हरता श्री गणेशा श्री गणेशा [संगीत] श्री बड़ा दायित्व निभाने हेतु स्वयं को अनुशासित रख नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक है मेरी दिनचर्या एक बार पुनः नियम के अनुसार प्रारंभ हो रही है ओम नम शिवाय [संगीत] ओम नमः [प्रशंसा] शिवाय ओम नमः [संगीत] शिवाय ओम नमः शिवा मैं भी प्रभु की बा साधना में लीन हो जाता हूं स यशु [संगीत] सर्वदा फोर होने को है मेरी पूजा का समय हो [संगीत] गया [प्रशंसा] [संगीत] प्रत्येक दिवस सर्वप्रथम मैं अपनी किरणें कैलाश पर्वत के शिखर पर भेजकर प्रभु महादेव का अभिवादन करता हूं और जबरी मानसरोवर से टकराती है तब माता पार्वती शिवलिंग का जलाभिषेक करती है ओ नम [संगीत] शिवाय समय हो गया है मुझे शीघ्र कैलाश के निकट पहुंचना [संगीत] चाहिए य यह क्या आ गया मेरे [संगीत] समक्ष [संगीत] महादेव का त्रिशूल किंतु महादेव का त्रिशूल मेरा और मेरे प्रकाश का मार्ग क्यों वादित कर रहा है महादेव का नहीं सूर्यदेव यह तुम्हारे नवीन भगवान जालंधर का त्रिशूल है जालंधर यह मुझे रोकने का दुस कर रहा है स देव स देव स देव जलंदर का त्रिशूल तो यहां है किंतु व स्वयं कहां है क्या हुआ सूर्यदेव अपने ईश्वर के समक्ष नतमस्तक हुए बिना आगे बढ़ने की दृष्ट क्यों कर रहे हो दृष्ट मैं नहीं दृष्ट तो तुम कर रहे हो जलंधर सूर्यदेव हूं मैं पाखंडी ईश्वर के लिए ना ही मैं रुकता हूं और ना ही उसके समक्ष शीश झुकाता हूं आगे बढ़ो रुकोगे अवश्य रुकोगे तुम तुम्ह रुकने प विवश कर दूंगा मैं मेरा पाश बांध लेगा तुम्हें मेरा मेरा रत गिर रहा है यह यह कैसे संभव है अभी तो ये मेरी शक्ति परिचय का आरम मात्र सूर्यदेव तुम्हारे भगवान सर्वश्री जलंदर की शक्ति तो अनंत अपार है [प्रशंसा] यह कैसा नष्ट कर रहे हो तुम छोड़ो मेरा मार्ग मैंने तो कहा था तुमसे कि मैं तुम सभी का भगवान हूं जितनी शीघ्र तुम ये बात स्वीकार करोगे और मेरी पूजा करोगे उतना जीवन आनंद में होगा तुम्हारा देवता पद पर स्थापित रहोगे अन्यथा अपने आदेश का पालन करवाना मुझे पली बात आता है मात्र कह देने से कोई ईश्वर नहीं बन जाता जलंदर हटो मेरे माग से अच्छा जैसी तुम्हारी इच्छा लो हट गया मार्ग [संगीत] से [संगीत] मैं और इसके समक्ष शीश चुकाऊंगा कदापि [संगीत] नहीं मेरी आज्ञा का पालन किए बिना तुम आगे नहीं जा सकते सूर्यदेव चलो पीछे चलो [संगीत] तुम मेरी दिनचर्या अस्तव्यस्त हुई तो संपूर्ण सृष्टि संकट में आ जाएगी तुम उचित नहीं कर रहे हो जालंधर उचित यही है सूर्यदेव कि तुम मुझे भगवान स्वीकार करो अन्यथा मैं तुम्हें आगे नहीं बढ़ने दूंगा अभिवादन करो मेरा मेरे समक्ष नतमस्तक हो जाओ मंत्र जपो मेरे ओम जराय नमः ओम जंद्र नमः मेहनत मस्तक होंगा इसके समक्ष कदा भी नहीं सर्वश्रेष्ठ हूं भगवान हू जलंदर हूं मैं मेरे समक्ष कोई भी देवता टक नहीं सकता मैं सूर्यदेव हू अपनी किरणों से सभी प्रायो को प्रदान करने का दायित्व है मेरा मेरी नियमित दिनचर्या से समस्त संसार में समस्त जीवन गतिशील होता है और जो मेरी भी ऊर्जा के स्रोत है परम सत्य है अनंत है अनादि है सर्वव्यापी है सगुण भी है और निर्गुण भी दया निधान है भक्त वात्सल्य [संगीत] है जिनकी सरलता ही उनकी विशेषता है जो सर्वश्रेष्ठ है वही मेरे प्रभु है और सूर्यदेव का शीष उन्ही सर्वोच्च ईश्वर के समक्ष झुकता है तुम जैसे पाखंडी के समक्ष नहीं हटो मेरे मार्ग से ये तुम्हे मेरी अंतिम चेतावनी है सूर्यदेव मुझे भगवान स्वीकार करने पर यश कर दूंगा तुम्हें शश कर दूंगा तुम्हें शश दु सासी असुर मैं तुम्हारे इन मिथ्या शब्दों से भयभीत होने वाला नहीं हटो मेरे मार् से अन्यथा मेरे रथ के दिव्य अश्व द्वारा कुछ ले जाओगे आगे बढ़ो और यदि मेरे अश्व से सुरक्षित भी रहे तो मेरा तेज तुम्हें भस्म कर देगा जलंधर चिंता चिता है चिंता में डालकर मुझे मेरी चिता तक पहुंचाने की कल्पना कर रहे सुदेव किंतु भगवान जलंदर चिंतित होने का नहीं दूसरों को चिंता में डालकर उनकी चिता को सज्जित करना जानता [संगीत] है सूर्यदेव मेरे आदेश का पालन नहीं करोगे तो उसका उचित दंड भुग तोगे तुम आग [संगीत] भी सूर्यदेव रुकना तो होगा ही तुम कदाच तुम्हे मेरी शक्ति का अनुमान नहीं अष्ट सिद्धियों का स्वामी हूं [संगीत] मैं ये क्या है नहीं मुझे अपने रथ को रोकना [संगीत] [संगीत] होगा वक्रतुंड महाकाय सूर्य कोटि सभ निघम कुरु देव सर्व सर्वदा प्रभु आकाश में यह कैसी हलचल है ऐसा क्यों प्रतीत हो है जैसे सूर्यदेव उदित होना चाहते हो और उन्हें कोई रोकने का प्रयास कर रहा है यह क्या रहस्य है मुझे शीघ्र ज्ञात करना चाहिए मेरा रथ अरे अरे अरे अरे अरे क्या सूर्यदेव मैंने तो मात्र अभिवादन करने के लिए कहा था आपने तो घुटने टेक दिए भगवान सर्वश्री जलंदर के [संगीत] समक्ष भगवान जलंदर प्रसन्न [संगीत] हुए अनुचित है तुम रा य कृत्य और तुम्हारा य अटस जिससे तुम मेरा ही नहीं मेरे प्रभु का भी अपमान कर रहे हो जो मैं कदा भी नहीं [संगीत] संगा जलंधर तुम्हारे इन दुर्व चनों का और दुष्कृतम् [संगीत] उत्तर तो तुम्हें प्राप्त होगा अभी के अभी जब तुम्हारे सभी वार निरर्थक हो जाएंगे और तुम मेरी प्रभुता स्वीकार करोगे ंगी जलंधर मेरी किरणों का यह शक्तिशाली बाण तुम्ह भेद देगा मिटा देगा तुम्हारा यह ढोंग और दिखा देगा तुम्हें कि सूर्यदेव का मार्ग बाधित करने का क्या परिणाम होता [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] है मेरे एक ही पाण से आहत हो गया ये पाखंडी यह तो ऐसे अटा हास कर रहा है जैसे इसे कुछ हुआ ही नहीं यही समस्या है तुम तुझ देवताओं की [संगीत] [संगीत] स्वामी सची क्या प्रिय स्वामी कुछ तो बहुत ही अनुचित हो रहा है वो सूर्यदेव वो सूर्यदेव सूर्यदेव य आप क्या कह रही है देवी शची क्या हुआ सूर्यदेव को स्वामी मैं देवी पूजा के लिए अपने भवन के आहते से पुष्प लेने गई थी तब सूर्य उदय के स्थान पर आकाश में मैंने कुछ विचित्र देखा आइए देखिए सूर्यदेव अभी तक प्रकट नहीं हुए हैं [संगीत] एक ऐसा विचित्र प्रकाश जैसे आकाश में कोई ज्वालामुखी फटा [संगीत] हो नियम सर्वोपरि है सूरी देव के लिए अपनी दिनचर्या प्रारंभ करने में वो कदा प विल करते और यदि उनसे विलंब हुआ है अर्थात अवश्य कोई अनहोनी घट रही है अवश्य सूर्यदेव किसी संकट [संगीत] में निश्चित रूप से सूर्यदेव के साथ कोई ना कोई अप्रिय घटना अवश्य घटित हो रही होगी किंतु क्या मुझे इसके बारे में ज्ञात करना होगा देवगन अग्निदेव वरुण देव वायु [संगीत] देव प्रतीत होता है सूर्यदेव किसी संकट में [संगीत] है संकट जो भी है शीघ्र उसका कारण ज्ञात कर उसे दूर करना होगा [संगीत] हमें प्रतीत होता है कि कोई बहुत बड़ा विघ्न आने वाला है अब तो प्रथम पूज्य गणेश जी ही इस विघ्न को हर सकते हैं अब और विलंब नहीं कर सकता मुझे जाकर देखना ही होगा ताकि मैं उस संकट का समाधान शीघ्र कर [संगीत] सकूं अहंकार में आकर किसी के कार्य में बाधा डालना अनुचित ही नहीं अभी तू पाप का भागी भी बना देता है
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