Tuesday, 6 January 2026

हनुमान और श्री राम जी का हरिहर रूप NirbhayWadhwa Mahabali Hanuman Episode 203 Pen Bhakti

[संगीत] जय श्री राम महा बली हनुमान [संगीत] मंगल मूर्ति अंजनी नंदन जय हनुमान जय श्री राम बोलो रघुवर नंदन जय श्री राम प्रथम दरस भयो राम लला की जय हनुमान जय श्री राम बोलो केसरी नंदन जय हनुमान प्रथम मिलन हनुमान लला संग जय श्री राम जय श्री राम बोलो केसरी नंदन जय हनुमान प्रथम मिलन हनुमान लाला संग जय श्री राम जय श्री राम बोलो केसरी नंदन जय हनुमान जय हनुमान जय रघ हनुमान जय हनुमान जय रघुवर जय श्री रामन जय श्री राम शीराम [संगीत] [संगीत] मन हनुमन बस हनुमंता राम नयन में हनुमत साजे राम नयन में हनुमत साजे नर रूप धारी जगत उधारी नारायण है राम शक ट हारी असुर संघी रुद्रावतार हनुमान आज हो रहा इं मिलन अपलक दिखे देवों के नयन अपलक दिखे देवों के नयन आज हो रहा इनका मिलन अपलक देखे देवों के नयन अपलक देखे देवों के नयन इनके पावन महामिलन से इनके पावन महामिलन से जग का होगा महा कल्याण जग का होगा महा कल्याण जय श्री राम बोलो जयम बोलो जय हनुमान जय श्री राम बोलो जय हनुमान जय श्री राम बोलो जय [संगीत] ह [हंसी] लहू के प्यासे पिशाच मांस के भूखे भूतो अब हम अयोध्या के समीप है विम रहे यग भंग करना है और अमावस्या की रात्रि समाप्त होने से पूर्व दशरथ के जेष्ठ पुत्र का हरण करके उसे लंका ले जाना है ऐसा ही होगा पिशाच राज शीघ्र चलिए प्यास लगी है मुझे सप्त रक्त पीना है मुझे [हंसी] भागो ये कोई दिव्य लोक है हमें भस्म कर देगा छुप जाओ यदि ये गुफा ना मिली होती तो हम सब भस्म हो जाते अवश्य हीय किसी महाशक्ति का बहा तेज था किंतु मुझे रक्त चाहिए जब तक ये प्रकाश छट नहीं जाता हमें इसी गुफा में छुपकर रहना पड़ेगा पसी हूं मैं रक्त चाहिए मुझे लहू की [संगीत] [संगीत] प्यासी [संगीत] [संगीत] अचानक य कैसा अद्भुत दिव्य प्रकाश विस्तारित हो रहा है ह कैसे संपूर्ण सृष्टि प्रफुल्लित हो उठी हो हा हनुमान के विज से दुखी मेरे मन में भी ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे आशा की किरण आलौकिक हो उठी जो संकेत दे रही है कि हमारा हनुमान सकुशल हे महादेव हमारा हनुमान जहां भी रहे सकुशल रहे क्या हो गया था मुझे इस अदभुत संगीत के समोह ने मुझे बुला ही दिया कि मैं यज्ञ को भंग करने आई मुझे शीघ्र ही यज्ञ को भंग करना [संगीत] होगा [संगीत] [संगीत] [संगीत] यह अनाया से कैसा प्रकाश फैलने लगा [संगीत] बोटे [संगीत] किंतु यह मैंने क्या किया सैकड़ों निर्दोष बालकों का वध करवा दिया मैं इतना कठोर क्यों हूं ये मुझे क्या हो गया रावण है हम यदि उस नर रूपी नारायण को ढूंढने के लिए मुझे संपूर्ण सृष्टि को भी से विहीन करना पड़ा तो वो भी कर दूंगा किंतु एक बालक को ढूंढने के लिए सैकड़ों बालकों का वद क्यों वो तो मेरे शत्रु नहीं थे उनसे भला क्या [संगीत] भय य मेरी सोच क्यों परिवर्तित हो रही है हमारी संस्कृति है निर्दोषों का वर्ध करके आतंक का साम्राज्य स्थापित करने की राक्षसों का धर्म है हिंसा लगता है दशान पर इस प्रकाश का प्रभाव रहा है पर हिंसा [संगीत] क्यों हिंसा से भी तो साम्राज्य स्थापित हो सकता है अब मैं भी सत्य और धर्म के पथ पर ही चलूंगा लंकेश दशान यह प्रकाश आपके विचारों को दूषित कर रहा है आप रक्ष साम्राज्य के सम्राट हैं कोई साधारण राजा नहीं कि एक तुच्छ सा प्रकाश आपके विचारों को परिवर्तित कर सके आप रक्ष संस्कृति के विरुद्ध सोच भी कैसे सकते हैं आप राजमाता कैक्सी के विचारों के विरुद्ध जा भी कैसे सकते हैं काल में [संगीत] हम जानते हैं हो ना हो यह प्रकाश उन छलिया देवताओं का यह छल है मेरे विरुद्ध परंतु राज माता के विचार और रक्ष संस्कृति के विरुद्ध कताई नहीं जा सकते रावण है हम अब हिंसा की नीव से ही आतंक का साम्राज्य स्थापित करेगा लंकेश दशानन रावण हनुमान और राम के इस हर हरि रूप से उत्पन्न हुआ यह महा प्रकाश वह शाश्वत आलोक है जो असत्य और अधर्म रूपी अंधकार से मनुष्य को सत्य और धर्म रूपी प्रकाश की ओर ले जाता है इसी आत्म प्रकाश का एक ण प्रत्येक मनुष्य के जीवन में अवश्य आता है किंतु यह उस मनुष्य के विवेक पर निर्भर करता है कि व उस आत्म प्रकाश से अपनी आत्मा के अंधकार और विकारों से मुक्ति पाकर स्वयं का कल्याण करें या उस प्रकाश के द्वार बंद करके पतन की ओर अग्रसर हो जाए हिंसक वृति वालों पर ऐसे आत्म प्रकाश का कोई प्रभाव नहीं पड़ता जैसे मैंने दुर्योधन को युद्ध से पूर्व भी युद्ध ना करने की सलाह दी थी जैसे प्रहलाद ने बारबार अपने पिता हिरण्य कश्यप को ईश्वरीय सत्ता से अवगत कराना चाहा था किंतु ना तो दुर्योधन पर और ना ही हिरण्य कश्यप पर इसका कोई प्रभाव पड़ा और परिणाम स्वरूप दोनों का ही पतन हु रावण भी उस प्रकाश का लाभ नहीं उठा पाया अपने आत्म प्रकाश से जीवन को आलोकित करने वाले मनुष्य का जीवन ही सफल होता [संगीत] है [संगीत] प्रथम मिलन हनुमान लाला संग जय श्री राम जय श्री राम बोलो केसरी नंदन जय हनुमान प्रथम मिलन हनुमान लो जय श्री राम जय श्री राम बोलो केसरी नंदन हमारे राम का च अति प्रसन्न लग रहा है कौशल जी हां स्वामी राम की उदासी अब समाप्त हो गई जय श्री राम ज श्री राम मां देखिए राम भैया कितने आनंदित है हां बेटा मैं देख रही हूं प्रभु श्री राम जय हराज जी मन की प्रसन्नता अनमोल होती है हम आपको जो प्रदान करें वो तु है फिर भी यदि आपको कुछ चाहिए तो कृपा करके बोल दीजिए अवश्य कहूंगा राजन किंतु अभी उपचार की प्रक्रिया पूर्ण नहीं [संगीत] हुई हनुमान का उपचार तो भी शेष है भक्त को उसके भगवान का प्रसाद तो मिलना ही चाहिए [संगीत] लीजिए राजकुमार यह लड्डू कितनी मधुर सुग रही है इन लड्डुओं में से जैसे माता अन्य पूर्णा ने स्वयं अपने हाथों से ही बनाए हो पत्नियां अन्नपूर्णा ही होती है और मेरी पत्नी भी अन्नपूर्णा ही है इन लड्डुओं को अनपूर्ण के हाथों से बनाए गए लड्डू ही समझे [संगीत] राम [संगीत] राम [संगीत] [संगीत] राम राम राम [संगीत] राम [संगीत] [प्रशंसा] राम [संगीत] [संगीत] अरे वाह ये लड्डू तो बहुत ही स्वादिष्ट राम राम राम श्री राम राम [संगीत] राम भक्त को भगवान के हाथों प्रसाद मिल गया हनुमान का उपचार हो गया कैसे हो मित्र जैसे प्यासे को जल मिल जाए डूबते हुए को थल मिल जाए वैसे ही आप मुझे मिल गए प्रभु मुझे तो सब कुछ मिल गया प्रभुने मुझे अपना मित्र [संगीत] कहो [संगीत] हनुमान राजकुमार को नहीं खिलाओगे लड्डू [संगीत] आ [संगीत] देनाना ज जय [संगीत] ना

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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