Friday, 2 January 2026

माता सुरसा ने हनुमान का मार्ग क्यों रोका था Nirbhay Sankat Mochan Mahabali Hanuman 377 PenBhakti

[संगीत] [संगीत] अब कोई भी आसुरी शक्ति प्रभु श्री राम के काज में बाधा नहीं बन सकती जय श्री राम हनुमान हनुमान अब रुक भी जाओ ना हनुमान ये विषाक्त धूम्र मुझ पर प्रभाव डाले उससे पूर्व ही मुझे यहां से निकलना होगा [संगीत] हनुमान जय श्रीराम जय श्री राम श्री रामम श्रीराम अरे गिरेगा वो संभालो उसे भयभीत मत हो मित्र हम तुम्हें लपक लेंगे [संगीत] े इतनी तीव्र गति भागो भा [संगीत] [संगीत] भाग [संगीत] दिखाई दि हनुमान नहीं बंद करो यह मूर्खता हनुमान जी लंका के निकट पहुंच ही रहे होंगे अर्थात तुम मेरे लिए रुकोगे नहीं [संगीत] हनुमान किंतु मुझसे बचकर तुम जा भी नहीं पाओगे हनुमान अच्छा तो यह है वह माया जय श्री राम जय श्री राम [संगीत] मैं तुम्हें अपना ग्रास बना [संगीत] लूंगी हे माता आप जो भी हैं मुझे जाने दीजिए एक क्षण का विलंब भी मेरे लिए दुष्कर है मेरा मार्ग छोड़ दीजिए तुम यहां से नहीं जा सकते हो वानर देवताओं ने तुम्हें मेरा आहार बनाकर यहां भेजा है भूखी हूं मैं तुम्हें खाकर तृप्ति मिलेगी मुझे वानर मुझे विलंब हो रहा है मुझे जाने दीजिए यह क्या मैं उड़ान क्यों नहीं भर पा रहा व्यर्थ में ही इतना परिश्रम कर रहे हो नाग माता तोड़ता हूं मैं मुझे स्वयं परमपिता ब्रह्मा जी ने वरदान दिया है कि जो भी यहां से आएगा उसे मेरा आहार बनना ही होगा माता प्रभु श्री राम की भारिया माता सीता को रावण ने अपरत कर लिया है मैं उन्हें ढूंढने जा रहा हूं उनसे मिलकर प्रभु को उनकी कुशलता का समाचार देना है मुझे यह कार्य मेरे लिए बहुत आवश्यक है तत्पश्चात मैं स्वयं आ जाऊंगा आपके पास तब आप मुझे अपना आहार बना लीजिएगा मूर्ख समझ रखा है क्या तुमने मुझे मृत्यु के मुख से छूटकर कौन वापस आता है ब्रह्मदेव का वरदान कभी निष्फल नहीं हो सकता है मैं जिसका मार्ग रोक लू उसे मेरे मुंह में आना ही होता [संगीत] है कहीं ये ब्रह्मदेव के वरदान की ओट में मुझसे छल तो नहीं कर रही हैं प्रभु श्रीराम के काज में कोई बाधा नहीं आने दूंगा मैं मुझे युक्ति से कार्य करना होगा जय श्री [संगीत] राम [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] माता यदि आपको सत्य में ही ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त है तो बताइए मेरी यह विशाल देह कैसे आप अपने मुख में ले पाएंगी मेरी देह इतनी विशाल और आपका मुख छोटा सा अच्छा मुझ नाग माता सुरसा से माया जो जन भरी तेही बदन पसारा कप तनु कीन दो गुन [संगीत] बितारा सोरह जो जन मुख ते ही तुरत पवन सुत पति भया राम सियाराम सियाराम जय हनुमान किंतु मेरी देह तो 32 योजन की हो गई [संगीत] है जस जस सुरसा बदन बढ़ावा का सुदू कपी रूप दिखा हो सत योजन तेही आनंद कीन्हा अति लघु रूप पवन सुतली भा राम सियाराम सियाराम जय हनुमान राम सिया श्याम सियाराम जय हनुमा जैसी आपकी आज्ञा [संगीत] माता हनुमान सुरसा के मुंह में ये तो अनर्थ हो गया महाब हनुमन की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमा बहुत चतुर समझ रहे हो तुम स्वयं को मेरे मुह में प्रवेश करके भी बाहर आ गए अपमान है मेरा तुम्ह मेरा आहार बनना ही [संगीत] होगा मैंने कोई चतुराई नहीं की कोई अपमान नहीं किया आपको ब्रह्मा जी का वरदान प्राप्त है ना कि आप जिसे रोक ले उसे आपके मुख में जाना ही होता है मैंने आपके उसी वरदान का मान रखा है किंतु प्रभु श्री राम के कार्य के लिए मेरा बाहर आना आवश्यक था अब आप मुझे जाने की अनुमति दीजिए [संगीत] [संगीत] हनुमान पुत्र तुम्हारी युक्ति प्रशंसनीय है तुमने स्वयं को क्षति पहुंचे बिना ही मुझे प्राप्त हुए वरदान को पूर्ण किया है बल और बुद्धि का अद्भुत संगम हो तुम हनुमान सब प्रभु श्री राम की कृपा है माता किंतु आपका यह रूप आप कौन है अपना पूर्ण परिचय दीजिए मैं नाग माता सरसा हूं मैं इंद्र देव आदि देवताओं के द्वारा यहां भेजी गई हूं इंद्र देव आदि के द्वारा किंतु क्यों यही प्रश्न मैंने भी देवताओं से पूछा था हनुमान किंतु क्यों क्यों मैं वहां जाकर हनुमान का मार्ग रोकूं देवराज हनुमान ने मेरा कोई अहित नहीं किया है तो फिर मैं क्यों उनके इस सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य में बाधा डालूं इसीलिए नाग माता सुरसा कि हनुमान का कार्य पूर्ण होने में कोई भी शंका ना रहे मैं कुछ समझी नहीं देवराज आपको ब्रह्मा जी ने वरदान दिया है कि आपने जिसे एक बार विजय का आशीर्वाद दे दिया फिर उसकी विजय निश्चित है हम देवता चाहते हैं कि आपका आशीर्वाद हनुमान को मिले और वो सफलता पूर्वक प्रभु श्री राम का कार्य पूर्ण कर सके नारायण नारायण नाग माता आप यही सोच रही हैं ना कि ना जाने हनुमान आपके आशीर्वाद के योग्य हैं या नहीं तो आप उनकी परीक्षा लेकर देख लीजिए मुझे पूर्ण विश्वास है कि देवराज के वज्र को भी सहन करने की क्षमता रखने वाले महाबली हनुमान के बल एवं विवेक से से आप पूर्णतया संतुष्ट हो जाएंगी और इस प्रकार देवताओं के आग्रह करने पर मैं यहां आई और तुम्हारी परीक्षा ली माता आशा है हनुमान से परीक्षा में कोई त्रुटि नहीं हुई होगी तुमसे कोई त्रुटि नहीं हुई है हनुमान बल बुद्धि और कार्य के प्रति समर्पण इन तीनों ही कसौट पर तुम सर्वश्रेष्ठ सिद्ध हुए हो अतः तुम मुझसे वरदानी आशीर्वाद प्राप्त करने के अधिकारी हो गए हो बल बुद्धि और कार्य के प्रति समर्पण इन तीनों ही कसौट हों पर तुम सर्वश्रेष्ठ सिद्ध हुए हो हनुमान मेरा आशीर्वाद है तुम्हें देवी सीता को ढूंढने में तुम्हें सफलता प्राप्त होगी माता भी मानी हनुमत बलशाली [संगीत] ज्ञानी राम का ज आशीष अर्जित पवन तन बढ़े हर्षित हर्षित राम सियाराम सियाराम जय हनुमान राम सियाराम सियाराम जय हनुमान ये गाथा महाब हनुमन की रुच कर लीला राम भगन की जय जय जय रघुनंदन रा धन्यवाद माता जो आपने मुझे आशीर्वाद के योग्य समझा मेरा नमन स्वीकार करें अब मुझे आज्ञा दे माता [संगीत] [प्रशंसा] जय श्री [संगीत] राम हनुमान सुरसा के क्षेत्र से आगे कैसे प्रस्थान करके आ नहीं हनुमान को सुरसा का आशीर्वाद यह शुभ संकेत नहीं है नियति का संकेत भी लंका एवं लंकेश रावन के लिए अशुभ की ओर इंगित कर रहा है कहीं यह मेरे उसी श्राप का आरंभ तो नहीं है जो मैंने क्रोध में आकर दैत राज बली को दे दिया था मैं दैत्य गुरु शुक्राचार्य तुम्ह श्राप देता हूं कि असुरो को सदैव ताओ से पराजित होना पड़ेगा नहीं मैं ऐसा नहीं होने दूंगा मैं दैत गुरु शुक्राचार्य अपने अनुयायियों को संकट में देखकर शांत नहीं रह सकता मुझे ही हनुमान को रावण तक पहुंचने से रोकने के लिए कुछ करना होगा सि का राहु की माता वो रोक सकती है हनुमान को या परछाई पक आखेट करे सिंघी का ऐसे उदर [हंसी] भरे [संगीत] सहि का यह तो दैत्य गुरु शुक्राचार्य का स्वर [संगीत] है परछाई पकड़ आखेट करे सिं का ऐसे ही उधर भरे मैं आ रही हूं दत्य गुरु शुक्राचार्य मैं आ रही हूं प्रणाम दैत्य गुरु आज आपको सिंहिका का स्मरण कैसे हो आया सिंहिका सर्वप्रथम जन्म लेने वाली राक्षस में से तुम एक हो इसलिए समस्त राक्षसों की सुरक्षा तुम्हारा दायित्व है दायित्व ही नहीं यह मेरा धर्म है गुरुदेव आज्ञा दे तुम्हें तो ज्ञात है कि राक्षसों के उत्थान का केंद्र इस समय लंका है किंतु एक संकट लंका की ओर बढ़ रहा है संकट तो क्या उसकी परछाई भी मुझसे बचकर लंका की ओर नहीं बढ़ सकती राक्षसों पर आने वाले हर संकट को अपने पंजों में दबोच लेगी यह सिंका भक्षण कर लेगी उसका आप केवल यह बताए गुरुदेव कि वो संकट है कौन हनुमान हनुमान शत्रु कितना भी शक्तिशाली हो बुद्धि का प्रयोग कर उसे परास्त किया जा सकता है

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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