[संगीत] क्या हुआ भाभी मां [संगीत] आप चिंतित क्यों [संगीत] है नहीं देव जी कुछ विशेष नहीं है नहीं नहीं देव जी ऐसा कुछ नहीं है आप चिंतित मत होए चिंता कैसे ना करू भाभी मां इधर आप चिंतित है उधर आप दोनों को स्पर्धा में देखकर माता भी अत्यंत चिंतित है भाभी मां आप दोनों तो एक ही है फिर यह व्यर्थ की स्पर्धा क्यों एक ही दाल के दो पुष्प आपस में में स्पर्धा करते हैं क्या जब आप दोनों का जन्म प्रभु श्री नारायण के हर्ष अतिरेक से उत्पन्न अश्रु से हुआ है फिर आप दोनों आपस में स्पर्धा कर स्वयं को क्यों व्याकुल कर रही हैं देवर जी मुझसे भूल हो रही थी देवर जी मुझे समझाने के लिए आपका अनेकों धन्यवाद मुझे प्रसन्नता है कि मैं आप दोनों को समझा पाया देवजी गणेश जी ने उचित ही कहा है मैं बहन बल्ली के साथ ऐसी स्पर्धा क्यों कर रही हूं और मां को भी यह ज्ञात हो ही गया देवर जी के शब्द सर्वथा उचित ही तो है जब हम दोनों एक है हमने एक दूसरे का स्वीकार किया है तो फिर सधा तो मूर्खता है [संगीत] उचित है अब इन दोनों को समझ आ गया है तो स्थिति सामान्य हो जाएगी अब भाभी मांओं के मध्य शांति बनी रहेगी दीदी क्षमा करें मेरा आपसे स्पर्धा करना तो उचित नहीं था क्षमा तो मुझे मांगनी चाहिए बहन बल्ली भोर से ही मैं हम दोनों की होड़ में लगी हुई [संगीत] थी हां दीदी स्वामी को नींद से मैं जगाऊं या आप एक ही तो बात है हां मेरे हाथ से उन्हें जल मिले या तुम्हारे हाथ से एक ही तो बात है लेकिन एक बात यह भी है मुझे सदा यही लगता है जैसे मैं ही उनके लिए कुछ अधिक कर डालूं यह बात तो मेरे साथ भी है ऐसा लगता है कि उन्हें जो भी चाहिए वो मैं ही दे दूं ये यह क्या हो रहा है इन दोनों में शांति हो रही है या दोनों भाभी मां फिर से एक नवीन स्पर्धा की तैयारी कर रही हैं जैसा मुझे ज्ञात है मुझे अब इस सूखे पौधे को जल देना चाहिए किंतु मेरा मन कह रहा है कि सूर्यास्त होने ही वाला है मुझे स्वामी की शैया तैयार करनी चाहिए मन तो मेरा भी ऐसा ही करने का है और वो भी आपसे पहले मैं विश्वास दिलाती हूं पहले मैं स्वामी की शैया तैयार कर दू उसके बाद अवश्य तुम्हे जल दूंगी उनका कार्य करने के बाद मैं तुम्हें जल देने अवश्य आऊंगी अपनी स्पर्धा में तो यह अपने सभी अन्य कर्तव्य भूल रही है कैलाश में यह एक दूसरे के साथ स्पर्धा का कैसा वातावरण उत्पन्न हो रहा है फिर तो तुम्ह शीघ्र ही कैलाश पहुंचना चाहिए क्योंकि देवी पार्वती को शीघ्र ही तुम्हारी आवश्यकता हो प्रभु श्री नारायण ने ने कहा था कुछ महत्त्वपूर्ण करना है मुझे जो भी हो रहा है उसका संबंध वैकुंठ से ही है मुझे मेरे सभी प्रश्नों के उत्तर वहीं [संगीत] मिलेंगे कहीं ऐसा ना हो कि इस मुरझा पौधे के समान कैलाश की शांति और कैलाश की समरसता कहीं मुरझा ना जाए अब तो मुझे कुछ करना ही होगा कदाचित मुझे स्वामी से इसकी चर्चा करनी चाहिए स्वामी तो सदा के समान अपने ध्यान में ही है यहां समस्या बढ़ती जा रही है और मैं किसी से अपनी चिंता बांट भी नहीं सकती स्वामी के लिए तो उनका ध्यान ही सब कुछ है और घर परिवार किंतु उनकी दृष्टि से छिपा थोड़ी ही होगा कि कार्तिक का तो स्वाद ही बदल गया अपनी मां की खीर के आगे अपनी पत्नियों के हाथों का शीरा भाने लगा है किंतु प्रभु ने इसे लेकर मुझे एक शब्द भी नहीं कहा बस भोजन किया और अपने ध्यान में रम गए जिन्हे यही नहीं पता कि उनकी पत्नी के मन में कितनी उथल पुथल चल रही है मेरे भोलेनाथ तो अपने पुत्र बधु के बीच की स्पर्धा भी कैसे देख पाएंगे भाभी माओ के मध्य जो हो रहा है वह ऐसी गुथी बनकर उलझ गई है जिसे सुलझाने का उपाय तो मुझे भी नहीं सूझ रहा है क्या हुआ पुत्र गणेश ऐसा क्या हो रहा है उन दोनों के बीच स्पर्धा मां और कोई साधारण स्पर्धा नहीं अति असाधारण अति गंभीर [संगीत] स्पर्धा मुझे लगा था बड़ी साधारण सी बात है साधारण स्पर्धा है किंतु अब तो लग रहा है यह तो गंभीर समस्या का रूप ले सकती है अपने पति का ध्यान रखना उस पर अपना अधिकार समझ उचित है किंतु उसके लिए स्पर्धा करना तो बिल्कुल भी उचित नहीं है अज्ञानता [संगीत] है हां वह दोनों बालकों के समान स्पर्धा में जुट जाती हैं और माता यह सब देखकर बहुत तनाव में आ जाती हैं मुझे तो भय है कहीं उनके इस आचरण के कारण माता किसी दिन क्रोध में ना आ जाए अज्ञानता वश जो हो रहा है वो उनमें दूरियां बढ़ाएगा और जब आपस में दूरियां बढ़ जाए तो उस परिवार के शत्रु सक्रिय हो जाते हैं द्वेष को बोने से तो द्वेष का ही फल फलित होगा ना किंतु मैं अपने परिवार के साथ ऐसा कदापि नहीं होने दूंगी मैं आपको समस्या बता रही हूं और उसे सुलझाने के उपाय के स्थान पर आप मुस्कुरा रहे [संगीत] हैं प्रभु मैं आपसे इतनी गंभीर समस्या साझा कर रहा हूं और आप मुस्कुरा रहे हैं क्योंकि यह वास्तव में इतनी गंभीर बात है नहीं यह तो प्रत्येक गृहस्थी की बात है प्रत्येक मां को लगता है कि पत्नी के आने के बाद उसका पुत्र बदल गया है हर सास को लगता है कि पुत्र वधु की आपस में ही होड़ लगी हुई है वोह आपस में ही नहीं सास के साथ भी स्पर्धा में है नहीं प्रभु बात साधारण नहीं गंभीर है इतनी ईर्षा साधारण नहीं मुझे तो शंका है यदि मैंने उन्हें समझाने का प्रयास भी किया तो उन्हें कहीं यह ना लगे कि मैं उनके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप कर रही हूं यह तो सर्वता अनुचित होगा मेरी चिंता का तो कोई समाधान ही मुझे नहीं दिखाई दे रहा है समाधान है स्पष्ट है और आपकी आंखों के सामने है जब एक पौधा नकारात्मकता के कारण सूखे तो उससे पहले ही उसे सकारात्मकता की शक्ति से सींच दीजिए और जब वो पौधा संपूर्ण परिवार का प्रतीक हो तो यह कार्य सभी को एक साथ मिलकर करना चाहिए ओ नम शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नम शिवाय ओम नम और जब परिवार एक होकर इन समस्याओं से जूझता है तो सभी भेद मिट जाते हैं नकारात्मकता मनमुटाव स्पर्धा ईर्ष य सभी भाव दूर हो जाते हैं और स्नेह विश्वास आपसी समझ का पौधा अपने आप लहराने लगता है किंतु यह होगा कैसे क्या करना होगा हमें बुद्धि के देवता हो तुम गणेश तुमसे भला क्या छिपा है तनिक अपनी बुद्धि का प्रयोग करो [संगीत] [संगीत] सोचो सोचा बहुत सोचा फिर मेरे मन में आया कि मुझे कैलाश में आपके महान रूप के दर्शन हो रहे थे तो क्या इस समस्या का समाधान उसी से जुड़ा हुआ है संभव है प्रभु पहेलिया मत बुझाए बताइए ना क्या सुझाव है आपका एक कथा और एक व्रत कैसा व्रत कैसी [संगीत] कथा किंतु स्वामी आप चिंता मत कीजिए प्रिय इस पौधे के समान सब कुशल हो जाएगा शीघ्र आपकी समस्या का समाधान स्वयं यहां चलकर [संगीत] [संगीत] आएगा शंख चण कोई भी आए युद्ध तो मैं करूंगा ही फिर वो चाहे महादेव ही क्यों ना महादेव ही क्यों ना महादेव इसका वत तो प्रभु कर चुके हैं फिर यह यहां कैसे और क्यों पहुंचा उसे रोकना [संगीत] होगा वही रुक जाओ शंख चण यहां शत्रुओं को प्रवेश की अनुमति [संगीत] नहीं गणेश जिन प्रश्नों के उत्तर के लिए तुम यहां आए हो उन सभी का उत्तर तुम्हें कैलाश में ही प्राप्त होगा और फिर वहां जो होना चाहिए उसे पूरे विधि विधान से तुम्हें ही करवाना होगा सुना नहीं शंखचूर यहां शत्रुओं को प्रवेश की अनुमति नहीं [संगीत] वही रुक जाओ शंखचूर अन्यथा परिणाम भयंकर [संगीत] होगा श जी यह क्या कर रहे हैं आप यह शंख चूड़ नहीं है प्रणाम नंदेश्वर जी मैं वो नहीं हूं जो आप समझ रहे हैं कपट कुटिलता अहंकार का रूप असुर शंख चूड़ नहीं हूं मैं गोलोक निवासी परम श्री कृष्ण भक्त सुदामा हूं मैं हां नंदी जी यह उचित कह रहे हैं यही इनका वास्तविक परिचय है प्रणाम सुदामा जी मैं बैर भाव से नहीं मैं कृतज्ञता के भाव से आया हूं प्रभु महादेव माता पार्वती स्वामी कार्तिके विघ्न हरता गणेश और संपूर्ण शिवसेना को धन्यवाद करने आया हूं जिन सभी की कृपा से मुझे असुर जन्म से मुक्ति मिली [संगीत] है प्रभु महादेव प्रभु [संगीत] प्रभु सत्य शिव प्रभु सत्य शिव प्रभु सत्य शव प्रणाम है प्रभु सत्य शिव प्रभु सत्य शिव कल्याण हो कल्याण पिता श्री के किसी भी भक्त को उनके इस नाम से उन्हें संबोधित करते हुए तो मैंने पहली बार सुना है ना गणेश अद्भुत है यह नाम सत्य शिव सत्य तो स्वयं श्री हरि नारायण है सुदामा प्रभु भक्त की दृष्टि से देखें तो आप दोनों में भेद ही कहां है जिनके दर्शन माया मोह के चक्र से दूर कर सभी झूठ से मुक्त कर दे जन्म मरण के इस चक्र से मुक्ति दिला दे वही सत्य है और भक्त सुदामा को तो आप दोनों से सत्यता का आशीर्वाद मिला है मेरे प्रथम जन्म में जब मैं एक निर्धन ब्राह्मण होने के बोझ से त्रस्त था तो मुझे उससे मुक्ति दिलाने वाले गोलोक बनाने वाले मेरे प्रभु ही तो थे प्रभु श्री [संगीत] सत्यनारायण श्राप के कारण मैंने असुर शंख चूड़ के रूप में जन्म लिया मुझे आसुरी जीवन से मुक्ति देकर पुनः गोलोक वासी किसने बनाया आप ही ने बनाया मेरे प्रभु सत्य शिव इसलिए हे प्रभु आप दोनों ही परम सत्य हैं जिसे सत्य का परिचय हो जाए उसका तो उधार ही हो जाता है इसलिए आज आपके सत्य रूप के दर्शन करने मैं कैलाश आ गया मेरे सत्य [संगीत] शव सब कुशल हो जाएगा शीघ्र आपकी समस्या का समाधान स्वयं यहां चलकर आएगा अर्थात इनके आगमन से ही कैलाश की दुविधा का समाधान भी जुड़ा हुआ है किंतु प्रभु एक दुविधा तो थी मेरे मन में मेरे असुर शंख चूड़ रूप में मैंने ऐसा क्या पुण्य किया कि मुझे आपके हाथों मुक्ति मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ किंतु अब अब इस प्रश्न का उत्तर मुझे मिल गया है उसका उत्तर है वो व्रत जो मैंने प्रथम जन्म में किया उसका उत्तर है वो कथा जो मैंने उसी जन्म में सुनी एक कथा और एक व्रत कौन सा व्रत कैसी कथा सुदामा जी वो व्रत वो कथा जो सभी कष्टों को मिटा दे सभी चिंताओं को दूर कर दे समस्या के बढ़ने से पहले उनको मूल से ही मिटा दे जिसके बाद अशुभ का अंत होकर शुभता का विस्तार होता [संगीत] है और जब पिवार एक होकर इन समस्याओं से जूझता है तो सभी भेद मिट जाते हैं नकारात्मकता मनमुटाव स्पर्धा ईर्षा ये सभी भाव दूर हो जाते हैं अर्थात प्रभु जिस समाधान का संकेत कर रहे थे वो यही है श्री सत्यनारायण व्रत कथा श्री सत्यनारायण त कथा नारायण गोविंदम कीर्ति भाजन गोवर्धन उधर तो प्रभु नारायण इस समाधान की बात कर रहे थे इस व्रत कथा की ऐसी महिमा है जो मात्र समस्या का समाधान ही नहीं करती वो शुभता प्रदान करती है जो व्रत करने वाले के साथ जन्म जन्मांतर तक उसके साथ रहती है और मुझे पूर्ण विश्वास है इसी महान व्रत के कारण ही मुझे एक जन्म में सत्यनारायण का आशीर्वाद प्राप्त हुआ और दूसरे जन्म में सत्य शिव का सत्यनारायण व्रत कथा समझ गया इस व्रत से ही कैलाश में पुनः शांति आ सकती है हमें यह व्रत करना चाहिए ऐसा अद्भुत महान व्रत है यह तो यह तो सभी को करना [संगीत] चाहिए पुत्र गणेश ने उचित ही कहा हम भी पूर्ण श्रद्धा से यह व्रत करेंगे और श्री सत्यनारायण व्रत पूजा का आयोजन कैलाश में ही होगा तलाश में ही होगा यह तो मेरा परम सौभाग्य [संगीत] [संगीत] होगा हे श्री हरि नारायण मेरा अनुरोध है कि आप स्वयं श्री सत्यनारायण व्रत की विधि हमें बताने की कृपा कीजिए ओम जय नारायण हरे स्वामी जय दिनानाथ हरे सनर मुनि सब ध्यावे सकल कल्याण करे ओम जय नारायण ह प्रणाम महादेव प्रणाम देवी पार्वती कैलाश में सत्यनारायण व्रत का निर्णय लेकर आपने तो मेरे इस व्रत की महिमा इसका महत्व अनेकों गुना बढ़ा दिया है हे श्री हरि नारायण सत्य तो यह है सत्यनारायण कथा से कैलाश में सभी अशुभ अशांति मिट जाएगी हे श्री सत्यनारायण आप हमें अपने इस व्रत की विधि बताने की कृपा कीजिए यह व्रत कब और कैसे करना चाहिए यह व्रत तो अत्यंत सरल है सभी परिवार जनों परिचितों और ऋषि मुनियों को आमंत्रित कर दिन भर व्रत में रहकर संध्या को भोग चढ़ाना होता है तब तो प्रसाद के लिए स्वादिष्ट व्यंजन भी पक मोदक तो आपको भी भाते होंगे ना प्रभु गणेश इस व्रत पूजा में मैं चूरमा केला घी दूध और नारियल का आहार करता हूं किंतु इससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण एक और भाग है इस व्रत का श्री सत्यनारायण व्रत [संगीत] कथा इन कथाओं में जीवन का भक्ति का ईश्वर का अर्थात सत्य का सार छिपा है जो बहुत सरलता से सीख बनकर इसका श्रवण करने वाले तक पहुंचता है यह वो सीख है जिनसे हम वर्तमान समस्याओं से भी मुक्ति पा सकते हैं और घर परिवार में एकता भी स्था कर सकते अर्थात यह तो मेरे परिवार के लिए मेरी मंगल कामना के सत्य होने का मार्ग है प्रभु हमें यह बताने की भी कृपा कीजिए कि आपका यह मंगलकारी व्रत कब किया जाता है सत्यनारायण व्रत और कथा तो कभी भी किए जा सकते हैं किंतु एकादशी पूर्णिमा और बृहस्पतिवार को करने से पुण्य मिलता है बहुत शुभ होता है तब तो यह समय भी उचित है कल ही बृहस्पतिवार है तो फिर शुभ कार्य में विलंब क्यों हमें कल ही सत्यनारायण व्रत और कथा का आयोजन करना चाहिए और इन कथाओं से हमें जीवन की बहुमूल्य शिक्षा प्राप्त करनी [संगीत] चाहिए कल स्वयं जाकर सभी को इस पूजा व्रत और कथा के लिए आमंत्रित करूंगा पुत्र गणेश ब्रह्मदेव को आमंत्रित करो और उनसे कहो कि मेरा अनुरोध है कि व इस पूजा में एक पुजारी के रूप में पधारे अद्भुत स्वयं ब्रह्मदेव पुजारी होंगे तो ज्ञान और सीख दोनों ही प्राप्त होंगे प्रभु मुझे भी आज रात्रि से ही सबके स्वागत और आसन की व्यवस्था में जुट जाना चाहिए मैं प्रसाद मना [संगीत] दूंगी इस आयोजन को भी स्पर्धा का रूप ना दे दे यह तो अनुचित ही नहीं होगा अभी तू जिस कारण से इस व्रत का आयोजन करवा रही हूं उसके विरुद्ध भी होगा दीदी मुझे भी तो कभी अवसर मिलना चाहिए ना यह मैं कर लूंगी नहीं वल्ली प्रसाद बनाना मेरा ही उचित होगा तुम कोई अन्य कार्य कर लो पर दीदी पुत्रियों यह पूजा कार्तिके के साथ तुम दोनों के हाथों से भी होगी उत्तम यही होगा कि तुम दोनों आपस में कार्य बांट लो पुत्री वल्ली पूजा सामग्री एकत्र करना भी एक महत्त्वपूर्ण कार्य है वो तुम कर लो अवश्य पुत्री देव सेना तुम प्रसाद बना लो उचित है माता सुदामा जी आपने ही हमें इस व्रत के प्रति सजक किया है इसलिए आपको इस पूजा में अवश्य रहना होगा जो आज्ञा माता मैं तो कल प्रभु सत्यनारायण व्रत और कथा को लेकर अत्यंत उत्साहित हूं मां की दृष्टि में दीदी ही उत्तम है तभी तो प्रसाद बनाने का दायित्व उन्हें दिया पूजा की तैयारी का मुख्य कार्य वल्ली को देकर मां ने उसे श्रेष्ठ होने का अवसर दिया है नकारात्मकता के विचार जो आपस में मनमुटाव उत्पन्न करते हैं कल के बाद कभी इन दोनों के बीच में ना आए मैं तो बस यही मना रही हूं तो प्रभु चले पूजा में सभी को आमंत्रित करने अवश्य मूषक जी [संगीत] [संगीत] सभी नवग्रहों को निमंत्रण है कैलाश में श्री सत्यनारायण व्रत कथा में भाग लेने का [संगीत] निमंत्रण देवगढ़ आप सभी का उपस्थित होना अनिवार्य [संगीत] है सप्त ऋषि गण आप सभी कैलाश के लिए प्रस्थान कीजिए प्रभु आपके सत्यनारायण स्वरूप की पूजा में आपको और मां को सर्वप्रथम आना होगा यह तो मेरा परम सौभाग्य होगा सौभाग्य तो हमारा होगा किंतु आपको शीघ्र पहुंचना है क्योंकि आपके बिना पूजा आरंभ नहीं हो सकती पता श्री के अनुरोध के अनुसार श्री सत्यनारायण कथा में पुजारी बनकर पूजा तो आपको ही करवानी है इसलिए शीघ्र चलिए ब्रह्मदेव कैलाश में आपकी प्रतीक्षा हो रही [संगीत] होगी [संगीत] रंगोली तो बन गई अब दीपक स्थापित कर देती [संगीत] हूं [संगीत] इस दीपक की जत ने मुझे क्या स्मरण करवा [संगीत] दिया मैं आप ही के पास आ रही थी मुझे लगता है कि हमारी अतिथियों की सूची में हमें उन्हें भी आमंत्रित करना चाहिए हमारी पुत्रियों [संगीत] को [संगीत] अवश्य प्रिय इस शुभ अवसर पर अपनी सभी पुत्रियों को आमंत्रित करना [संगीत] चाहिए पुत्र गणेश तो उनसे परिचित नहीं इसलिए मैं स्वयं ही उन्हें निमंत्रण [संगीत] दूंगी उतरी [संगीत] ज्योति [संगीत] [प्रशंसा] पुत्री अशोक सुंदरी प्रणाम पता श्री प्रणाम मां मैं तुम दोनों को कैलाश में होने वाले सत्यनारायण पूजा के लिए आमंत्रित करती हूं पुत्र तुम दोनों के आगमन से यह आयोजन हर्षोल्लास पूर्ण अत्यंत आनंददायक हो जाएगा इस महत्त्वपूर्ण आयोजन के अवसर पर मां मुझे निमंत्रण देना कैसे भूल गई परिवार के किसी भी समस्या का समाधान तभी संभव है जब सकारात्मक सोच के साथ संपूर्ण परिवार एकजुट होकर उसे दूर करने का प्रयत्न करें
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