[संगीत] [संगीत] प्रणाम देवगण कहिए देवगण कालदेव काल चक्र की भवता को केवल आप ही समाप्त कर सकते हैं अन्यथा संपूर्ण सृष्टि संकट में पड़ जाएगी स्वयं संकट मोचन हनुमान भी सबकी रक्षा करने के प्रयास में इस संकट में पड़ गए हैं शीघ्र ही कुछ नहीं किया गया कालदेव तो य सृष्टि असमय ही काल के काल में समा जाएगी क्षमा करे देवराज वायु देव यदि मैं कुछ करने का प्रयास करूंगा तो प्रकृति के कार्य में हस्तक्षेप होगा मैं प्रकृति के नियमों से बंधा हुआ हूं कालदेव नियम होते हैं सृष्टि को सुचारू रूप से चलाने के लिए इसीलिए प्रकृति के कार्य में हस्तक्षेप करना अनुचित है किंतु ऐसे नियम पालन का भी क्या लाभ जो सृष्टि को ही विनाश से ना बचा सके जब दो महा शक्तियां आपस में टकराती है तो सदैव संसार का ही हित होता है यदि हनुमान और शनिदेव आपस में युद्ध नहीं करते कुछ नहीं होता इनके युद्ध के कारण ही यह विनाश आरंभ हुआ है नारायण नारायण कालदेव कदाचित ही आप ये नहीं देख पाए कि हनुमान ने अंतिम समय तक युद्ध को टालने का प्रयास किया था सूर्यदेव की अनुमति मिलने के पश्चात भी हनुमान ने शनिदेव के विरुद्ध कुछ नहीं किया तो उसे हट जाना चाहिए था शनिदेव के सामने से तो ऐसी स्थिति ही नहीं बनती हनुमान के हट के कारण ही अनहोनी घटित होने जा रही है जिसको टालना असंभव है कालदेव का यह व्यवहार तो अनुचित है द्वारकाधीश उचित और अनुचित का दृष्टिकोण सबका अपना अपना होता है जो कार्य किसी के लिए उचित है वह दूसरे के लिए अनुचित भी हो किंतु हनुमान का कार्य सर्वथा उचित ही है कालदेव भी नियमों की सीमा में बंधे हुए अपना उत्तरदायित्व निभा रहे थे किंतु जो विनम्रता और निस्वार्थ भाव से परहित के कार्य में लगा रहता है विजय उसी की होती है इस संकट को टालने के लिए मुझे कुछ करना होगा अन्यथा ये पूरे ब्रहमान को ही अपने अंदर संभालेगा किंतु मैं क्या करू यह क्या यह का चक्र तो अपने अंदर सब कुछ सता ही जा रहा है पृथ्वी तो पुन सो राते हु दिखाई दे रही है काल पथवी लो को भी खीच रहा है य कालचक्र स्थिति तो अनियंत्रित हो रही है देवर्ष ये असमय खुला कालचक्र बहुत ही शक्तिशाली होता है यह जितना सबको निगल है उतनी अधिक उसकी शक्ति बढ़ती है इसे रोकना मेरे लिए भी कठिन होगा किंतु कालदेव उसे रोकना तो होगा ही यदि मैंने इसे रोकने का प्रयास किया तो बहुत ही विनाश काक प्रतिक्रिया होती है कालचक्र की ऐसे स्थिति के निदान का कोई तो उपाय होगा उपाय था जब इसका बनना आरंभ हुआ था तभी इसे रोका जा सकता था किंतु अब यह अन नियंत्रित हो चुका है आप सभी को हनुमान की शक्ति पर बहुत विश्वास है ना देखते हैं अब वह क्या करता [संगीत] है आज्ञा दे ये क्या हो रहा है करो हनुमान ह अब तो यह भूकंप भी आने लगा अंजना किर दशा फिर से बिगड़ने लगी है न जाने क्या होने जा रहा है यह कोई साधारण भूकंप नहीं है यह अवश्य ही प्रकृति में कोई अघ घटना घट रही है जो बहुत बड़े विनाश का संकेत दे रही है स्थिति तो बहुत ही भयावह बनी हुई है हनुमान हनुमान अंधिया ये विपरीत वायु प्रभा देवताओं के आपसी युद्ध से ही सृष्टि संतप्त होती है लिंगेश अमृत के कारण तो यह सब नहीं हो रहा इन देवताओं ने मुझे भी अमृत पीने से रोका था हो सकता है कि आपको भी अमृत पान से रोकने के उद्देश्य से इन देवताओं ने यह षडयंत्र देवताओं का य आप से युद्ध मात्र एक ंग हो ंग हो या सत्य हो जो भी हो अब रावण को अमृत पान करने से नहीं रोक [प्रशंसा] सकता पूर्णिमा का चंद्रमा उकत ही रावण करेगा अमृत पान हा लंकेश आप देशा अनुसार मैंने तीनों लोगों के असरों दैत्यों और राक्षसों को निमंत्रण पहुंचा दिए हैं पूर्णिमा की संध्या ढलते ढलते वो लोग सभी लंका में एकत्रित हो जाएंगे उत्तम अति उत्तम सर्वोत्तम य महा पूर्णिमा की रात्रि होगी असरों के चर्म उत्कर्ष के राते य इस क्षण की प्रतीक्षा कर रहे थे सदियों से असुर मुझे इसे रोकना ही होगा मैं स्वयं को संभाल नहीं पा रहा हूं कुछ तो करना होगा रना मा के का क्या होगा हनुमान इस काल चक्र को रोकने की सोच रहे हो ना तुम नहीं रोक पाओगे तुम इसे अब ना पूर्ण होगा तुम्हारी मां का व्रत और ना ही उनका वचन यह काल चक्र इस पूरी सृष्टि को निगल लेगा इस पूरी पृथ्वी को भी और साथ में तुम्हारी मां को भी किसी को को तुम नहीं बचा पाओगे हनुमान ये काल चक्र वो अंधकूप है जिससे कोई बाहर नहीं निकल सका तुम कुछ नहीं कर पाओगे कुछ भी नहीं काल अधीन सृष्टि यह सारी काल चक्र रोधन अति भारी बाल कपीश्वर अति बलशाली काल करा काल गति भी निराली काल रुके तो महा प्रलय है काल कूप में सृष्टि विलय है सृष्टि की रक्षा हनुमत धर्मा मातु वचन करते सब [संगीत] कर्म मैं रोकूंगा इसे पृथ्वी को हस में समाप्त होने नहीं दूंगा मैं किंतु इसे रोकू कैसे क्या करूं मैं मुझे इस कालचक्र से बाहर निकलने में विपरीत दिशा में घूमना हो [संगीत] मुझे और और तीता करनी होगी और वेग बढ़ाना [संगीत] [संगीत] होगा नारायण नारायण यह हनुमान क्या कर रहा है अब चेष्टा परिस्थिति से लड़ने की चेष्टा परिस्थिति पर विजय केवल वही पाता है जो चेष्टा करता है कठिन परिस्थिति में शांत बैठे रहने वाले की केवल पराजय ही होती है किंतु होगा क्या इस चेष्टा से जब स्वयं काल देवी कुछ नहीं कर पाए तो अब यह हनुमान क्या कर पाएगा हो सकता है हनुमान की विपरीत दिशा में घूमने से सब कुछ विपरीत होने लगे काल चक्र में जो कुछ समा रहा था वापस आने लगे काल चक्र की शक्ति ही ण होने लगी नारायण नारायण शनिदेव ने तो अपनी अहम की तुष्टि के लिए सारे संसार को ही संकट में डाल दिया है जबकि हनुमान अपनी मां एवं संपूर्ण सृष्टि को बचाने के लिए पूर्ण प्रयास कर रहा है ये क्या जिस जिस प्रकार सृष्टि को बचाने के लिए हनुमान प्रयास कर रहे हैं वो अनुचित है काल चक्र को विपरीत दिशा में घुमाने का प्रयास प्रकृति के नियमों के विरुद्ध है महाराज सृष्टि को संकट से बचाने के लिए हनुमान ऐसा कर रहा है सृष्टि को संकट से बचाने के लिए हनुमान ने जिस युक्ति का प्रयोग किया है वो काल चक्र के मर्यादा के विरुद्ध है इसका परिणाम अच्छा नहीं होगा मुझे पूर्ण शक्ति से अब विपरीत दिशा में घूमना होगा [संगीत] नारायण नारायण हनुमान ने तो निराशा के अंधकार में आशा की एक ज्योति आलोकित कर दी है प्रतीत होता है कि भीतर फसे हुए ग्रह भी बाहर आ जाएंगे मुझे भी यही प्रतीत हो रहा है किंतु कहीं यह कालदेव के कार्यों में हस्तक्षेप तो नहीं है हनुमान का कालचक्र को विपरीत दिशा में घुमाना अनुचित है यह तो समय को ही परिवर्तित करने का प्रयास कर रहा है ऐसा करना किसी के लिए भी संभव नहीं है सृष्टि असंतुलित हो उठेगी हाहाकार मत जाएगा जिसका दुष्परिणाम वर्षों तक जगत को भोगना होगा [संगीत] प्रतीत होता है इस काल चक्र की शक्ति क्षीण हो रही है मुझे अपना वेग और बढ़ाना [संगीत] होगा जो भी का चक्र के भीतर है मुझे सब बाहर निकालना होगा [संगीत] हनुमान ने तो असंभव को भी संभव कर समय को ही परिवर्तित कर दिया हनुमान तुम अविद [संगीत] पुत्र काल चक्र विपरीत दिशा में घूम हनुमत की महिमा से सुफल रहा मारुति का प्रयास आंजनेय है जग की आस काल कूप से बाहर आकर शनि में समाते का भयंकर देव सकल गाते हनुमत गुण चंद्र देव का भर आया मन धा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय [संगीत] महा बहुत बड़ी भूल की है हनुमान ने काल चक्र को विपरीत दिशा में घुमाने का अर्थ है समय गति को ही विपरीत कर देना यही नहीं जिस प्रकार खुला हुआ कालचक्र विनाशकारी हो सकता है उसी प्रकार बल पूर्वक बंद किया हुआ कालचक्र भी विनाशकारी हो सकता है [संगीत] [संगीत] [संगीत] प्र होता हनुमा ने काल चक्रों को विपरीत दिशा में घुमाकर समय गति को भी विपरीत कर दिया है अब सृष्टि असंतुलित हो उठेगी अब इस सृष्टि को संतुलन में लाने का प्रयास मुझे ही करना होगा चित्रगुप्त जी जी महाराज मैं ध्यान लगाकर सृष्टि को असमय होने वाली कठिनाइयों से बचाने का प्रयास करता हूं आप बस इतना कीजिए कि मेरे ध्यान में कोई बाधा ना आ पाए जी नारायण नारायण प्रणाम देव गणों हनुमान तुमने इस सृष्टि को विनाश से बचाया तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद हम सब भी तुम्हें धन्यवाद देते हैं देवगण मेरी मां ने मुझे सीख दी थी कि संसार की रक्षा सर्वोपरि है मैंने तो अपना कर्तव्य निभाया है [संगीत] तुमने जो किया है वह अन्य के लिए संभव नहीं है संपूर्ण सृष्टि पर आभार है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] तुम्हारा नारायण रायण हनुमान अब सारे वाद विवाद दूर हो जाएंगे तुमने स्वयं के साथ-साथ शनिदेव को भी मुक्त कराया है अब वो तुम्हारी बात मानकर चंद्रदेव को प्रताड़ित नहीं करेंगे कदापि नहीं हनुमान ने जो किया है अपनी मां के लिए किया है मुझे जो करना है मैं भी वो अवश्य करूंगा मैं चंद्रदेव को यूं ही नहीं छोडूंगा ऐसा मत कए शनिदेव अब तो मान जाइए हनुमान अपने एक प्रयास का दुष्परिणाम तुमने देख लिया अब और कुछ अनिष्ट घटे इससे पूर्व मेरे मार्ग से हट जाओ चंद्रदेव को मुझे सौंप दो शनिदेव मुझे मेरी मां का वचन निभाना है उसके लिए मैं चंद्रदेव की रक्षा करूंगा शनिदेव मैं आपसे मिनती करता हूं कि आप चंद्रदेव को क्षमा कर दीजिए और इन्ह अपनी दृष्टि का को भाजन ना बनाए य विनम्र निवेदन दुर्बल का कार्य है हनुमान शूरवीर की बात युद्ध करो अभी युद्ध समाप्त नहीं हुआ है हनुमान शनिदेव तो अभी भी अपने हट पर है [संगीत] [संगीत] क्षमा कीजिए शनिदेव अब मुझे आपसे युद्ध आरंभ करना ही [संगीत] होगा
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