[संगीत] [संगीत] आ [संगीत] मित्रों पिछले हमारे कठिन अनुभवों के आधार पर हमें इस गुफा में प्रवेश करते समय भी अत्यंत सतर्क रहने की आवश्यकता है हम सभी को सतर्क होकर आगे बढ़ना होगा चलिए मित्रों चलिए [संगीत] चारों ओर फलों से लदे हुए वृक्ष है यहां तो और वायु में फैली मीठे फलों की मधुर सुगंध भी ऐसा मनोरम वन तो मैं प्रथम बार देख रहा हूं [संगीत] मित्रों चारों और फल ही फल यहां तो शहद भी है यह तो मेरा प्रिय भोजन है अब तो मेरी शुदा इसी से ही शांत [संगीत] होगी रुक जाइए सब हनुमान को कुछ उचित प्रतीत नहीं हो रहा है कहीं यह वृक्ष जल धाराए फल आदि किसी नवीन संकट का संकेत तो नहीं इतने समय के पश्चात स्वादिष्ट भोजन नेत्रों के समक्ष आया है इसमें क्या अनुचित हो सकता है हनुमान जी ऐसे सरस फल और कहां प्राप्त होंगे हनुमान जी और ऐसे सुंदर जैसे अपनी कांति से हमें आमंत्रित कर रहे हो आओ हमारा भोजन करो हां हां सत्य है ऐसे सरस फल मैं तो अब और प्रतीक्षा कर ही नहीं सकता रुक जाइए आप सब मेरी बात सुनिए ऐसा मनमोहक दृश्य अवश्य ही कोई भ्रम जाल हो सकता है तनिक विचार कीजिए इतने परिपूर्ण वन का ऐसे निर्जन स्थान में स्वतः स्थित होना असंभव [संगीत] है इसका कोई स्वामी अवश्य है जो किसी प्रयोजन से ही नियमित रूप से इस वन का रख रखाव करता है इसलिए इस वन के स्वामी की अनुमति लिए बिना ही हम कैसे इसका स्वामी कोई भी हो हनुमान जी युवराज अंगत की इच्छा को नहीं नकार सकता [संगीत] जामत मामा आप तो समझिए अब हमसे और प्रतीक्षा नहीं होती चलो प्रभु श्री राम के कार्य से निकले हैं हम सब और हमारा परम उद्देश्य सीता माता की खोज है रुक [प्रशंसा] [संगीत] जाइए [संगीत] रामन फल स्वाद बहुत स्वादिष्ट है बहुत स्वादिष्ट है स्वाद फल इतने सारे फल इनम से कौन सा [संगीत] खाऊ हम इतने स्वादिष्ट सरोवर का जल भी मीठा है [संगीत] हां जय श्री राम राम [प्रशंसा] राम इतने दिनों के पश्चात स्वादिष्ट अभी जड़कर इसका पान करता [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] हूं बस रो चारों दिशा बस निर्जन वानर पा गए पोषित उपवन शांत शुधा तृष्णा करने को दौड़े सब कपि रोके रोके को अंगद जामवंत सब ही मगन है पवन सुता बस राम लगन है इत पसरा सारे वानर उत हनुमत जपे राम निरंतर हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली [संगीत] हनुमान क्या हो रहा है ये ये क्या हो रहा है प्रभु प्रभु [संगीत] प्रभ क्या रक्षा कीजिए [संगीत] प्रभु [संगीत] [संगीत] ये लताए ये लताए तो झगड़ जा रही है इन लताओ से मुक्त नहीं हो पा रहे हैं हम प्रभु हमारी रक्षा कीजिए प्रभु रक्षा करो बाबू रक्षा रक्षा करो रक्षा करो इन लताओ ने हम अरे ये क्या लताओ में सब बंधे हुए हैं मित्रों अरे [संगीत] हनुमान जी हनुमान जी रक्षा कीजिए हनुमान जी यह तो अंगत का स्वर [संगीत] है हनुमान जी सहायता कीजिए [संगीत] युवरांग [संगीत] हनुमान जी रक्षा कीजिए आप जो भी है मेरे मित्रों को छोड़ दीजिए मैं उनका भक्षण आपको कदापि नहीं करने दूंगा जय श्री [प्रशंसा] राम हनुमान जी हनुमान [संगीत] [संगीत] जी हनुमान के मित्रों को बंधक बनाने वाले कौन है आप प्रत्यक्ष रूप में प्रकट होइए अन्यथा अपने मित्रों की रक्षा के लिए इस वन के समस्त वृक्षों को उखाड़ने पर बाध्य हो जाएगा जय श्री [प्रशंसा] [संगीत] राम जय श्री [प्रशंसा] राम रुक जाइए रुक जाइए [संगीत] जा [संगीत] कौन है यह [संगीत] देवी [संगीत] देवी आप जो भी हैं हनुमान का प्रणाम स्वीकार कीजिए कल्याण हो वत्स वानर होने पर भी आपके इस शिष्टाचार पूर्ण आचरण की मैं सराहना करती हूं परंतु आप मेरे वृक्षों को क्षति क्यों पहुंचा रहे हैं अपने मित्रों को संकट मुक्त करने के लिए देवी परंतु वो तो इसी योग्य है वो मेरी अनुमति के बिना मेरे वृक्षों के फलों को अप अपना आहार बना रहे थे और अब दंड स्वरूप मेरे वृक्षों का उनको अपना भोजन बनाना सर्वथा उचित है देवी उनकी ओर से मैं आपसे क्षमा मांगता हूं दो सप्ताह से भूख और प्यास से व्यथित यहां फलों को देखकर वह स्वयं को रोकने में असमर्थ हो गए यदि ऐसा था तो आप उनके साथ सम्मिलित क्यों नहीं हुए आप ऐसे प्रथम जीव है जिसने भूख और प्यास से इतना प्रताड़ित होने के पश्चात भी यहां के वृक्षों का एक फल तक नहीं चखा देवी मैं जब तक अपना कार्य पूर्ण कर लू मैं ना तो विश्राम करता हूं और ना ही भोजन और इस बार तो मैं अपने जीवन का सबसे महत्त्वपूर्ण और सबसे महान कार्य करने निकला हूं अपने प्रभु श्रीराम का श्री राम का कार्य उसकी पूर्ति के पश्चात ही मैं कुछ ग्रहण [संगीत] करूंगा क्या हुआ देवी आप किस विचार में खो गई देवी हमें विलंब हो रहा है कृपया मेरे मित्रों को क्षमा कर हमें यहां से प्रस्थान करने की अनुमति दीजिए देवी अपने वृक्षों को आदेश दीजिए कि वह मेरे मित्रों को मुक्त कर दें अंतता मेरी भेंट आपसे हो ही गई रामदूत [संगीत] हनुमान मैं कृतार्थ हुई परंतु आप मेरे नाम से कैसे परिचित है कौन है आप देवी मैं स्वयं प्रभा हूं हनुमान इस स्थान की रक्षक जिसका निर्माण बहुत समय पूर्व दानव माया सुर ने अपनी प्रियतमा अप्सरा हेमा के लिए किया था इसीलिए यह स्थान उन्हीं देवी हेमा का है जिन्होंने मुझे यहां की रक्षा एवं रखरखाव के लिए नियुक्त किया है मुझे अभी स्मरण हुआ उन्होंने मुझे बताया था प्रभु श्री राम के भक्त हनुमान अर्थात आपका यहां आगमन होगा और तब मुझे आपकी सहायता करनी होगी तब हनुमान की सहायता करने में विलंब मत कीजिए माता मुझे अपने मित्रों के साथ यहां से सुरक्षित जाने दीजिए जिससे हम रावण द्वारा अपरत प्रभु श्री राम की अर्धांगिनी माता सीता को ढूंढ सके इसके लिए अब हमारे पास अधिक समय नहीं है आपका दृढ़ निश्चय और कार्य निष्ठ अत्यंत ही प्रशंसनीय है हनुमान इसीलिए मैं आपके मित्रों को तत्काल ही मुक्त करती हूं आपका बहुत-बहुत आभार [संगीत] देवी [संगीत] और [संगीत] मित्रों आप सभी कुशल तो है हा मैंने आप सभी से कहा था ना कि इस उद्यान पर किसी का स्वामित्व है यह वही है इस स्थान की रक्षक देवी स्वयं प्रभा प्रणाम [संगीत] देवी हमें क्षमा करें माता हनुमान जी ने हमें रोकने की बहुत चेष्टा की परंतु भूख और प्यास से पीड़ित हम शिष्टाचार की सभी मर्यादाओं का उल्लंघन कर बैठे परंतु यह तो आपका सौभाग्य है कि हनुमान जी आपके साथ है उनका अनुशासन विचार क्षमता सूझबूझ और शक्ति सदैव आपकी सहायता करेगी [संगीत] हनुमान मैं आपको आशीष देती हूं आप शीघ्र ही सीता माता को ढूंढने में सफल [संगीत] होंगे धन्यवाद माता आपके मुख से यह सुखद वचन सुनकर हनुमान धन्य हुआ मैं भी आपके इस महान कार्य में छोटा सा भाग निभाने की इच्छुक हूं मैं आपको और आपके इस दल को ऐसे स्थान पर पहुंचा दूंगी जहां से आपकी शोध एक भिन्न स्तर पर पहुंच जाएगी और आप सीता माता के और समीप पहुंच जाएंगे हमारा मार्गदर्शन कीजिए माता हम प्रस्तुत [संगीत] हैं ठीक है आप सभी अपने नेत्र बंद कर [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] लीजिए जो आज्ञा माता [संगीत] [संगीत] यह तो समुद्र तट है ये हम कहां आ गए [संगीत] यह माता स्वयं प्रभा ने हमें कहां पहुंचा दिया इसके आगे तो कोई मार्ग ही नहीं है यहां तो मात्र अनंत सागर और उसका अथाह जल है अब हम प्रभु का कार्य कैसे पूर्ण करेंगे अब तो अधिक समय भी शेष नहीं है माता स्वयं प्रभा ने हमें यहां भेजा है तो अवश्य उसका कोई कारण [संगीत] होगा अवश्य यहीं से सीता माता तक पहुंचने का कोई मार्ग होगा प्रतीत होता है कि उन तक पहुंचने के लिए हमें इस सागर को पार करना होगा हम आप और कुछ वानर मित्र भले ही इस समुद्र को पार करने में सक्षम हो हनुमान जी किंतु हमें शेष वानर मित्रों के लिए भी कोई उपाय सोचना होगा इतने सारे स्वस्थ वानर एक साथ आ इतना भरपूर आहार भेजकर इस आहत पक्षी पर बहुत बड़ी कृपा की है कृपा निदान [संगीत] ने बिना सोचे विचारे कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए अन्यथा बुरा परिणाम भुगतना पड़ सकता है
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