Tuesday, 6 January 2026

श्रीधर को देनी होगी भक्ति की परीक्षा Sumbul Romiit Vighnaharta Ganesh Episode 856 Pen Bhakti

[संगीत] शक्ति बहरों की दृष्टि में कैसे नहीं आई अब और नहीं क्या करना होगा मां आप स्वयम य आई थी अपनी ममता भी आपने नु छावर की माता रानी आपने अपने इस भक्त के जीवन को धन्य कर दिया धन्य कर दिया आपने मिल गया [संगीत] संकेत असंभव कैसे चूक हो गई मुझसे वो अलौकिक शक्ति मेरे सामने से निकल गई सुलोचना यह सत्य है ना माता रानी स्वयं यहा आई थी ना स्वामी आप बड़े भाग्यशाली है माता ने आपको अपने आंचल की छाव दी इतना ही नहीं स्वयं अपने हाथों से जल दिया भोजन [संगीत] कराया मुझे क्षमा कर दीजिए माता भक्त श्रीधर जी अहंकार ने मेरी बुद्धि हर ली थी अब मुझे सब स्पष्ट दिख रहा है माता के होने का आभास हुआ है मुझे मुझे क्षमा कीजिए क्षमा हमें भी क्षमा कर दीजिए श्रीधर भैया सुलोचना तुम दोनों पर स्वयं माता की कृपा दृष्टि है इस पर विश्वास ना कर हमने बहुत बड़ी भूल की है आप दोनों पर माता की असीम कृपा देखने के बाद संदेह करने वाला स्वयं संदेह के घरे में आ जाएगा [संगीत] माता रानी आपकी असीम कृपा हुई चमत्कार हुआ है सुलोचना को भी माता रानी के दर्शन प्राप्त हुए भूस्वामी जी आपको भी आभास हुआ ना माता रानी के यहां होने का हां श्रीधर जी हां भाभी आपने भी वो चमत्कार देखा बस मैं ही अब भागा रह गया चमत्कार तो भैरो करेंगे मेरे साथ बस सूचना पहुंचा दूं इससे मुझे कई और स्वर्ण मुद्राए मिल जाएंगी माता रानी क्या भूल हो गई मुझसे जो मैं ही आपके दर्शन से वंचित रह गया माता ने कृपा की है आप पर स्वामी किंतु मेरे नैन उनके दर्शन तप ना हो सके मेरे हृदय की इच्छा अपूर्ण रह गई ना जाने कब मुझे यह सौभाग्य प्राप्त होगा इस जीवन में होगा भी या नहीं माता अब कैसी दुविधा है यह दुविधा नहीं भक्त शिरोमणि हनुमान यह मेरी परीक्षा है कभी कभी जब भक्त की भक्ति भगवान को पुकारती है तो उनको भी विधि के विधान के समान के लिए स्वयं को रोकना पड़ता है हदय तो कहता है मैं अभी जाऊ उसे दर्शन द किंतु मन जानता है समय से पहले कुछ प्राप्त नहीं होता इसलिए प्रतीक्षा करनी होगी मुझे जब तक व अपनी अंतिम परीक्षा में उत्तीर्ण होकर अपनी भक्ति के चरम का परिचय नहीं देता जो वचन उसने दिया उसे पूर्ण नहीं कर देता किंतु पुत्र श्रीधर मैं तुम्हें वचन देती हूं तुम्हें मेरे दर्शन का सुख अवश्य प्राप्त होगा श्री राम भक्त हनुमान आपको मेरी सहायता करनी होगी श्रीधर के पास जाकर उसे संभालना होगा उसे उसका वचन स्मरण कराना होगा अवश्य माता माता आपका भक्त निराश है हताश है जब तक मुझे आपके दर्शन प्राप्त नहीं होते तब तक मैं जय माता [संगीत] दी प्रणाम हे ब्राह्मण देवता देखिए ना कैसा दुर्भाग्य है मेरा माता रानी आई भी और मैं उनके दर्शन ना पा सका शांत हो जाओ श्रीधर शांत हो जाओ माता के मुख से निकले शब्द बाण के ही समान है एक बार निकल गए तो फिर पीछे नहीं हटते आपको माता के दर्शन का सुख अवश्य प्राप्त होगा किंतु आप अपना कर्म कीजिए अपना वचन निभाए मैं वचन देता हूं माता आगामी दशमी को भंडारा अवश्य करूंगा संपूर्ण ग्राम को निमंत्रण दूंगा आप सत्य कह रहे हैं उन्होंने वचन दिया है तो वो उसे अवश्य पूर्ण करेंगे किंतु मैं मूर्ख ज्ञानी भंडारे का वचन पूर्ण करने से पहले कृपा की आशा करने [प्रशंसा] [संगीत] लगा ब्राह्मण देवता पुनः मेरा मार्गदर्शन करने के लिए धन्यवाद अब बस भंडारा करना है मुझे किंतु कैसे स्वामी दशमी तो कल ही है तो कल ही होगा भंडारा यह समाचार देते ही वारे न्यारे हो जाएंगे मेरे साधक भैरव प्रसन्न होकर ढेरों स्वर्ण मुद्राएं देंगे [संगीत] मुझे कहा था मैंने श्रीधर के पलपल की सूचना चाहिए मुझे वो क्यों नहीं मिली क्रोध त्याग दीजिए भैर जी क्रोध त्याग दीजिए आपने बिल्कुल उचित व्यक्ति को चुना है अपने कार्य के लिए मैं समाचार लाया हूं च चमत्कार का [प्रशंसा] समाचार स्वामी धन तो क्या अन्न का एक दाना नहीं है हमारे पास फिर कल सब कुछ कैसे संभव होगा तुम चिंता मत करो हम है ना तुम्हारी सहायता के लिए मेरे पति भंडारी का आयोजन करने में तुम्हारी सहायता अवश्य करेंगे है ना स्वामी ना इधर उधर कहां देख रही हो बापू तो कब से जा चुके हैं मेरा विश्वास कीजिए भैरो मेरा विश्वास [संगीत] कीजिए तू आई और चली गई किंतु अगली बार वो शक्ति पैरों के अधीन होगी शांत भैरव शांत अवसर ढूंढो और चूट करो जैसा आपने कहा था सब कुछ स्वर्ण मुद्रा ही मिल जाती भोजन तो मिला नहीं नहीं मुद्राए नहीं दंड मिलेगा तुम्हें दंड क्यों मैं तो विलंब किया तुमने और उसका दंड यह है जो भी स्वर्ण तुमने पाया है वो सब कोयला बन जाए यदि फिर से स्व चाहिए तो चम से पहले मुझे सूचना देनी होगी जो भी स्वर्ण तुमने पाया है वो सब कोयला बन जाए हे ब्राह्मण देवता आपने हमेशा मेरा मार्गदर्शन किया आपको कोटि कोटि धन्यवाद अब बस इतना आशीर्वाद दे दीजिए कि मैं संकल्प में सफल हो जाऊ [संगीत] माता की भक्ति सब संभव करने की शक्ति [संगीत] देगी सखी मुझे भी क्षमा कर दो सखी भीतर आओ सखी भीतर आओ [प्रशंसा] आओ मैंने तुम्हें धिक्कार कर दूर किया था और तुम मेरा स्वागत कर रही हो तुम महान हो सखी महान माता रानी की कृपा है तुम दोनों पर तुमने मुझे क्षमा कर दिया तो अब आशीर्वाद स्वरूप मेरी संतान को उसका नाम दे [संगीत] दो वैष्णवी [संगीत] वैष्णवी [संगीत] तुम्हारी शमा ने मुझे माता रानी के आशीष का पात्र बना दिया सखी मेरी पीड़ा दूर हुई मैं पुनः अपनी संतान को आहार देने में सक्षम [संगीत] हुई [संगीत] जय माता जी जय माता [संगीत] [संगीत] जी सारा दिन कोयले में कैसे बदल [संगीत] गया व्यर्थ हो गया सब मिट गया हम निर्धन हो गए आए तो ठीक से थे नैन दुख जी यहां आके मुख अपना काला कैसे कर [संगीत] लिया मैंने तो पहले ही कहा था कहीं यह स्वर्ण की चमक कालिख में ना बदल जाए लो यह तो सत्य हो गया मैंने आपसे कहा था श्रीधर भैया से क्षमा मांग लीजिए किंतु आपने ऐसा किया नहीं अब बुगती है बापू अभी भी समय है चले जाइए और क्षमा मांग लीजिए अन्यथा कल बोर में पूरे गांव वालों के सामने क्षमा मांगनी पड़ जाएगी [संगीत] आपको भंडारा एक महीना पूजा में व्यर्थ करने के बाद भंडारा करने जा रहा है श्रीधर सुलोचना मां के दर पर देर है अंधेर नहीं माता रानी सब पर कृपा करती है और मुझे पूरा विश्वास है इस बार मुझ पर भी करेगी मुझे माता रानी के दर्शन अवश्य प्राप्त [संगीत] होंगे धन्यवाद श्री राम भक्त हनुमान भक्त श्रीधर को बस इतने ही मार्गदर्शन की आवश्यकता [प्रशंसा] थी जय माता की श्रीधर पंडित जी जय माता की पधारिए श्रीधर जी आपने माता रानी की पूजा मेरे कहने पर की थी उसकी उचित संभावना स्वीकार [संगीत] कीजिए मैंने पूजा करवाई थी उसके लिए मुझे तो कुछ नहीं दिया इस भूस्वामी ने मैं आपकी भक्ति और पूजा से इतना प्रभावित हूं कि आज के बाद मेरे घर में सारी पूजा पाठ और कीर्तन का दायित्व मैं आपको सौंपना चाहता हूं भैर ने स्वर्ण छीना पुत्र ने सुख छीना पत्नी ने भोजन छीना किंतु श्रीधर तुमने जो किया वह तो सबसे बुरा है मेरे हाथ से मेरा निवाला ही छीन लिया नहीं नहीं यह मैं कदा प नहीं होने दूंगा क्षमा कीजिएगा भूस्वामी जी मैं यह सब लेकर अपने संकल्प का अपमान नहीं कर सकता चावल के एक दाने का संकल्प है आपसे विनती है मेरा संकल्प मुझे पूर्ण करने [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] दीजिए जय माता की उचित है किंतु आप मुझे भंडारे में आपकी सहायता करने का अवसर तो दे सकते हैं ना मैं भंडारे का आयोजन कर देता हूं धन्यवाद भूस्वामी जी मैं आपकी इस दानशी की भावना को समझ सकता हूं किंतु आपको भी मेरे वचन और संकल्प को समझना होगा एक महापर्व भंडारे के लिए मैंने भी संभावना एकत्र करने की भूल की थी किंतु मैं समझ चुका हूं भंडारे के लिए मुझे धन की नहीं माता रानी के आशीर्वाद और उन पर विश्वास की आवश्यकता है किंतु धर जी माता रानी पर मेरा विश्वास अडिग है कितना मूर्ख है ये विश्वास से नहीं भंडारा होता है धन धान्य से और जिसके पास वह नहीं होता वह कभी भंडारा नहीं करा सकता इसलिए कल यदि भंडारा हुआ तो वह अवश्य चमत्कार ही होगा ओ हो हो यह सूचना साधक भैरव को शीघ्र पहुंचा चाहिए मुझे वो अलौकिक शक्ति मेरी शक्ति बनेगी भैरव की शक्ति पहली बार समय पर सूचना दी है प्रसन्न किया है [संगीत] तुमने भैरव पुरस्कार देता है तुम्हारे कोश का कोयला स्वर्ण बन जाएगा जाओ आनंद मनाओ जय भैरो की जय भैरो श्रीधर की भक्ति और माता पर उसका विश्वास चरम पर था किंतु एक और श्रीधर माता के दर्शन को आतुर था और वही दूसरी ओर भैरव माता को अपने अधीन करने की चेष्टा में था किंतु माता रानी को इसमें क्या चिंता वो तो शक्ति स्वरूपा है भैरव साधक भले ही हो किंतु उसमें इतनी शक्ति नहीं हो सकती कि वह माता रानी को अपने अधीन कर ले दुष्टता जब हृदय में घर बना लेती है तो अति विश्वास से ग्रसित करती है फिर उस दुष्ट को अपनी और दूसरों की शक्ति का अनुमान लगाना कठिन हो जाता है और यही हो रहा था नयन सुख एवं बहरों के साथ सुलोचना में ऐसा कोई नहीं जो माता रानी का प्रसाद पाने को आतुर ना हो सभी आएंगे सुलोचना स्वामी ना खिलाने के लिए पत्तल ना पकाने के लिए पात्र और कहीं से मैं ले भी आऊ तो कुछ पकाने के लिए कहां है हमारे पास आपने किस विश्वास पर सभी को आमंत्रित कर लिया स्वामी माता रानी के विश्वास पर परंतु भंडारा हमें कराना है मुझे भय है लोग हसेंगे हम पर जग हंसाई होगी कल हमारी जब हम घर बुलाकर किसी को कुछ दे ना सकेंगे जो भक्त संपूर्ण भाव से भगवान पर विश्वास करता है उस पर सदा भगवान की कृपा दृष्टि बनी रहती है और उस भक्त के प्रत्येक कार्य भगवान स्वयं पूर्ण कराते हैं इसलिए श्रीधर के भंडारे को संपन्न कराना अब मेरा दायित्व है माता आप मुझे भी तो भक्ति और सेवा का अवसर प्रदान करें मैं भी आपके भंडारे में कुछ भाग निभाना चाहता हूं धन्यवाद माता [संगीत] धन्यवाद व्यक्ति के कर्म और विचार ही फल निर्धारित करते हैं चाहे वह अच्छा हो या बुरा

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...