Thursday, 1 January 2026

महादेव अपने भक्त थिन्ना पर प्रसन्न हुए Malkhan Singh Uzair B Vighnaharta Ganesh Episode 649

अपने भक्त को जन्म जन्मांतर तक भूखा रखना चाहते हैं ना तो रखिए प्रभु तो मैं भी इसी प्रकार हट करूंगा यही बैठा [संगीत] रहूंगा प्रभु यदि आज आपने दर्शन नहीं दिया ना तो आपका यह भक्त अपनी [संगीत] प्रभु प्रभु महादेव मुझे पता था प्रभु कि आप मेरी पुकार अवश्य सुनेंगे आप आ गए प्रभु आप आ [संगीत] गए प्रभु भोजन [संगीत] प्रभु ने तो अपने भक्त का मन रखने के लिए साश भोग भी ग्रहण कर [संगीत] लिया मैं धन्य हो गया प्रभु मैं धन्य हो [संगीत] गया भक्त की भक्ति और भक्त एवं भगवान के मध्य वो दिव्य स्नेह वाले पल अद्भुत थे किंतु वो दिव्य पल अधिक अवधि तक नहीं [संगीत] रहे ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओ पापी इस मंदिर में साश भोजन लाने का दो साहस कैसे किया तुमने लीजिए ना प्रभु इतना बड़ा अपराध इसका परिणाम भुगतना होगा इसे बाहर ले जाकर दंडित करेंगे इसे अरे अरे छोड़ो मुझे अरे छोड़ो मुझे छोड़ो मुझे अरे देख नहीं कि मैं प्रभु को शैया को भोजन करा रहा हूं अरे रुक जा अरे भूखे है मेरे शि उन्होने अपकार भीखा ली अरे रुक जाओ अरे रुक जाओ रुक जाओ इतनी उदंड दूषित किया हमारे मंदिर को सामि भोजन ले गए वहां तो आप भुगतो उसका दंड रुक जाओ तुम लोग उसे छोड़ो और [संगीत] जाओ [संगीत] उसे क्षमा कर दीजिए प्रभु दोष उसका नहीं उसकी अज्ञानता का है देखिए ना पहले तो उसे आप में कोई आस्था ही नहीं थी और जब वह हुई तो कितना विचित्र व्यवहार कर रहा है प्रभु उस नासमझ को मैं मंदिर में प्रवेश करने ही नहीं [संगीत] दूंगा ये ये क्या हो रहा है [संगीत] यहां प्रभु के नेत्रों में इतना क्रोध भक्त है तो भगवान है मेरे किसी भी सच्चे भक्त को मेरे मंदिर में प्रवेश से कोई नहीं रोक सकता क्षमा करें प्रभु वर्षों से आपके इस मंदिर की सेवा और आपकी विधिवत पूजा करता आ रहा हूं उसे दर् दि जो आप पूजा करना भी नहीं जानता ना मंत्र ना पूजा पाठ कुछ भी नहीं जानता प्रभु फिर वह आपका भक्त कैसे हुआ एक मकड़ा मेरे ऊपर चलकर जाल गूध कर मुझे धूप से सुरक्षित रखकर मेरा भक्त बन सकता है एक हाथी अपनी सू में लाए जल से मेरा अभिषेक कर मेरा भक्त हो सकता है एक सर अपने पेट से रत्न उगल कर उन्हे मुझे समर्पित कर मेरा भक्त हो सकता है तो फिर यह मेरा भक्त क्यों नहीं हो सकता भक्ति करने की विधि सबकी भीन हो सकती है किंतु इसका यह अर्थ नहीं उसकी भक्ति में खट है प्रभु उन्होंने तो अपनी भक्ति का प्रमाण दिया था कठोर परीक्षा से होकर निकले थे वो उन्होंने अपना जीवन दाव पर लगा दिया था प्रभु तो अब ना की परीक्षा का भी समय आ गया [संगीत] है [संगीत] प्रभु ने यह वायु प्रवाह उत्पन्न क्यों [संगीत] [संगीत] किया ये थिन्ना अब क्या कर रहा [संगीत] [संगीत] है प्रभु मैं आ गया प्रभु मैं आ गया प्रभु [प्रशंसा] न्हे लगा प्रभु कि वो लोग मुझे हाथ करेंगे तो मैं नहीं लौटूंगा मुझे रोक नहीं सकेंगे वह प्रभु अब मैं आपको फिर भोजन कराऊंगा और पूरा भोजन आप ही करेंगे जब तक आप डकार नहीं [संगीत] लेते प्रभु आपको समझना कठिन है जब वो लोग मुझे रोक रहे थे तब आपने उनसे कहा क्यों नहीं कि आप मेरे भोजन का आनंद ले रहे हैं देखिए कितना हाथ किया उन्होंने मुझे किंतु कोई बात नहीं प्रभु अब मुझे दंड मिल गया है मेरे नास्तिक होने का लीजिए प्रभु ग्रहण [संगीत] कीजिए आप आ क्यों नहीं रहे प्रभु कहीं यहां के पुजारी जी ने मेरे विरु से कुछ कह तो नहीं द ना मंत्र ना क्रिया ना विधान किसी का ज्ञान नहीं है मुझे मुझे तो बस इतना ज्ञान है कि आप मेरे प्रभु है और मैं आपका भक्त हमारा संबंध तो ठीक उसी प्रकार है जैसे पुष्प का सुगंध से होता है पति का पत्नी से होता है अटूट संबंध जैसे मैं नीला के प्रति समर्पित हूं ठीक वैसा ही समर्पण मेरा आपके प्रति भी है या उससे भी अधिक पर तोत अब नीला को ना बताइएगा ईर्ष करेगी ना प्रभु मुझे पुजारी जी के समान पूजा पाठ का ज्ञान नहीं है परंतु सेवा का है और मुझे पता है कि भोजन कराने से बड़ी सेवा और कोई नहीं होती है यह लीजिए प्रभु ग्रहण कीजिए [संगीत] ना प्रभु भोजन दिखा था क्या इसलिए आपके नेत्रों में अश्रू आ गए रुकिए प्रभु रुकिए अभी हम अभी हम ठीक कर देते हैं प्रभु हां प्रभु अभी उचित है [संगीत] ना प्रभु यह क्या किंतु चिंता ना करें जैसे नीला मेरे अश्रू पचती है वैसे मैं भी आपके अश्रू पहुच [संगीत] दूंगा आपके नेत्र तो अछरू से भरे जा रहे हैं लगता है आपको कोई रोग हो गया है पर मैं यहां हूं ना प्रभु आपको चिंता की कोई बात नहीं मुझे नीला के पिता ने सिखाया है कि कैसे जड़ीबूटी से उपचार किया जाता है मैं शीघ्र ही लौटूंगा प्रभु और आप कुशल भी हो जाएंगे देखा प्रभु मैं यूं गया और यूं आ गया प्रभु प्रभु मैं आ गया मैं आ गया प्रभु आप चिंता ना करिए मैं अभी लेप लगा देता हूं प्रभु [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] आप उचित है ना प्रभु मेरे लेप से लगता है कोई लाभ नहीं हुआ थोड़ी और जड़ीबूटी चाहिए [संगीत] हशु औषधि है य प्रभु आप शीघ्र कुशल हो [संगीत] जाएंगे प्रभु के नेत्रों में रक्त के अश्रु रक्त ये तो उचित नहीं क मेरे से कोई भूल तो नहीं हो गई क्या कर क्या करू मैं प्रभु प्रभु आप चिंता ना करें यदि मैंने आपको दुख दिया है उसका निवारण भी मैं ही करूंगा मैं अपना नेत्र ही आपको दे दूंगा मैं अपना नेत्र ही आपको दे दूंगा मैं अपना नेत्र ही आपको दे दूंगा अप ने आपको दे दूंगा अप ने आपको दे [संगीत] दूंगा प्रले तुंग मालिका म म म म मना म मव तांडव अदभुत भक्ति है इस भक्त की तनिक भी संकोच किए बिना अपना नेत्र ही प्रभु को समर्पित कर दिया थिन्ना की सरल भक्ति प्रभु के प्रति आस्था की पराकाष्ठा है ओम नमः शिवाय अच्छा हुआ प्रभु जो कुछ भी हुआ मेरे सामने हुआ और आपको मेरे उत्तम नेत्र प्राप्त हुए जो अपने लक्ष्य से कभी नहीं चूकते प्रभु देखिए इसे प्रभु और बताइए उत्तम है [संगीत] ना लीजिए प्रभु अब रोग एक नेत्र में होगा तो दूसरे में तो पहुंचेगा ही ना तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है प्रभु सिन्ना है ना और मेरे पास दोदो नेत्र है प्रभु जो श्रेष्ठ भी है और कुशल भी प्रभु आप इसकी चिंता मत कीजिए कि मैं अपने दोनों नेत्र आपको देकर स्वयं कैसे देखूंगा आप है ना प्रभु मुझे मार्ग दिखाने के लिए किंतु आपको तो अनेकों भक्तों को देखना होता है उनका मार्गदर्शन करना होता है इसलिए आपके पास नेत्रों का होना और आपका देखना तो आवश्यक है लीजिए प्रभु यह तो मैंने भी नहीं सोचा कि मैंने अपने दोनों नेत्र बलक कर दिए तो मैं यह कहां से देखूंगा कि मैंने य दूसरा नेत्र कहां स्थित करना [संगीत] है कोई बात नहीं प्रभु उसका भी उपाय ढूंढ लिया है मैंने बस अंतिम बात आपके मन भर के दर्शन तो कर ल प्रभु अब कोई भूल नहीं होगी [संगीत] प्रभु प्रभु नीला तो कहती थी कि आपका तीसरा नेत्र भी है फिर प्रभु एक बार देख लीजिए कि वो कुशल तो है ना क्योंकि मेरे पास तो बस एक ही नेत्र बचा है [संगीत] प्रभु आपने ही तो कहा था प्रभु और जब तुम दृष्टि से परे जो भी है उसे देखने लगोगे तो तुम्हारा भी तीसरा नेत्र जागृत हो जाएगा तो जब आपके दर्शन प्राप्त हुए तो वो भी क्रियान्वित हो गया होगा ना प्रभु तो फिर चिंता किस बात की तीसरे नेत्र का उपाय भी मैं ढूंढ लूंगा प्रभु अभी के लिए तो इसी नेत्र का महत्व है प्रभु [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] ा प्रभु चय तो रात शरीर का करपूर गौरा शरीर काय ि कांडा धराय नम शिवाय शवा प्रभु प्रणाम माता माता आपके दर्शन पाकर मैं धन्य हो गई भक्ति से मैं बहुत प्रभावित हूं ना तुम्हारा सदा कल्याण हो कहो मुझसे क्या वरदान चाहते आपके दर्शन से बढ़कर और बड़ा वरदान क्या हो सकता है प्रभु अपने नेत्र देते समय मुझे बस यही चिंता सता रही थी कि मैं आपके दर्शन नहीं कर पाऊंगा किंतु आपके दर्शन पाकर मुझे वो सब कुछ मिल गया जिसकी मुझे इच्छा थी प्रभु जगत पिता हूं मैं सदैव अपनी संतानों को कुछ ना कुछ अवश्य देता किंतु यहां तो आरम से ही तुम मुझे कुछ ना कुछ देते आ रहे हो पुत्र मुझे भक्ति दी भोजन दिया और अपने दोनों नेत्र दे मुझे इसलिए मैं तुम्ह आशीष देता हूं कि आज के बाद तुम्हारी गिनती मेरे महानतम भक्तो में होगी और तुम्हे कनपा पुकारा जाएगा और तुम्ह कपारा [संगीत] जाएगा कन्नू अर्थात नेत्र और अब्बा अर्थात जगत पिता कनपा अर्थात वो जिसने जगत पिता को नेत्र दिए कनपा जब तुम पूर्व जन्म में अर्जुन के रूप में थे तो मैंने तुम्हें सबसे बड़ा वरदान दिया था मोक्ष तो अब उस वरदान को सार्थक करने का समय आ गया [संगीत] है किंतु प्रभु अपने थिन्ना के बिना ये लीला कैसे जीवित रहेगी प्रभु पुत्री नीला तुम कनपा की अर्धांगिनी हो उसके पुण्यं के फलों पर तुम्हारा भी अधिकार है इसलिए यदि उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी तो तुम भी मोक्ष की भागी बनोगी क्योंकि जहां कनपा रहेगा वहीं तो उसकी नीला [संगीत] रहेगी [संगीत] अद्भुत सर्वता अद्भुत [संगीत] भक्त कनपा की जय भक्त कनपा की जय भक्त कनपा की जय भक्त कनपा की जय भक्त कनपा की जय कनपा की जय भक्त कनपा की जय एक ऐसी अनुपम कथा है जिससे हमें एक भक्त और भगवान के मध्य के अद्भुत अनूठे संबंध का महत्व समझ आता है जिस प्रकार भक्त और भगवान का संबंध अटूट होता है उसी प्रकार पति और पत्नी का संबंध भी अटूट होता है नीला के कारण थिन्ना के भीतर भक्ति का भाव आया और थिन्ना की भक्ति का फल नीला को भी प्राप्त हुआ इस कथा से हमें विवाह से जुड़ा तीस संकल्प ज्ञात होता है जिसमें पति और पत्नी एक दूसरे को बल सहयोग और प्रेम देकर असहमति होने पर भी एक दूसरे के विचारों को समझकर उनके निर्णय में भागीदार बनते हैं और जीवन के प्रत्येक कर्म में सहभागिता का धर्म निभाते हुए जीवन के परम लक्ष्य तक पहुंच जाते [संगीत] हैं मां ने कहा था शिव कथा सुनने पर ही पूजा संपन्न होगी किंतु यहां तो कोई नहीं है मैं किससे कहूं शिव कथा सुनाने [संगीत] को कहीं मेरी पूजा अधूरी रहकर किसी अनिष्ट का कारण ना बन जाए कुछ भी क्यों ना हो जाए जब तक आप मेरे पद प्रदर्शक नहीं बनेंगे प्रभु मैं भी यहां से नहीं उठूंगी और ना ही अपने व्रत को संपन्न करूंगी मैं यही स्थित रहूंगी जब तक कोई आकर मुझे शिव कथा नहीं सुनाता और उसके साथ ही पूर्ण होगा मेरा प्रथम दिन का [संगीत] व्रत [संगीत] ओम नमः [संगीत] शिवाय अनुज गणेश हम तो कथा सुनने में इतने लीन हो गए कि प्रभु के लिए प्रसाद लाना ही भूल गए चिंता मत कीजिए भ्राता श्री काल हस्ती मंदिर की यही तो विशेषता है यहां भक्त जो भी चढ़ाते हैं व प्रसाद बन जाता है यहां वस्तु नहीं श्रद्धा महत्त्वपूर्ण है जैसे प्रभु के भक्तों मकड़ा गज सर्प और कनपा में थी अतः भ्राता इन बेल पत्रों से अपनी पूजा संपन्न कर प्रभु महादेव को प्रसन्न कीजिए और उनसे वह शक्ति प्राप्त कीजिए जिससे आप पाशुपतास्त्र प्राप्त कर [संगीत] [प्रशंसा] सके करपूर गौरम करुणा अवतारम संसार सारम भुजगेंद्र हारम सदा वसंतम हृदयार विंदे भव भवाम सहित [संगीत] नमामि सम्राट सुरा पद्मन तैयार रहिए आप शीघ्र ही शुभ समाचार लेकर आऊंगा मैं जब बालक कार्तिकेय श्री काल हस्ती से प्रथम तत्व की ऊर्जा लेने से पहले परीक्षा में असफल हो जाएगा मायावी अज रूप में शत्रु का आक्रमण है सावधान भक्ति की पराकाष्ठा पर पहुंचकर जब कोई भक्त भगवान को अपना सर्वस्व अर्पित कर देता है तो भगवान भी ऐसे भक्त को सर्वोत्तम फल प्रदान कर जीवन के अंतिम लक्ष्य तक पहुंचाते हैं

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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