[संगीत] पृथ्वी पर यह कहीं भी शिक्षा लेता मैं जाने देती किंतु सूर्यलोक नहीं मैं एक बार अपने पुत्र को खो चुकी हूं फिर नहीं खोना [संगीत] चाहती प्रणाम देव गुरु शुभ मस्त प्रणाम देव गुरु पुत्री अंजना गुरु ही वह ज्योतिर पुंज होता है जो शिष्य के संपूर्ण जीवन के मार्ग को आलोकित और निकंठ कर देता है शिष्य के जीवन को संपूर्णता प्रदान करता है तुम मां हो क्या तुम चाहती हो कि तुम्हारी संतान गुरु ज्ञान के बिना अपूर्ण रहे अंजना मां की ममता यदि संतान के भविष्य के मार्ग में बाधा बन जाए तो वो ममता नहीं स्वार्थ बन जाती है और तुम्हें तो अपने पुत्र पर गर्व होना चाहिए हनुमान का जीवन संसार के लिए क्या तुम नहीं चाहती हो कि हनुमान के जीवन का उद्देश्य पूर्ण [संगीत] [संगीत] [संगीत] हो [संगीत] जाओ पुत्र अपने गुरुदेव के पास [संगीत] जा अपने जीवन की पूर्णता प्राप्त करो अपनी शिक्षा दीक्षा पूर्ण करकर मैं तुम्हारी प्रतीक्षा करू [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] प्रणाम पिता श्री अपने गुरु की आज्ञा का सदैव पालन करना पुत्र मेरा शुभ आशीष तुम्हारे साथ है [प्रशंसा] [संगीत] प्रणाम देव गुरु गुरु की सेवा ईश्वर की सेवा होती है पुत्र आयुष्मान प्रणाम मां आशीर्वाद दीजिए मुझे [संगीत] अपनी मां का स्मरण रखना जब भी मेरा मन तुम्हारे मुख चंद्र को देखने के लिए व्याकुल होगा मैं आकाश में स्थित इस चंद्र को देख लूंगी हां मां मैं भी चंद्रदेव को देखकर आपको स्मरण कर लिया करूंगा मां प्रणाम नानी आयुष्मान भव पुत्र प्रणाम धाई मा पुत्र हनुमान अति तीव्रता से जाओ सूर्यास्त होने को है हां पिता श्री आज मैं सर्वाधिक तीव्र गति से जाऊंगा ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान मात पिता से मिली अनुमति एकत्रित की अपनी शक्ति लक्ष्य लिया मन में ठान हनुमत हुए अति गति मान पृथ्वी से सूर्य की दूरी अल्प समय में करेंगे पूरी हनुमत ऐसे पग रखते जिनके विशाल पद चिन्ह बनते ये गाथा महाबली हनुमत की झ कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनाथ जय जय जय महाबली हनुमान ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान उर्वशी को मुक्त कराया यक्ष राज से उसे बचाया हनुमत पुत्र धर्म निभाते पुलकित होकर स्वर्ग को जाते अब ना होगी कोई बाधा मुक्त होंगी अंजन माता मातृ प्रेम वो अमूल्य धन जिससे तत होता जीवन ये गाधा महाबली हनुम की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमा हृदय पर पत्थर पाशा रखकर भेज तो दिया है इतनी दूर अपने लाल को किंतु अपने मन को कैसे समझाऊ अब ना जाने कब तक लौट कर आएगा वो हे प्रभु उसकी रक्षा [संगीत] करना अंजना [प्रशंसा] पुत्र की भलाई के लिए माता-पिता को त्याग तो करना ही पड़ता है आप पिता है जी कड़ा करके निर्णय ले सकते हैं किंतु मां का मन कोमल होता है वो कभी कठोर नहीं हो सकता इतने दिनों के बाद पुत्र का साथ मिला और उसे पुनः स्वयं से दूर भेजना पड़ा तुम्हारी ही इच्छा थी ना कि सूर्यदेव जैसे ज्ञान के भंडार जगत को प्रकाश और ऊर्जा देने वाले तुम्हारे पुत्र के गुरुदेव हो यह जो भी हो रहा है यह तुम्हारे उस प्रार्थना का फल है जो एक दिन तु तुमने भगवान से की [संगीत] थी यह क्या लिखा है प्रिय ये मेरी उन कामनाओं की सूची है जो मैंने हमारे पुत्र के उज्जवल भविष्य के लिए सोचा है मारुति को शिक्षा ग्रहण करने के लिए सर्वोत्तम गुरु के पास भेजना फिर तो निश्चित ही तुमने सर्वोत्तम गुरु का चयन कर लिया होगा प्राणियों को मोक्ष देने वाले स्वयं भगवान सूर्य उनसे उत्तम गुरु हमारे पुत्र के और कौन हो सकता है तुम्हारा पुत्र तुम्हारी उस प्रार्थना को पूर्ण करने गया है अंजना किंतु क्या सूर्यदेव हनुमान को अपने शिष्य के रूप में स्वीकार [संगीत] करेंगे तुमने जब भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना की है तो उन पर विश्वास रखो हम यहां से मात्र इतनी प्रार्थना कर सकते हैं कि सूर्यदेव भगवान हनुमान को शिक्षा प्रदान करने के लिए मान जाए हे जगत प्रकाशक सूर्यदेव हमारे पुत्र को शिष्य के रूप में स्वीकार [संगीत] करें मुझे समय रहते सूर्य देव तक पहुंचना होगा उनके परिक्रमा पद को पूर्ण करने के पूर्व ही मुझे उनका शिष्य बनना है अन्यथा मां और पिताश्री को बहुत दुख होगा मां ने तो कैसे कैसे अपने मन को मनाकर मुझे इतनी दूर तक भेजा है देव महाराज केसरी और अंजना देवी ने जो प्रार्थना की थी उसी के अनुसार कदाचित हनुमान आपको अपना गुरु बनाने के लिए आ रहे हैं हनुमान ने ही आपको लंकेश रावण के दास से मुक्ति दिलाई थी रावण के दासत से मुक्ति दिलाने के लिए मैं सदैव हनुमान का आभारी [संगीत] रहूं किंतु शिक्षा और शक्ति दोनों के कार्यक्षेत्र भिन्न होते हैं शक्ति से कभी शिक्षा प्राप्त नहीं होती शिक्षक छात्र को कभी आभार पूर्वक शिक्षा नहीं देता यह तो उसका कर्तव्य होता है इसी प्रकार छात्र को भी शिक्षा प्राप्त करने के लिए श्रद्धा संयम अनुशासन गंभीरता और समर्पण की आवश्यकता होती हनुमान को मेरा शिष्य बनने के लिए पहले अपनी योग्यता को सिद्ध करना होगा प्राण वल्लभ हनुमान ने तो सबके लिए इतना कुछ किया फिर भी उनके साथ ऐसा क्यों हो रहा है हा प्रभु जिस हनुमान ने सृष्टि को प्रलय से बचाया असुरों का संहार किया नव ग्रहो को मुक्त कराया उसे भी अपने लिए योग गुरु प्राप्त करने में समय सीमा और अन्य कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा हनुमान ने तो सव को मुक्त करके उन पर उपकार भी किया फिर भी सूर्यदेव हनुमान को अपनी योग्यता सिद्ध करने की बात कह रहे हैं आप सबके नारी मन की ममता मैं समझ सकता [संगीत] हूं किंतु देवियों यह भली बात ही समझ लीजिए कि हनुमान को संसार में बड़े बड़े कार्य करने हैं और उसके लिए हनुमान को अभी से बड़ी कठिनाइयों में पड़कर उन पर विजय पाना सीखना है स्वर्ण को जितना तपाया जाए उसकी चमक उतनी ही बढ़ती है इसी प्रकार हनुमान को भी पग बक पर कठिनाइयों की आंच में दबकर कुंदन बनना है और गुरुदेव का ज्ञान तो वो अग्नि है जिसमें तपक ल भी स्वर्ण के समान चमक उठता है इसीलिए योग्य गुरुदेव को पाना बड़ा कठिन है जिसने योग्य गुरुदेव को पा लिया उसका जीवन धन्य हो गया पूर्ण हो गया ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाब हनुमान पूर्व को मुक्त कराया सूर्यलोक तो आ गया मुझे शीघ्र ही सूर्यदेव के समक्ष पहुंचना होगा सूर्यदेव के विश्राम हेतु जाने से पूर्व तक यदि उन्होंने मुझे अपने शिष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया तो बड़ा अनर्थ हो जाएगा देव गुरु ने कहा था कि सूर्यास्त के पश्चात मुझे जीवन भर परर गुरुदेव नहीं मिल [संगीत] पाएंगे कहा जा रहे हो बालक मुझे सूर्यदेव के पास ज्ञान प्राप्त करने जाना है आइए इतने सारे बालक लगता है यह भी शिक्षा ग्रहण करने के लिए आए [संगीत] [संगीत] [संगीत] हैं ना जाने क्या होगा सूर्यदेव मुझे शिष्य के रूप में स्वीकार करेंगे भी या [संगीत] नहीं इन्हे क्या हुआ है यह बालक निराश और दुखी प्रतीत हो रहे [संगीत] हैं क्या हुआ मित्र तुम इतने दुखी क्यों हो मैं सूर्यदेव से शिक्षा ग्रहण करने का स्वप्ने लिए यहां आया था किंतु उन्होंने शिष्य के रूप में मेरा चयन नहीं [संगीत] किया मित्र अपने सपनों को साकार करने के लिए तुम किसी अन्य गुरु के पास भी जा सकते हो हां जा तो सकता हूं तो फिर दुखी क्यों हो रहे हो अन्य गुरु के पास जाकर अपने जीवन के उद्देश्य को पूर्ण [संगीत] करो मेरे दुखी हृदय को शांतोना देने के लिए तुम्हें धन्यवाद मित्र [संगीत] प्रणाम [संगीत] बालकों मुझसे शिक्षा ग्रहण करने के लिए योग्यता के जिस मापदंड पर आप लोगों की परीक्षा ली जाने वाली उसमें उत्तीर्ण होने वाले बालक ही मेरे शिष्य बनेंगे जो उसमें असफल रहेगा उन बालकों को वापस लौट जाना [संगीत] होगा अच्छा वो बालक परीक्षा में अनुत्तीर्ण रहा इसीलिए दुखी होकर लौट रहा [संगीत] था यह देख रहे हैं यह समय सूचक काल स्तंभ है शिष्य बनने की चयन प्रक्रिया इस स्तंभ पर प्रकाश रहने तक चलेगी इस स्तंभ के अंधकार में डूबने के साथ ही सूर्यदेव अपने विश्राम स्थल की ओर रवाना होंगे तब शेष बालकों को पुनः कल चयन प्रक्रिया के लिए आना [संगीत] होगा किंतु मुझे तो कल आने से कोई लाभ नहीं होगा मुझे सूर्यदेव से अनुरोध करना होगा [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] प्रणाम सूर्य देव प्रणाम अरुण [संगीत] देव हनुमान पुनः सूर्य लोक में कैसे आना हुआ सूर्यदेव मैं ज्ञान प्राप्ति की याचना लेकर आपकी शरण में आया हूं पहले मां और पिताश्री मुझे ऋषिवर मतंग जी के पास ले गए [संगीत] थे उसके पश्चात पूज्य सप्तऋषि गणों ने कहा कि सूर्यदेव की शरण में जाओ किंतु क्या तुम मेरा शिष्य बनने के योग्य हो हनुमान ज्ञान प्राप्त करने और प्रदान करने के लिए शिष्य और गुरु दोनों का योग्य होना आवश्यक है मुझसे ज्ञान प्राप्त करने के लिए तुम्हें अपनी योग्यता सिद्ध करनी होग जाओ और वहां पंक्ति में सबसे पीछे अपना स्थान ग्रहण करो तुमसे पूर्व जो छात्र आए हैं तुमसे पहले मुझे इनकी परीक्षा लेनी है किंतु सूर्यदेव मेरे पास मात्र जब तक तुम्हारा समय नहीं आता अपने स्थान पर जाकर प्रतीक्षा करो इतने सारे छात्र मेरा समय आने तक तो यह स्म अंधकार में ही डूब जाएगा और सूर्य देव के विश्राम का समय हो जाएगा क्या करूं [संगीत] मैं
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