की यात्रा करेगा मेरे उस भक्त को मैं कलयुग के प्रभाव से मुक्त करूंगी और उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करूंगी और भैरव भूल हो जाने पर प्रश्चित मुक्ति के द्वार खोल देता है इसीलिए तुम्हारे दर्शन के बाद मेरे वैष्णव धाम की यात्रा को पूर्ण माना जाएगा मेरे वैष्णव धाम की यात्रा को पूर्ण माना जाएगा किंतु यदि कोई भक्त शारीरिक रूप से स्वस्थ नहीं और भैरो धाम अथवा मेरे मंदिर चढ़कर नहीं पहुंच सकता तो यदि वो यहां पहुंच भी जाए जहां मेरे पद चन तो भी मेरे आशीर्वाद का पूर्ण भागी बनेगा मां बस इतनी कृपा और कीजिए मेरी देह सदा आपके चरणों में रहे और भविष्य में जो भी भक्त आपके दर्शन के लिए आए वो मेरी इस अभिमानी देह पर चढ़कर आपके दर्शन पाए मां मेरी विनती स्वीकार कीजिए मां तथास्तु पुत्र जीवन भर अधर्म पद पर चलने वाले इस अधर्मी को आपने प्रायश्चित का इतना बड़ा पुरस्कार दे दिया है मां आप करुणा की सागर है माता आपके समान करुणा म और कोई नहीं अदभुत सर्वथा अदभुत है आपकी मम माता रानी आपने तो बिन मांगे ही हमारी झोली भर दी जय माता की आपकी लीला अपरंपार है माता यह प्रमाण है इसका आपके दर से कोई खाली हाथ नहीं लौटेगा माता रानी की जय शेरावाली की जय माता रानी कीरा की जय माता देवी की जय माता शेरावाली की जय [संगीत] वहां एक और माता वैष्णव देवी के मंदिर की स्थापना होने वाली थी वहीं दूसरी ओर भोला पहले तीर्थ यात्रियों को लेकर माता के मंदिर की ओर बढ़ रहे थे और जैसे श्रीधर माता के पद चिन्हो पर चले थे वैसे ही वह सभी यात्री भी श्रीधर के पद चिन्हो पर चले वो देखो लगता है य उन्ही के प चिन्ह [संगीत] है देखा श्रीधर की तपस्या संपन्न हो गई अब अवश्य माता जी के आशीर्वाद के अनुसार मंदिर का निर्माण होगा हमें भी वहा चलना चाहिए चलिए जय माता की जय माता की जय माता की जय माता की जय माता की जय माता की जय माता की माता की माता रानी की जय माता वैशु देवी की जय माता शेरा की जय माता रानी की जय माता वैशु देवी की जय जय माता की जय माता की जय माता की माता रानी की ज की माता वण देवी की जय माता शेरावाली की जय माता रानी की जय माता वैशु देवी की स्वागत है [संगीत] माता [संगीत] के भगवान मिले आपने तो हमें ही नहीं हमारे पूरे कुल को तार दिया श्रीधर एक भक्त ही दूसरे सच्चे भक्त की अवस्था को समझ सकता है यही भक्ति की मर्यादा है और मैंने तो केवल उसका पालन ही किया है आओ श्रीधर अब तुम भी वह कर्तव्य निभाओ माता रानी स्वयंभू स्वरूप में पधार चुकी हैं आओ श्रीधर आओ जय माता की जय माता की जय जय माता की जय माता की माता की जय माता [संगीत] [संगीत] की [संगीत] श्रीधर तुम्हारी भक्ति ने इस मंदिर की स्थापना की है माता रानी यहां देवी लक्ष्मी देवी शारदा सरस्वती और देवी दुर्गा भवानी अर्थात अपने तीनों रूपों में उपस्थित [संगीत] रहेंगी बोलो शेरावाली माता की सदा ही जय बोलो शेरावाली माता की सदा ही जय बोलो शेरावाली माता की बो शेरावाली माता सदा जय मा सदा जय बोलो शेरावाली माता की सदा ही जय सदा ही जय विष्णु देवी की जय जय साचे दरबार की जय जय माता की जय माता जय माता [संगीत] दी [संगीत] माता वैष्णु देवी की जय माता रानी की जय माता शेरावाली की [प्रशंसा] जय [प्रशंसा] [संगीत] श मुझे से कर दो श मैं तो एक भक्त हूं माता रानी का आप माता रानी के दर पर आए तो उन्हीं से शमादान मांगे माता रानी के दर पर देर हो सकती है अंधेर नहीं [संगीत] कर कर माता रानी का आशीर्वाद मेरा कार्य संपन्न हुआ किंतु प्रभु श्री राम को दिया वचन नहीं उन्होंने मुझे अपने अगले अवतार तक माता के साथ रहने का आदेश जो दिया था प्रभु की आज्ञा के अनुसार मैं लांगुरिया बनकर यहीं माता और उनके भक्तों की सेवा में उपस्थित रहूंगा क्योंकि भक्तों की सेवा में ही तो माता की सेवा है और हनुमान जी अभी भी लांगुरिया बनकर माता के मंदिर की रक्षा कर रहे हैं वहां आने वाले भक्तों की सहायता करते हैं और माता के आशीर्वाद के अनुसार श्रीधर को भी शीघ्र एक तेजस्वी संतान प्राप्त हुई जिसने श्रीधर के बाद माता के मंदिर की देखरेख की बागडोर संभाली श्रीधर की भक्ति के उदाहरण से यही सीख मिलती है कि सच्ची भक्ति से भगवान के प्रत्यक्ष होने का और उनके आश्रय को प्रकट करने का साधन भी बना जा सकता है इसीलिए प्रेम से बोले जय माता की जय माता की जय माता की जय माता की उचित समझा था मैंने इनके मन का भाव बदल रहा है भक्ति से परिपूर्ण हो रहे हैं ये जय माता की जय माता की अपने हाथ देखिए स्वामी आंखों में भक्ति का भाव [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] देखिए मुझे पूर्ण विश्वास है आप शीघ्र ही इस पिशाच योनि से मुक्त हो जाएंगे बस आप इसी प्रकार श्रद्धा और भक्ति से भक्तों की कथा सुनते रहिए माता वैष्णवी देवी के आविर्भाव की कथा तो भक्ति से परिपूर्ण थी भक्त श्रीधर के उदाहरण ने मुझे बहुत प्रभावित किया है प्रभु भक्ति का ऐसा प्रभाव हुआ है कि मन तृप्त ही नहीं हुआ गणेश जी एक कृपा कीजिए मुझ पे भक्त [संगीत] चलो स्वामी स्वामी तो फिर चले गए प्रभु मुझे तो लगा था वो अब बदल रहे हैं कि तो नहीं वो तो इस बार भी भाग गए अब इस बार हम उन्हें कहां ढूंढेंगे प्रभु मौसी चिंता अंतर मन में भी अंधेरा कर देती है इसलिए चिंता ना करें उसकी कोई आवश्यकता नहीं आप उचित कह रहे हैं गणेश जी किंतु स्वामी का उत्साह देखकर ऐसा लग रहा था कि परिवर्तन ने उनके हृदय के द्वार को खटखटाया है किंतु ऐसा कुछ भी नहीं हुआ वो तो फिर भी चले गए चले तो अवश्य गए हैं किंतु मुझे ज्ञात है यह भक्त पुष्पदंत जी और पिशाच पुष्पदंत जी के बीच का द्वंद है मुझे आशा ही नहीं विश्वास है इस बार भक्त पुष्पदंत जी स्वयं लौट कर आएंगे सिगरेट नता हूं मैं किसी को जिसके भीतर छुप जाऊ मैं इस बार गणेश जी के हाथों में नहीं पड़ूंगा नहीं पड़ूंगा कदा प नहीं [संगीत] पड़ूंगा चोर है अच्छा चोर कुशल है अब देखना यह है कि भक्ति और पिशाची प्रवृत्ति के इस द्वंद में विजय किसकी होती है पिशाच की या भक्त [संगीत] की [संगीत] कैसे समझाऊ तुम्हें तुम्हारा सत्य भक्ति नहीं पिशाची प्रवृत्ति है पिशाच हो तुम भक्ति में बंधन है नियमों का सात्विक जीवन का बंधन और एक बार यदि भक्त बन गए तो उन्मुक्त आनंद केवल स्वप्न रह जाएगा इसलिए भक्ति की मूर्खता मत करो स्वतंत्र पिशाच रहो जिसका कोई कर्तव्य नहीं कोई दायित्व नहीं जिसका कोई सात्विक जीवन नहीं जिसकी कोई दिनचर्या भी [संगीत] [संगीत] नहीं अब उचित पथ पर आए हो तुम इसी पर अधिक रहना अब मत पलटना जया मौसी प्रतीक्षा तो करनी होगी हमें उनके भीतर के भक्त को के पिशाच पर विजय पाने की यदि ऐसा ना हुआ और उनका पिशाच ही उन पर हावी रहा तो अब मेरे कहने का कोई प्रभाव नहीं पड़ता क्या आप लोगों पर मैंने कहा था ना चुपचाप एक कोने में दुपके पड़े रहिए किंतु आप दोनों आपको तो कुछ ना कुछ करना ही है ना हम तो बस मंदिर गए थे पिताजी बस बस चुप हो जाइए जैसे दादा दादी वैसा ही पौत्र स्वयं तो भूल करते ही है तुमसे भी करवाते हैं घर में कार अधूरा छोड़कर भला मंदिर जाने की क्या आवश्यकता थी अब रोने धोने का कोई लाभ नहीं पता है मुझे आपकी पुत्री आ रही है ना इसीलिए हो रहा है यह सब मा बुआ जी आने वाली है हां तो इसमें इतनी प्रसन्नता वाली क्या बात है और हां अपनी पुत्री के सामने अपना दुखड़ा लेकर मत बैठ जाइएगा हमारी बुराई मत कीजिएगा क्योंकि स्मरण है ना रहना तो आपको हमारे साथ ही है यह दोनों अपने माता-पिता के साथ इतना दुर्व्यवहार कर रहे हैं मां आपके मिट्टी के पात्र कहां है वो है बेटा इन पात्रों को छिपा दो आज इन्ह हमारे ही समान पीतल के पात्र में भोजन [संगीत] देना [संगीत] आज के लिए इस बिस्तर का प्रयोग कीजिए और ध्यान रहे घर की प्रतिष्ठा पर आंच नहीं आनी चाहिए हम बचा हुआ भोजन देते हैं अच्छे वस्त्र नहीं दे पाते यह सब मत कहिए अपना मुंह बंद रखिएगा और यदि कुछ कहा तो इसके भी लाले पड़ [संगीत] जाएंगे माता-पिता जितने कठोर हैं उनका पुत्र उतना ही [संगीत] कोमल ऐसे क्या देख रहे हो हम कोई अपराध नहीं कर रहे हैं तुम्हारे भविष्य के लिए ही संचित कर रहे हैं मैं दीदी जीजा जी को लेने जा रहा हूं उनकी नौका पहुंचती होगी हां हां ले आओ क्या करें मुझे भी पकवान बनाने का श्रम करना पड़ेगा मुझे क्षमा कीजिए दादा जी दादी जी मैं अभी इतना बड़ा नहीं हुआ तो बाप से तो कुछ नहीं कह सकता कोई बात नहीं बेटा वैसे भी तो हम तुम्हारे मां बाप पर बोझी है जि वो ढोने के लिए विवश है तुम जाओ जाओ [प्रशंसा] तुम स्वयं को बोझ क्यों बुला रहे हैं दादाजी क्या जो व्रद होते हैं वो बोझ बन जाते हैं तो क्या मां बापू भी व होंगे तो वो भी जो अपने माता-पिता को बोझ मान ले वह किसी पिशाच से कम [संगीत] नहीं यह क्या हुआ कुछ नहीं मेरा भ्रम था कितना अच्छा होता यदि मैं दादा दादी के लिए कुछ कर सकता प्रणाम दादा जी प्रणाम [संगीत] दा गणेश जी स्वामी ये क्या कर रहे हैं उन्होंने बालक गोपी में प्रवेश क्यों कर [संगीत] लिया आडंबर से सेवा संभव नहीं अपितु यह धर्म और कर्तव्य का उपहास है जो व्यक्ति को पाप का भागी बनाता है
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