Tuesday, 6 January 2026

सूर्यदेव ने हनुमान को शिक्षा देने से मना क्यों किया Nirbhay Mahabali Hanuman Episode PenBhakti

[संगीत] जाओ और वहां पंक्ति में सबसे पीछे अपना स्थान ग्रहण करो तुमसे पूर्व जो छात्र आए हैं तुमसे पहले मुझे इनकी परीक्षा लेनी है किंतु सूर्य देव मेरे पास मात्र अमान जब तक तुम्हारा समय नहीं आता अपने स्थान पर जाकर प्रतीक्षा [संगीत] करो मेरा समय आने तक तो यह स्तंभ अंधकार में ही डूब जाएगा और सूर्यदेव के विश्राम का समय हो जाएगा क्या करूं मैं अब तुम आओ पुत्र प्रणाम सूर्य देव प्रणाम अरुण देव तुम मेरे शिष्य क्यों बनना चाहते हो मेरे पिताजी जाते थे उनका पुत्र आप जैसे महान विद्वान से शिक्षा ग्रहण करें तो तुम यहां अपने पिता की इच्छा पूर्ण करने आए हो जी पुत्र अपने पिता से क्षमा प्रार्थना के साथ कहना वो तुम्हें किसी और गुरु के पास भेजे अब तुम यहां से जा सकते हो इसने ऐसा क्या कह दिया जो इसका चयन नहीं हुआ मुझे भी तो मां और पिता श्री ने ही भेजा [संगीत] है हनुमान जब तक तुम्हारा समय नहीं आता अपने स्थान पर जाकर प्रतीक्षा करो [संगीत] जी कहीं सूर्यदेव के विश्राम का समय ना हो [संगीत] जाए ये सूर्य देव ऐसा क्यों कर रहे हैं देवाधि देव यदि हनुमान को आज उसके गुरुदेव नहीं मिले तो वे नारायण के नर अवतार में उनकी सहायता कैसे करेंगे धैर्य रखे देवी सूर्य देव की कठोरता अकारण नहीं उनकी इस कठोरता से ही नम नम शिवाय हनुमान को कुछ अच्छा सीखने को मिलेगा नम शिवाय ना जाने क्या होगा हनुमान का बच अंत में अल्प अवकाश शीन है महाकाल स्तंभ प्रकाश हनुमत हृदय में छाया संशय अपूर्ण रहना का आशय शेष रूप में उन्हे अपनाए तब सूर्य भीम पर जाए गुरु कृपा से रहना वंचित हो रहे हैं हनुमत चिंति मित्र हनुमान क्या तुम भी यहां शिक्षा ग्रहण करने सूर्यदेव के पास आए हो अरे मित्र जयन तुम भी यहां मैं भी यहां सूर्यदेव के पास शिक्षा ग्रहण करने ही आया [संगीत] हूं इतने छात्रों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है हे प्रभु सूर्यदेव मुझे स्वीकार कर ले अपने शिष्य के रूप में हनुमान तुमने तो कितने बड़े-बड़े कार्य किए हैं और तुम्हें तो सबका स्नेह भी प्राप्त है तुम्हारा चयन तो ही [संगीत] [संगीत] जाएगा सब तो लौट लौट कर जा रहे हैं इनके माता-पिता भी निराश हो जाएंगे अपने पुत्र की असफलता देखकर कहीं मेरे भी नहीं नहीं हे प्रभु मुझे गुरुदेव मिल जाए जैसे धरती पर मेरे मित्रों को मिले [संगीत] हैं प्रणाम गुरुदेव मित्र हनुमान को समय रहते गुरुदेव मिल पाएंगे क्या मुझे लगता है कि अवश्य मिल जाएंगे सूर्यदेव को अपना गुरुदेव बना पाना सहज नहीं है मित्र यदि वह तुमसे कुछ ज्ञान ले लेता तो उसे अवश्य सफलता मिल जाती [संगीत] [प्रशंसा] क्या हुआ यह कैसी ध्वनि थी मुझे लगता है यह किसी हिंसक पशु की ध्वनी थी निकट ही घने वन है ना मुझे तो लगता है वहां कोई हिंसक पशु आ गया [संगीत] है [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] बालकों सूर्यास्त होने वाला है अंधकार गिरने से पूर्व ही तुम सभी को अपने घर लौट जाना चाहिए जो आ आ गया गुरुदेव चलो मित्रों चलते हैं चलो चलो मित्रों अब तुम आओ [संगीत] पुत्र प्रणाम सूर्यदेव प्रणाम अरुणदेव गव मुझे यह बताओ कि तुम मुझे अपना गुरु क्यों बनाना चाहते वो इसीलिए सूर्यदेव क्योंकि एक तो मैं आपके सहायक का पुत्र हूं और दूसरा कि आपसे शिक्षा पाना मेरे लिए गर्व की बात है पुत्र शिष्य को भी इस योग्य होना चाहिए कि गुरुदेव के लिए भी गर्व की बात हो उचित होगा कि तुम घर को लौट [संगीत] जाओ आश्चर्य है अरुण देव के पुत्रों को भी मना कर दिया इन्होंने [संगीत] तो अब तुम आओ [संगीत] पुत्र [संगीत] अब तो कुछ ही क्षण शेष है मेरा समय आने से पूर्व ही यह काल स्त अंधकारमय हो [संगीत] जाएगा [संगीत] पुत्र हनुमान स्मरण रहे तुम्हारे पास गुरुदेव को ढूंढने के लिए अल्प समय ही शेष है सूर्यास से पूर्व ही तुम्हें गुरुदेव को ढूंढकर उन्हें स्वयं को शिष्य के रूप में ग्रहण करने के लिए मनाना [संगीत] होगा [संगीत] [संगीत] शमा करें सूर्यदेव तुम कैसे आ गए हनुमान मैंने तुमसे कहा था ना अपना समय आने तक प्रतीक्षा करो क्षमा करें देव मुझे प्रतीक्षा करने में कोई आपत्ति नहीं है किंतु मुझे आज ही आपके विश्राम स्थल पर जाने से पूर्व ही गुरु दीक्षा प्राप्त करनी है हनुमान मैं अपने अन्य शिष्यों के साथ अन्याय नहीं कर सकता वो तुमसे पहले आए तो उन्हें छोड़कर मैं पहले तुम्हें दीक्षा कैसे दे सकता हूं देव गुरु ने बताया था यदि आज ही मुझे गुरु नहीं मिले तो मैं पूर्ण जीवन भर बिना गुरु के ही रह जाऊंगा और गुरु के बिना तो जीवन अपूर्ण रहता है और फिर मैं उनसे भी नहीं मिल पाऊंगा जिनका कार्य करने के लिए मेरा जन्म हुआ है इसीलिए मेरी आपसे कबत प्रार्थना है कि आप अन्य छात्रों से पूर्व मुझे गुरु दीक्षा दे हनुमान तुम मुझ तक पहुचने के पूर्व अपनी परीक्षा में अनुत्तीर्ण हो गए हो परीक्षा अनुत्तीर्ण यह कैसी परीक्षा थी प्रथम परीक्षा तुम्हारे धैर्य रखने और आज्ञा मानने की थी हनुमान किंतु तुमने तो अपना धैर्य खो दिया मेरे आदेश की अवज्ञा की ऐसे छात्र मेरे शिष्य कदापि नहीं हो सकते ऐसा मत कहिए देव मुझे क्षमा कर दीजिए मुझसे भूल हो गई भूल नहीं महा भूल की है तुमने अन्य छात्रों की तुम्हें चिंता ही नहीं है तुम उनसे अनुमति भी ले सकते थे इतना भी नहीं हो सका तुमसे तुमने कितने भी बड़े-बड़े कार्य किए हो कितने ही विशिष्ट और दिव्य बालक हो तुम किंतु मेरी दृष्टि में सब एक समान है मैं कभी किसी के साथ पक्षपात नहीं करता राजा हो या रंग आस्तिक हो या नास्तिक [संगीत] राज भवन हो या कुटिया मेरी रश्मिया सबको एक समान रूप से प्रकाशित करती मेरे लिए यहां आए सभी छात्र समान है वो राजपुत्र देवपुत्र या ऋषि पुत्र एक अच्छे शिष्य के लिए संयमी और धैर्यवान होना अति आवश्यक है किंतु तुमने तो अपना संयम ही खो दिया इसलिए मैं तुम्हें अपने शिष्य के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता नहीं कर सकता नहीं कर सकता नहीं कर [प्रशंसा] [प्रशंसा] स [संगीत] यदि आज हनुमान को गुरुदेव नहीं मिले तो उसका कारण मैं हूं मैं हनुमान को छोड़कर स्वर्ग नहीं जाती तो समय रहते उसकी कुंडली देख लेती और फिर हनुमान को पर्याप्त समय मिल जाता योग्य गुरु ढूंढने के लिए नहीं अंजना तुमसे अधिक दोष मेरा है मैं अपने कार्यों में इतना व्यस्त हो गया कि मुझे अपने पुत्र की शिक्षा का ध्यान ही नहीं रहा माता-पिता का उत्तरदायित्व होता है कि कोई भी व्यस्तता हो समय रहते अपनी संतान के भविष्य को संवारने के लिए उसके लिए समुचित शिक्षा दीक्षा की व्यवस्था करें आज हमारे पुत्र के समक्ष यह संकट उत्पन्न हुआ है कि यदि सूर्यदेव ने उसे शिष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया तो वह कभी भी पूर्णता प्राप्त नहीं कर पाएगा [संगीत] आ रु दाश की सूर्य लेते परीक्षा यही है विधि की इच्छा शिष्य रूप में अस्वीकार किया हनुमत को गुण पाठ दिया नियती का है विधान विषमता में वलता का सूर्य शिक्षा का दान विनम्र विनती मान की शिक्षा आरंभ होने का योग कल संध्या तक का ही है यदि शीघ्र ही इनको गुरु ना मिले आजीवन बिना गुरु के गुरु की शिक्षा के बिना यह उनसे भी नहीं मिल पाएंगे जिनके लिए जन्म [प्रशंसा] मुझे क्षमा कर दीजिए देव मैं अपनी भूल स्वीकार करता हूं मैं अपने समय आने की प्रतीक्षा कर लूंगा किंतु इस प्रकार मुझे अस्वीकार मत कीजिए मुझे एक अवसर दे दीजिए स एक अवसर दे दीजिए आज यदि आपने मुझे गुरु दीक्षा नहीं दी तो मैं जीवन भर बिना गुरु के रह जाऊंगा बिना गुरु ज्ञान के मैं अपूर्ण रह [प्रशंसा] जाऊंगा अब तो बहुत कम समय बचा है क इन्हीं सब बातों में हनुमान को गुरुदेव के प्राप्त होने का समय ना व्यतीत हो जाए समय तो व्यतीत होता ही जा रहा है और कुछ ही समय में सूर्य भी अस्त होने वाला है अंधकार होने से पूर्व ही हमें इस वनक्षेत्र से निकलना होगा चलो शीघ्र हा मित्रों अपनी गति बढ़ाओ मुझे संकट का आभास हो रहा है जो हमारी ओर ही बढ़ रहा है शीघ्र चलो जहां भी जहां भी कोई पालक मिले उसका अपहरण कर लो जो तुम्ह रोकने आए उसका वद कर दो आज सुरू का बालक है हमारा लक्ष चलो शिक्षा के अभाव में ऐसी त्रुटिया तो होती है गुरुदेव मैं आपसे शिक्षा प्राप्त करने के लिए ही तो आया हूं कि इस प्रकार त्रुटिया ना हो मुझ पर कृपा कर दीजिए [संगीत] ते ठीक है हनुमान मैं तुम्हें एक अवसर और दूंगा किंतु तुम यहां का अनुशासन नहीं तोड़ [संगीत] सकते तुम्हें अपने समय पर ही आगे आना होगा मुझ पर कृपा करने के लिए धन्यवाद देव [संगीत] ना जाने आज सूर्यदेव के विश्राम स्थल की ओर जाने से पूर्व मेरा अवसर आ भी पाएगा या नहीं मुझे यह सौभाग्य प्राप्त होगा या [संगीत] नहीं

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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