Thursday, 1 January 2026

महादेव और जलंधर का द्वन्द युद्ध Akanksha Puri Malkhan Singh Vighnaharta Ganesh Episode

हता श्री गणेशा श्री गणेशा श्री लगता है शक्ति प्रदर्शन करने का समय आही गया [संगीत] [प्रशंसा] अब कली ओ कली कैसे समझाऊ तुमको विनाश संभव नहीं मेरा स्वीकार करो मुझे भगवान हूं तुम्हारा कदा भी नहीं मूर्ख तेरा अस्तित्व तो महादेव के कारण है तू तो एक धूर्त दंभी असुर मात्र है तेरा पाप तुझे विनाश के गर्भ में अवश्य ढके लेगा तेरा अन तो होक रहेगा और मैं ही करूंगी तेरा अंत पिता श्री के अतिरिक्त कोई अन्य शक्ति जलंधर का वध नहीं कर सकती हां पिताश्री यही सत्य है एक मात्र आपके ही द्वारा जलंधर का अंत संभव [संगीत] है काल देवी एक और निरर्थक प्रयास करके देख लो [संगीत] जीवा ज [संगीत] उचित है बल श्रेष्ठ उचित पाट सिखाइए [संगीत] इसे समीप है अं मेरा नहीं तेरा निश्चित है मूर्ख तू आगे बढ़ा अवश्य है कि तू विजय नहीं हो पाएगा संस् [संगीत] [संगीत] न [संगीत] नम अब अं हुआ [संगीत] तेरा अब उचित दंड प्राप्त हुआ है इसे [संगीत] अवश [संगीत] उठूंगा कहा था ना मैंने मैं सर्वश्रेष्ठ चला अंदर हूं अनेको असुरों का रक्त बहा चुकी हूं मैं कोई भी दुष्ट मेरे प्रहार से सुरक्षित कभी नहीं रहा फिर इसका अंत क्यों नहीं हो रहा है देखो व्यर्थ हो गना तुम्हारे समस्त प्रयास पुन कुशल हूं मैं किंतु अब तुम्ह कुशल नहीं रहने दूंगा मैं मेरी क्रोधाग्नि से उत्पन्न हुआ है यह तो मेरा क्रोध ही से दंडित करेगा अब मेरे और जलंदर के माध्य कोई नहीं आएगा हा पिताश्री [संगीत] गौरम करुणा वतार संसार सारम भुज गद हारम कला वसंतम स्यार देवम भवानी सतम नमाम पंयम यमल दंजय सुलिंग य [प्रशंसा] या जय काली जय काली जय काली जय काली जय काली जय कालीली जय काली जय काली जय काली जय [संगीत] काली आ वही होने जा रहा है जिसकी आशंका सता रही थी मुझे महादेव का उनकी क्रोधाग्नि से उत्पन्न जालंधर के साथ [प्रशंसा] महायुद्ध अब तेरा अंत होगा मेरा अंत करेगा दु साहसी हां [प्रशंसा] तेरा या त भीषण है कितना रक्त बह रहा है इस खाव से मुझे तो कुछ नहीं हुआ मैं तो बच गया किंतु तुम्हारी रक्षा कौन करेगा बस बहुत उत्पाद बचा लिया बहुत क्रीड़ा करनी मेरे साथ कभी ऊपर कभी नीचे अब तुम्हारा अंत समीप है [संगीत] यह कैसा स्पोट था [प्रशंसा] पल पारट कौन आ रहा है यहां आवश्य श भी है प्रणाम महादेव प्रणाम देवी ली आप इसको इसका दंड दे चुकी है अब मेरे हाथों इसका अंत शेष है इसलिए आपका यहां से प्रस्थान करना ही उचित है उचित है [संगीत] महादेव ब [संगीत] आओ शिव आओ बात प्रतीक्षा कराई तुमने यह उचित है यह सर्वथा उचित है स्वयं शिव मेरे समक्ष अब सारी कड़ाए संपन्न हुई यह है वास्तविक युद्ध जिसके पश्चात स संसार सभी देवता गदर यक्ष किन्नर मेरे सामने भगवान सर्वश्रेष्ठ जलंदर के समक्ष नतमस्तक होंगे आओ शे मुझे लकारा था करो करो मुझसे यद सयद मैं कैलाश के निकट भी नहीं जाऊंगा और वहा देव से कभी युद्ध नहीं करूंगा जलंधर दम भी मूर्ख तुमने वचन दिया था मुझे महादेव के समक्ष कभी नहीं जाओगे और वही कर बैठे तुम नहीं भल श्रेष्ठ य उचित नहीं है शिव के समक्ष नहीं जाना था [संगीत] आपको जलंदर मैं तुम्हें अवसर पर अवसर देता चला गया किंतु तुम अपराध पर अपराध ही करते रहे क्या तुम्ह इसका परिणाम परिणाम इसका एक ही परिणाम है मेरी जय मेरी विजय मेरी जयरी विजय कोई नहीं टिक सका मेरे समक्ष ना तुम्हारा नारायण ना तुम्हारी व काली इसलिए विवश होकर तुम्ह मेरे समक्ष आना पड़ा मझ से याद करने इसका अहंकार समाप्त नहीं हुआ शिव पूर नहीं आते तो मैं नारायण देवी काली को इतना अपमानित नहीं करता चलो कोई बात नहीं तु इतना तो ज्ञात हो गया कि मैं कौन हूं नवीन भगवान जालंधर की असीम क्षमताओं का आभास तो हो गया है अब टन तो तुम्हें अवश्य भुगतना होगा तुम्हारे दु सास का मुझे प्रतीक्षा करवाने का मुझे चुनौती देने का भगवान सर्वश्रेष्ठ जलंदर को परिणाम तो भुगतना ही होगा [संगीत] किंतु यदि तुम मेरे समक्ष नतमस्तक हो जाओ मुझसे क्षमा मांग लो तो तुम्हारा दंड अवश्य कम हो जाएगा भगवान सर्वश्रेष्ट चलर हूं मैं दयालु भी हूं अब जलंधर का दुस्साहस उसकी इस उद्दंडता के बाद उसे दंडित होने से कोई नहीं रोक सकता अंत कीजिए शिव का बल श्रे तभी मेरी चिंता का भी अंत होगा किस प्रतीक्षा में हो शिव आओ मेरे शरणागत बन जाओ कुबुद्धि का प्रभाव है अहंकार और अहंकार का परिणाम है विनाश ये शीघ्र ज्ञात होगा जलंदर को अंतिम अवसर देता हूं तुम्हें मेरी शरण में आ जाओ अन्यथा तुम्हारी अपमान जनक पराजय से कोई नहीं बचा सकेगा तुम्हें जिसके पश्चात समस्त संसार से तुम्हारा नाम मिट जाएगा रा नाम मिट जाएगा रा नाम मिट जाएगा और भगवान सर्वश्रेष्ठ जलंदर की मानता सित होगी और सर्वत्र गूंजेगा एक ही मंत्र ओम चलय नमः ओम जालंधरा नमः मूर्ख जलंदर भगवान को अपनी महानता प्रमाणित करने की कोई आवश्यकता नहीं होती पराजित होने वाला अपनी पराज स्वीकार करने के स्थान पर उस पराजय को अपनी विजय मानने का दिखावा करता है नारायण ने तुम्हें पराजित किया देवी काली ने बारबार तुम्हें प्रताड़ित किया किंतु अहंकार वश तुम अपने आप को विजय घोषित करते रहे यह सत्य नहीं है तुम्हारे अहंकार से उत्पन्न तुम्हारा भ्रम है यह तुम अपनी महानता नहीं जलंदर तुम मेरे हाथों मृत्यु पाकर एक मात्र यही प्रमाणित कर सकते हो कि जिसका जन्म होता है उसका अंत अवश्य होता है अच्छा तो जलंदर का अंत करोगे तुम लो संभालो मेरा वाज [संगीत] [संगीत] [संगीत] श शक्तिशाली तो है यह शिव उचित थ गुरु शुक्राचार्य की च इसका क्रोध प्रकाश बनकर समस्त आकाश बछा रहा है प्रिय भल श्रेष सावधान [संगीत] रहिएगा [संगीत] [संगीत] अब जालंधर के अंत का समय आ गया है हां गणेश पिता श्री का परशु तो कोई नहीं रोक सकता फिर जलंदर यह करने में कैसे सक्षम हुआ कैसे संभव है यह अभी देखते हैं शिव अब इस युद्ध में कौन किसको पाठ सिखाता है कौन किसका अंत निश्चित करता है अभी के अभी सावधान शिव अब भगवान सर्वश्रेष्ठ जलंदर के वार का सामना [संगीत] करो लो शिव मैंने तुम्हारा परशु तुम्हें लौटा दिया अब वही तुम्हारा अंत करेगा मूर्ख जलंदर अपने अहंकार में अपना विवेक खो बैठा है अब इसका सार आवश्यक है बड़ी सरलता से परशु को नियंत्रित कर लिया इसने अब अब क्या करने जा रहा है ये दया करना मेरा कर्तव्य है तो दुष्ट को दंड देना भी मेरा ही दायित्व है अब ये क्या कर रहा है पूर्व में तो एक ही पशु था अभ अनेक कैसे हो गए य य असंग के परशु आ रहे हैं मेरी ओर इन्ह तो रोकने का कोई उपाय भी नहीं है मेरे पास अब क्या करूं मैं [संगीत] [संगीत] [संगीत] नहीं महादेव के समक्ष आए उनके हाथों से तुम्हारा अंत होगा जालंधर जैसे असुर का यही उचित दंड है अंत हुआ इस ष जलंधर का संकट टल चुका है सृष्टि अब सुरक्षित हुई महादव ने अपने एक ही प्रहार से जलंधर का अंत कर दिया पिताश्री का क्रोध जागृत करने के बाद तो जालंधर का अंत निश्चित ही था जो हुआ उचित ही हुआ जलंधर पिता श्री के पशु प्रहार से आहत हुआ दंब सदा धूल धूसर ही होता है यही उसकी नियति है स्वामी देखिए महादेव ने कैसे अंत कर दिया जालंधर का और किसी अन्य का कोई अहित भी नहीं हुआ त करूंगा अवश्य करूंगा करूंगा तुम शिव अप आप ऐसा कदा भी नहीं करेंगे शिव से युद्ध नहीं करेंगे आप आप कैलाश जाकर महादेव के समक्ष नहीं जा सकते मुझे भ है आपको कैलाश पर नहीं जाना चाहिए था स्वामी आपने क्या कर दिया बल सर गुरु को दिया हुआ वचन क्यों भंग कर दिया बल श्रेष्ठ उस शिव ने क्या कर दिया मेरे प्रिय बल श्रेष्ठ को पाप कितना भी बढ़ जाए पापी कितना भी शक्तिशाली हो जाए उसका अंत अवश्य होता है जलंदर का यह भयंकर अंत भी इसी का प्रमाण है श जलंदर का स्वर मेरे भाई श्रेष्ठ उनका स्वर सुना मैंने वो वो जीवित है यह कैसे संभव है पिता श्री जलंधर का वध कर सकते हैं तो उनके प्रहार के बाद भी ये जीवित कैसे है सुनो शिव मैं क्या विचार कर रहा था ना मुझे लगा मैंने सभी परशु हटा दिए किंतु एक विशेष एक रह गया चलो कोई बात नहीं [संगीत] क्या [संगीत] तो मैं क्या कह रहा था देवताओं को तो उनके दायित्व सौप दिए मैंने किंतु तुम्ह दायित्व सौंपना अभिशेष है तुम्हारे सभी नियमों को वैसे भी उलट रहा हूं मैं इसलिए मेरे विचार से तुम्हें पाताल लोक जाना चाहिए बात निवास कर लिया कैलाश में पताल जाओ उसकी तेरे करो य बोलता क्यों नहीं है जते को मुस्कुराता रहता है यह आदेश है तुम्हारे भगवान सर्वश्रेष्ठ जलंदर का सर्वश्रेष्ठ चलर सर्वश्रेष्ठ जलंदर कालो जैसी आज्ञा [संगीत] प्रभु अरे बोलो उचित है प्रभु जल अंदर विनाश काले विपरीत बुद्धि विपरीत बुद्धि विपरीत बुद्धि री तुम्हें बहुत अवसर दे चुका हूं मैं मुझे भगवान स्वीकार करने के लिए किंतु अब बहुत हुआ अब तुम मेरे क्रोध का सामना करोगे [संगीत] [संगीत] है अब महादेव अवश्य इस पापी का अंत करें महादेव का क्रोध चरम पर है इसका प्रभाव सृष्टि के अन्य प्राणियों पर भी हो सकता [संगीत] है [संगीत] ईश्वर अनंत है उनकी सत्ता और अस्तित्व को समझना सहज नहीं

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...