[संगीत] महा अच्छा अब यह बताओ तुम्हारा आना कैसे हुआ यह शस्त्र विद्या सीखने की हट कर रहा है आचार्य वर और शस्त्र विद्या के लिए कोई पिता अपने पुत्र को आपके सिवा और कहां ले जा सकता है मैं इसे विद्यादान देकर अति प्रसन्न होता अधिरथ क्षमा चाहता हूं मैं दान नहीं लेता और विद्या दान में दी भी नहीं जा सकती आयुष्मान बाबा परंतु इस गुरुकुल में राजपुत्र क्षत्रियों के अतिरिक्त किसी और को शिक्षा नहीं दी जा सकती है और तुम्हारा पुत्र कण इन दोनों कसौट पर खरा नहीं उतरता अधिरथ तुम्हें इसके लिए कोई और गुरु ढूंढना होगा तो क्या शिक्षा दए आचार्य क्या माता सरस्वती पहले पिता का नाम पूछती है संसार चाहे मुझे जिस नाम से पुकारे बाबा परंतु आप मुझे राधे कहा कीजिए आपके मुंह से कण सुनकर ऐसा लगता है जैसे कि मैं आपका कोई लगता ही नहीं क्या मैं एक प्रश्न कर सकता हूं अवश्य यह युवक कौन है यह मेरा पुत्र है अश्वथामा अर्थात ना तो यह राजपुत्र है और ना ही क्त्र प्रणाम आचार्य गुरु द्रोण का यह शिष्य भी युद्ध ही की आज्ञा मांग रहा है कुल गुरु क्योंकि उसे हस्तिनापुर की भूमि पर उगाने वाला यह अभिमान का वृक्ष अच्छा नहीं लग रहा इससे पहले की यह जड़ पकड़ ले इसे काही डालना [संगीत] चाहिए क्या तुम्हारे पास केवल शब्दों के वान पार्थ यह धनुष और य नों से भरा तुनीर क्या केवल दिखावे के लिए परंतु याद रहे कि मैं ब्रह्मास्त्र तक तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ू दान में पाया हुआ राज्य किसी को क्षत्रिय नहीं बना सकता है अंग राज करण मनुष्य को छत्री बनाती है उसकी खाव खाने योग्य छाती और उसकी वान चलाने योग्य बुझाए यह सूत पुत्र है इसके हाथ में कशा दो दुर्योधन और इससे अपना रा तवाओ आ जाओ अर्जुन यह तुम्हारे हाथों आने वाली मृत्य के योग्य नहीं ऋषियों के गोत्र नदियों के स्रोत को कौन देखता है भीम और यह भी मत भूलो कि तुम सबके जन्म के विषय में भी अटपटे प्रश्न किए जा सकते हैं मैं तो सूत पुत्र नहीं हूं कण ने तो केवल अर्जुन को ललकारा था मैं तुम पांचों भाइयों को ललता हूं आओ और अपना सीत्व सिद्ध [संगीत] करो [संगीत] करण [संगीत] करण आयुष्मान भवा हे भगवन मेरे अ भाग्य की आपने मुझे दर्शन दिए हे दानवीर मुझे आना ही पड़ा तुम प्रतिज्ञा बद्ध हो कि दोपहर में मेरी पूजा समाप्ति के उपरांत यदि कोई तुमसे कुछ मांगेगा तो तुम उसे निराश नहीं करोगे इंद्र देव तुम्हारी इसी प्रतिज्ञा का लाभ उठाने के लिए तुम्हारे पास आने वाले हैं े तुमसे तुम्हारा कवच और कुंडल मांगेंगे हे दानवीर महापुरुष उन्हें दोनों वस्तु ना देना यह तो संभव ही नहीं है भगवन उस समय तो यदि कोई मुझसे मेरे प्राण भी मांग ले तो मैं वो भी दे दूंगा यह कवच भाग्य के बाण रोक सकता है मैं क्षमा चाहता हूं भगवान किंतु यह जान लेने के उपरांत भी यदि कोई उस समय मुझसे मेरा कवच और मेरे कुंडल मांगेगा तो मैं उसे निराश नहीं करूंगा मुझे अपने जीवन से कहीं अधिक प्रिय मेरी प्रतिज्ञा है हे भगवन इस संसार में मेरी मां राधा और मेरे मित्र दुर्योधन के अतिरिक्त किसी ने मुझे अपमान के सिवा और कुछ नहीं दिया इसीलिए मैं चाहता हूं कि जब मैं जाऊं तो लोगों को ऋणी छोड़ जाऊ फिर तुम ऐसा करना कवच कुंडल पा लेने के उपरांत जब व तुम्हें वर मांगने की आज्ञा दे तो उनसे उनका शक्ति अस्त्र मांग [संगीत] लेना [संगीत] [संगीत] भारत महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत
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