[संगीत] [संगीत] यह तो वही शूल है जिससे देव सेनापति कुमार कार्तिके ने ताड़का का वध किया था और उनके अतिरिक्त किसी अन्य में ऐसे उठाने का सामर्थ थ [संगीत] नहीं [संगीत] आश्चर्य [संगीत] [संगीत] पिता श्री मां मुझे चलना चाहिए [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] स्वामी क्या ये हमारे लिए कोई संकेत था क्या कुछ ऐसा है जो जो हम समझ नहीं पा रहे हैं जो देव सेना और कुमार कार्तिक को जोड़ता है मेरे प्रिय अनज जमू द्वीप के दक्षिण की सुरक्षा का अत्यंत महत्त्वपूर्ण दायित्व है मेरा विवाह का निवेदन कर मुझे उससे दूर मत करो मैं समझ गया भैया बहुत विकट परीक्षा है वैवाहिक जीवन वो एकाकीपन से मुक्त नहीं करता अभी तू जीवन की फास बन जाता है आपने मुझे सद्बुद्धि दी विवाह से तो कोसों दूर रहना चाहिए आपको ही नहीं मुझे [संगीत] भी गणेश आ गया हरता झसे कार्तिकी को मना ही लिया [संगीत] होगा अपने भैया से मिला है पुत्र गणेश हां मां तुमने उन्हें बताया विवाह के बारे में हां मां बताया मान गए वो हां मां मान गए भैया भी और मैं भी मान गए तुम दोनों यही कि विवाह एक बहुत बड़ा माया जाल है इसलिए अब आपके दोनों पुत्र कभी विवाह नहीं करेंगे हां मां हम दोनों की ही ओर से अब विवाह के लिए बस ना है किंतु क्यों क्योंकि भैया ने मुझे भली भाति समझा दिया वो स जिसम तुम खींचते चले गए वो वैवाहिक संसार का दलदल रूपी सरोवर था यदि मैंने विवाह किया तो मैं भी उसी में खींचा चला जाऊंगा और धीरे-धीरे ईश्वर और अपने कर्तव्य दोनों से दूर हो जाऊंगा मां विवाह रूपी माया का दलदल किसी को भी इतना धंसा लेता है कि व्यक्ति चाह कर भी बाहर नहीं आ पाता एक बार इसमें उलझ गए तो ईश्वर और कर्तव्य दोनों भूल होंगे और माया संसार के बंधन में बंदी बनकर रह जाएंगे नहीं पुत्र विवा कर्तव्य से दूर नहीं करता उसे पूर्ण करता है विवाह भगवान से दूर नहीं करता हमें उनके निकट ले जाता है किंतु मां भैया ने तो कहा था विवाह मायावी बंधन है पुत्र विवाह तो पावन बंधन है जो दो आत्माओं को संबंध में बांध कर उन्हें पूर्ण करता है जैसे मैं और तुम्हारे पिता एक दूसरे के पूर और कठिनाइयों में पति-पत्नी एक दूसरे के लिए शांति स्थान है जिसे जीवन संगिनी के रूप में चुना उसके साथ जीवन साझा करना तो सुख और शांति का कारण होता [संगीत] है और किसी को सुख देना शांति देना इससे अधिक धार्मिक और क्या हो सकता है [संगीत] पुत्र इसीलिए पत्नी अथवा अर्धांगिनी को धर्म संगिनी और पत्नी को धर्म संगी भी भी कहा जाता है इतना ही नहीं कोई भी पूजा व्रत या यज्ञ तब तक पूर्ण नहीं होता जब तक पत्नी का साथ नहीं होता है पुत्र नारायण अवतार श्री राम भी इससे अछूते नहीं थे पुत्र उन्हें भी अपना अश्वमेघ यज पूर्ण करने के लिए देवी सीता की अनुपस्थिति में उनके स्थान पर स्वर्ण मूर्ति रखनी पड़ी थी और यह भी स्मरण रहे पुत्र कि जीवन के चारों आश्रम ब्रह्मचारी क्रस्त वानप्रस्थ और सन्यास अत्यंत महत्त्वपूर्ण है बिना विवाह के सन्यास आश्रम में प्रवेश करने से मोक्ष प्राप्ति असंभव हो जाती [संगीत] है क्योंकि विवाह के बाद कोई माता पिता बनता है तब अपनी संतान का भली भाती पालन पोषण करने पर ही कोई मात्री और पित ण से मुक्त होता है इसलिए विवाह ना ही तो कर्तव्य से दूर करता है और ना ही ईश्वर भक्ति सेत विवाह करने से तो सभी कर्तव्य पूर्ण होते हैं हां आप भी उचित कह रही है मां फिर तो भैया को ही नहीं मुझे भी विवाह करना [संगीत] चाहिए शीघ्र ही मेरा भी विवाह करवा दीजिए हां पुत्र किंतु तुम्हारे विवाह की चिंता तो तब करेंगे ना जब उसका उचित समय होगा और वह समय अभी नहीं है अभी कार्तिकेय के विवाह का समय है आपने उचित कहा मां किंतु भैया उन्हें समझाना उनका निर्णय बदलना तो बहुत कठिन है उन पर मेरी या आपकी बात का प्रभाव नहीं पड़ेगा किंतु यदि पिताश्री यहां होते तो मैं उनसे निवेदन करता पर वह तो अभी यहां है ही नहीं नहीं गणेश जी महादेव यही है वो [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] देखिए क्या हुआ पुत्र तुम उन्हें यहां देखकर इतना चकित क्यों हो गए क्योंकि भैया कार्तिकेय के पास से लौटते समय तो मैंने पिता श्री को मार्ग में देखा था सनकादिक कुमारों के साथ [संगीत] और ध्रुप तारे के नीचे और बर्गत के वृक्ष की छाव यह आपको कैसे ज्ञात है मां क्योंकि प्रभु दक्षिणा मूर्ति जो है दक्षिणा मूर्ति यहां कैलाश में भी महादेव और वहां बरकत के वृक्ष के नीचे भी महादेव ही है अपने दक्षिणा मूर्ति स्वरूप में तो इस दक्षिणा मूर्ति स्वरूप की क्या कथा है माता स्वामी ब्रह्मदेव के मानस संका पुत्र सनत सनन सनातन व सनत कुमार ज्ञान और आत्म तत्व प्राप्ति के इच्छुक थे उनकी इस इच्छा को फलित करने के लिए प्रभु महादेव ने एक सर्वोच्च गुरु का रूप लिया और यही है उनका दक्षिणा मूर्ति [संगीत] स्वरूप बगत वृक्ष अर्थात वदा अला वृक्षम की छाव जिसके ऊपर सभी ध्रुवतारे प्रकाशित होते हैं वहां स्थिर दक्षिणा मूर्ति अपने चतुर्भुज अवतार में स्थित होती है और इस मुद्रा में उनके नीचे वाला दाहिना हाथ छिन मुद्रा में रहता है जो श्रेष्ठा और परिपूर्णता का घोटक है अपने नीचे रहने वाले बायना हाथ में वो ध्रुवा धान में होते हैं जो उनके समस्त उजागर ज्ञान का स्रोत होने का संकेत उनके ऊपर रहने वाले दाहिने हाथ में डमरू जो इसका संकेत है कि समय और सृजन दोनों से ही उनका तारतम्य है क्योंकि स्पंदन ही तो है जो प्रत्यक्ष रूप धारण करता है उनके ऊपर रहने वाले बायने हाथ में वो अज्ञानता को मिटाने वाली अग्नि को धारण करते हैं ुद और उनका बाया पांव उनके दाएं पांव के घुटने पर विराना मुद्रा में स्थिर रहता है जो स्थिरता का घोतक है और उनका दाहिना घुटना जो पृथ्वी का स्पर्श करता है उसके नीचे अपना शीष उठाने में असमर्थ अज्ञानता रूपी असुर दबा रहता है प्रभु को उनके इस रूप में ध्यान ज्ञान विद्या और जगतगुरु के रूप में जाना जाता है दक्षिणा मूर्ति अर्थात दिव्य चेतना और जब व इन चारों ऋषि कुमारों को ज्ञान प्रदान कर रहे हैं तब उनका मुख दक्षिण की ओर और यह भी एक कारण है कि उन्ह दक्षिणा कहा जाता है मां आपने जिस प्रकार प्रभु का वर्णन किया है उससे मुझे उनका वह स्वरूप दिखाई दिया जिसे मैं देखकर भी नहीं देख सका था यह महा ज्ञान शब्द रहित इसीलिए महादेव इस मुद्रा के माध्यम से ही प्रदान कर रहे हैं जिसमें सबसे विशेष मुद्रा क्योंकि इस मुद्रा में तर्जनी उंगली जो जीव अथवा आत्मा के प्रतीक [संगीत] है जो भी उनकी ध्यान साधना पूर्ण करता है प्रभु दक्षिणा मूर्ति स्वयं उनके हृदय के निकट अमूर्त अमृत तुल्य रूप में होने का आभास करते [संगीत] हैं [संगीत] अर्थात जब तक प्रभु दक्षिणा मूर्ति सनत कुमारों को ज्ञान प्रदान नहीं कर देते तब तक हम भैया के विवाह की चर्चा उनसे नहीं कर सकते और पुत्र यदि प्रभु इस विषय में कुछ करना चाहेंगे तो वह स्वयं हमें संकेत दे [संगीत] देंगे [संगीत] [संगीत] सूर्यदेव तो है अभी आकाश में फिर अचानक अंधेरा क्यों छाने लगा [संगीत] [संगीत] ओ क्या उस क्षणिक अंधकार से प्रभु ने हमें किसी संकट का संकेत दिया था मां हां पुत्र यह शुभ संकेत तो कदापि नहीं था कदाचित कोई अनर्थ होने वाला है या कहीं कोई अनर्थ हो रहा है [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] पिता श्री ये कैसा अद्भुत स्थान है ज हम जा रहे हैं पुत्र इसका ज्ञान तो हमारा मार्ग दर्शन करने वाली तुम्हारी बहन को ही [प्रशंसा] है बताओ पुत्री यह तुम कहां लेकर आई हो हमें मेरी कल्पनाओं का उपवन है य कल्पनाओं का उपवन हां पिता श्री जहा आपकी पुत्री देव सेना आपका पूर्ण हृदय से स्वागत करती [संगीत] है [संगीत] आई ओ [संगीत] पुत्र अद्भुत सर्वथा अद्भुत आकर्षक मनमोहक स्थान है [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] ये पिता श्री मां आपने मुझे इतने वर्षों अपार स्नेह दिया भ्राता जयंत के जन्म के उपरांत भी आपने मुझे कभी आबास नहीं होने दिया आपने मुझे जन्म ना देकर भी अपनी पुत्री रूप में स्वीकार किया मेरे जीवन को अपने प्रेम से इतना सुंदर बनाने के लिए मैं भी आपको यह सुंदर उपवन उपहार स्वरूप देना चाहती हूं [संगीत] तनिक भी संकोच मत कीजिए अपने भीतर चिपे बालक को जागृत कीजिए और इस स्थान का पूर्ण आनंद उठाइए हम देवता को य अवसर प्रदान करने के लिए धन्यवाद देवसेना धन्यवाद [संगीत] देवसेना आनंद अपार आनंद आ रहा है हमें यह अद्भुत उत्सव समान वातावरण अत्यंत सुख में [संगीत] है [संगीत] पुत तुम ठीक तो होना शची देवसेना तुम दोनों ठीक तो हो हां पता श्री ये क्या था इंद्र देव यह कोई शत्रु का आक्रमण था कोई आसुरी शक्ति जो आपके परिवार पर आक्रमण करने आया और अब चला [संगीत] गया हे विशाल काय चि यह तो किसी मायावी असुर का प्रतीत होता है सान पुन अधिकारी छाया प्रकट हो रही [प्रशंसा] है देवगढ़ आप सभी पीछे हट जाइए जो कोई भी दुष्ट है मैं उसका सामना [संगीत] करूंगा मैं इस दुष्ट के हाथों से जल की एक एक बूट को खींच कर उे शिथल बना दूंगा [संगीत] इसकी समस्त प्राण वायु सोख लूंगा मैं [संगीत] अशक्त होकर यह दुष्ट कुछ भी नहीं कर सकेगा अब मैं इस दुर्बल पड़े मायावी हाथ को अपनी ही अग्नि से भस्म करूंगा [संगीत] यह भयंकर माया भी हाथ भाई भी ो करर लौट [संगीत] गया चलिए वापस लौटते हैं [संगीत] [संगीत] य शत्रु हमारी अपेक्षा से अधिक शक्तिशाली सभी [संगीत] ज मैं तुम्ह जंत को नहीं ले जाने दूंगा की रक्षा कीजिए पिताजी इस से मुझे मुक्त कीजिए जंत सुर हमें जयंत की रक्षा करनी होगी आइए मेरी सहायता [संगीत] कीजिए कार्तिकी को विवा के लिए तैयार करने की चिंता तो मुझे पूर्ण में ही सता रही थी और अब य अशुभ संकेत भी प्रकट हो गए मां अपनी चिंता त्याग दीजिए हर जटिल समस्या का कोई ना कोई हल होता है यह तो आप ही सदा कहती हैं इसलिए कदाचित जो भी होगा उसका भी कोई कारण होगा माता घोर अनर्थ हो गया देवराज इद्र क्या हुआ देवराज मेरी सहायता कीजिए माता किंतु संकट है क्या देवराज संकट नहीं माता महा संकट छाया है मुझ पर एक राहस से में हाथ अचानक से आया और और उसने मेरे पुत्र जयंत का हरण कर ली वरुण देव वायु देव अग्निदेव जिन्ह उस हाथ में उछला था वो कहां है किसी को ज्ञात नहीं है माता वो किसका हाथ था इंद्रदेव ये मुझे ज्ञात नहीं है माता वो अचानक से आया उसने मेरे पुत्र का हरण किया और अदृश्य हो गया और हम सब देवता मिलकर भी उसे रोक नहीं [संगीत] पाए माता कृपया मेरे पुत्र की रक्षा कीज रक्षा कीज माता रक्षा कीजिए मेरे पुत्र की ना स्त्री पूर्ण है ना पुरुष किंतु दोनों जब विवाह संबंध में बन जाते हैं तो मिलकर पूर्ण हो जाते हैं
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