[संगीत] अब ये कौन सी आपदा आ गई मुझे शीघ्र ही इसे पार करना होगा हमें यहां से निकलकर मायावी त्रिलोक के बारे में हनुमान को सचेत कर देना चाहिए किंतु देवराज अब हनुमान मेघनाथ के मायावी त्रिलोक में फस गया है अब हम में से कोई भी उसकी सहायता नहीं कर पाएगा मेघनाथ का रचाया हुआ मायावी त्रिलोक अभेद्य है उसमें वही प्रवेश कर सकता है जिसे वो प्रवेश कराना चाहता है अन्य कोई नहीं [संगीत] [संगीत] हम यह सब तो पहले कभी दिखाई नहीं दिए थे ब्रह्मांड में यह कहीं माया लोक तो नहीं है आओ वान आओ मेघनाथ के मायावी त्रिलोक में तुम्हारा स्वागत [हंसी] है क्या है यह सब क्यों अपना और मेरा समय व्यर्थ में ही नष्ट कर रहे हो तुम्हें युद्ध नहीं करना तो ठीक है मैं लौट जाता हूं मुझे वैसे भी प्रभु श्री राम से मिलने की शीघ्रता है जाओ किंतु मेरे मायावी त्रिलोक से बाहर निकलने का केवल एक ही उपाय है वानर तीनों लोगों का विद्वंस जो तुम जैसे तुच्छ वानर के वश की बात नहीं है और मेरे विचार से इस मायावी त्रिलोक के तीनों लोकों में से तुम्हारे लिए उत्तम रहेगा अंतरनाद लो अना लो और तुम्हारे लिए सर्वोत्तम यह रहेगा कि मैं यहां से चला जाऊं अन्यथा अन्यथा क्या तु छ वानर यहां कोई नहीं है जो तेरी सहायता करेगा ना कोई देवता ना ही तेरे प्रभु श्री [संगीत] राम प्रभु श्री राम के प्रभाव को सहना तुम्हारे बस की बात नहीं है तुम्हारे लिए तो मैं ही पर्याप्त [संगीत] हूं क्या हुआ रुक क्यों गए आओ मेरे पास आओ यह मायावी विरुद्ध लोक है प्रवेश करो इसमें रक्षा करो कोई रक्षा करो कोई बचाओ रक्षा करो कोई मुक्त करो हमें य से रक्षा करो कोई बचाओ रक्षा करो कोई मुक्त करो हमें य सेय धनि कहां से आ रही है प्रतीत होता है इस दुष्ट ने कुछ मनुष्यों को यहां बंदी बना रखा है रुक जाओ नर म प्रवे मत करना यह मेघनाथ यह यहां नहीं नहीं इसकी आवश्यकता नहीं है मैं तुम पर वार करने नहीं अभी तो तुम्हारी सहायता करने आया हूं मे मेघनाथ मेरी सहायता क्यों करेगा और मेघनाथ यहां है किंतु उस लोक के भीतर से भी मेघनाथ का स्वर सुनाई दे रहा है दो स्थानों पर एक साथ कैसे हो सकता है मेघनाथ तुम्हारे पास बहुत ही अल्प समय शेष है अपना कार्य कैसे पूण करोगे तुम इतने अल्प समय में उसकी बात मत सुनो वानर वो छल कर रहा है तुमसे यदि तुमने उस मायावी लोक में प्रवेश कर लिया तो वो तुम्हें तुम्हारी शक्तियों के साथ युद्ध करने के लिए बाध्य कर देगा क्यों विलंब कर रहे हो वानर क्या तुम्हें अपने बल पर भरोसा नहीं रहा आओ और मुक्त करा लो यहां फसे हुए मनुष्यों को रक्षा करो कोई बचाओ रक्षा करो कोई मुक्त करो हमें यहां से निकालो हमें यहां से नहीं नहीं वान ये ध्वनियां छल है वास्तव में वहां कोई नहीं पुकार रहा है उस माया लोक में प्रविष्ट मत होना रक्षा करो कोई बचाओ रक्षा करो कोई मुक्त करो हमें यहां से से निकालो हमें य से यह सब मेघनाथ की माया है मुझसे क्रीड़ा करके आनंद ले रहा है वह किंतु यदि इस लोक में कोई निर्दोष मनुष्य संकट में है तो मुझे अवश्य उसकी सहायता के लिए जाना होगा रक्षा करो कोई बचाओ रक्षा करो कोई मुक्त करो हम य से य जाओ रक्षा करो कोई रुक जाओ वानर माया लोक में प्रविष्ट मत होना तुम अपने आप को संकट में डाल रहे हो रक्षा करो कोई बचाओ रक्षा करो कोई मुक्त करो हमें यहां से निकालो हमें यहां से यह तो पाताल लोग की ही भाति प्रतीत हो रहा है बाहर तो सैकड़ों स्वर सुनाई दे रहे थे पर भीतर तो कोई नहीं है अब तो ध्वनियां भी सुनाई देनी बंद हो गई है कहीं वो मायावी मेघनाथ जो बाहर मिला था वह सत्य तो नहीं कह रहा था सत्य है वानर बुद्धि है तुम्हारी जो भ्रामक ध्वनियों को सुनकर भीतर चले आए यहां कोई नहीं है जिसे तुम बचा सको अपितु यहां तुम्हें स्वयं को स्वयं से ही बचाना होगा छल कर रहे हो रक्ष संस्कृति में छल और माया सबसे बड़े अस्त्र माने जाते हैं तुमने जो मनुष्यों को बचाने के लिए सहृदयता दर्शाई उस मूर्खता वश तुम मेरे मायावी लोक में आ फसे अब तुम्हारा सामना उससे होगा जो पूर्णतया तुमसे विपरीत है किंतु हर प्रकार से तुम्हारे समान है वास्तव में उसका जन्म भी तुम्हारे ही कारण हुआ है अभी [संगीत] अभी जितने तुम पवित्र विचारों वाले दयावान हो अच्छे हो यह उतना ही अपवित्र विचारों वाला क्रूर निर्दय और बुरा है किंतु सामर्थ्य और शक्ति में पूर्णता तुम्हारे ही समान है अर्थात इस लोक में जो प्रवेश करता है यहां के प्रभाव से उसके विपरीत शक्ति का उद्भव स्वतः हो जाता है मुझे इस लोक के बाहर भी एक मेघनाथ मिला था जो मुझे इस लोक में प्रवेश ना करने की चेतावनी दे रहा था तुम क्रूर हो वो दयावान था सत्य समझा वानर तुमने एक और विशेषता है मेरे मायावी लोग की यहां आने वाले प्रत्येक प्राणी के विपरीत स्वभाव का एक और प्राणी स्वतः ही उत्पन्न हो जाता है जैसे यह दानव तुम्हारे आने से उत्पन्न हुआ है यहां से दो में से एक ही बाहर निकल सकता है या तो तुम या फिर मेरा मायावी [संगीत] दानव आरंभ करो युद्ध देखें पहले यहां से कौन बाहर निकल सकता [संगीत] है माया भी लोक के प्रभाव से तो ये दानव हनुमान से और भी अधिक मायावी और प्रचंड योद्धा हो गया है हनुमान कैसे पार पा सकेगा यदि मेगनाथ काली और बुरी शक्तियों का स्वामी है तो हनुमान के पास भी धर्म और सत्य की शक्ति है आशीर्वाद और भक्ति की शक्ति है यह तो ठीक मुझ जैसा ही युद्ध कर रहा है जब यह मेरा अनुसरण कर ही रहा है तो इसे युक्ति से परास्त किया जा सकता है निर्दय और क्रूर अधिक शक्तिशाली होते हैं वानर इस प्रकार यह वश में नहीं आएगा इसे अपनी कांख में दबोच कर ही गिराना [संगीत] होगा आ [हंसी] यह तो मेरे विचार भी पड़ सकता है अच्छा तो ये लो बड़ा ही आनंद आ रहा है आज का यह युद्ध देखकर वानर मैं तुम्हारी सहायता के लिए आया हूं वानर यह तो युद्ध का सारा आनंद ही समाप्त कर [संगीत] [संगीत] देगा देखा वानर मेरे मायावी त्रिलोक में धर्म और सत्य की विजय नहीं अधर्म और असत्य की विजय होती है तुम्हारी पराजय निश्चित है वानर निश्चित है इस दानव में मेरे समान दैहिक शक्ति है यह मेरी भंगिमा और मेरे विचारों का अनुसरण कर रहा है किंतु मुझसे विपरीत स्वभाव वाला होने के कारण कुछ ऐसा भी है जिसका अनुसरण यह कदापि नहीं कर पाएगा जय श्री राम जय श्री राम जय जय [संगीत] श्रीराम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम ये अकस्मात इस वानर को क्या हुआ श्रीराम जय श्री राम जय श्री [संगीत] राम मेघनाथ तुम जैसे रक्ष संस्कृति के पोषक यह नहीं जानते कि अहंकार काम क्रोध लोभ मोह जैसी समस्त विकार की शक्तियां प्रभु श्री राम नाम के आगे स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं जिसके भी पास प्रभु श्री राम नाम की भक्ति की शक्ति है उसके आसपास कोई भी बुरी शक्ति या बुराई अधिक समय तक टिक नहीं सकती जय श्रीराम नर अब तेरी भक्ति ही तेरी दुर्बलता सिद्ध होगी मेरे दुर्बा लोक में देख रहे हो वानर शूल की भाती भेद देने वाली सिलाए एक बार इन पर कोई गिर जाए ना जीवित नहीं [संगीत] बचता इतने सारे चंद्रमा यह क्या माया है अब अपनी भक्ति की दुर्बलता के कारण ही परास्त होना है तुम्हें वानर [संगीत] आओ मायावी राक्षसों तुम्हारी सारी माया नष्ट कर दूंगा [संगीत] मैं संभालो मेरा वार अंगद जामवंत मामा जी नल भ्राता [संगीत] सुग्रीव नील [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] यह क्या इन सबके साथ पिताश्री [संगीत] भी [संगीत] [संगीत] [संगीत] पिता श्री फस गया वानर मेरे मायावी जाल में अब इसे समझ में नहीं आ रहा यह करे तो क्या करे मूर्ख मेघनाद सोच रहा है कि मेरे बंधु बांधव मेरी भक्ति मेरी दुर्बलता है इसे ज्ञात नहीं है कि यह सब मेरी शक्ति है किंतु जब तक यह मायावी मेरे संबंधियों और मित्रों के रूप में है मैं इन पर वार नहीं कर सकता अब होगा तुम्हारा अंत हे माता हे दुर्गेश्वरी हे माता हे दुर्गेश्वरी हे माता हे दुर्गेश्वरी जहां तक मुझे ज्ञात है माया आप ही का एक रूप है जो सदैव सबको भ्रम में डाले रखती है माया रुक्मणी माता मेरी सहायता कीजिए मुझे इस भ्रम से बाहर निकालिए माता हे माता आपने मुझे संकट से उबारने के लिए नौ दुर्गा के रूप में प्रकट होकर वरदान और आशीर्वाद दिया था मेरी सहायता कीजिए माता यह मेघनाथ जैसे राक्षस भक्ति और श्रद्धा को दुर्बलता समझते हैं माता उन्हें दिखा दीजिए कि भक्ति और प्रेम से बड़ी कोई और शक्ति नहीं होती सच्चे हृदय व मन से ईश्वर को की जाने वाली कोई भी प्रार्थना हमेशा फलित होती है
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