Thursday, 1 January 2026

महादेव का विराट रूप Akanksha Puri Uzair Basar Vighnaharta Ganesh Episode

न हरता श्री गणेशा श्री गणेशा [संगीत] श्री [संगीत] सत्य विघ्न हरता है गणेश जी के वचन मेरे कर्म मेरे पाप कर्म मेरे और इस संसार के लिए विघ्न बन गए थे लेकिन गणेश जी ने मुझे उचित मार्ग पर लाकर मुझे सत्य कर्म के मार्ग पर लाकर उस विघ्न को दूर कर दिया मुक्ति दिलाई उन्होंने मुझे आप महान है गणेश जी अब देवी वृंदा को प्रभु नारायण के चरणों में स्थान प्राप्त होगा नारायण बहुत दयालु है भक्त उने भले ही भूल जाए किंतु वह अपने भक्तों को कभी नहीं भूलते उनकी दया दृष्टि तो सदैव अपने भक्तों पर बनी रहती है क्या नहीं मेरे पापों के बाद प्रभु नारायण मुझे स्वीकार करेंगे या [संगीत] नहीं शांताकारम मुग शयम पद्मनाभम सुरेशम विश्वा गगन सदृश मेघ वर्ण शुभांग लक्ष्मीकांतम कमल नयनम योगी धान्य गम्यम वंदे विष्णु भव भय हरम सर्व लोके [संगीत] [संगीत] नाथम [संगीत] आपके दर्शन पाकर मैं कृतार्थ हो गई प्रभु अपने पापों के कारण में आपसे चाहे कितनी भी क्षमा याचना करू कम है प्रभु फिर भी मुझे क्षमा कर दीजिए प्रभु पुत्री वृंदा संसार के हित के लिए तुमने स्वयं को दंड दे दिया अब तुम मुक्ति की अधिकारी हो धन्यवाद [संगीत] प्रभु आप क्षमाशील है महान है नारायण आपको शत शत नमन मामा जी [संगीत] मूषक जी चलिए अब शीघ्रता कीजिए हमें शीघ्र कैलाश पहुंचना चाहिए जी [संगीत] [संगीत] प्रभु बस कुछ ही क्षण बाद यह दुष्ट पुन उठ खड़ा [संगीत] होगा आप सभी इतने चिंतित क्यों [संगीत] है प्रणाम मां प्रणाम पिता श्री पुत्र गणेश तुम कुशल तो हो ना और मैं भी कुशल हूं मां और वृंदा जी भी मामा जी ने स्वयं उन्हें उचित मार्ग जो दिखाया है है ना मामा जी महादेव जालंधर अब पुनः जीवित नहीं होगा क्योंकि मैंने वृंदा को वरदान दिया था कि जब तक वह जीवित है उसका पति मृत्यु से सुरक्षित रहेगा परंतु गणेश के कारण मैंने वृंदा को मोक्ष प्रदान कर दिया [संगीत] है जलंधर अब मृत्यु के मुख में जा चुका [संगीत] है पिता श्री जलंधर ने घोर पाप किए उसके अपराध बहुत बड़े थे किंतु अब आपने उनका विनाश कर दिया और आपके त्रिशूल से जिसका भी वध होता है उसका अहंकार तो स्वत ही मिट जाता है पिताश्री महादेव जलंधर आपकी क्रोधाग्नि से उत्पन्न हुआ था इसलिए कदाचित आपका उसको मोक्ष प्रदान करना ही उचित [संगीत] होगा [संगीत] पूर गौरम करुणावतारं संसार सारम भुजगेंद्र हारम कला वसंतम विंदे भव भवानी सतम [संगीत] नमामि महादेव [संगीत] अहंकार वश मैं कितना बड़ा अपराध कर बैठा मैं आपसे ही उत्पन्न हुआ और आपको ही नहीं पहचान सका आपके दिव्य स्वरूप में ना देख सका आपको आपके नाम से संबोधित करता रहा यह ना समझ सका कि देवाधि देव है आप परम ब्रह्मा महादेव है आप जगत पिता है आप आपसे श्रधा करने की मूर्ता करता [संगीत] रहा किंतु आप तो दया निधान है प्रभु इतना होने के बाद भी आपने मुझे अपने दर्शन दिए मैं कृता हुआ प्रभु तुम मेरी क्रोधाग्नि से उत्पन्न हुए हो जलंदर इसलिए उसके अंधकार का भाव भी था तुम पर जो बढ़ता ही गया तुम तो स्वयं को भगवान घोषित कर चुके थे मति भ्रष्ट हो चुकी थी तुम्हारी इसलिए तुमने अपनी भूल स्वीकार नहीं की और तुम्हारा विनाश हुआ किंतु मेरे त्रिशूल के वार से तुम्हारे भीतर के अंधकार अर्थात तुम्हारे अहंकार का भी नाश हुआ है मुझे क्षमा कर दीजिए महादेव मुझे श कर [संगीत] दीजिए मैं कुमार कार्तिके और गणेश जी से भी क्षमा याचना करता हूं [संगीत] प्रभु उन्होंने मुझे सत्य दिखाने की चेष्टा की मुझे समझाने का प्रयास किया किंतु कावाश मैं कुछ देख सका प्रभु किंतु जिस पर अहंकार हावी हो सकता है वो भला सत्य कहां देख सकता है मैंने अहंकार वश इनके साथ भी बुरा व्यवहार किया मुझे क्षमा कर दीजिए मुझे शमा कर दीजिए प्रभु महादेव मुझ पर एक कृपा कीजिए मैं आपकी क्रोधा सेप हुआ तो पुन मुझे अपने भीतर समाहित कर मुक्ति दीजिए प्रभु जालंधर जो तुम्हारे पापों का आधार था तुम्हारे उस अहंकार को मैंने मिटा दिया अब तुम्हारी आत्मा को अपने भीतर समाहित कर तो मैं मोक्ष प्रदान करूंगा महादेव की जय महादेव की जय महादेव की जय [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] जम शवा ओ [संगीत] महादेव आपको कोटि कोटि धन्यवाद आपने एक बार पुनः हम सभी को और इस सृष्टि को एक महान संकट से रक्षित किया नहीं देवराज इस संकट के टलने का इस विजय का श्रेय तो मुझसे कहीं अधिक पुत्र गणेश जाता है पिताश्री भैया और मामा जी की सहायता के बिना यह कहां संभव था और देवराज इंद्र के साथ अन्य देवताओं ने भी हमारी योजना में पूर्ण सहयोग दिया था सम्मिलित शक्ति और उचित युक्ति से ही हम इस संकट को पराजित कर सके प्रथम पूज्य गणेश की जय विता श्री गणेश की जय पार्वती नंदन श्र गणेश की जय प्रथम पूज्य श्री गणेश की जय मां आपके आशीर्वाद से ही तो मेरी सफलता है पुत्र मेरी भी यही कामना है विघ्नहर्ता तुम इसी प्रकार संसार के सभी विघ्न दूर करते रहो जालंधर सृष्टि के नियमों को उलट पर तुला था सृष्टि का सर्वनाश करने चला था किंतु प्रथम पूज्य गणेश जी आपने उसके अंत का उपाय कर हम सभी को एक घोर महा संकट से बचा ले देवराज इंद्र मैंने तो मात्र अपना कर्तव्य निभाया वही किया जो धर्म उचित था किंतु हमें स्मरण रखना चाहिए कि भैया ने भी इस कार्य में मेरी सहायता की वे इस समय अवधि तक शांत रहे क्रोधित नहीं हुए वह तभी तो हमारी युक्ति सफल हो [संगीत] सकी हां अनुज उचित कह रहे हो किंतु स्मरण रहे कदाचित मेरा क्रोध अब ना जागृत हो [संगीत] जाए त्रिदेव माता पार्वती प्रथम पूज्य गणेश जी हम सभी को प्रस्थान करने की अनुमति दीजिए ना नारायण [संगीत] नारायण प्रणाम ऋषिवर प्रणाम देवर्ष [संगीत] प्रणाम आज्ञा अभी देवराज यह कुछ अनुचित कर रहे हैं आप आज मैं अनुचित कर रहा हूं किंतु मुझे जत ही नहीं है कि मैं क्या अनुचित कर रहा हूं तेव ऋषि कृपया शीघ्र बताइए क्या अनुचित हुआ है मुझसे देवराज इंद्र जब संकट आप पर कोई छाता है तो प्रथम स्मरण आपको महादेव और प्रथम पूजनीय गणेश जी का ही आता है तत्पश्चात आप भागे हुए यहां आते हैं और जैसे ही गणेश जी वह संकट मिटाते हैं उसी क्षण आप पुनः लौट के भाग जाते हैं यह परमार्थ नहीं यह तो स्वार्थ [संगीत] है देवर्ष नारद सभी देवता यहां उपस्थित थे परंतु आप बताइए इस संकट काल में आप कहां [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] थे नारायण नारायण प्रभु मुझे इस बात का था ज्ञात कि गणेश जी उस असुर के मिटा देंगे सारे ही उत्पात विश्वास था मुझे समस्त समस्याओं को वे करेंगे नष्ट इसी कारण अन्य कार्यों में मैं था व्यस्त व्यस्त अच्छा तो बताइए देवश्री किस कार्य में व्यस्त है आप अति महत्त्वपूर्ण कार्य था महादेव हमारे विघ्न हरत हैं जो सदैव उनकी उचित हो अर्चना इसीलिए उनकी स्तुति की मैं कर रहा था रचना देवर्षि मेरी [संगीत] स्तुति प्रणम्य शिरसा देव गौरी पुत्रम विनायकम भक्ता वासम स्मर नित्य माय कामा सिद्ध प्रथमं वक्रतुंडम च एक दंतमंजन दरम पंचम च ठम विकट मेव च सप्तम विघ्न राजेंद्रम धूम्रवर्ण तथा स्कम नवम भाल चंद्र च दशम विनायकम एकादश गणपतिम द्वादश तु गजाननम द्वाद शैतानी नामानि त्रिस पठिन नर नचा विघ्न भयम तस्य सर्वा सिद्धि करम [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] प्रभु अद्भुत अति सुंदर देवर्ष मुझे आनंद आया मैं अति प्रसन्न हुआ यह स्तुति जिसमें मेरे 12 नाम है संकट नाश गणेश स्त्रोतम के नाम से विख्यात होगी और जो भी भक्त मेरे लिए यह स्तुति गाकर मेरी पूजा करेगा मैं उसे सभी विघ्नों से मुक्त कर उसके सभी दुखों का नाश करूंगा मैं कृतार्थ हुआ प्रथम पूजनीय गणेश जी का सत्य सत्य धन्यवाद देवऋषि यह हमारा सौभाग्य है जो आपके मुख से हमें प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता गणेश जी की इतनी अद्भुत स्तुति सुनने को मिली हम कृतार्थ हुए प्रथम पूज्य श्री गणेश जी की जय विघ्न हर्ता श्री गणेश जी की जय पार्वती नंदन श्री गणेश जी की जय मुझे तुम पर गर्व है पुत्र गणेश सत्य है अनुज गणेश तुम्हारी बुद्धि की शक्ति किसी बलशाली योद्धा के बल से भी अधिक बलवान है भैया यह तो आपका प्रेम और आशीर्वाद है प्रथम पूज्य गणेश जी हम सभी को प्रस्थान करने की अनुमति [संगीत] [संगीत] दीजिए प्रणाम पिता श्री आपने झे स्मरण किया पिता श्री हां गणेश जलंधर का तो वध हो गया किंतु जो शेष है उसका भी अंत होना चाहिए पुत्र जालंधर के द्वारा रचित इस कैलाश का कहां कोई औच है मैं आपकी आज्ञा समझ गया पिताश्री [संगीत] संसार में जो भी मिथ्या है उसका अंत होगा तभी तो सत्य सभी के समक्ष उजागर होगा कोई कितना भी बड़ा भ्रम उत्पन्न कर दे किंतु सत्य तो सत्य है और सत्य यही है कि समस्त ब्रह्मांड में महादेव एक ही है और एक ही है उनका [संगीत] कैलाश [संगीत] प्रभु अब पुन उस संकट के मुख में क्यों प्रवेश कर रहे हैंक जी आप इतने भयभीत क्यों हो रहे हैं अरे प्रभु कैसे भल सकते हैं आप उस भयंकर स्थान को जहां मेरे ऊपर आक्रमण हुआ था वो तो मैं अपनी गति अपनी कुशलता से हम दोनों को यहां से सुरक्षित निकाल कर ले गया था अन्यथा मुझे ज्ञात है मूषक जी किंतु अब तो देवी वृंदा को मुक्ति भी मिल चुकी है इसीलिए अब चिंता का कोई कारण ही नहीं उचित है प्रभु किंतु ऐसे स्थान पर लौट कर जाने की क्या आवश्यकता है उस मिथ्या कैलाश को नष्ट करने मूषक जी ओ जो आज्ञा प्रभु शुभ कार्य में तो तन भीत नहीं मैं आपको अति शीघ्र वहा पंचांगा [संगीत] गणपति बापा असत्य का कोई अस्तित्व नहीं होता मिथ्या कैलाश का जहां से उदय हुआ था अंत में वह वहीं समा गया यह कार्य तो संपन्न हुआ मशक जी चलिए अब कैलाश लट चलते हैं जी प्रभु अब कभी कोई मिथ्या कला का निर्माण करने का दुस्साहस कदापि नहीं करेगा गप [संगीत] प्रत्यक्ष [संगीत] पर स [संगीत] [संगीत] कितना भव्य कितना सुंदर दृश्य है प्रतीत होता है स्वयं प्रकृति उमा ने अपना श्रृंगार आरंभ किया है जिसके कारण संपूर्ण ब्रह्मांड ने भी अपना नव श्रृंगार प्रारंभ किया है मूषक जी वो देखिए यह मेघ कितनी सुंदर कितनी मनोहर आकृतियां ले रहे हैं हां प्रभु और संपूर्ण वातावरण में इतनी मनमोहक सुगंध भी छाई हुई है हां मूषक जी यह सुगंध इन सभी नवीन पुष्पों की ही [संगीत] है अद्भुत इतना सुंदर जलप्रपात सूरज से चल के मा पर टी का ससे शो है के सृष्ट मान का हर किसी का शोक ड़ स जा दुखती की सार उल जा सब से ई लाश होती की ार गा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] सब कुछ इतना सुंदर इतना सजीव इतना गुंजायमान हो गया है जैसे प्रकृति ने स्वयं अपना श्रृंगार किया हो [प्रशंसा] [संगीत] जा ये मृग बड़ा स्वादिष्ट होगा बहुत आनंद आएगा इसका आहार करने [संगीत] [संगीत] में [संगीत] कितने समीप थे उसके हम तब भी व कैसे भाग गया मैं उसे पकड़ने ही वाला था कि अचानक इन वृक्षों के मध्य एक प्रकाश उत्पन्न हुआ पुन वही [संगीत] प्रकाश देखा देखा तुमने वो चमकीला प्रकाश पुन दिखाई दिया किसी ने हमारे आखिर का ध्यान भटका है उसे वही जाकर दंड देना होगा [संगीत] चलो [संगीत] अब मैं स्वयं स्वामी के लिए यह फल लेकर जाती [संगीत] हूं तो यह है वो स्त्री जिसके कारण हमसे हमारा भोजन दूर हो गया अब तो इनसे अवश्य की भेट करनी [संगीत] होगी मोशक जी संपूर्ण वातावरण कितना निर्मल पावन सौंदर्य से परिपूर्ण है ना आज हां प्रभु आज की यात्रा तो बड़ी आनंदमय [संगीत] है मूषक जी गति थोड़ी धीमी कीजिए मुझे कैलाश के इस मनोहर दृश्य का आनंद लेने दीजिए वाह प्रभु आप मुझे सदा गति बढ़ाने को कहते हैं आज प्रथम बार है जब आपने मुझे धीमी गति से चलने को कहा है आपके आनंद के लिए प्रभु यह तो मैं बड़ी प्रसन्नता से करूंगा व आकाश में क्या था कुछ नहीं मात्र एक मेघ है कोई पखी होगा मशक जी रुकिए क्या हुआ प्रभु आप मुझे रोक क्यों रहे [संगीत] हैं विचित्र सा आभास क्यों हो रहा है मुझे मूषक जी यहां नीचे उतरना होगा आपको जो आ गया प्रभु पुन मुझे आभास हुआ प्रभु हम कहां जा रहे हैं मुष जी वहां कैलाश के सिरे पर उस वृक्ष पर कुछ बेर दिखाई दिए मुझे चलिए ना मां के लिए कुछ बेर तोड़ कर ले चलते हैं उचित है [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] प्रभु [संगीत] कहां गई वो स्त्री मुझे तो यहां कोई दिखाई नहीं दे रहा कौन [संगीत] स्त्री [संगीत] हृदय में फुर्ती भर दे ऐसी पावन वायु का प्रवाह है [संगीत] [संगीत] यहां [संगीत] अदभूत और स्वामी को फल खिलाने में और भी आनंद आएगा मुझे अभूतपूर्व सौंदर्य है इस स्त्री का असाधारण असाधारण रूप है इस देवी [संगीत] का मक जी मा बेर पाकर प्रसन्न हो जाएंगी मैं उन्हें अभी देकर आता हूं उचित है प्रभु अद्भुत है इसका सौंदर्य नेत्र नहीं हट रहे हैं इस देवी [संगीत] से [संगीत] असुरी अंधकार का चक्र कभी समाप्त नहीं होता किंतु सत्य सदैव उसके अंत के लिए तत्पर रहता है

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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