[संगीत] काका श्री यह सागर हमारे सामने कैसी अबूझ पहेली बनकर प्रस्तुत हुआ है अब आप ही सुझाव दीजिए कि अब हम क्या करें मैं भी दुविधा में हूं पुत्र कि हमें इस सागर को पार करने की चेष्टा करनी चाहिए या नहीं यदि कहीं से कोई स्पष्ट संकेत प्राप्त हो जाता कि मा सीता सागर के उस पार ही है तो निर्णय लेना सरल हो [संगीत] जाता युवराज अंगद किसे ज्ञात है कि सागर के उस पार क्या है मेरे अनुसार अब हमारे पास यहां से लौटने के सिवाय और कोई विकल्प नहीं है क्योंकि महाराज सुग्रीव के द्वारा हमें दी गई समय अवधि भी शीघ्र ही समाप्त होने वाली है मित्र गंध मादन समय भले ही बीत जाए और उसके फल स्वरूप महाराज सुग्रीव हमें मृत्यु दंड ही क्यों ना दे [प्रशंसा] दे परंतु हमें अपने कर्तव्य पद से विमुख नहीं होना [प्रशंसा] चाहिए निराश होकर लौटने के स्थान पर हमें माता सीता को ढूंढने का हर संभव प्रयास करना चाहिए अन्यथा प्रभु श्री राम उनके वियोग की दुखा आगनी में जलते रहेंगे यदि हम अपने प्राण देकर भी माता सीता का कोई समाचार प्रभु श्री राम तक पहुंचा सके और उनकी पीड़ा हरने में सहायक बन सके तो हमारा जीवन सफल हो जाएगा [संगीत] इन सब को अपना आहार बनाकर अपने शुदा बटाऊंगा इस महान राम काज में अपने प्राणों की आहुति देना तो हमारा सौभाग्य होगा हमें पक्षी राज जटायु के उदाहरण से कुछ सीखना चाहिए प्रभु भक्ति की पराकाष्ठा के प्रतीक महाराज जटायु के परम त्याग की चर्चा मुझसे भ्राता लक्ष्मण ने की थी कि कैसे अपने प्राणों की चिंता किए बिना माता सीता को मुक्त कराने के प्रयास में उन्होंने अपने प्राण तक ने छावर कर [संगीत] दिए अब यह कौन सी नई आपदा आ गई इतना विशाल काय पक्षी कहीं यह हम सबको खाने तो नहीं आ रहा अन्य विपत्तियों के समान हम इसका भी सामना कर [संगीत] लेंगे तुम अभी जटायु की बात कर रहे थे क्या हुआ उसे शीघ्र बताओ मुझे जटायू के प्राण तो सुरक्षित हैं कौन है आप और पक्षीराज जटायु के विषय में क्यों पूछ रहे हैं मेरे प्रश्न का उत्तर दो बोलो क्या हुआ जटायू को [संगीत] धीरज रखिए मैं विस्तार से आपको सब बताता हूं अयोध्या नरेश महाराज दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र श्री राम की पत्नी का हरण कर दुष्ट रावण उन्हें अपने पुष्पक विमान से किसी गुप्त स्थान पर ले जा रहा था तभी महा पराक्रमी पक्षीराज जटायु की दृष्टि रावण के इस दुष्कृतम् [संगीत] रावण के शक्तिशाली पुष्पक विमान की गति का सामना किया जा दुष्ट [संगीत] रावण मेरे मा को अवध करने का तो साहस तुम्ह बहुत भारी पड़ेगा मूर्ख मूर्खता मैंने नहीं अभी तू देवी सीता का हरण करने का दुस्साहस कर तुमने की है [संगीत] [संगीत] रावण मुक्त कर दो देवी सीता को [संगीत] दो अभी दिखाता हूं [संगीत] तुम्हे जय श्री राम रा राम रा [संगीत] राम [संगीत] फिर फिर क्या हुआ उसे फिर उस क्षत विक्षत अवस्था में भी महाराज जटायु ने असहनीय कष्ट सहकर भी अपने प्राणों को अपने शरीर में संजो कर रखा और प्रभु श्री राम की प्रतीक्षा करते रहे जब अपने भ्राता लक्ष्मण जी के साथ प्रभु श्री राम माता सीता को ढूंढते हुए उनके निकट पहुंचे तब प्रभु को इस घटना का संपूर्ण विवरण देने के पश्चात ही जटायु जी ने अपने प्राण त्याग [संगीत] दिए मता जटायु संपाद आपकी रक्षा भी ना कर सका संपाती जी अपने आप को संभालिए संपाती जी सदाचार और विनय का प्रतीक था मेरा अनुज जटायु उसके विपरीत मैं दम भी और मूड [संगीत] था बहुत समय पूर्व अहंकार वश अपने ने उड़ने की शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए मैंने उड़ान भरकर सूर्यदेव तक पहुंचने की चेष्टा की थी परंतु सूर्यदेव की प्रखर उष्मा को मैं कहां सहन कर पाता उनके समीप जाते ही मेरे पंख झुलस गए और पंख जल जाने के कारण उड़ने में असमर्थ हो मैं यहां आकर गिर पड़ा उस दिन के उपरांत मैं कभी उड़ान नहीं भर पाया मृत्यु मेरी होनी चाहिए थी मेरे शूर भी भ्राता की नहीं अपने पंख खोकर तो मैं यह निरर्थक जीवन जीने का एक छुक भी नहीं था परंतु तभी मेरी भेंट मुनि निशा करर से हुई उन्होंने मुझसे कहा कि प्रभु श्री राम की कथा सुनने और उनके कार्य में सहायक बनने से मेरा उद्धार होगा तभी से मैं इसी प्रतीक्षा में य स्थित हूं और वैसे भी पंख रहित असहाय अवस्था में मैं जाता भी कहां संपाती जी मेरा सुझाव है कि आप सर्वप्रथम अपने दिवंगत भ्राता को तर्पण देकर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें उसके पश्चात ही हमारा आपसे सहायता मांगना उचित होगा अद्य श्रुति स्मृति पुराणो फल प्राप्थम देवर्षी मनुष्य पि तर्पण [संगीत] [संगीत] करिश्य प्रभु तुम्हारी आत्मा को शांति दे जटाय हे महान संपाती जी आपके कथन अनुसार आप यहां दीर्घ काल से स्थित हैं हमें बताइए कि आपने यहां आकाश मार्ग में पुष्पक विमान या माता सीता को किसी दिशा में जाते देखा है जहां तक मेरी वृद्ध बुद्धि को स्मरण पड़ता है कुछ दिनों पूर्व जब मैं चौकन्ना रहकर अपने भोजन के लिए किसी आखेट की प्रतीक्षा कर रहा था मुझे आकाश से एक करुणा भरी पुकार सुनाई दी थी स्वर स्पष्ट नहीं था परंतु ऐसा प्रतीत होता था जैसे किसी युवती का है परंतु जब तक मैं अपनी दृष्टि को उस स्वर पर केंद्रित कर पाता एक विमान सागर के उस पार शितिज में विलीन होकर अदृश्य हो रहा था प्रतीत होता है संपाती जी द्वारा देखे गए उस विमान से आने वाला स्वर माता सीता का ही था संभव है दुष्ट रावण उन्हें सागर के उस पार लंका नगरी ले गया हो यदि ऐसा है काका श्री तो अब हमय कैसे ज्ञात करेंगे कि अभी भी माता सीता लंका में ही है गरुड़ दृष्टि तो योजन तक देख सकती है संपाती जी क्या आप अपनी पैनी गरुड़ दृष्टि से लंका नगरी की ओर देखकर ज्ञात कर सकेंगे कि माता सीता वहां पर है या नहीं पुत्र यहां से तो कुछ दिखाई नहीं देगा और मैं ऐसा असहाय पक्षी हूं जिसके पास पंख ही नहीं है आकाश में उड़कर देखने में अक्षम हूं मैं यह मेरा दुर्भाग्य है कि मैं तुम्हारी कोई सहायता नहीं कर सकता निराश मत होय संपा प्रभु का नाम लेने से तो समस्त विषद दूर हो जाते हैं एक बार पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से प्रभु का नाम लीजिए संपाती जी मुझे विश्वास है कि उससे कोई उपाय अवश्य निकलेगा मैं अवश्य प्रयास करूंगा हनुमान [संगीत] जय श्री राम जय श्री राम श्रीराम श्री राम जय श्री राम जय श्री राम [संगीत] [संगीत] राम मैं धन्य हुआ प्रभु मुझे नूतन पंख देकर आपने मुझे इस कार्य के लिए सक्षम बना दिया जय श्री राम ज श श्रीराम जय श्री राम जय श्री राम [संगीत] हे संपाद जी क्या दिखाई दिया आपको क्या आपको माता सीता के दर्शन हुए हां पुत्र लंका जैसी भोगर विलास की नगरी में साधारण वेशभूषा में एक वृक्ष के नीचे उदास और चिंतित बैठी एक महिला दिखी परंतु वह माता सीता ही है यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता पुत्र हो ना हो वह माता सीता ही होंगी अर्थात देवी स्वयं प्रभा ने हमें उचित स्थान पर भेजा था प्रतीत होता है कि हम अपने लक्ष्य के निकट हैं अब हम प्रभु श्री राम का यह महान कार्य पूर्ण करने की आशा कर सकते हैं हां हनुमान जी परंतु हमें इस बात की पुष्टि करनी होगी कि संपाद जी द्वारा लंका नगरी में देखी गई महिला माता सीता ही है हां पुत्र और यह भी कि प्रभु श्री राम के साथ हमारे यहां लौटने तक वह वहां सुरक्षित रहेंगी परंतु यह हम करेंगे कैसे हां वहां कौन जाएगा और कैसे [संगीत] नवीन पंख प्राप्त करने के पश्चात भी मेरे वृद्ध शरीर में इतनी सामर्थ्य नहीं कि मैं यह कार्य संपन्न कर सकूं मेरा सुझाव है कि आप अपने दल में से ही किसी योद्धा का चुनाव कर ले जो छलांग लगाकर लंका पहुंचे और इस कार्य को पूर्ण करे हम सब में सबसे जेष्ठ होने के नाते इस कार्य के लिए मुझे स्वयं प्रस्तुत होना चाहिए परंतु वृद्धावस्था में मेरी शक्ति भी क्षीण हो चुकी है युवावस्था में ब्रह्मांड की 21 परिक्रमा करने वाला यह वृद्ध शरीर अब थक चुका है इसलिए दुर्भाग्यवश मेरे लिए संयोजन की छलांग लगाना असंभव है आप हमारे आदरणीय अग्रज हैं हम युवा वानरों के होते हुए आपको यह कार्य करने की कोई आवश्यकता नहीं है इस दल का अधिपति होने के के नाते मुझे ही जाना चाहिए मुझे विश्वास है 100 योजन की छलांग तो मैं लगा ही लूंगा किंतु युवराज अंगद यह दूरी आपको दो बार तय करनी होगी माता सीता की सूचना के साथ आपको वहां से वापस लौटना भी तो होगा आप उचित कह रहे हैं काका श्री मैं पहुंच तो जाऊंगा परंतु मुझे संदेह है कि इस श्रम के पश्चात मुझ में लौटने की शक्ति शेष रहेगी या वैसे भी युवराज और सेनापति होने के नाते का जाना उचित नहीं है आपको यहीं रहकर हमारे नेतृत्व का दायित्व निभाना है फिर काका श्री हमारे बीच ऐसा कौन है जो यह कार्य सफलता पूर्वक कर सके मैं तो केवल 60 योजन तक ही छलांग लगा सकता हूं मेरी भी सर्वश्रेष्ठ छलांग कुछ 80 योजन तक पार कर सकती है 100 योजन पार करना तो अत्यंत कठिन होगा मैं भी संयोजन की दूरी कूदने में असमर्थ हूं युवराज यह कैसी व्यवस्था है काका श्री अभी तक हम माता सीता का कोई चिन्ह प्राप्त करने व कहां स्थित है इसका कोई संकेत ढूंढने के लिए भटक रहे थे परंतु अब व प्राप्त हुआ तो हम आगे बढ़कर उसकी पुष्टि करने में असमर्थ [संगीत] है निराशा त्याग दीजिए युवराज अंगद मुझे ज्ञात है कि कौन यह असंभव कार्य अत्यंत सरलता से संभव बनाने में सक्षम है जय हनुमान जय श्री राम महा बली [संगीत] हनुमान भ्राता लक्ष्मण मैं किस मोह से प्रभु श्री राम को यह अशुभ समाचार दूं जिस कार्य को हमने अति उत्साह के साथ आरंभ किया था उसमें अभी तक निराशा के सिवा कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ है उत्तर दिशा के अधिपति तो पूर्व में ही रिक्त हाथ लौट चुके थे और अब पश्चिम और पूर्व दिशा के अधिपति भी सीता माता का कोई समाचार नहीं ला अर्थात अब जो भी आशा है वह युवराज अंगद और महाबली हनुमान के दल से ही [संगीत] [संगीत] है हनुमान अब तुम्हें इस राम काज को पूर्ण करना होगा हनुमान अब तुम्हें ही इस अनंत सागर को पार कर उस पार जाना [संगीत] होगा यदि मैं समर्थ होता तो सहर्ष चला जाता परंतु मामा श्री मुझ जैसे साधारण वानर के लिए यह कहां संभव है साधारण नहीं समस्त वानर समाज के भूषण हो तुम हनुमान तुम सर्वश्रेष्ठ हो वानर हनुमान यहां हम स योद्धाओं में उपस्थित एक तुम ही हो जो इस दुष्कर कार्य को कर सकते हो स्मरण करो हनुमान तुम कौन हो तुम कितने अनुपम बल के स्वामी हो हनुमान जो जग में संकट मोचन के नाम से विख्यात है जिसकी बल बुद्धि और शक्ति का कोई सानी नहीं है तुम हो हनुमान मैं तुम्हें तुम्हारी असाधारण शक्तियों से पुनः परिचित कराता हूं हनुमान सुनो ध्यान से मैं कुछ समझा नहीं मामा श्री मैं तुम्हें अभी समझाता हूं हनुमान [संगीत] को नहीं जानत है जग में कपी संकट मोचन नाम तिहारो संकट मोचन नाम तिहारो को नहीं जानत है जग में कपी संकट मोचन नाम तिहारो संकट मोचन नाम तिहारो अंजनी पुत्र हो केसरी नंदन शिव के जो अंश शिवांश पुकारो शिव के जो अंश शिवांश पुकारो बाल समय भानु भक्ष लियो तुम जान के फल कोई प्यारो प्यारो जान के फल कोई प्यारो प्यारो देव कीय विनती तब छोड़ो देव कीय विनती तब छोड़ो दिन कर जग में की उजियार को नहीं जानत है जग में कपी संकट मोचन नाम तिहारो संकट मोचन नाम प [संगीत] हारो वज्र पहारा टूटी हनु तव नाव भयो हनुमानते हारो नाव भयो हनुमान दे हारो आशीष रूपी वरदान अनगिन देव सभी तुमको दे डारो देव सभी तुमको दे डारो कार्य कितना भी दुष्कर हो धैर्य रखने पर मार्ग निकल ही आता है
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