Thursday, 1 January 2026

महादेव के द्वारा द्रौपदी की इच्छा पूर्ण हुई Mahabharat Best Scene B R Chopra Pen Bhakti

महाभारत मजले भैया यदि हम घर चलकर माता श्री से यह कहे कि हम भिक्षा ले आए और पांचाली को सामने कर दें तो कैसा रहेगा राजकुमारी को भिक्षा कहोगे परिहास में हानि ही क्या है मजले भैया क्यों पंचाली जैसी आपकी इच्छा आज बड़ी अच्छी शिक्षा ले आए माता जी सारे भाई आपस में बांट [संगीत] लो [प्रशंसा] [संगीत] यह देवी कौन है पुत्र माता श्री यह काम पिल्ले की राजकुमारी द्रौपदी है अर्जुन ने इसे स्वयं व में जीता है अखंड सौभाग्यवती भवा परंतु परंतु माता श्री आपने इनके विभाजन का आदेश दिया है इसके विभाजन का आदेश क्या मेरी मती मारी गई है कि मैं पुत्र वधु के विभाजन का आदेश दूंगी अर्जुन तुमने तो भिक्षा तुम दोनों ने द्रौपदी को भिक्षा बताया था पत्नी को भिक्षा कहा तुमने मां से झूठ बोले अर्जुन अब बांटो इसे और बांट कर दिखलाओ मुझे क्या समस्या है माता श्री यह तो तुम अपने इन दोनों अनुज से ही पूछो युधिष्ठिर जो पत्नी को भिक्षा मानते हैं वस्तु समझते हैं क्या भरत वंश की यही मर्यादा है तुम तो साक्षात धर्म हो तुम ही बताओ युधिष्ठिर के बिना नर संपूर्ण नहीं हो सकता नारी चाहे माता के रूप में हो चाहे पत्नी के रूप में चाहे बहन के रूप में हो चाहे पुत्री के रूप में नारी सदैव आदरणीय है भीम और अर्जुन ने नारी को भिक्षा कहके नारी का अपमान किया है और माता परम गुरु भी है उसका कोई भी आदेश अस्वीकार नहीं हो ही नहीं सकता यह आप क्या कह रहे बता श्री हा माता श्री के मुंह से आज तक कोई अस्वीकार ने बात नहीं निकली तो फिर माता श्री के अनजाने में दिए गए इस आदेश में भी कोई ना कोई रहस्य अवश्य होगा वर्तमान में जो कुछ भी हो रहा है अतीत में उसका कोई ना कोई अंकुर अवश्य होगा तो क्या तुम यह कह रहे हो युधिष्ठिर कि द्रोपदी को पांचों भाइयों में बांट दिया जाए यह मैंने नहीं कहा माता श्री यह आपने कहा है यह आपका आदेश है मैंने तो भिक्षा के लिए कहा था पुत्र यह आप जाने परंतु यह सोच लीजिए माता श्री कि भविष्य में जो कुछ भी होना है वो ना आप जानती हैं और ना मैं हो सकता है कि आपकी जीभ पर बैठकर स्वयं काल ने य निर्णय लिया [संगीत] हो युधिष्ठिर तुम कोई उदाहरण दे सकते हो पुत्र अवश्य दे सकता हूं माता श्री गौतम कुल की कन्या जटला का विवाह सात ऋषियों से हुआ था दाना हक्ष की बहन प्रचिती का विवाह 10 भाइयों से हुआ था परंतु क्या विवाह और विभाजन में कोई अंतर नहीं है भ्राता श्री वास्तविकता हों के इस चक्रव्यूह से निकलने के मार्ग का ज्ञान मुझे नहीं है प्रिय नकुल वासुदेव का प्रणाम स्वीकार कीजिए बुआ युग युग जिव द्वारका में तो सब कुशल है ना आपके आशीर्वाद से वहां तो सब कुशल है परंतु इस समय मुझे यहां कुशलता दिखाई नहीं दे रही हम हम एक धर्म संकट में पड़ गए हैं वत्स भीम और अर्जुन द्रोपदी को लेकर आए और मुझसे कहने लगे कि माते हम एक बहुत अच्छी भिक्षा लेकर आए हैं मैंने देखे बिना ही कह दिया कि सारे भाई आपस में बांट लो अब द्रौपदी कोई वस्तु थोड़ी है जिसका विभाजन किया जाए यह तो आप स्वयं द्रौपदी से ही पूछिए यह क्या बताएगी वत्स यही तो बताएगी क्योंकि इसी ने पूर्व जन्म में यह नहीं सोचा कि गागर में समाई कितनी है और महादेव से सागर का वरदान मांग लिया और जब वह बोले यह संभव नहीं है तो यह बोले कि ईश्वर के लिए भला क्या असंभव हो सकता है परंतु महादेव के लिए भी गागर को नदी का वरदान देना संभव नहीं है द्रौपदी तुमने ऐसा क्या मांग लिया था महादेव से पुत्री यह तुम बताओगे द्रौपदी की यह भी मैं ही बताऊ द्रौपदी ने महादेव से एक वरदान में लपेटकर पांच वरदान मांगे थे बुआ उसने एक ऐसा पति मांगा था जो धर्म का चिन्ह हो प्रतीक हो सत्य का संकेता अक्षर हो जो हनुमान की भांति बलवान भी हो परशुराम जैसा धनुर्धर हो सुंदर तो ऐसा हो कि समय भी देखता रह जाए और सहनशीलता में कोई उसके समान ना हो क्या तुमने ऐसा नहीं मांगा था द्रौपदी और क्या महादेव ने यह नहीं कहा था कि य सारी श्रेष्ठता एकत्र नहीं हो सकती कुछ मांगने से पहले तुम्हें यह सोच लेना चाहिए था द्रौपदी कि जो मांग रही हो तुम्हारे हाथ में उसकी समाई है या नहीं महादेव से तुमने हट कर के वरदान तो ले लिया अब बुआ के मुख से स्वयं महादेव बोले हैं क्योंकि आधुनिक संसार में युधिष्ठिर ही धर्म का चिन्ह है यह है महादेव का पहला वरदान आधुनिक संसार में भीम से अधिक शक्तिशाली कोई नहीं महादेव का दूसरा वरदान आधुनिक संसार का सबसे बड़ा धनुर्धर अर्जुन है यह तुम्हारा तीसरा वरदान आधुनिक संसार में नकुल से अधिक सुंदर कोई नहीं तुम्हारा चौथा वरदान सहदेव सहनशीलता में सर्वोत्तम है तुम्हारा पांचवा वरदान हा यह सारे वरदान लौटा करर यदि तुम महादेव का अपमान करना चाहो तो यह तुम पर निर्भर है द्रौपदी अरे आप सब लोग द्रौपदी की ओर क्यों देख रहे हैं पार्थ तुमने स्वयं व अवश्य जीता है परंतु इसका अर्थ यह नहीं कि जीती जागती द्रौपदी भिक्षा हो गई माता परम गुरु होती है अर्थात तुमने अपने परम गुरु से झूठ बोला है और बुआ मां होने का अर्थ यह नहीं कि आप देखे बिना सोचे बिना समझे बिना आदेश दे कि आपस में बांट लो आपने ममता की मर्यादा का उल्लंघन किया है तो आज से यह जीवन आप सबकी तपस्या भी है और प्रायश्चित भी पूर्व जन्म में थे दिए शिव ने जो वरदान वरे पा पाच व द्रौपदी पांचों गुण महान पांचों गुण महान महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत h

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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