Tuesday, 6 January 2026

श्रीधर को माता वैष्णवी के दर्शन कैसे होंगे Romiit Vighnaharta Ganesh Episode 848 Pen Bhakti

[संगीत] आ हाहा नैन सुख सुख ही सुख होगा जब यह सारा मेवा मेरी झोली में होगा [संगीत] [संगीत] बुरा मत मानिए पंडित जी हमारा परिवार बहुत बड़ा है सबको प्रशाद बाटना है कि सेठ जी आपने तो कहा था कि संभावना में बहुत कुछ मिलेगा हा तो दिया ना फल दिया मिष्ठान दिया मेवा दिया ओ हो हो एक वस्तु मैं भूल गया अभी देता [संगीत] हूं [संगीत] स्वर्ण मुद्राए यह तो पहले मैंने कभी नहीं देखी माता की ममता को जो जानेगा पहचाने का वो उनके चमत्कार को भी [संगीत] समझेगा देखिए माता की कृपा से कुछ तो मिला है आपको देने के [संगीत] लिए मैंने कहा था ना माता रानी है माता रानी ने इनकी झोली भर दी माता रानी मुझे अवश्य दर्शन [संगीत] दगी माता माता रानी रुक गए अपने भक्त की पुकार सुनकर रुक गई वो उनके ही पचन है वो वहां तो कुछ नहीं स्वामी को क्या दिखाई दे रहा [संगीत] है माता [संगीत] [संगीत] मां आपने इस पर कृपा कर द आपके चरणों की भूल पाकर मैं धन्य हो [संगीत] गया मा यहां होकर आपने अपने इस भक्त को दर्शन नहीं दिए क्या भूल गई मुस क्या दोष हुआ पूजन में जिसके कारण आपके दर्शन का परम सुख नहीं मिला मुझे क्यों हुआ ऐसा मां ऐसी क्या भूल गई मुझसे मां बाता क्षमा करें किंतु इतना निकट होने के उपरांत भी उसे आपके पूर्ण दर्शन का सुख क्यों नहीं प्राप्त हुआ भक्त हनुमान ये तो तुम भी जानते हो भक्ति का परिणाम परही प्राप्त होता है भक्त श्रीधर मेरा महान भक्त है वो परम सौभाग्य प्राप्त करने के पद पर अवश्य किंतु अभी अभी उसके योग्य नहीं बन सका है किंतु शीघ्र ही व दिन आएगा जब मेरे पूर्ण दर्शन के साथ संसार में मेरा आविर्भव का कारण बनेगा [संगीत] स्वामी इस प्रकार क्यों रो रहे हैं माता रानी का आभास हुआ मुझे उनके पचन देखे मैंने फिर उनके दर्शन प्राप्त नहीं हुए मुझे मुझसे कोई बहुत बड़ी भूल हुई है बहुत बड़ी भूल नहीं स्वामी संभव है माता आपको यहां आशीर्वाद देने आई थी कि किंतु मुझे माता ने माता की लीला है वो उसमें किंतु परंतु का कोई स्थान नहीं यह बात आप भी जानते हैं अवश्य ही माता ने आपकी पूजा से प्रसन्न होके आपकी पुकार सुनके मुझे मेरे पुण्य का अधिकार देने आई थी तो फिर मुझे दर्शन क्यों नहीं दिए माता ने किंतु आपको उनके पद चिन्हो के दर्शन तो प्राप्त हुए स्वामी हमें तो वो सुख भी प्राप्त नहीं हुआ यदि आपसे कोई भूल होती तो माता मेरे घर चमत्कार कैसे करती यह तो आपकी भक्ति की महानता है तो इस वृद्धा के घर माता पधारी आपने यहां जगराता किया मुझे इस पुण्य का भागी बनाया उसके लिए यह संभावना स्वीकार कीजिए नहीं माता शेष मुद्राए आप रख लीजिए मेरे लिए एक ही स्वर्ण मुद्र पर्याप्त है जय माता [संगीत] की जय माता की जय माता द देखो पला इतनी सारी मुद्राए मैं तो श्र धर के साथ प्रयास कर रहा था कि वो व्रत उसे स्वर्ण मुद्राएं देंगे किंतु मुझे लग रहा है कि ये सारी मुद्राएं हमें मिलने वाली हैं यह आपके लिए है हां हां सहयोगी हो तो कासा मुद्रा ही मिलेगी जो मिल रहा है प्रसन्नता पूर्वक स्वीकार करो हैं जी आप मुख्य पंडित तो आपके लिए आपके सहयोगी से दो गुना स्वीकार कीजिए बस दो कमसा मुद्रा [संगीत] है नैन सुख दुख हो रहा है मेरे नैनों को इस बड़े सेठ की बड़ी कंजूसी देखकर आप बड़े पंडित हैं बड़ी पूजा कराते हैं आपको धन देकर आपका अपमान नहीं कर सकता यह सब तो आपको साधारण सा लगता होगा फिर भी आप स्वीकार कीजिए चिंता मत करिए जी नगर के मुख्य पंडित होने के नाते सभी सेट इनसे पूजा कराते हैं दान दक्षिणा का लोभ नहीं है है ना पंडित जी हा हा उचित कहते हो तुम लाइए दे [संगीत] दीजिए चले भोला आज्ञा [संगीत] दीजिए गणेश जी नयन सुख और दोनों माता के जगराता पूजा करते थे परंतु दोनों में अंतर क्या भक्ति में लालच का कोई स्थान नहीं होता नयन सुख भक्ति नहीं केवल संभावना की लालच में भक्ति करते थे और वहीं श्रीधर जैसे भक्त केवल अपने आराध्य के आशीर्वाद के [संगीत] लिए क्या क्या देने को कहा था और दिया क्या कुछ भी [संगीत] नहीं बड़ा सेठ बनता है कंजूस कहीं का फिर कभी नेवता लेकर के आएगा तो सुनूंगा भी नहीं कम से कम इतना तो हुआ मैं श्रीधर के समान खाली हाथ नहीं आया एक फल मिष्ठान मेवा और साथ ही कांसे की दो मुद्राए मिली है [संगीत] मुझे कुछ नहीं से कुछ सही है ना हां उचित कहा तुमने कुछ नहीं सख कुछ सही लगता है सेठ जी को निचोड़ नहीं पाए नैन सुख [संगीत] जी और आज इनका झोला इनकी बुद्धि से भी हल्का है हल्का तो यजमान और उसका हृदय निकला भाग्यवान बहुत कंजूस है किंतु किंतु श्रीधर को देखो उसे तो कुछ भी नहीं मिला होगा देखो कैसी घोर निराशा लिखी है उसके मुख पर कुछ नहीं मिला [प्रशंसा] इसे प्रणाम कृपया मंदिर निर्माण हेतु चंदा दीजिए जी अवश्य देता हूं और अधिक चंदा चाहिए तो श्रीधर जी से मांगो आज मेरे पास कुछ नहीं है पर आज पाठ में जो भी संभावना मुझे मिलेगी वो कल मैं आपको अवश्य दे दूंगा अरे अरे सुनो भाई इधर आइए इधर अ चंदा चाहिए ना आपको इधर आइए जब जब मेरे पिताजी अति उत्साहित होकर कुछ करने चलते हैं तो अपना अपमान कराकर ही मानते हैं य श्रीधर भाई माता का जगराता करा कर के आए [संगीत] [प्रशंसा] हैं प्रणाम श्रीधर जी प्रणाम प्रणाम आप मंदिर के लिए सहयोग देंगे ना हां हां अवश्य देंगे क्यों नहीं देंगे और साधारण सहयोग नहीं स्वर्ण मुद्रा देंगे क्यों श्रीधर अे क्या हुआ श्रीधर शांत मत खड़े रहो सो मुद्रा दे दो इनको ये लीजिए लो हो गया अपमान आप खाली हाथ आए और श्रीधर काका के पास स्वर्ण मुद्रा अरे भाई सही से देख लो असली है या नकली यह तो असली स्वर्ण मुद्रा है आप यह वास्तव में देना चाहते हैं नहीं नहीं ये ये असली कैसे हो सकता [प्रशंसा] [संगीत] है अरे ये तो असली है नयन सुख जी किसने रखा था आपका नाम आपके नयन तो है पर आपके जीवन में सुखी नहीं है काका श्रीधर को मिली स्वर्ण मुद्रा और आपको कुछ नहीं श्रीधर जी फिर से विचार कर लीजिएगा या आप वास्तव में मंदिर को दान करना चाहते हैं इसमें विचार क्या करना और मैं यह स्वर्ण मुद्रा का क्या करूंगा मुझे कोई मोह नहीं माता रानी जो दे देती है वही मेरे लिए पर्याप्त है किंतु मंदिर के लिए यह स्वर्ण मुद्रा आवश्यक होगी का घर अच्छा बनना चाहिए जय माता की जय माता की श्रीधर स्वर्ण मुद्रा तुम्हें प्रिय नहीं और यदि किसी को देनी थी तो अपने सुख दुख के साथी पंडित नैन सुख को दे दी होती जो सुपात्र जिसे दान की आवश्यकता उसे ही दान देना चाहिए और वैसे भी जिसके भाग्य में होता है माता की कृपा से उसके पास पहुंच ही जाता है यह तो सनि अपमान [संगीत] है नन सुख आज फिर घर में भोजन नहीं मिलने वाला सीर तुम स्वर्ण मुद्रा लेकर के लौटे हो फिर ऐसे निराश मुख लेकर क्यों भला मैं ये स्वर्ण मुद्रा का क्या करता मुझे तो बस माता के दर्शन चाहिए और माता वहां पे अवश्य थी परंतु मुझे माता के दर्शन प्राप्त नहीं हुए अवश्य मेरी भक्ति में कोई कमी रह गई होगी किंतु इस बार मैं ऐसी भक्ति करूंगा जो भी कमी रह गई होगी वो सब मिल जाएगी लगता है उस दरिद्र के घर से स्वर्ण मुद्रा पाकर अनाप सनाप बढ़ा चढ़ाकर अनर्गल कुछ भी कहे जा रहा है इसका तो मानसिक संतुलन ही खो रहा है संतुलन तो एक और स्थान पर बिगड़ रहा है नैन सुख जी मां का क्रोध बढ़ता ही जा रहा है श्रीधर काका को माता के दर्शन हो या ना लेकिन मेरी माता के विलन के दर्शन आपको अवश्य होंगे नया न दुख जी स्वामी की भक्ति से मैं परिचित हूं किंतु भक्ति में अशांति यह मुझे चिंतित कर रही है [संगीत] स्वामी आप सदा कहते हैं अपना विश्वास अटूट रखो तो आज आप उदास क्यों [संगीत] [प्रशंसा] है आशा मत खोए स्वामी इसे माता का संकेत समझिए माता अवश्य कुछ अच्छा करने वाली है उचित कहा सुलोचना ने जो भी होगा वो बड़ा भी होगा और अच्छा भी किंतु श्री राम भक्त हनुमान भक्त के जीवन में कुछ बड़ा हो और भक्त शिरोमणि हनुमान का योगदान ना हो ऐसा कैसे हो सकता है अब उसके लिए आगे का मार्ग आपको ही तो खोलना है [संगीत] जय श्री राम यह क्यों भूलते हैं आप स्वामी कि माता की चरण धूनी रूपी आशीर्वाद तो प्राप्त है ना आपको कहाने सुलोचना है कि इस पूजा से माता का वि आशीर्वाद मिलता है तब तुम्हें कंजक पूजन अवश्य करूंगा ब्राह्मण [संगीत] देवता अब मैं भी देखता हूं कैसे होती है श्रीधर के घर कंजक पूजा मोह माया का त्याग ही भक्ति के परम सुख का मार्ग खोलता है

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...