[संगीत] हमारे जीवन में दो प्रकार के व्यक्ति होते हैं पहला मित्र और दूसरा शत्रु मित्र हमें भाते हैं और शत्रुओं से हमें घृणा होती है मित्रों के लिए हम अपने प्राणों पर खेल जाते हैं और शत्रुओं के प्राण लेने पर तुले रहते हैं यही होता है ना परंतु मित्र कौन है और शत्रु कौन इसकी परिभाषा जान लेना भी महत्त्वपूर्ण है कभी-कभी हमारे मित्र हमारी हां में ना करते हैं हमारी इच्छा पूर्ति में बाधा बनते हैं और कभी-कभी हमारे शत्रु हमारी इच्छा पूर्ति में हमारे सहयोगी होते तो एक मित्र हमारे मार्ग में बाधा क्यों बनेगा और एक शत्रु हमारे मार्ग से कांटा क्यों हटाएगा क्योंकि कभी-कभी हमसे अधिक हमारे शत्रु और मित्र हमारा भविष्य देख सकते हैं इसलिए यदि शत्रु और मित्र को पहचानना है तो सबसे पहले अपने भविष्य को देखिए कि कौन उसे सार्थक करने में सहयोग करता और कौन असहयोग यही शत्रु और मित्र की परिभाषा है कोई नहीं आएगा तेरी सहायता के लिए यहां पर घुंगरू पहन और नृत्य कर बस सेनापति कौन था यह किसने अपनी मृत्यु को ललकारा है जद कोई अपनी मृत्यु को पुकार रहा है तो वो तुम हो सेनापति की [संगीत] चक [संगीत] [संगीत] नारी नारायणी और नाश तीनों की एक राशि होती है य नारी को नारायणी के पद से गिराया गया तो नारी नाश भी कर सकती [संगीत] है और आप युवराज अभी तक एक नारी के अपमान का कलंक हस्ना हमारे मस्तक से उतरा नहीं कि आप एक और अपमान के भागीदार बनने जा रहे हैं [संगीत] आपको पांचाली से प्रतिशोध लेना था ना वो आप ले चुके [संगीत] हैं फगने आपका क्या ब आप इस अपमान में भागीदार क्यों मान रहे हैं मित्र शांत हो जाओ शांत मैं यहां केवल अतिथि हूं यह मेरा राज्य नहीं है विराट राज्य [संगीत] है एक एक स्वामी अपनी दासी के साथ कैसा बर्ताव करें इस पर प्रश्न उठाने का अधिकार मुझे नहीं है सही कह रहे हैं आप कि आपका अधिकार नहीं है हां परंतु य आपका कर्तव्य है युवराज एक नारी का अपमान रोकना हर पुरुष का कर्तव्य होता [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] है [संगीत] [संगीत] सायरंधरी गंधर्व पत्नी पांच गंधर्व की सुरक्षा में है मेरा संदेह ठीक था केवल द्रौपदी नहीं पांचों पांडव विराट में उपस्थित हैं मित्र दुर्योधन को इन पांचों की ही खोज [संगीत] है मैं क्या कर सकता हूं तुम तुम शांत हो जाओ हां मित्र होने के नाते इन्हें दुर्योधन को सौंप देना मेरा कर्तव्य है परंतु विराट ने पांडवों को आश्रय दिया है और यहां का सेनापति होने के नाते इसका कर वसूलना मेरा अधिकार [संगीत] है बहुत हुआ दासी अब जाओ यहां से तुम्हारी इस अलना के कारण हमारे मित्र दुर्योधन का अपने मित्र से कलय हो गया है आनंद के षड़ों को मैं व्यर्थ नहीं जाने देना चाहता अब जाओ यहां से सुना [संगीत] नहीं क्षमा चाहता हूं [संगीत] मि और खेद है अंगराज मैं तो आप लोगों का मनोरंजन करना चाहता था इस दासी के दर्प ने मेरे कार्य को असफल कर दिया क्षमा प्रार्थी हूं मैं आपका य आप कह रहे हैं सेनापति की हा आपने तो कहा था अंगराज कि जो नारी का अपमान करता है वह अपनी मृत्यु को ललकार है और मुझे अपने प्राण बहुत प्रिय अगर कोई और भूल हुई हो तो सेवक को क्षमा कीजिएगा अंगराज अरे अरे नहीं नहीं [संगीत] चलो कीचक ने क्षमा मांग ली है ना यही तो आश्चर्य है कि कीचक के व्यवहार में अचानक परिवर्तन क्यों आया [संगीत] करण तुम्हारे अपमान का प्रतिकार मैं उसी क्षण कर देता पांचाली परंतु तुमने मुझे क्यों रोका क्योंकि 12 वर्ष की प्रतीक्षा हमारी प्रतिज्ञा पूरी करने की तपस्या को भंग नहीं करना चाहती थी मैं और आज भी कीचक ने जो कुछ किया उस दुर्योधन की उपस्थिति के कारण वश किया अब मुझे केवल उस क्षण की प्रतीक्षा है जब युद्ध का शंखनाद होगा और मैं अपनी आंखों के सामने एक एक गौरव का नाश देखूंगी उस क्षण के संतोष के लिए यह पांचाली कितनी भी पीड़ा कितना भी अपमान सह सकती है परंतु अब हमारे य रहना भी ठीक नहीं है ना ही हमारी सुरक्षा के लिए और ना ही पंचाली की हमें शीघ्र स्थान छोड़ के चले जाना चाहिए नहीं नकुल हम सब इस राज्य में प्रमुख पदों पर है मैं महाराज का विश्वास पात्र सभासद अनुज भीम मुख्य रसोइया है अर्जुन राजकुमारी उत्तरा का शिक्षक पांचाली महारानी की विशेष सहयोगी और तुम अश्व शलाला हो और सहदेव गौशाला इसीलिए हम सबका यहां से एक साथ निकल निश्चित ही लोगों का ध्यान आकर्षित करेगा परंतु मुझे नहीं लगता जेष्ठ कि शेष मा सरलता से कट पाएंगे मेरी मानिए मध्यरात्रि में हम विराट राज्य को छोड़ देंगे ता जब तक किसी को हमारी अनुपस्थिति का बोध होगा हम सबके पहुंच से दूर [संगीत] होंगे ता भीम का मत उचित है जता श्री यो से जाते नहीं दिखता और जब तक वो यहां रहेगा संकट हमारे सरों पर मटता रहेगा मैं भ्राता अर्जुन के साथ सहमत हूं ठीक है यदि तुम सबका यही मत है तो हम सब लोग आज रात्रि गुप्त रूप से प्रस्थान [संगीत] करेंगे [संगीत] [संगीत] सेनापति कीचक आप यहां पर [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] तो सर्री के पांचों गंधर्व पति उसकी रक्षा के लिए आ ही [संगीत] गए प्रणाम जय गंधर्व आपकी योजना अच्छी थी परंतु विराट में कीचक से कुछ भी गुप्त नहीं रहता [संगीत] [संगीत] बेचारा दुर्योधन सारे आर्यव्रत में सेना लिए घूम रहा है तुम लोगों की खोज कर रहा है उसका आखेट ठीक उसकी नाक के नीचे बैठा अद्भुत [संगीत] प्रतिशोध की चा मनुष्य को क्या से क्या बना देती है दुर्योधन ने स्वप्न में भी नहीं सोचा होगा कि महान धर्मराज युधिष्ठिर कंक बनकर विराट का मनोरंजन कर रहे होंगे अदभुत और भोजन भक्त महान भी दूसरों के लिए भोजन पका रहा है झूठे पात्र ो रहा है [संगीत] और तुम अर्जुन पशुपतास्त्र धारण करने वाला किन्नर का जीवन जी रहा है और बेचारे कोमल सुंदर नकुल सहदेव जो सदा सुगंध में नहाए रहते थे आज अश्व की लीद और गौवंश का गोवर साफ कर रहे हैं अद्भुत और [संगीत] तुम पिछले 13 वर्षों से अपने खुले केशों को बांधने की चाह रखने वाली यज्ञ सेनी सुदेशना के केश सज्जित कर रही है अति मनोरंजक [संगीत] तुम पांचों भाई धूल झोक में सफल हुए स्वीकार है परंतु द्रौपदी अपना रूप नहीं छिपा सकी ना ना ना ना इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं है तुम्हारे सौंदर्य और यवन का दोष है य तुम्हें हो क्या जाता है क क्यों क्यों भरी सभा में तुमने कीचक के साथ में विवाद [संगीत] किया और जो कीचक ने किया उसका क्या आपने उस अपमान का विरोध तो नहीं किया युवराज अरे तुम्हें समझ में क्यों नहीं आता है जिससे सहयोग की अपेक्षा हो उसका विरोध नहीं किया जाता जिस जिस वष फल खाने हो उसे काटा नहीं जाता इस समय हमें कीचक के सहयोग की सबसे अधिक आवश्यकता है इसीलिए मैंने उसका विरोध नहीं किया करता तो तो उसका सहयोग खो देता तुम्हें पहचानने के पश्चात मन करता है कि भूल जाऊं दुर्योधन को उसकी मित्रता को और उस वचन को कि मैं तुम सबको ढूंढने में उसकी सहायता करूंगा बस मुझे एक लगाने की देरी है मेरे एक शब्द पर पुनः तुम लोगों को 12 वर्षों के वनवास का मार्ग दिखा सकता है और यदि ऐसा हुआ तो कैसा लगेगा यज्ञ सेनी नहीं मैं ऐसा पाप होने नहीं दे सकता मैं तुम्हारी केश राशि को सज्जित देखना चाहता हूं तुम्हारे रूप को आभूषणों सहित देखना चाहता हूं और इसके लिए मुझे अपने मित्र से द्रोह भी स्वीकार परंतु इस भेद को भेद रखने के लिए एक मूल्य चुकाना होगा [संगीत] तुम पांचों मेरे लिए कोई महत्व नहीं रखते वन में रहो या महल में लेकिन द्रौपदी द्रौपदी के लिए यह भेद ना खुलना जरूरी है इसीलिए मेरे पास एक दस्ता [संगीत] है सोच समझकर ध्यान से सुनकर निर्णय लेना आज रात्रि चंद्र ग्रहण है और इस अंधेरी रात में मैं यज्ञ सेनी के रूप के प्रकाश में स्नान करना चाहता हूं यदि उस स्त्री का मान भंग हो जाता तो हस्तिनापुर फिर से अपना सम्मान खो बैठता है शवराज क्या पांडवों को ढूंढने के लिए आप फिर से हस्तिनापुर का सम्मान वव पर लगा देंगे पांडव मिले या ना मिले परंतु अब जब भी वह सामने आएंगे तो हम उनसे युद्ध करेंगे युद्ध में उन्ह पराजित करेंगे और मेरा मानना है कि हमें ह वापस चले जाना चाहिए कितनी बार मैंने तुमसे कहा है कि तुम केवल और केवल बाण चलाया करो बाण अपना मस्तिष्क नहीं समझ गए तुम केवल युद्ध करना जानते हो राजनीति करना तुम्हारे बस की बात नहीं है समझाओ समझाओ अपने मित्र को पांडवों को पकड़ने का अंतिम अवसर है हमारे पास दुर्योधन अंतिम लक्ष्य हमारे सामने है दुर्योधन और तुम्हारा ये प्रिय मित्र कह रहा है कि हस्तिनापुर जाकर हम संतोष की निद्रा में सो जाए मैं ये नहीं कह रहा हूं कि हम संतोष की निद्रा में सो जाए तो मैं यह कह रहा हूं कि हमें हस्तिनापुर शीघ्र ही लौट जाना चाहिए क्योंकि यहां रहकर हम अपना समय व्यर्थ कर रहे हैं क्या कहा तुमने युवराज सेनापति कीचक ने हमें सहायता का वचन दिया है यदि पांडव यहां होंगे तो व अवश्य उन्हें पकड़ लेंगे हमें हस्तिनापुर वापस चले जाना चाहिए कक पांडव ज नहीं मिले तो हमें संभावित युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए और आप दोनों बोल रहे हैं कि पांडवों का अज्ञातवास पूर्ण होने में केवल दो मा शेष है दो मा शेष है दो मा शेष है क्या हो जाएगा दो मा तो फिर से यु युद्ध युद्ध युद्ध केवल यु तुमने कभी शांति नामक शब्द सीखा भी है या नहीं नहीं [संगीत] कर कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम जिसे संभावित कह रहे हो उस उस युद्ध को तुम निश्चित करना चाहते हो ना अर्थात तुम्हें तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि युद्ध ही होगा [संगीत] कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम चाहते हो कि पांडवों का अज्ञातवास पूर्ण हो [संगीत] जाए
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