[संगीत] उस वानर को समझने में मुझसे भूल हुई मुझे उसे पहले ही भेज देना चाहिए था जिसके नाम से ही देवता थर्थ हराते हैं जिसने युद्ध विक्रम में देवराज इंद्र को तक परास्त किया हो उसके भजो बल और तप बल के कारण जो अपराज है जिसके समक्ष युद्ध में कोई और योद्ध टिक नहीं सकता उस महा प्रतापी इंद्रजीत के समक्ष देव ता के द्वारा भेजा हु दिव्य वानन कप नहीं त पाएगा पुत्र इंद्रजीत समय आ चुका है कि तुम अपना पुत्र धर्म निभाओ क्या और क्या कर अपने पराक्रम से उस वनर पर विजय पा परंतु स्मरण रहे वो हमें जीवित चाहिए उसकी मृत्यु केवल हमारे हातो होगे आपकी आज्ञा श्रो धारी है पिता श्री और उसे पूर्ण करना मेरा परम धर्म जिसने मेरे प्रिय भ्राता का वध किया है अब उसका अंत अनिवार्य है अनिवार्य है अनिवार्य [संगीत] है [संगीत] मैं मेघनाथ लंकेश पुत्र यह शपथ लेता हूं अपने अनुज की चिता की अग्नि शांत होने से पूर्व उस वानर को पकड़कर लंका की राज सभा में प्रस्तुत करूंगा उसे यथोचित दंडित करूंगा यदि मैं उसे यथोचित दंडित नहीं कर पाया तो अपने आपको इसी स्थान इसी अग्नि में भेट कर दूंगा स्वयं को भस्म कर लूंगा आत्मदाह कर लूंगा आत्म दार उस प्रचंड महाबली योधा जिसके रण कौशल के समक्ष समस्त देवता यहां तक कि मैं देवराज इंद्र भी नहीं टिक सका हनुमान कैसे युद्ध करेगा उसके सामने मेघनाथ के हाथों पराजित होना कदाचित मेरे संपूर्ण जीवन की सबसे अपमानजनक घटना है जिसे मैं भुलाना चाहकर भी भुला नहीं [संगीत] पाता [संगीत] सभी देवताओं को बंदी बना चुका हूं मैं त्रिलोक काप उठे हैं मेरे नाद से मेघनाथ हूं मैं मुझसे युद्ध का परिणाम केवल तुम्हारी पराजय है देव राजेंद्र कहो देव राजेंद्र मुझसे युद्ध करोगे या स्वच्छा से अपने शस्त्र मेरे समक्ष डालोगे तुम जो कोई भी हो मेरे वज्र प्रहार से नहीं बच सकते देव राजेंद्र तुम्हारा वज्र भी तुम्हें बचा नहीं सका कहो अपनी पराजय स्वीकार करते हो या नहीं मेघनाथ अत्यंत शक्तिशाली और भयंकर है परंतु उसकी सबसे बड़ी शक्ति है उसकी माया संपूर्ण सृष्टि में इससे अधिक मायावी शक्तिशाली योद्धा कोई [संगीत] नहीं वो सामने आकर युद्ध नहीं करता है परंतु छिपकर वार करता है और जिसको कोई देख ही नहीं सकता उसको पराजित करना कैसे संभव है इसके पूर्व की मेघनाद उनको लेने उनके निकट पहुंचे हनुमान को लंका छोड़कर चले जाना [संगीत] चाहिए चले जाओ चले जाओ यहां से अपने प्राण प्रिय हैं तो अभिलंब इस लंका नगरी को छोड़कर चले जाओ अपनी मृत्यु के मुख में स्वयं प्रवेश करने क्यों चले आए यहां यह स्वर कैसा चले जाओ यहां तो कोई नहीं दिखाई दे रहा है फिर यह किसका स्वर है कौन हो तुम सामने आओ बहुत बड़ी भूल की है तुमने वानर भूल मैंने नहीं तुमने की है मुझे छल की नहीं पकड़ पाए ना मुझे सुनो मेरी चेतावनी चले जा जाओ यहां से अभी भी समय है चले जाओ यहां से मूर्ख वानर लंकेश रावण को चुनौती देने की बहुत बड़ी भूल की है तुमने अब अपने प्राणों की रक्षा नहीं कर पाओगे तुम मूर्ख वानर यहां यदि साहस है तो अंधकार को छोड़कर मेरे समक्ष प्रकाश में आओ [संगीत] प्रकाश ये इस बार रावण ने किस मायावी राक्षस को भेजा है जो सामने ही नहीं आता और जिसने अपने प्रभाव से चारों ओर अंधकार उत्पन्न कर दिया है कौन तुम मायावी सामने आकर अपना परिचय क्यों नहीं देते यह है मेरा परिचय काल के इस घन अंधकार को पहचान लो वानर [संगीत] या क्या क्या हुआ वानर अब तुम्हारी शक्ति कहां गई जिसके बल पर तुमने यहां उत्पात मचा रखा था कहां गया कैसे योद्धा हो तुम ना प्रत्यक्ष होते हो और ना ही अपना परिचय देने का साहस रखते हो धूर्त वानर देवता भी जिससे भयभीत रहते हैं उतनी अपार शक्ति का स्वामी हूं मैं मेरे नाद से त्रिलोक भी कांप उठते हैं मूर्ख वानर मेरी शक्ति ही मेरा परिचय है अच्छा इतने ही शक्तिशाली योद्धा हो तो फिर पृथ्वी में धसे इस वानर के समक्ष आने में अपना नाम बताने में उसे अपना वास्तविक परिचय देने में इतना भयभीत क्यों [संगीत] हो प्रतीत होता है मेरे प्रत्यक्ष रूप को देखे बिना तुम्हारी जिज्ञासा शांत नहीं होगी वानर कदाचित नहीं होगी क्या हुआ वानर अपने समक्ष अपने काल रूपी लंकेश रावण के ज्येष्ठ पुत्र मेघनाथ को देखकर तुम्हारी शिराओं के बीच बहता हुआ रक्त कहीं गति हीन तो नहीं हो गया बलवान का अभिमान शक्ति का दम और उसका अनुचित प्रयोग किसी भी योद्धा के विनाश का कारण बनता है मेघनाथ तुम्हारे अनुज अक्ष ने भी मुझसे ऐसे ही वचन कहे थे जिसका परिणाम वह भुगत चुका है [संगीत] वानर संभव है कि तुम्हें मेरे बारे में ज्ञात नहीं परंतु समय आ गया है कि मैं तुम्हारी क्रीड़ा को समाप्त करके तुम्हारे उदंड व्यवहार को ठीक करने के लिए एक उपयुक्त सीख दूं स पा ू वानर तूने मेरे प्रिय भ्राता पराक्रमी अक्ष का वध किया है दंड दूंगा इसका मैं राम दूत को दंड दोगे तुम इस भ्रम में मत रहना [संगीत] मेघनाथ अभी भी समय है कह दो अपने पिता से कि अपनी भूल को सुधार ले अन्यथा दंड भुगतो ग तुम तुम्हारे पिता रावण और संपूर्ण राक्षस कुल बस दुष्ट वानर बस अब तुम्हारी और धृष्टता सहन नहीं करूंगा मैं अब तुम्हारी जिबा नहीं मेरे शस्त्र चलेंगे हे प्रभु रक्षा करो हनुमान की लो वानर अब तुम महायोद्धा मेघनाथ का प्रहार सा हो जय श्री [संगीत] [संगीत] राम [संगीत] अदृश्य होकर वार कर रहा है तुच्छ वानर कहां तक भागोगे जहां जाओगे मैं अपने खड़क लेकर पल भर में वहां पहुंच [संगीत] जाऊंगा बल और छल दोनों का प्रयोग कर रहा है यह मेघनाथ कहां गया ये पुनः मेरे समीप पहुंच गया ये देख र उस उदंड वानर का कैसे शृंगार होगा इस बार उसका युद्ध किसी साधारण योद्धा से नहीं महाशक्तिशाली अति मायावी महायोद्धा युवराज मेघनाथ से है जाओ उसका वद करेंगे रावण पुत्री युवराज मेघनाथ की अपार शक्ति का तुम अनुमान भी नहीं लगा सकती वे उस बानर के शरीर को छत वि छत कर भयानक मृत्यु देंगे [संगीत] उसे अब इस खंभ के नीचे दबकर तुम महत हो जाओगे बानर इसने इस खम को थाम कर रोक [संगीत] लिया आज प्रथम बार मुझे अपने सपने की सत्यता पर संदेह हो रहा है ऐसा आभास हो रहा है जैसे युवराज मेघनाथ की राक्षसी शक्ति उस रामदूत पर हावी हो रही है आपका स्वप्न सत्य ना हो यह संभव है प्रभु श्री राम और उनके भेजे हुए दूध की शक्ति को कोई पराजित नहीं कर सकता मुझे पूर्ण विश्वास है कि हनुमान युवराज मेघनाथ की शक्ति का बहुत सहजता से सामना कर रहे होंगे जय श्री [प्रशंसा] शीराम इस खंभ से मैं नहीं तुम आहत होगे मेघनाथ तुम्हारा सल सर्वथा उचित है देवी अल्ला अपने सिद्ध वाण से किसी भी शत्रु को हताहत करने में सक्षम मायावी अस्त्रों के देवराज इंद्र के नेतृत्व में समस्त देवताओं को पराजित करने वाले महा प्रतापी योद्धा है युवराज मेघनाथ रणभूमि तो जैसे उनके लिए कड़ा स्थल है जहां वो असंभव को भी संभव कर सकते हैं उनके भयानक खडग की जोड़ी से आज तक कोई योद्धा पार नहीं पा सका है ये रावण पुत्र मेघनाथ वास्तव में असाधारण योद्धा है इसे परास्त करना बहुत कठिन [संगीत] है छल का प्रयोग कर केवल क्षणिक सफलता प्राप्त की जा सकती है चुनौती का सामना छल से नहीं अभी तो सामने आकर करना [संगीत] चाहिए
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