[संगीत] महाभारत महाराज की जय हो क्या समाचार लाए हो क्या कहा युधिष्ठिर ने महाराज उन्होंने कहा कि धर्म से उत्तम कोई संपत्ति नहीं और धर्म के पालन में ही संपूर्ण आनंद है महाराज इस यात्रा में मैंने भी सोच विचार किया और उस सोच का परिणाम क्या निकला संजय मैंने यह परिणाम निकाला महाराज कि देर से बोला जाने वाला सत्य असत्य से अधिक हानिकारक होता है तो फिर सत्य बोलो संजय मुझे सत्य सुनना आता है क्या है तुम्हारा सत्य राजन आपका कर्म आपके धर्म के मार्ग को काट रहा है आपने अपनी आत्मा को पुत्र मोह के भाले से घायल कर दिया है आपकी आत्मा लह लुहान है स्वामी उसकी सेवा कीजिए तुम भी मुझी पर आरोप लगाने लगे नहीं महाराज मैं आप पर आरोप नहीं लगा रहा हूं यह तो केवल एक विवरण है यदि इस जन्म में मुझसे नहीं सुनेंगे तो अगले जन्म में आपको इतिहास से यही वक्तव्य बार-बार सुनना पड़ेगा महाराज महाराज हस्तिनापुर के भविष्य को दाव पर मत लगाइए आप औरों का कहा मान लेते हैं और शुभ चत की बात नहीं मानते पांडव को इंद्र दे दीजिए इसी में युवराज की भलाई भी है क्या युधिष्ठिर ने युद्ध की धमकी दी है नहीं नहीं महाराज धमकी देना तो उनका स्वभाव नहीं है उन्होंने तो बस यह कहा कि संजय जेष्ठ पिता श से कहना कि उनके अनुज पुत्र शांति और युद्ध दोनों ही के लिए तैयार है यदि आप युद्ध का आदेश देंगे तो युद्ध होगा और यदि आप शांति चाहेंगे तो शांति रहेगी [संगीत] तुम्हें इस लंबी यात्रा ने थका दिया होगा संजय जाओ विश्राम करो जोग महाराज सेवक प्रणाम महाराज किसी को भेजो के विदुर को बुला लाए जो आज्ञा महाराज [संगीत] महा भारत महा भारत महाभारत [संगीत] महाभारत महाभारत [संगीत]
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