Tuesday, 6 January 2026

हनुमान अपनी परीक्षा में सफल कैसे हुए थे Nirbhay Wadhwa Mahabali Hanuman Episode Pen Bhakti

[संगीत] मैं तो असफल हुआ इस कार्य में अब क्या होगा गुरुदेव को सब स्पष्ट बता देना उचित ही [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] होगा [प्रशंसा] [संगीत] स्वामी हनुमान तो असफल हो गए अब क्या होगा प्रिय सफलता प्राप्ति के लिए अपनाए गए छोटे मार्ग एवं लघु उपाय सदैव अनुचित और अनर्थ कारी होते हैं विशेष रूप से ज्ञान प्राप्ति के लिए कोई छोटा मार्ग नहीं होता और जो ज्ञान प्राप्ति के लिए छोटे मार्ग को चुनते हैं उनका ज्ञान अधूरा रह जाता है जो कभी-कभी हानिकारक तो होता ही है असफलता का कारण भी बनता [संगीत] है [संगीत] प्रणाम गुरुदेव गुरुदेव मैं आपके सौंपे गए कार्य में असफल रहा असफलता से कभी निराश नहीं होना चाहिए असफलता ही सफलता की ओर ले जाने वाली सीढ़ी है वत्स इस असफलता ने तुम्हें यह तो सिखा दिया कि ज्ञान प्राप्ति के लिए कभी भी लघु मार्ग नहीं अपनाना चाहिए आप सत्य कह रहे हैं गुरुदेव किंतु मुझे कोई और उपाय सूझ ही नहीं रहा था जल पात्र से ध्यान हटाकर उल्का पिंडों की गणना करू तो जल छलक उठता है और पात्र पर ध्यान न देता तो गणना नहीं हो पा रही थी वस तुम प्रातः से सायंकाल तक अनेकों कार्य करते हो किंतु उन कार्यों पर मन एकाग्र करते हुए शवास लेना भूल जाते हो क्या नहीं गुरुदेव हनुमान हमारा मस्तिष्क हृदय गति श्वसन क्रिया पाचन आदि क्रिया देखना सुनना चलना बोलना सीखना यह सब कार्य एक ही समय में एक साथ संपन्न करता है हमारा मस्तिष्क असीम शक्तियों का भंडार है आवश्यकता है तो उन्हें पहचान करर उनका प्रयोग करने की मस्तिष्क के एक भाग को जल पात्र पर केंद्रित करो और दूसरे भाग को उल्का पिंडों पर हनुमान इस अभ्यास से ही तुम भा जीवन में मन को एकाग्र करके एक साथ अनेक कार्य करने की दक्षता प्राप्त कर [संगीत] सकोगे मन आत्मा और बुद्धि के संतुलन को समझ पाओगे तुम अब तो जान गए पुत्र कि तुम्हें कैसे अपना कार्य करना है मैं सब समझ गया गुरुदेव मन मस्तिष्क और बुद्धि का ऐसा संतुलन बनाना है कि पात्र से ध्यान भी ना हटे और उल्का पिंडों की गणना भी होती रहे उचित है पुत्र अब जाओ और पुनः प्रयास करो अवश्य गुरुदेव प्रणाम असफलता में ज्ञान निहित गुरु वचन से हुआ विदित गुरु ने गढ़ पाठ सिखाया महत्व परिश्रम का समझाया संतुलित हो मन और बुद्धि संभव होगी तब का सिद्धि हनुमत करेंगे पुनः प्रयास गुरु स मेरे साथ मेरी माता एवं पिताश्री का भी आशीर्वाद है रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय नंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान अब देख वनर नरेश मैं तेरी देह को कितनी भागों में विभाजित करता हूं अब तू नहीं बचेगा मेरे वार से [संगीत] दुष्ट वानर मैं तुझे समाप्त कर दूंगा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] मुझे यहां से निकाल त चनर तुम्हें कोई नहीं निकालेगा वजरा सर अब जीवन भर ऐसे ही पड़े रहोगे तुम [संगीत] मेरी मृत्यु नहीं होगी वानर और बाहर आते ही तुझे और तेरी सारी वानर प्रजाति को मिटा दूंगा [संगीत] मैं सेनापति बालकों को बंधन मुक्त कराकर सुमेरू ले चलो हमें शीघ्र वहा पहुंचना है कदाचित हनुमान की कोई सूचना आई हो जी महाराज [संगीत] इस बार मुझे अपने कार्य में सफल होकर दिखाना है गुरुदेव [संगीत] को जय गुरुदेव मुझे शक्ति दे एक उलका दो तीन चार पांच [संगीत] छ 5 लक्ष पा 54 इससे बचना होगा और उनकी गणना भी करनी [संगीत] है 5 लाख 555 अब तो हनुमान की परिक्रमा सफल हो ही जाएगी बस अन्य कोई नवीन विघ्न ना आ [संगीत] जाए नारायण नारायण देवर्ष आप लंका में पधारे हैं वो भी प्रसन्न मुद्रा में आश्चर्य है लंकेश रावण श्री हरि नारायण की भग नारायण छलिया नारायण का नाम नहीं लेंगे आप मेरे सामने रावण मैं तो यह बताने आया हूं कि तुम्हें ज्ञात भी है कि आजकल क्या हो रहा है सूर्यलोक में स्वयं सूर्यदेव शिक्षा दे रहे हैं हनुमान को वो भी किसी विशेष कार्य के लिए वो ज्ञात है मुझे परंतु आप हनुमान के किस विशेष कार्य के बारे में बात कर रहे अब हनुमान की शिक्षा तुम्हारे किसी कार्य के लिए तो हो नहीं रही होगी और जिस कार्य के लिए हो रही है वो वही है जो तुम्हारे सहार का कारण बनेगा देव आपने मेरे भाई कुंभकरण को तो यह सूचना दे दी कि नारायण नर का अवतार ले चुका है परंतु यह आप ने हमें नहीं बताया क्यों तुम इतने बड़े सम्राट किस लिए हो तुम्हें स्वयं अपने शत्रु की हर सूचना रखनी चाहिए मैं तो कहता हूं कि अभी भी श्री हरि की शरण में आ जाओ कल्याण होगा तुम्हारा दे यदि यह वाणी किसी और के मुख से निकली होती तो महादेव की सौगं उसका शीश उसके ड़ से अलग मृत्यु के मुख में होता मृत्यु के मुख में तो सभी को जाना है एक दिन इस मृत्यु लोक में मृत्यु ही अटल सत्य है नारायण नारायण सूर्य देव स्वयं हनुमान को श दे र उन्हें रोकने के लिए भी स्वयं ही जाना होगा ठहरो रावण प्रणाम दैत्य गुरु कल्याण [संगीत] भवन रावण जो कार्य शब्द कर सकते हैं वहां तलवार का प्रयोग नहीं किया जाता युक्ति से काम लो इस बार किस युक्ति की बात कर रहे हैं आप रावण हनुमान को सात दिनों में अपनी शिक्षा पूर्ण करनी है एक बात मैं बता दूं हनुमान की भाति ही वरुण देव का पुत्र गौ भी सूर्यदेव के पास शिक्षा लेने के लिए गया था परंतु सूर्यदेव ने उन्हें शिक्षा देने से मना कर दिया समझ गया दैत्य गुरु के मुझे क्या करना है अब किसी भी स्थिति में सात दिन में हनुमान की शिक्षा पूण नहीं होगी 5556 5557 [संगीत] 5558 5559 5560 5561 [संगीत] ओ हो यह क्या जलते हुए उल्का [संगीत] पिन चिंता मत कीजिए महारानी जी सूचना आ गई है महाराज किसी भी क्षण आते ही होंगे हे सारे बालक कुशलता से ही हो मुझे तो भरोसा है महाराज पर वे बालकों को कुछ नहीं होने देंगे [संगीत] देखो महाराज केसरी आ [संगीत] गए बालक भी साथ है महाराज मेरा पुत्र स्वामी कुशल तो हो ना पुत्र देखिए आपके पराक्रम से सभी परिवार कितने प्रसन्न होठ हैं सब माताओं के जैसे प्राण वापस लौट आए हू मेरे पुत्र मेरे लाल तुझे असुरों ने सताया तो नहीं मां मुझे उन असुरों के सताने का भय नहीं था मुझे आप सबकी चिंता थी महाराज ने आकर हम सबको बचा [संगीत] लिया महाराज आपने मेरे पुत्र को बचा के हम हम सबको जीने का सहारा दिया [संगीत] है मैं आपका यह उपकार जीवन भर नहीं भूलूंगी भगवान आपको और आपके परिवार को समस्त दुखों और विपदा से [संगीत] बचाए बहन प्रजा और शरणागत की रक्षा करना तो राजा का प्रजा राजा की संतान के समान होती है मैं तो मात्र अपना कर्तव्य निभा रहा था बस ईश्वर की इतनी कृपा रही कि मैं इन सबकी रक्षा करने में समर्थ [संगीत] रहा महाराज केसरी यहां अपने बालकों को असरो से बचाकर अपना पराक्रम दिखाया और वहां हनुमान सूर्य द्वारा ली जाने वाली परीक्षा में अपना पराक्रम दिखा रहा है प्रणाम [संगीत] प्रणाम अर्थात सूर्यदेव ने मेरे पुत्र हनुमान को अपने शिष्य के रूप में स्वीकार कर लिया हा देवी अंजना अब संसार के सबसे बड़े ज्ञान मंदिर के आचार्य सूर्यदेव उसके गुरु [संगीत] और हनुमान अपनी शिक्षा का प्रथम अध्याय पूर्ण करने के लिए निकल भी चुका [संगीत] है इन जलते हुए उल्का पिंडों की गणना करने में बड़ी ही कठिनाई होगी यह सब तो गोलाकार घूमते हुए आगे आ र रहे हैं यह जलती हुई अग्नि का तीव्र प्रकाश और धुए के कारण सब एक में ही मिले हुए लग रहे हैं इससे मेरी गणना में त्रुटि हो सकती है मुझे कुछ करना होगा हनुमत देख हुए बच उल्का समूह गतिमान ज्वलित [संगीत] अंधकार धूम्र से छाया हनुमत दृष्टि पे भ्रम का साया कार पर केंद्रित उनका ध्यान करेंगे समस्या का समाधान उल् काओं की अग्नि को बुझाया जटिल पहेली को सुलझाया ये धा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली [संगीत] हनुमान

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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