[संगीत] [संगीत] हनुमान तुम तो सबके संकट हते हो और मैं हूं कि सबको संकट में डाल रहा था मेरी करनी का परिणाम है ये कि अब मैं भी संकट में हूं और सारी सृष्टि को भी संकट में डाल दिया है [संगीत] मैंने द्वारपाल द्वार को भली भाति बंद करके बाहर सतर्कता के साथ पहरा देते रहना राज भवन पर राक्षसों का आक्रमण हुआ है [संगीत] [प्रशंसा] जाओ ये एकाएक क्या होने लगा मां मां ये क्या हो रहा है [संगीत] मां ये ध कहां से आई ये क्या हो रहा है मां पुत्री एका एक कच में धुमर भर गया [प्रशंसा] है कौन हो तुम मुझसे भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है आपको मैं तो यहां मात्र वानर की माता और इन बच्चों को ले जाने आई हूं तुम ऐसा कुछ नहीं कर पाओगी राक्षसी मैं जो चाहती हूं वो कर ही लेती हूं मुझे कोई नहीं रोक सकता ये सब कहां गायब हो गए मेरे बच्चे बच् अंजना एकाएक सब कहां लुप्त हो गए महाराज एक मायावी राक्षसी ने माया के द्वारा शयन कक्ष से महारानी और एकत्रित बच्चों का अपहरण कर लिया [संगीत] [संगीत] है [संगीत] गुरुदेव गुरुदेव के चरणों में मेरा [संगीत] नमन आयुष्मान भव पुत्र हनुमान आज पुनः तुमने मेरे प्राणों की रक्षा गुरुदेव यह सब आपकी शिक्षा और आशीर्वाद के कारण ही संभव हो सका [संगीत] है पुत्र मैं तुम्हें देख रहा हूं इतना महान कार्य करने के बाद अभिमान तुम्हे तनिक स्पर्श नहीं कर पाया है तुम्हें मेरा आशीर्वाद है [संगीत] प्रणाम नारायण नारायण सत्य है अभिमान और अहंकार जैसे विकार तो हनुमान को स्पर्श भी नहीं कर सकते तुम्हारी जय हो हनुमान नारायण [संगीत] नाराय [संगीत] पुत्र हनुमान तुमने मुझे संकट से मुक्त करा दिया फिर भी कार्य अपूर्ण है रत तो मिल गया है किंतु अभी अश्व के विषय में ज्ञात नहीं हुआ और जब तक अश्व नहीं मिलेंगे दिवस नहीं हो पाए तुम्हारी शिक्षा रुकी हुई है सृष्टि का असंतुलन भी बढ़ता जा रहा है इसलिए हमें शीघ्र ही अश्व को ढूंढने जाना है चलो जैसे आपकी आज्ञा प्रणाम [संगीत] सूर्यदेव मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा कि देवी संज्ञा को हुआ क्या है उपचार तो तभी संभव है जब यह ज्ञात हो जाए कि स्वर कैसा [संगीत] है गुरु माता क्या हो गया था को एकाएक मुझे स्वयं ज्ञात नहीं पुत्र कदाचित तुम्हारे गुरुदेव संकट में थे संभवत वो संज्ञा विहीन हो रहे थे जिसके प्रभाव से मेरी व्याकुलता इतनी अधिक बढ़ गई किंतु अब मुझे स्वस्थ का आभास हो रहा [प्रशंसा] है मुझे भी यही आशंका थी देवी प्रतीत हो रहा है कि हनुमान ने गुरुदेव के संकट हर लिए इसलिए आप भी स्वस्थ हो गई है प्रणाम महारानी जी हनुमान मेरे स्वामी ने जो कुछ भी किया उसके लिए हम सब क्षमा प्रार्थी है आप क्षमा क्यों मांग रही हैं आप मुझसे बड़ी है ना आप मुझसे क्षमा मत मांगिए हनुमान तुम तो सभी को संकटों से मुक्ति दिलाते हो मेरे स्वामी के संकट भी दूर कर दो मैं सदा तुम्हारी आभारी रहूंगी हनुमान अश्व को ढूंढने में जितना विलंब होगा सृष्टि उतनी ही संतप्त होती जाएगी शीघ्र चलना होगा हमें चलो [संगीत] पुत्र एक और गुरुदेव की साथ चलने की आज्ञा है दूसरी और महारानी जी का निवेदन एवं वरुण देव का संकट क्या करूं मैं गुरुदेव की आज्ञा मानो या महारानी जी का निवेदन हनुमान चलो वरुण देव को मुक्त कराए बिना चलने को क्यों कह रहे हैं गुरुदेव क्या सोच रहे हो हनुमान तुम्हारी शिक्षा का समय निकला जा रहा है चलो क्षमा करें [संगीत] गुरुदेव गुरुदेव वरुण देव भी आपके समान एक देवता ही है जो मुख्य तत्वों में से एक [संगीत] है इनकी मुक्ति से ही जल के लिए तरस रहे संसार को जल की प्राप्ति होगी इन्ह मुक्त कराए बिना यहां से जाना अनुचित होगा गुरुदेव मारुती को हुई दुविधा सृष्टि की करते चिंता जगत पाए जीवन जल वरुण देव हो पुन सबल मुझे क्षमा करें हनुमान तुम अद्वितीय हो बल से ही नहीं मन से भी वीर हो [प्रशंसा] तु तुम्हे परमार्थ सेवा भाव से कोई डिगा नहीं सकता मैं तो केवल री परीक्षा ले रहा था हनुमान कि तुम्हारे लिए अपना हित बड़ा है या तुम्हारी शिक्षा और तुम्हारा प्रतिशोध संसार का हित सर्वोपरि होता है वरुण देव को मुक्त करा के संसार का संकट हरो हनुमान मैं भी तुम्हारा साथ दूंगा जो आजा गुरुदेव [संगीत] आज्ञा गुरु ने की प्रदान वरुण पाएंगे मुक्ति दान होगा जल पुनः प्रवाहित हनुमत करते सबका [संगीत] हित [संगीत] [संगीत] [संगीत] प्रणाम सूर्यदेव आपने मेरी दृष्ट होता को भुलाकर मुझे मुक्ति प्रदान की आपको शत शत नमन हनुमान तुम्हारा भी आभार है मुझ पर तुम्हें भी नमन वरुण देव यह आप क्या कर रहे हैं मैं तो आपके पुत्र के ही समान हूं आप को मुझे नमन नहीं करना चाहिए आपको तो मुझे आशीर्वाद देना चाहिए हनुमान तुम तो वो दीपक हो पुत्र जो संसार के अंधकार को हर लेता [संगीत] है देवता हो या असुर तुम्हारे रहते संसार का कोई अहित नहीं कर [प्रशंसा] सकता पुत्र तुम्हे आशीर्वाद है मेरा [संगीत] [संगीत] प्रणाम चलो सारे के सारे महारा [संगीत] अंजना अब तुम अपने जीवन के अंतिम क्षण तक यही रहोगी महारानी अंजना जो शीघ्र ही आने वाला है और हां इसे इंद्रलोक समझने की भूल मत करना जहां से तुम लौट करर वापस आ गई थी क्यों कर रही हो यह सब कहां लेकर आई हो हम बालकों ने तुम्हारा क्या अहित दिया है नेत्र दृष्टि विहीन देह शक्तिहीन फिर भी स्वर में इतना रोश मुझ महा मायावी पातालियो किंतु तब भी तुम्हारी अंतिम इच्छा अवश्य पूर्ण करूंगी मैं तुम्हारे प्रश्नों का उत्तर अवश्य दूंगी तुम सब पाताल लोक में हो सुमेरु की महारानी किंतु चिंता मत करो तुम शीघ्र ही तुम सबको मुक्ति मिलने वाली है पाताल लोक से ही नहीं मृत्यु लोग से भी छोड़ जाने दो क्योंकि शीघ्र तुम सबकी बली दी जाने वाली है हमें माफ कर दो दो जाने लक्षित करो हमें हमें यहां से जाने [संगीत] दो मुफ करो हमें यहां से जाने दो पताल का कदाचित तुम्हें ज्ञात नहीं है कि मैं हनुमान की मां हूं संकट मोचन हनुमान की मा जो इन बालकों पर आए संकट को अवश्य हारेगा तुम्हें और तुम्हारे समस्त राक्षसों को इस दुष्कृतम् अवश्य देगा मेरा हनुमान अवश्य देगा मेरा हनुमान अवश्य देगा मेरा [संगीत] हनुमान सूर्यदेव मेरे दुष्कृतम् फिर भी हनुमान और संसार के प्रति जो घोर अपराध हुआ है मुझसे और उसका परिणाम समज सृष्टि को उठाना पड़ा वरुण देव मुझे अभिल संसार को जल तत्व लौटाना होगा संसार में पुनः जल तत्व व्याप्त हो [संगीत] जाए [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] संसार को जल तत्व प्राप्त हो गया सूर्यदेव अब आपका रथ भी लौटाना है मुझे वरुण देव मेरे अश्व कहां है अश्व के बिना मेरा रथ नहीं चल सकता व तो पाताल लोक में पातालियो गुरुदेव मैं पाताल से आपके अशु को सुरक्षित लेकर आऊंगा मुझे आज्ञा दे हनुमान पाताल लोग जाना सहज नहीं है और वह पातालियो भी राक्षसी है मुख कर दो हमें जाने दो महा मायावी पातालियो [संगीत] कुछ नहीं कर पाया था वो बुला लो अपनी उस महाबली पुत्र को शिक्षा प्राप्त करने गया है वो अन्यथा मैं उसे अवश्य बुला लेती वैसे भी उसकी शिक्षा में अब एक ही दिन शेष है और तुम्हारे जीवन के भी कुछ ही दिन बचे हैं नहीं मिल लोगी तुम अपने पुत्र से इतनी दया तो दिखा ही सकती हूं मैं हनुमान की शिक्षा आवश्यक है किंतु यहां के बालकों की जीवन की रक्षा उससे भी अधिक आवश्यक [संगीत] है रायण नारायण कहा तो हनुमान को संकट से बचाने और शिक्षा पूर्ण के लिए अंजना ने अनिमेश व्रत रखा और अपने नित्र गवा बैठी अब सहस्त्र बालकों के जीवन की रक्षा के लिए अंजना हनुमान को शिक्षा के मध्य से बुलाने जा रही है सत्य है मो से बड़ा कर्तव्य होता है आप धन्य है देवी अंजना नारायण [संगीत] नारायण नहीं जाने दो को अन्यथा बली से पूर्व ही इस बच्चे की बली चढ़ा दूंगी हनुमान हनुमान मां क्या हुआ हनुमान मुझे मेरी मां की सुनाई दी गुरुदेव अवश्य ही वो किसी संकट में है नारायण नारायण [संगीत] प्रणाम तुम्हारा अनुमान सत्य है अनुमान पाताली काल से तुम्हारी माता को पाताल लोग ले गई है मैं जो चाहती हूं वो कर ही लेती हूं मुझे कोई नहीं रोक सकता क्या मेरी मां ये क्या कह रहे हैं आप देवर्ष इतना ही नहीं बालकों को भी अपहरण करके उन्हें पाताल लोग ले गई है शिखा सिंगी का व अवैध यज्ञ कर रही है जिसमें शीघ्र सूर्यदेव के अश्व की बालकों की और देवी अंजना की बली चढ़ाई जाने वाली है और यह सब लंकेश रावण के कहने पर हो रहा [संगीत] है [संगीत] h
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