[संगीत] [प्रशंसा] स्वामी यपा स्वामी [संगीत] अपा [संगीत] नमामि नमामि स्वामी अयप्पा हरि हरा स्वरूपा स्वामी अपा आराध्या आराध्या स्वामी [संगीत] अपा आपको देखते एक माता पिता का प्रेम मल आता है इसलिए हम बारबार आपकी दिव को भूल जाते यह भी भूल जाते हैं कि आपको आपको हमारा त्याग करके जाना होगा आपके अवतार का प्रयोजन समाप्त हो गया प्रभु लेकिन एक माता-पिता का स्नेह शेष है यदि मैं आपसे मिलना चाहूं मैं आपको वस्त्र और मिष्ठान भेट देना चाहूं तो मैं क्या करूं प्रभु मैं आपको वचन देता हूं मेरे मंदिर की स्थापना होने पर प्रत्येक मकर संक्रांति के दिन मैं मैं आपकी भेट स्वीकार करूंगा तो प्रभु मुझे ये बताने की कृपा करें कि आपका मंदिर कहां स्थापित होगा अब जहां यह बांड पृथ्वी का स्पर्श करेगा वहीं मेरे मंदिर की स्थापना होगी [संगीत] और व बान एक पर्वत पर जाकर गिरा और तुम्हें ज्ञात है पुत्र कि वही पर्वत माला है जहां भक्त शबरी ने प्रभु अयप्पा की प्रदक्षिणा की थी इसीलिए भक्त शबरी और मलय यानी पत से मिलकर इस मंदिर का नाम शबरी माला पड़ा और सबरी को दिए गए वचन के अनुसार जिन 18 प्रवृत्तियों पर नियंत्रण पाकर मनुष्य प्रभु तक पहुंच सकता है उनके प्रतीक स्वरूप 18 सीडिया भी प्रकट हुई श्री राम श्री राम श्रीराम [संगीत] [संगीत] स्वामी शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयपा स्वामी शरणम और फिर राजा राज शेखरा की आराधना और प्रार्थना देव शिल्पी विश्वकर्मा जी ने उन सीढियों के निकट प्रभु स्वामी अयप्पा के मंदिर का निर्माण [संगीत] की और फिर प्रभु परशुराम जी ने प्रभु स्वामी अयप्पा की मूर्ति को आकार [संगीत] दिया [संगीत] स्वामी [संगीत] [प्रशंसा] शरणम स्वामी शरणम भा स्वामी [संगीत] श [संगीत] मकर संक्रांति के उस पावन दिवस पर प्रभु अयप्पा एक दिव्य ज्योति के रूप में उस मंदिर में स्थित हो गए और उस दिन के बाद राजा राज शेखर को दिए गए वचन के अनुसार जो भी भक्त 41 दिन का व्रत कर पूर्ण श्रद्धा से सबरी माला की 18 सीढ़ियां चढ़कर प्रभु के पास पहुंचते हैं उन्हें प्रभु मकर संक्रांति या मकर वलक के दिन अपने दिव्य दर्शन प्रदान करते हैं हर वर्ष मंडल पूजा के एक माह और महा विश्वा संक्रांति के एक दिन और हर माह के प्रथम पांच दिन प्रभु के मंदिर के द्वार भक्तों के लिए खुले रहते हैं यदि यह मुझे पहले ज्ञात होता तो मैं पिता श्री के व्रत में सम्मिलित हो जाता व्रत की इच्छा हो तो कभी भी विलंब नहीं होता पुत्र जाओ तुम अभी भी जाकर अपने पिताश्री के साथ यह व्रत कर सकते हो धन्यवाद मां स्वामी अपा स्वामी पिता श्री मुझे एक दिन का विलंब हो गया है किंतु क्या मैं अभी भी प्रभु अयप्पा व्रत में आपका साथ दे सकता हूं क्या आप मेरे गुरु स्वामी बन मुझे दीक्षा देने की कृपा करेंगे पुत्र तुम्हारी निष्ठा और भक्ति से मैं भली भाति परिचित हूं और प्रथम पूज्य गणेश के बिना मैं अपना व्रत कैसे संपन्न कर सकता हूं तुम आज ही व्रत आरंभ करो और फिर 41 दिन बाद व्रत पूर्ण करने के बाद हम एक साथ सबरी मला जाकर प्रभु अयप्पा के दर्शन प्राप्त [संगीत] करेंगे [संगीत] [संगीत] [संगीत] स्वामी ये शरणम अयप्पा स्वामी ये शरणम [संगीत] अयप्पा [संगीत] स्वामी स्वा [संगीत] स्वामी शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयपा स्वामी शरणम [संगीत] अयप्पा पुत्र अब हमारी सबरी माला की यात्रा का समय हो चुका है इस वस्त्र से इरुमड़ अर्थात दो भागों में इस पोटली को विभाजित करो और इसमें प्रभु की पूजा के लिए विशेष सामग्री जैसे चंदन पुष्प आदि रखो और प्रस्थान के लिए प्रस्तुत हो [संगीत] जाओ रमया रम अनि रम अरु मलयान स्वा शरण पुत्र गणेश यह वही स्थान है जहां प्रभु आने महा असुरी महिषी का आतंक का अंत किया था स्थान का नाम है एर मुली स्वामी शरणम गणेश यह वह स्थान है जहां प्रभु अयपा ने महिषी के वध के बाद नृत्य किया था यह भक्त पेटा लाल की विधि कर रहे हैं यह वही नृत्य है जो अयपा ने महिषी का उतार करने के बाद यहां किया था स्वामी शरणम मयप्पा स्वामी शरणम म इस अजु नदी के पावन जल से लिए गए र को भक्त वहा चढ़ाते हैं जहां प्रभु अया दवारा फके जाने पर महिषी की मृद भूमि में सहित हुई [संगीत] थी स्वामी शरण स्वामी शरण ये हम कहां आ गए पिता श्री गणेश इस करी मलाई झरने का जल शुद्ध और मीठा होता इसे स्वयं प्रभु अयपा ने अपने बान से उत्पन्न किया था भक्त इस पावन जल से अपनी प्यास बुझाते [प्रशंसा] [संगीत] हैं स्वामी श रिया नाई वतम यह व स्थान गणेश जहां प्रभु अपा ने उस मदमस्त गज को अपनी सवारी बनाया था प्रभु आया की दिव्य लीला से जुड़ी यात्रा अत्यंत सुखद है स्वामी शरण स्वामी शरण प्रणाम महादेव प्रणाम प्रथम पूजनीय गणेश जी पुत्र गणेश पवित्रता की प्रतीक देवी गंगा के समान यह पावन पम नदी है प्रभु श्री राम ने अपने पिता महाराज दशरथ जी का तर्पण इन्ही के जन् में किया था पिता श्री तब तो हमें भी माता पंबा की पावन जलधारा में डुबकी लगाकर ही आगे बढ़ना [संगीत] चाहिए [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] पुत्र गणेश यह सबरी पीठ है यह उस स्थान का प्रतीक है जहां भक्त शबरी और अयपा की भेट हुई थी स्वामी शरणम अयपा स्वामी शरणम [संगीत] अयपा स्वामी शरणम [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] अयपा प्रणाम स्वामी अयपा प्रणाम स्वामी अयप्पा स्वामी शरणम अयपा स्वामी शरणम प्रभु मकर संक्रांति के पावन दिवस पर आप यहां स्थित हुए थे आज हम उसी मकर संक्रांति के पावन दिवस पर आपके दर्शन की कामना से आए हैं कृपा करके हमें दर्शन प्रदान [संगीत] कीजिए नमाम न प्रणाम पिता श्री नमाम नमाम [संगीत] स् स्वामी कल्याण स्वयं जगत पिता मेरे भक्त का रूप धारण कर यहां पधारे हैं अपने ही इस अंश को इतना सम्मान देकर आपने मुझे भाव विभोर कर दिया है सत्य है सर्वोच्च होने का प्रमाण शक्ति नहीं विनय है किंतु भ्राता गणेश के साथ आपने मेरा व्रत किया और सबरी माला की यात्रा भी संपन्न कीय कैसी लीला है पिताश्री अहंकार शक्ति का हो या वैभव का व्यक्ति को भक्ति से दूर कर भोग विलास की ओर ले जाता है कलयुग में स्वीकार का प्रभाव व्यक्ति के ऊपर अपने चर्म पर होगा और तब मेरे द्वारा किए गए इस व्रत को ध्यान में रख मानव पुनः भगवान की भक्ति में लीन हो [संगीत] सकेंगे हां भ्राता सादा सरल जीवन ही हमें ईश्वर के निकट लाता है पिता श्री ने यह व्रत जिस नियम सादगी भक्ति और अनुशासन से किया है व सभी पृथ्वी वासियों के लिए एक सीख होगी और आपके इस योग मुद्रा में विराजमान होने का भी लाभ आप भक्तों को प्राप्त होगा जो निर्भयता का मस्तिष्क के पूर्ण नियंत्रण में होने का प्रतीक है और आपके चरणों की मुद्रा व्यक्ति के भीतर अनुशासन का ज्ञान जागृत करता [संगीत] है जो नश्वर है व अंधकार है जो नश्वरता की और ले जाता है व मनुष्य का अंकारी विकार है जिस प्रकार आपने उस अंधकार रूपी महिषी का अंत किया उसी प्रकार यह 41 दिनों की दीक्षा आपके भक्तो को हानि पहुचाने वाले अंधकार का अंत करेगी और उन्हे सुख समृद्धि और स्वास्थ्य प्रदान करे आपकी कृपा के लिए आपको कोटि कोटि धन्यवाद पिता श्री स्वामी शरणम [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] अयप्पा [संगीत] [संगीत] अद्भुत है प्रभु की लीला व्रत और यात्रा तो संपन्न हो गए अब मुझे बहुत भूख लग रही है मां तो मुझे देखकर ही समझ जाती किंतु पिताश्री पता नहीं क्या सोचेंगे व्रत संपन्न हुआ नहीं और मुझे भूख लगने [संगीत] लगी मुझे तो यहां हर स्थान पर अपने प्रिय भोजन मोदक की ही आकृति दिखाई दे रही है पुत्र गणेश तुम्हारी माता और मैं पृथक नहीं एक ही है इसलिए वह जो समझती हैं वह मेरी दृष्टि से छिपा नहीं इसलिए चिंता मत करो कैलाश पहुंचते ही तुम्हें मोदक तैयार मिलेंगे अरे जल्दी जल्दी शीघ्रता कीजिए आप सभी 41 दिन के व्रत के बाद लौट रहा है मेरा पुत्र गणेश और आते ही मुझसे भोजन मांगेगा चलिए शीघ्रता [संगीत] कीजिए नंदी जी शीघ्रता कीजिए पिता श्री मुझे तो यहां सभी स्थानों पर मोदक ही दिखाई दे रहे हैं मैं समझ सकता हूं तुम्हारे उधर की स्थिति को कैलाश पहुंचते ही तुम्हें तुम्हारा प्रिय भोजन अवश्य मिलेगा किंतु आप यहां क्यों रुक गए पिताश्री [संगीत] पुत्र जिस प्रकार तुम्हारी भोग तुम्हें विचलित कर रही है वैसे ही यहां के निकट कोई दिव्य आत्मा किसी अन्य कारण व्यथा में है ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय पता नहीं ऐसा आभास हो रहा है कि अभी भी कुछ अपूर्ण है हे प्रभु मेरा मार्गदर्शन [संगीत] कीजिए प्रभु ओम नमः [संगीत] [संगीत] शिवाय तेरे रे तेरे नद तेरे [संगीत] नद प्रणाम ऋषिवर मेरा प्रणाम भी स्वीकार कीजिए ऋषिवर प्रणाम प्रभु प्रणाम गणेश जी प्रभु आपका सुखमय दर्शन पाकर मैं धन्य हो गया महान ऋषियों के दर्शन तो मेरे लिए भी अत्यंत सुखमय है किंतु आप किसी दुविधा में है हे जगत पिता आप तो सृष्टि के कण कण में व्याप्त है भला आप से क्या छिपा है किंतु आपने प्रश्न किया है तो मैं आपको अपनी व्यथा सुनाता हूं प्रभु बहुत समय से मुझे ऐसा आभास हो रहा है जैसे कि मेरे भीतर कुछ समाहित है जिसे बाहर लाना अनिवार्य है किंतु मुझे यह ज्ञात नहीं प्रभु कि मैं यह कैसे करूं मैं किसकी सहायता लू किसी भी नए सृजन से पहले व्यक्ति को अने को दुविधा का सामना कर करना पड़ता है किंतु समय के साथ उनका हल भी प्राप्त हो जाता है मुझे विश्वास है आप भी शीघ्र ही किसी महान रचना का सृजन अवश्य करेंगे और आपके सहायक और मार्गदर्शक बनने के लिए सृष्टि रे चैता ब्रह्मदेव से उपयुक्त भला और कौन होंगे धन्यवाद प्रभु मेरी एक ही पुकार पर आपका मुझे दर्शन देकर मेरा मार्ग दर्शन करने के लिए कोटि कोटि धन्य प्रभु प्रभु अब मुझे आज्ञा दीजिए प्रणाम प्रभु प्रणाम ऋषिवर प्रणाम प्रथम पूज्य गणेश [संगीत] जी पिता श्री आज प्रथम बार मैंने आपको किसी को पहले प्रणाम करते देखा यह तो मैं समझ गया अवश्य ये कोई साधारण ऋषि नहीं है ये महा ज्ञानी ऋषि और कोई नहीं स्वयं महर्षि वेदव्यास है जो प्रभु नारायण के अवतार हैं नारायण के अवतार हैय अर प्रभु विष्णु जो करते हैं जगत का पालन इसी जगत का करने मार्गदर्शन दिया था अवतार ऋषि वेदव्यास के रूप में जिनका महाकाव्य आने वाली पीढ़ी को अच्छाई और बुराई का भेद सिखा करर उनके जीवन का सफल आधार होगा अपनी शक्ति और वैभव के अहंकार से बाहर निकलकर यदि सभी मनुष्य धर्म के पथ का चुनाव करें तो उसमें उनकी और समाज की दोनों की भलाई निहित है
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