[संगीत] कभी खेत में किसी किसान को खेती करते देखा है वह उसे सीच होता है उसे जोतता है पशु पक्षियों से खेत की फसल की रक्षा करता है परंतु एक बात का वह सबसे विशेष ध्यान रखता है कहीं खेत में खर पतवार ना उग जाए क्योंकि एक खर पतवार खेत की सारी फसल को नष्ट कर सकती है ठीक उसी प्रकार यदि वंश की कोई संतान खोटी निकल जाती है तो वह समूचे वंश का सर्वनाश कर देती इसीलिए संतान के लालन पालन में विशेष ध्यान देना आवश्यक होता है क्योंकि संतान वो फसल होती है जो वंश के आने वाले समय को महान बना सकती है या फिर वंश का पतन भी कर सकती [संगीत] [संगीत] है सोर देव [संगीत] आप बड़ी बात कल्याण हो [संगीत] पुत्र ऐसी क्या आवश्यकता आन पड़ी कि आपको इस समय मेरे समक्ष आना पड़ा कुछ समय पश्चात मैं आपको अर्ग भेट करने आने ही वाला था आज मैं अर्ग लेने नहीं आया हूं पुत्र तुम्हे एक चेतावनी देने आया [संगीत] हूं और वो यह तुम कल प्रातकाल मुझे अर्क भेट करने मत आना और यदि तुम मुझे अर्क भेट करने आए तो तुम अपना सर्वस्व खो बैठोगे [संगीत] हां पुत्र मेरी विनती है तुमसे कल प्रात काल तुम मुझे अर्क देने मत आना परंतु मैं तो आपको बचपन से अर्क देते आया हूं तो आज अचानक ऐसा क्या हो गया कि आप मुझे अर्क देने से रोक रहे हैं तुम्हारा वचन पुत्र तुमने प्रतिज्ञा ली है सूर्य को अर्ग देते समय य कोई भी तुमसे कुछ भी मांगेगा तो वो तुम उसे दान में दे दोगे कल का अर्ग तुम्हें कुछ ऐसा दान देने पर विवश कर देगा जिससे तुम मेरा दिया हुआ आशीर्वाद सदैव के लिए ख बैठोगे देवराज इंद्र ने तुम्ह परास्त करने के लिए षड्यंत्र है वो कल प्रात काल तुमसे माने और दान में व तुमसे कवज और कुंडल मांगे तुम्ह ज्ञात है पुत्र मुझे जत नहीं परंतु आपको चिंतित देख के आभास हो ग यदि स्वयं मेरे पिता श्री मुझे चेतावनी देने आए हैं कि इंद्रदेव मुझसे दान मांगने आएंगे तो इसका सीधा संबंध अर्जुन से होता है इंद्रदेव का पुत्र [संगीत] अर्जुन और उसम कोई बुराई भी नहीं क्योंकि हर पिता अपने पुत्र की भलाई चाहता है यदि इतना समझते हो तो यह भी समझ लो पुत्र यह पिता भी यही चाहता है कि उसके पुत्र के साथ कोई अन्याय ना हो कोई छल ना हो मेरी विनती है तुमसे कल प्रात काल मुझे अर्क देने मत आना पहले भी मैं तुम्हारे साथ बहुत अन्याय कर चुका हूं पुत्र परंतु अब और अन्याय नहीं कहो पुत्र अपने पिता की बात मानोगे कल प्रता काल हक देने नहीं आओगे ना मुझे उत्तर दो पुत्र मुझे उत्तर दो प्रश्न उत्तर का समय नहीं बचा है मनुष्य का कर्म उसके हर प्रश्न और उत्तर से बड़ा होता है और अब आपके कर्म का समय हो गया है अंधकार में डूबे समस्त संसार को आपको प्रकाश देना है आप अपना कर्म और धर्म निभाए और मैं अपना कर्म और धर्म निभाऊंगा बस आपसे एक प्रार्थना है कि अब ये अन्याय मत होने दीजिएगा कि संसार कहे कि करण ने अपने जन्मदाता को अपना धर्म करने से रोक दिया प्रणिपात पिता श्री मुझे आशा है पुत्र तुम मेरी विनती स्वीकार कर कल्याण हो तुम्हारा [संगीत] [संगीत] तुम तुम यहां क्या कर रहे हो मैंने सब सुन [संगीत] [संगीत] [संगीत] लिया सूर्यनारायण आप यहां इस प्रकार यहां आने के लिए मैं आपसे क्षमा चाहता हूं परंतु पुत्र कण पर बहुत बड़ा संकट आने वाला है उसे सावधान करना [संगीत] होगा आप सूर्य पुत्र है परंतु यह कैसे संभव [संगीत] है मेरे जन्म से पूर्व एक स्त्री को वरदान मिला था वो किसी भी देवता का आहवान करके कोई भी वरदान पा सकती थी उस स्त्री को विश्वास नहीं हुआ और उसने इस वरदान को परखने का प्रयास किया उसने सूर्यदेव का आवाहन किया और वरदान से बदत सूर्यदेव को उन्हें पुत्र देना पड़ा परंतु वह अविवाहित कन्या समाज के भय से भयभीत हो गए और उसने उस बालक को गंगा में बहा दिया वो बालक मैं था जिसे पिता अधिरथ ने पाला सूर्यदेव के आशीर्वाद के रूप में मुझे कवच और कुंडल मिले जो अ इंद्रदेव छीन लेना चाहते अपने पुत्र अर्जुन के लिए सूर्यदेव मुझे यही समझाने आए थे मैं इंद्रदेव को कल दान ना दू अर्थात आज आप अर्ग देने नहीं जा [संगीत] रहे [संगीत] नहीं मैं अवश्य [संगीत] जाऊंगा [संगीत] क्यों मैं आपको ऐसा नहीं करने [संगीत] दूंगा मुझे क्यों नहीं जाना चाहिए दन के भय से अपना संकल्प तोड़ दो अपना सम्मान खो दो नहीं पुत्र यह सूत पुत्र ऐसा कायर नहीं है आप स्वयं के साथ ऐसा अन्याय कैसे होने दे सकते हैं पिता श्री आप भली भाती जानते हैं आपके साथ छल होने जा रहा है फिर भी वह सूर्यदेव जिन्होंने आपको अपना नाम कभी नहीं दिया जिस पर आपका अधिकार था व सम्मान कभी नहीं थी फिर भी आप उन सूर्यदेव के सम्मान के लिए इंद्रदेव के बिछाए झाल में फसने जा रहे हैं पिताश्री य यह कवच आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है और आप इसे इंद्रदेव को दान में दे देंगे क्यों केवल सूर्य पुत्र होने के सम्मान के लिए नहीं एक सूत पुत्र होने के अभिमान के [संगीत] लिए [संगीत] मैं आज भी एक सूत पुत्र हूं एक सूत नहीं मुझे प्रेम दिया सम्मान दिया अधिकार दिया आवश्यकता पड़ने पर धनुष दिया जब मैंने उससे दूर जाने की आज्ञा मांगी तो उन्होंने मुझे वो भी [संगीत] दी तुमने ठीक कहा जिन सूर्यदेव ने मुझे मेरा नाम मेरा सम्मान नहीं दिया मैं उनके एक उपहार के लिए ऋणी क्यों रहा पुत्र तुमने पूर्णतः अपने पिता को नहीं पहचाना मैं अपनी सुरक्षा के लिए कवच और कुंडल पर निर्भर नहीं मेरी शक्ति मेरा व साहस है जो मैंने अपनी मां राधा से पाया मेरी शक्ति मेरा व विश्वास है जो मैंने अपने पिता अधिर से पाया मेरी शक्ति तिरस्कार है जो मैंने समाज से पाया इस राधे करण के कौशल और योग्यता को किसी कवच कुंडल की आवश्यकता नहीं [संगीत] है परंतु पिताश्री य सब अन्याय जो भी आपके साथ हो रहा है यह सब ये सब अन्याय है कदाचित ये अन्याय है परंतु कोई और अन्याय करे इसका अर्थ यह नहीं कि हम भी न्याय का पद छोड़ दे मैं अपना मार्ग चुन चुका हूं ति तुम्हारे मन में मेरे लिए कोई भी स्थान है एक पिता के रूप में या एक योद्धा के रूप में तुम इस रहस्य को रहस्य ही रखोगे तुम्हें मेरी सौगंध है वचन दो मुझे पता श्री चचन दो मुझे [संगीत] [संगीत] न सूर्य उदय का समय हो गया है और मेरे अर्ग देने का भी अब तुम जा सकते [संगीत] [संगीत] [संगीत] हो [संगीत] क्या हुआ माता समय हो गया है परंतु अभी तक सूर्यदेव उदित नहीं हुए क्योंकि कदाचित यह उदय होने का उचित समय नहीं है पार्थ मैं समझा नहीं मा सूर्यदेव का उदित होना अनिवार्य है प्रकृति का नियम है भला इसके विरुद्ध कौन जा सकता [संगीत] है एक पिता अपनी संतान के लिए किसी के भी विरुद्ध जा सकता है पार्थ [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [संगीत] प्राणी पात वासुदेव प्राणी पात गांधी धारी अर्जुन प्राणी पात परंतु मैंने आपको पहचाना नहीं ब्राह्मण देव महान व्यक्ति के पास समय ही कहां होता है किसी और से परिचित होने के लिए परंतु महान व्यक्ति से समस्त संसार परिचित रहता है वासुदेव का पराक्रम अर्जुन के शौर्य से ऐसा कौन है इस संसार में जो परिचित ना [संगीत] हो [संगीत] धन्यवाद मेरा आशीर्वाद है अर्जुन इस महाभारत के युद्ध में तुम्हारी विजय निश्चित तुम अपने शौर्य से अपने शत्रु पर विजय प्राप्त [संगीत] करो मैंने आपकी बात सुनी वासुदेव और मैंने उसके मंतव्य को भी समझा परंतु सूर्यदेव केवल एक पिता ही नहीं व समस्त संसार को ऊर्जा भी देते हैं किसी भी स्थिति में उन्हें अपना कार्य पूर्ण करना ही होगा सूर्य उदय होना अनिवार्य है यह प्रकृति का नियम है अवश्य परंतु इन नियमों के बंधन में सभी आते हैं ब्राह्मण देव सूर्य देव पर मुझ पर भी और आप [संगीत] भी नियति चाहे प्रकृति की चाहे देवताओं की हो या फिर मनुष्य की परंतु उसे समझ पाना बहुत कठिन कार्य है आपको स्मरण करवा देता हूं बण मनुष्य को दुर्बल समझना देवताओं के लिए घातक सिद्ध हो सकता है ऐसा कोई विघ्न नहीं जो एक दृढ़ निश्चय मनुष्य का मार्ग रोक सके यदि मनुष्य चाहे तो वह पर्वतों का स्थान भी बदल सकता है मैं मनुष्य की नियति और निश्चय को कम नहीं आकर वासुदेव परंतु किसमें कितना बल है ये तो केवल परीक्षा से ही सिद्ध होगा कभी-कभी परीक्षा में परीक्षार्थी नहीं परीक्षा लेने वाला भी असफल हो जाता है ब्राह्मण [संगीत] देव कभी-कभी परीक्षा में परीक्षार्थी नहीं परीक्षा लेने वाला भी असफल हो जाता है ब्राह्मण देव फिर चाहे वह मनुष्य हो या देव देवताओ का तो धर्म होता है ना वासुदेव मनुष्य को सदैव नए नए अवसर देना उचित कहा आपने ब्राह्मण देव परंतु अवसर में यदि छल और भेदभाव आ जाए तो वह अवसर नहीं [संगीत] होता कदाचित आपको स्मरण तो हो ग यदि धर्म और कर्म में पक्षपात आ जाए तो धर्म धर्म नहीं होता और ना कर्म कर्म रहता है एक पिता का धर्म होता है सदैव अपने पुत्र के हित में देख और एक पिता के अंधे पुत्र प्रेम के कारण ही यह महाभारत हो रही है ब्राह्मण [संगीत] देव मुझे पिता से कोई लेना देना नहीं देखना यह है कि क्या एक पुत्र अपना धर्म निभा पाता है या नहीं क्या एक पुत्र अपने पिता के सम्मान की रक्षा कर पाता है या [संगीत] नहीं आज्ञा दे वास मेरा प्रस्थान करने का समय हो चला नी [संगीत] पा विजय भाव विजय [संगीत] रुक जाइए पिताश्री मत जाइए अपने साथ ऐसा अन्याय मत होने दीजिए देव ने आपके साथ जो अन्याय किया उसके पश्चात उसके पश्चात आप ऐसा कैसे कर सकते हैं मैं यह सब इसलिए कर रहा हूं क्योंकि यह मेरा धर्म है एक सूत का धर्म हम सूत सदा देते आए हैं ु में सारथी बनकर सुरक्षा देते हैं राज्य को समय पर कर देते हैं आज एक सूर्य पुत्र के सम्मान का नहीं एक सूत पुत्र के सम्मान का प्रश्न है व सूत पुत्र जिसने दान में मांगी हर वस्तु देने का वचन दिया है आज मुझसे कोई मेरे कवज और कुंडल क्या प्राण भी मांगेगा तो मैं दे [संगीत] दूंगा
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