[संगीत] [संगीत] ना य तो क्रूरता है शनिदेव [संगीत] की बालक पर इस तरह प्रहार कर रहे हैं इससे बहुत बड़ा शत्रु हो कोई यह अन्याय ही नहीं अत्याचार है शनिदेव का वो तो सूर्यदेव को दिए हुए वचन से बंधा हुआ है हनुमान अन्यथा अभी तक तो शनिदेव का अहंकार तोड़ चुका होता शनिदेव बहुत ही अनुचित कर रहे हैं हनुमान के साथ हां देव शनिदेव अपने क्रोध और अहंकार में न्याय और अन्याय का भेद ही भूल गए हैं किसी नि शस्त्र पर वार करना न्याय है अब आप ही कुछ कीजिए सूर्यदेव तुम्ह अपनी अड़कता पर बहुत घमंड है अनुमान देखो कैसे तुम्हारा घमन चूर चूर कर तुम्हें हमारे मध्य से हटाता [संगीत] हूं इसका र तुम सह नहीं पाओगे हनुमान वायु की भाति उड़ा ले जाएगा ये तुम्हे [संगीत] कैसा तीव्र प्रकाश है हनुमान [संगीत] गुरुदेव प्रणाम गुरुदेव गुरुदेव आप चिंता मत कीजिए मैं आपके दिए हुए वचन को पूर्णत से निभाऊंगा मैं शनिदेव पर वार नहीं करूंगा मैं जानता हूं किंतु मुझे दिए इस वचन के कारण तुम बहुत अन्याय सह रहे हो यह पाप है इसलिए मैं तुम्हारा गुरुदेव तुम्हें इस अन्याय को और सहने नहीं दूंगा मैं तुम्हें इस वचन के बंधन से मुक्त करने के लिए आया हूं ये आप क्या कह रहे हैं गुरुदेव अमृत की सुरक्षा के लिए चंद्रदेव के उदित ना होने के कारण संतप्त जगत के कल्याण के लिए और तुम्हारी माता देवी अंजना के व्रत के पूर्ण करने के लिए एवं मेरे पुत्र शनिदेव के अहंकार का अंत करने के लिए मैं सूर्यदेव तुम्हे उस वचन से मुक्त करता हूं जाओ जाकर शनिदेव से युद्ध करो और जगत का कल्याण करो यह मेरी अनुमति ही नहीं आज्ञा भी है जो आज्ञा [संगीत] गुरुदेव ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान करते विनय गुरु से हनुमन वचन तात के बनते बंधन सूर्य देव जग अंतर्यामी है सर्वज्ञ जगत हित कामी पुत्र शिष्य के मध्य में आए अपनी महिमा कैसे घटाए महा शेष की चिंता हरत दिए वचन से मुक्त है करते महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय बाब हनुमान जय लंकेश जय लंकेश जय लंकेश जय [संगीत] लंकेश प्रणाम लंकेश प्रणाम स्वामी प्रणाम महाराज अनुमान लगाइए कि रावण क्या लेकर आया है लंकेश दशानन रावण ने एक ऐसा कार्य किया है जो युगों तक रक्ष कुल में किसी राजा ने नहीं किया अमृत प्राप्त किया है हमने हां महारानी अमृत प्राप्त किया है हमने यह रावण का ही प्रताप है कि ना एक बूंद रक्त बहा ना युद्ध हुआ और अमृत अमृत प्राप्त हो गया हमें आपकी सुनी होती तो अमृत क्या कतक नहीं होता रावण को स्वामी मैंने सदैव आपकी सुरक्षा एवं हित के लिए सोचा है मैं प्रसन्न आपकी इतनी बड़ी विजय पर जो आपने बिना किसी युद्ध के प्राप्त की है लंकेश अमृत कलश की प्राप्ति का अर्थ है रक्ष कुल का चरमोत्कर्ष य देवताओं के विरुद्ध आपकी अपार उपलब्धि है अपार दशानन जय लंकेश ज जय लंकेश बधाई हो लंकेश बधाई हो यह अमृत कलश है कल महा पूर्णिमा के दिन अमृत में उबाल आएगा तब हरि सभा में परिजनों एवं सभासदों के समक्ष रावण इस अमृत का पान करेगा और सबसे अध्य हो जाएगा हां स्वामी आप संपूर्ण भव्यता के साथ इस अमृत का पान करेंगे मैं अभी जाके सारी व्यवस्था करती हूं देवताओ ये अमृत नहीं तुम्हारी पराजय है पराजय और असुरो की होगी तीनों लो पर आप विजय ही विजय रावण है हम मुझे भ्रमित करने के लिए तुमने यह तीव्र प्रकाश की माया र तो हनुमान मेरे समक्ष तुम्हारी कोई भी माया नहीं टिकेगी शनिदेव आपके पिता श्री और मेरे गुरु सूर्यदेव मुझे आशीर्वाद देने आए थे उन्होंने मुझे वचन के बंधन से मुक्त कर दिया है कोई बात नहीं समस्त देवताओं के बात वो भी मेरे विरुद्ध हो गए इसम आश्चर्य ही कैसा किंतु न्याय के युद्ध में मैं एकाकी ही पर्याप्त हूं हनुमान शनिदेव मैं आपसे करवत विनती करता हूं अब सूर्यदेव ने वचन मुक्त कर दिया फिर किस बात की विनती मैं यहां युद्ध करने के उद्देश्य से नहीं आया हूं आप अपना यह क्रोध और अहंकार त्याग दीजिए और चंद्रदेव को क्षमा कर दीजिए चंद्रदेव को मुझे सौप दो और चले जाओ यहां से फिर कोई युद्ध नहीं होगा ऐसा नहीं हो सकता तो फिर विनती की भाषा छोड़ो और युद्ध करो मुझसे तो संभालो मेरा [संगीत] वार शनिदेव यदि मात्र यही समस्या का निधान है तो मैं युद्ध करने के लिए प्रस्तुत हूं किंतु मैं चंद्रदेव के साथ आपको बल प्रयास करने नहीं दे सकता प्रतीत होता है कि तुम्हें पाठ पढ़ाना ही होगा आज मेरी मां के व्रत का तृतीय दिवस है आज पूर्णिमा के दिन मैं अपनी मां का व्रत पूर्ण करा के ही रहूंगा चंद्रदेव को आपकी दृष्टि से बचाकर चंद्र उदित करा कर ही रहूंगा शनिदेव मैं मेरी मां की कुशलता के लिए कुछ भी करूंगा कोई भी बाधा मुझे मेरे निश्चय से गा नहीं सकती हनुमान तुम्हारे हठ ने मुझे तुम पर दृष्टि पात करने के लिए विवश कर दिया है हनुमान मेरी दृष्टि पात का प्रभाव तभी होगा जब मैं तुमसे मेरी दृष्टि पात से अप प्रभावित रहने वाला वरदान वापस लेल शनिदेव आप देव हैं मुझसे बड़े हैं आपने अपनी इच्छा से मुझे वरदान दिया था और अपनी इच्छा से ही ले [संगीत] लीजिए मेरे लिए तो मात्र मेरी मां का व्रत पूर्ण कराना है मेरी मां की वचन की लाज रखनी है सारे संसार का संताप मिटाना है शनिदेव कदाचित आप भूल रहे हैं दिए हुए वरदान स्वयं वापस नहीं लिए जा सकते मैं शनि देव हूं मैं कुछ भी कर सकता [संगीत] हूं मुझे आपसे सीखने की आवश्यकता नहीं है शनिदेव आप मेरे प्राण ले लीजिए किंतु चंद्रदेव को क्षमा कर दीजिए मेरी मां को जीवन दान मिल जाएगा जो तुम चाहते हो वो कुछ नहीं होगा हनुमान जो भी मेरे मार्ग में आएगा उसे दंड अवश्य भोगना होगा वरदान त्यागने के लिए प्रस्तुत हो जाओ महा हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान कुपित हो गए शनि भगवान वापस लेंगे दिए वरदान हनुमत और सुमेरु का नाश चंद्र की रक्षा वचन विनाश कठिन क्रूरता भरा कर्म यह महा वि घाती शनि का निश्चय चकित देवता चिंतित माता होनी में क्या लिखा विधाता महाब हनुमत की रच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान देव गुरु यह क्या अनर्थ कर रहे हैं शनिदेव अपने ही दिए हुए वरदान को यह वापस कैसे ले सकते मुझे तो प्रतीत होता है ण दे पर उनकी ही दशा का प्रकोप चल रहा है इसीलिए तो उनकी मति भ्रष्ट हो गई है जो न्याय और अन्याय में भेद भूल रहे हैं [संगीत] [संगीत] अब होगा तुम्हारा [संगीत] अंत बड़ी ही घातक है शनि देव की दृष्टि जब निर्दोष हनुमान पर य अपना क्रोध इस प्रकार निकाल रहे हैं तब मुझ पर तो इनके प्रकोप का पर्वत ही टूट [संगीत] पड़ेगा सावधान चंद्रदेव यह क्या शनिदेव ने तो मुझ पर भी आक्रमण कर दिया अब मैं क्या [संगीत] करूं [संगीत] [संगीत] हनुमान [संगीत] हनुमान मुझे क्यों बचाया हनुमान मेरी करनी का दंड मिलने दिया होता मुझे आप ऐसा मत कहिए चंद्रदेव आपकी रक्षा करना तो मेरा प्रथम उद्देश्य था इसीलिए मैं आपको यहां ले आया मुझे मेरी मां के वचन को निभाना है किंतु जो कुकर्म मैंने किया है उसके लिए तो मुझे कोई भी दंड दिया जाए वो कम ही होगा मुझे बहुत गलानी हो रही है स्वयं पर चंद्रदेव आप इतने दुखी मत होइए आपने इतना बड़ा कुकर्म नहीं किया है आपने जो भी किया सब शनिदेव की दशा के प्रभाव में ही किया प्रभाव किसी का भी हो हनुमान किंतु कृत तो मैंने ही किया है मुझे अपने मन को नियंत्रित रखना चाहिए था तुम सब पर भी क्रोधित हुआ मैं फिर भी तुम मेरी रक्षा कर रहे हो हनुमान बहुत-बहुत आभार हनुमान आभार तो मुझे आपका करना चाहिए चंद्रदेव जब आप उद तो मेरी मां का व्रत पूर्ण करेंगे उनके प्राणों की रक्षा करेंगे अवश्य हनुमान ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान मन में भर गया महा विषद चंद्र देव करते पछता असफलता से होते विचलित अत्र अनुसया नंदन चिंतित चंद्र को मारुति धैर्य दिलाते पूर्ण उदय का ध्यान कराते चंद्र पूर्णिमा का दिन आया मिट पाएगी क्या शनि छाया था बली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान हनुमान चंद्रदेव उदित नहीं होंगे दंडित होंगे और साथ में दंडित हो ग तुम भी अब तुम दोनों मुझसे नहीं बच सकते चंद्रदेव चंद्रदेव आप चिंता मत कीजिए हनुमान है आपके [संगीत] [संगीत] साथ अपनी तीव्रता से अधिक समय तक तुम चंद्रदेव को सुरक्षित नहीं कर सकते हनुमान इनके उदित होने का तो प्रश्न ही नहीं उठता क्योंकि क्योंकि चंद्रदेव के समस्त सहायक चाहे व तुम हो ज इनके उदित होने में सहायक बनने वाले वत एवं मृत हो सभी मेरे कोप का भाजन बनेंगे मैं वृत और ऋत को नष्ट कर दूंगा नहीं शनिदेव ऐसा मत कीजिए रित और वृत ने आपका क्या अहित किया है फिर किसलिए आप उन्हें दंडित करेंगे चंद्रदेव आपके सभी सहायक चाहे वो आपके मित्र हो यह वंशज मैं सबको समाप्त कर दूंगा आज मैं समस्त चंद्रवंश का नाश कर दूंगा चंद्रदेव आपको मैं महादेव के भाल से उतार दूंगा
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