Tuesday, 6 January 2026

हनुमान अपने पिता का प्राण लेने पहुँचे काल लोक Ishant Mahabali Hanuman Episode 260 Pen Bhakti

[संगीत] [संगीत] आ पुत्र हनुमान यह पवित्र गंगाजल आप अपने मृतक पिता के शरीर पर [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] छिड़क स्मृति चित्र ने में आए मन पर पिता मेघ समझाए करते योग्य पुत्र का कर्म वेद विहित आलौकिक धर्म आंसू से भर आई अंजलि यही तात अर्पित श्रद्धांजलि ये था महाबली हनुमत की र लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान पिता श्री महारानी जी आप लोगों को इस प्रकार तड़पता देखकर महाराज केसरी की आत्मा को कष्ट हो रहा होगा [संगीत] पुत्र हनुमान यह पिंड अपने हाथ में [संगीत] लीजिए अब हम आपके मृतक पिता की शांति के लिए यह पिंड दान आरंभ करते हैं [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] रुक जाइए रुक जाइए प्रणाम देव गुरु बृहस्पति ऋषिवर य पिंड विधि त्रुटिपूर्ण [संगीत] है चावल का नहीं काले तिल मधु के साथ पिंड देना होगा आपको क्योंकि केसरी जी की अकाल मृत्यु हुई है अकाल मृत्यु अकाल मृत्यु हां क्रिया क्रम अकाल मृत्यु के द्वारा ही करना उचित होगा खेसरी जी की मृत्यु एक स्वाभाविक मृत्यु नहीं है अकाल मृत्यु हुई है कालदेव द्वारा कालदेव द्वारा का देव दवारा यह क्या कह रहे हैं आप देव गुरु यही सत्य है पुत्र हनुमान ब्रह्मदेव ने जितनी शवास दी थी उसे पूर्ण के बिना छीन लिया कालदेव ने यह तो अन्याय हुआ है स्वामी के साथ आप तो देव गुरु है आपके कुल के दीपक को असमय बुझा दिया कालदेव ने और आपने उन्ह रोका तकने क्यों किया ऐसा कालदेव ने पुत्री अंजना मान ने संसार के रक्षा करने के लिए काल चक्र को विपरीत दिशा में प्रचा कर दिया [संगीत] इसे ही अपने कार्य में हस्तक्षेप मानकर कालदेव ने हनुमान को दंड देने के लिए केसरी को अकाल मृत्यु प्रदान कर [संगीत] दी यह तो अन्याय है मेरे पिता श्री ने कौन सा अपराध किया है मुझे दंड देते किंतु वो पिता श्री को इस प्रकार दंड नहीं दे सकते किंतु हनुमान अब कुछ नहीं किया जा सकता कालदेव का निर्णय अटल है उसे मैं भी परिवर्तित नहीं कर सकता हू नहीं गुरुदेव कर्म भाग्य को बदल देता है जैसे कालदेव को भी अपने निर्णय को तपस्वी महाराज मारकंडे जी के लिए बदलना पड़ा था मैं भी हम लोग जाकर अपने पिता श्री का जीवन वापस लाऊंगा नहीं हनुमान तुम कहीं नहीं जाओगे यदि कालदेव अधिक क्रोधित हो गए तो न जाने क्या अनर्थ कर बैठेंगे अन्याय करना ही नहीं अन्याय सहना भी अधर्म होता है मैं यह न्याय नहीं चाहूंगा कालदेव को मेरे पिता श्री का जीवन लौटाना ही होगा जो तुम करना चाहते हो व असंभव है अनुमान कालदेव इसे पुन अपने कार्य में हस्तक्षेप मान बैठेंगे तु वहा नहीं जाना चाहिए मेरा हनुमान कालदेव के के पास जाएगा मां आपको मुझ पर विश्वास तो है ना हां पुत्र मेरे विश्वास और तुम्हारे पितृ भक्ति की शक्ति कालदेव से तुम्हारे पिताश्री के प्राण वापस लेकर आएगी मां आपने ही कहा था ना जिस पुत्र के साथ अपने माता-पिता का आशीर्वाद हो वह कभी असफल नहीं होता आपका विश्वास ही मेरी विजय का आधार होगा हां पुत्र अपने पिताश्री के प्राण वापस लेकर ही आना ऐसा ही हो [संगीत] [संगीत] मा पिता श्री आप साक्षी है मेरे परिजन है ये मित्र है और आप सब भी साक्षी है ये दसों दिशाए भी साक्षी है हनुमान के प्रतिज्ञा की मैं केसरी नंदन अंजलि पुत्र हनुमान काल लोक से अपने पिता श्री के प्राण वापस ले आऊंगा ले आऊंगा वापस ले आऊंगा ले आऊा तभी इस पृथ्वी पर पग रखूंगा निराशा पतन का द्वार है और आशा उत्थान का सोपान इसीलिए मनुष्य को आशा कभी नहीं छोड़नी चाहिए स्वयं के प्रति हुए अन्याय का बोध होने न्याय के लिए उठ खड़े होना चाहिए परिस्थिति का सामना दृढ़ता के साथ करना चाहिए परिणाम की चिंता ना करते हुए मनुष्य को सत्य और न्याय के लिए एक योद्धा की भाति प्रयास करना चाहिए मां मैं प्रतिज्ञा पूर्ण करके ही लौटूंगा मां मुझे आज्ञा एवं आशीर्वाद हनुमत लेते महा घोर प्रण लौटा आएंगे पिता का जीवन जाएंगे वे काल लोक अब आ कुलता है होगा क्या अब माता को बहु धीर बंधते भाति भाति उनको समझा पाकर आज्ञा ओ आशीष उड़े काल गति व्यथित कप श गांधा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महावली हनुमान प्रणाम देव गुरु असंभव फिर भी मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है पुत्र सफल मनोरथ तुम्हारे पास केवल 11 दिवस ही शेष समय रहते कुछ ना हुआ तो किसी का जीवन असंभव मां हमारी तीर्थ यात्रा अवश्य पूर्ण होगी और पिताश्री हमारे साथ [संगीत] होंगे हनुमान तुम्हारे पिता अब कभी नहीं होंगे तुम्हारे साथ तुम्हारे लौट कर आने से पहले ही केसरी की देह चिता में भस्म हो चुकी होगी पिता श्री की आत्मा बहुत कष्ट में होगी मां का मन भी बहुत दुखी है मुझे शीघ्र ही पिता श्री के प्राण लेकर वापस लौटना होगा मेरे कारण पिता श्री के प्राण चले जाए ऐसा पुत्र नहीं हूं मैं ऐसा कदा भी नहीं होने दूंगा मैं अपने पिता के साथ अन्याय नहीं होने देगा हनुमान मुझे पूर्ण विश्वास है मेरे स्वामी की देह का अंतिम संस्कार नहीं होगा हनुमान इनके प्राण वापस लेकर ही आएगा जब तक हनुमान मेरे स्वामी के प्राण लेकर नहीं लौटता मैं ऐसे ही इनके पास बैठी रहूंगी अंजना इस प्रकार पुत्र केसरी की देह को अधिक समय तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता मैं इनकी देह की सुरक्षा की व्यवस्था कराता हूं तुम शांत मन से हनुमान के लौटने की प्रतीक्षा [संगीत] करो जब तक हनुमान लौटकर वापस नहीं आता तब तक पुत्र केसरी की देह पर जड़ीबूटी का लेप लगाकर एक तेल से भरी द्रोणी में सुरक्षित रखने की व्यवस्था सुरक्षित नहीं रख पाओगे तुम वाकली के राज्य में वाकली के शत्रु इस केसरी को वाकली राज का युवराज है वाका शर ये कदापि नहीं होने देगा कदापि नहीं मैं सत्य कह रहा हूं काका महाराज वश कली केसरी की मृत देह को स्वयं अपने नेत्रों से देख कर आ रहा हूं मैं उस दुष्ट केसरी के पुत्र हनुमान ने हमें भी पराजित किया और हम असहाय देखते रह गए [संगीत] प्रती वर्षों से केसरी के विरुद्ध प्रतिशोध की चिंगारी भड़क उठी थी मेरे हृदय में किंतु मेरे मृत्यु दंड से पूर्व वो मर गया अब इस प्रतिशोध की ज को कैसे शांत करू प्रतिशोध तो हम अब भी ले सकते हैं प्रतिशोध अब कैसा मृत्यु हो चुकी है उसकी उस केसरी की देह को नष्ट करके तुम्हारा तात्पर्य है कि उस केसरी की मृत देह की उसकी देह की दुर्गति कर दे किंतु इसमें आनंद क्या आएगा आएगा आएगा आनंद काका महाराज वाश कली उसका पुत्र वो चमत्कारी बालक हनुमान अपने पिता की आत्मा को लाने का लोक गया है यदि वह सफल हो गया तो उसके आने के पूर्व ही हम उस केसरी की देह को भस्म कर देंगे अब ना रहेगा बांस और बजेगी बासुरी अनुमान तुम्हारे पास केवल 11 दिवस ही शेष है समय रहते कुछ ना हुआ तो खेसरी का जीवन असंभव उनकी आत्मा को दूसरा जीवन मि जा मेरा निश्चय भी मारकंडे जी की भाति अधिक रहेगा हे भोले बाबा मेरा मनोरथ सफल करने में मेरी सहायता कीजिएगा प्रभु वो देखो हनुमान महाराज कालदेव ने हनुमान के प्रवेश पर निषेध लगाया है इन द्वारपालों के हावभाव से तो प्रतीत होता है कि यह मुझे भीतर नहीं जाने देंगे मुझे इनसे युद्ध किए बिना ही भीतर जाना होगा मेरी तीव्र गति मुझे प्रवेश दिलाएगी काल लोक में हनुमान प्रतीत होता है कि काल का दंड तुम्हें कम लग रहा है इसीलिए काल लोक में आने का दुस्साहस कर बैठे हो तुम तुम्हारा मौन तुम्हारे क्रोध को दर्शा रहा है हनुमान किंतु तुम्हारे क्रोध का काल के समक्ष कोई अर्थ नहीं है बोलो हनुमान क्यों आए हो [संगीत] यहां प्रणाम कालदेव [संगीत] मैं यहां पिता श्री के प्राण वापस लेने आया हूं बालक हो मृत्यु का अर्थ नहीं जानते हो तुम तुम्हें क्या लगता है यह संभव है दंड अपराधी को ही दिया जाता है और अपराधी मैं हूं मेरे पिताश्री ने तो कोई अपराध नहीं किया था फिर पिताश्री को कैसे दंड दे सकते हैं आप तुम्हारे पिता की मृत्यु ही तुम्हारे लिए सबसे बड़ा दंड है हनुमान किंतु यह अन्याय है कालदेव ऐसा मत करिए पिता श्री के प्राण वापस लौटा दीजिए तुम्हारे परिवार को दुख पहुंचा है इसलिए तुम मुझ पर अन्याय का आरोप लगा रहे हो हनुमान मैंने जो भी किया है अपने अधिकार क्षेत्र में रहकर ही किया है किंतु कालदेव नियम है तो यम है जितने कठोर नियम दंड भी उतना ही भीषण तुमने काल के कार्य में हस्तक्षेप किया है मैंने अधिकार का प्रयोग करते हुए तुम्हारे पिता को अकाल मृत्यु दे दी कालदेव यह आपका कैसा अधिकार है किसी के अपराध का दंड किसी और को दे कालदेव मैं प्रस्तुत हूं मुझे दंड दीजिए किंतु मेरे कारण मेरे पिताश्री को दंड देना यह न्याय है हनुमान मेरे न्याय और मेरे अधिकार पर प्र प्रश् उठाने का प्रयास मत करो तुम तुमसे नहीं सीखना है मुझे न्याय और अन्याय का पाठ मेरा अधिकार क्या है इसका ज्ञान है मुझे और एक बात भली भाति जान लो तुम हनुमान यदि मैं चाहूं भी तब भी तुम्हारी प्रार्थना स्वीकार नहीं कर सकता हूं ऐसा क्यों कह रहे हैं आप आप प्राण हर सकते हैं तो लौटा भी सकते हैं यह भ्रम है तुम्हारा हनुमान मैं प्राण हरने का कार्य करता हूं किंतु मैं किसी के प्राण नहीं लौटा सकता यही नियम है नियम है तो यम है कालदेव मैंने मां को वचन दिया है कि मैं पिताश्री के प्राण लेकर ही पृथ्वी लोक जाऊंगा अबोध हो तुम पुनः भूल कर बैठे ऐसे असंभव प्रण लेने से पहले तुम्हें सोचना चाहिए था असंभव को संभव करके रहूंगा मैं मैंने मेरी मां को जो वचन दिया था वो पूर्ण करके [संगीत] रहूंगा

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...