Tuesday, 6 January 2026

सिंहमुख ने सुरापदमन को कौनसी सुचना दी Basant Bhatt Uzair Basar Vighnaharta Ganesh Episode 686

मुझे स्वयं के साम्राज्य का विस्तार करना है और उसके लिए मैं किसी की भी आहुति दे सकती हूं चाहे वो मेरे पुत्र हो या पुत्र के पुत्र तो यह है मां की वास्तविकता जिनके द्वारा गजमुख का अंत हुआ जिनके समक्ष आज तक कोई टिक ना सका उन्हीं स्वामी कार्तिकेय पर विजय प्राप्त करने का स्वप्न देख रही हो तुम हां देख रही हूं स्वप्न जो पूर्ण होगा क्योंकि स्वयं आपने महर्षि कश्यप ने जिनके आशीर्वाद का मान तो त्रिदेव भी रखते हैं उन्होंने विजय का आशीर्वाद दिया है मुझे तु मेरी विजय तो निश्चित है मेरे इस महान विजय की साक्षी बनना चाहते हैं तो यही रहिए मैं आपको पूरे सम्मान के साथ यहां रखूंगी अन्यथा द्वार खुला है मैंने जिस विजय के लिए तुम्हें विजय भवा का आशीर्वाद दिया है उसमें तुम्हें विजय अवश्य प्राप्त हो यही मेरी कामना है अद्भुत देव शिल्पी विश्वकर्मा जी आपने अपार भक्ति और श्रद्धा से इस दुर्ग का निर्माण किया वह भविष्य में सुब्रम स्वामी कार्तिकेय की विजय का प्रतीक बनेगा धन्यवाद प्रथम पूज्य गणेश जी किंतु अभी इसके निर्माण में अंतिम कार्य शेष [संगीत] है [संगीत] अद्भुत है उसकी निष्ठा उसकी भक्ति जिससे उसने मेरे लिए उस आश्रय का निर्माण किया था प्रभु आपकी विजय के लिए मेरे यह विजय व्रत का प्रथम दिन सफलता पूर्वक संपन्न हो गया मेरा यह व्रत इसी प्रकार श्रद्धा और संयम के साथ चलता रहे जब तक [संगीत] तो तुम्ह धन्यवाद भी नहीं कह पाया यु के बाद मैं तुम्ह अवश्य उचित सम्मान देकर तुम्हारे प्रति अपना आभार प्रकट करूंगा स्वामी मैं आपकी अर्धांगिनी होने के योग्य हूं या नहीं यह तो मुझे ज्ञात नहीं किंतु आपके दर्शन करने के सौभाग्य के योग्य तो [संगीत] हूं [संगीत] आपके विचार से ही मेरे हृदय का स्पंदन बढ़ जाता है आपसे दूर होना असनी है मेरे लिए मुझे विचलित कर रहा है किंतु आप कहां है कैसे है बस यह जान लो तो मैं निश्चिंत हो जाऊंगी मुझे अपने दर्शन करने की अनुमति दीजिए प्रभु [संगीत] [संगीत] स्वामी आपकी दर्शन पाकर मैं धन्य हो [संगीत] [संगीत] गई सुंदर है ना भ्राता हा अत्यंत सुंदर है वो वो वो कौन भ्राता [संगीत] वो मैं तो आपके लिए बनाए विश्वकर्मा जी के दुर्ग की बात कर रहा था उसकी भव्यता के बारे में कह रहा था हां तो मैं भी उसी के विषय में बात कर रहा था गणेश तुम्हें क्या लगा देखो जितना भव्य है उतना ही सुंदर है वो दुर्ग वीर बाऊ जी प्रभु देवराज क्या विचार है आपका है ना अत्यंत सुंदर वो दुर्ग हा हा देव सेनापति आप पाप उचित कह रहे अपना मनोभाव मुझसे छिपा रहे हैं भ्राता किंतु मुझे ज्ञात है आप उसकी भव्यता की नहीं भाभी मां की बात कर रहे [संगीत] थे देव शिल्पी विश्वकर्मा जी आपके द्वारा इस दुर्ग का निर्माण सत्य में अत्यंत सरानी है हमारी र्ण सेना को इस दुर्ग में आश्रय अवश्य मिल जाएगा किंतु हमें शत्रु के शस्त्र अस्त्र उनकी दुर्ग रचना और उनकी शक्ति का ज्ञान होना भी अत्यंत आवश्यक है प्रभु मैं आपके सामने महेंद्रपुरी की और उनके राज भवन की संरचना प्रस्तुत कर सकता हूं किंतु उनकी सेना का व्यूह अस्त्र शस्त्र सब सुरा सई द्वारा निर्मित भी है और नियंत्रित भी यहां तक कि उस मायाव की शक्ति और उसके अंतर के भेद तो उसके पुत्रों को भी ज्ञात नहीं अब समय है उन्ही पुत्रों के प्रयोग का मुझे स्वयं के साम्राज्य का विस्तार करना है और उसके लिए मैं किसी की भी आहुति दे सकती हूं चाहे वो मेरे पुत्र हो या पुत्र के पुत्र मां के लिए पुत्र नहीं मात्र उनकी विजय की सामग्री है हम उनकी महत्वाकांक्षा के साधन है बस माहा की वास्तविक मंशा का जेस्ट के सामने उजागर होना अति आवश्यक [संगीत] है बहन विभूति ये पिताजी ने क्या कर दिया माता सुरा साई को ज्ञात हुआ तो तो वो मुझे भसम ही कर देगी आप ही नहीं बहन पद्म कोमल हमें भी उनकी क्रोधाग्नि में जलना होगा क्योंकि व यह तनिक भी विचार नहीं करेंगी कि आप उनके जेष्ठ पुत्र की पत्नी है और हम छोटे पुत्र की वह तो हमें केवल द्रोही देवताओं की पुत्रियां ही मानेगी असूर सम्राट सब कुछ सहन कर सकता है किंतु विश्वासघात नहीं अब मां की कोब से तुम्हें बचा सकू या नहीं तुम्हारे पिता को दंड अवश्य दूंगा मैं नहीं भैया यह समय दंड देने का नहीं अीत सत्य जानने का है वह सत्य आपको चकित भी करेगा और दुखी भी क्योंकि वह सत्य उनके बारे में है क्या है व सत्य किसके बारे में है सि मुखन बताओ क्या बोलना चाहते हो तुम बोलो सी मुखन शीघ्र कहो क्या कहना चाहते हो भ्राता आप तो वीर पराक्रमी सिंह मुख है ना तो जो सत्य है वह कह दीजिए दे दीजिए महत्वपूर्ण सूचना जेष्ठ को सूचना ये है कि सूचना यह है कि शत्रु सेना द्वार पर है और देवी शिल्पी विश्वकर्मा भी शत्रु सेना के साथ है और वह उनके लिए दुर्ग का निर्माण भी कर रहे हैं हमें हमें आक्रमण करना [संगीत] चाहिए बस कह लिया जो कहना था तुम्हे और और हां यह भी कि मेरे ससुर यमराज भी उनके साथ [संगीत] है कोई और सूचना है जो तुम मुझे देना चाहते हो [संगीत] [प्रशंसा] विश्वास घात तो इन देवताओं का स्वभाव है इनकी पुत्रियों को हमने अपनी पुत्र वधु बनाया उन्हें सुख ऐश्वर्य प्रदान किया और वह देव शिल्पी विश्वकर्मा हमारे शत्रुओं की सुख शांति की व्यवस्था कर रहे हैं और तुम्हारे पिता यमराज क्या कर रहे हैं अपने यमदू तों को यहां भेजने की तैयारी कर हमारे साथ विश्वास घात करने वाले हैं है ना तुम्हारे पितांबर से जितना कष्ट हमें हुआ है इस कष्ट का प्रतिशोध तो कष्ट ही होगा और अब मैं वो कष्ट तुम दोनों को दूंगी [संगीत] किंतु उससे पहले हमारे शत्रु कार्तिके को पराजित करने के लिए रणनीति बनानी है हमें उसे नष्ट करना है खड़े मत रहो असुर राजाओं की सभा बुलाओ स्मरण रहे उसमें मेरे सभी पुत्र और पुत्र दोनों होने चाहिए उन्हीं से सबसे अधिक आशा है मुझे उनमें से कोई भी नहीं छूटना चाहिए सुनिश्चित करो सभी उपस्थित होने चाहिए उस सवा में उचित है मा मैं अपने पुत्र सुम को पहले ही खो चुकी हूं हम किसी और को नहीं खोना चाहती किंतु इनका वश रहे तो ये सभी का बलिदान दे [संगीत] देगी किंतु इतना सरल सत्य भ्राता को कैसे दिखाई नहीं दे [संगीत] रहा [संगीत] मैं और प्रभु गणेश जी दोनों ही महेंद्रपुरी के भीतर जाकर लौटे हैं किंतु वहां तो हमें कोई विशेष दुर्गा का रचना दिखाई नहीं दी जो केवल माया को ही अपना अस्त्र और कवच दोनों मानते हैं वह ऐसे किसी दुर्ग का निर्माण नहीं करते किंतु उनका यही मिथ्या आत्म विश्वास ही उनका सबसे बड़ा शत्रु बनेगा उचित कहा तुमने अनुज गणेश उन्हे यह भी विश्वास अवश्य होगा कि वह अपनी माया का प्रयोग करके कभी भी और कहीं भी सफलता प्राप्त कर सकते हैं इसीलिए वह अपनी नगरी के भीतर तो नहीं रहेंगे अभी तो वह बाहर निकलकर हम पर आक्रमण अवश्य करेंगे इस समय भी वह अवश्य किसी योद्धा को यहां भेजने का ही विचार कर रहे होंगे असुर सम्राट सुर पद की असुर सम्राट सुरमन की की रचना करनी चाहिए प्रक्ष आक्रमण करना [संगीत] चाहि सभी स्वयं का बलिदान देकर भी युद्ध करने को तैयार है और यही तो मां भी चाहती है मुझे समय रहते जेस्ट को इसके प्रति सतर्क करना होगा कहीं हम भूल तो नहीं कर रहे हैं रा तयार अहंकारी है सुरा पद्मन किंतु महेंद्रपुरी के राज सिंहासन पर स्थित होकर भी अपनी माता सुरा सई के वश में है और उसका सिख पराक्रमी और सिंह के समान शक्तिशाली भी है और युद्ध कौशल में पारंगत भी [संगीत] है [संगीत] [प्रशंसा] प्रम अधर्म और पापियों के अनुसार उनका अह ही उनका सबसे बड़ा आभूषण होता है और अहंकार में डूबा हुआ व्यक्ति अपने समक्ष सभी को तुच्छ मानता है इसीलिए वह अहंकारी अधर्मी असुर सम्राट युद्ध के प्रथम दिवस पर स्वयं तो रणभूमि में कदापि नहीं उतरेगा और ना ही अपने उस अनुज को भेजेगा तो फिर ऐसा कौन है जिसे वह भेज सकता है अधर्मी असुर सम्राट युद्ध के प्रथम दिवस पर स्वयं तो रणभूमि में कदापि नहीं उतरेगा तो फिर ऐसा कौन है जिसे वह भेज सकता है उन असुर भ्राता हों के अनेक पुत्र हैं उनमें से कोई भी युद्ध के लिए आ सकता है प्रभु गजमुख का पुत्र अग्निमुख भी हो सकता है जो श्रेष्ठ योद्धा भी है और आपसे प्रतिशोध के लिए लालायित भी है क्योंकि आपने उसके पिता का वध किया था हे राजमाता सुरास यदि आप य निर्णय ले रही है कि युद्ध करने का पहला अवसर किस असुर योद्धा को मिलना चाहिए तो वो मैं ही हूं अग्निमुख अग्निमुख प्रतिशोध की भावना सदैव अनुचित निर्णय ही करवाती है इसलिए यदि उनमें तनिक भी समझ होगी तो वो उसे तो कदापि नहीं भेजेंगे आप मुझे सुरा पद्मन के अन्य पुत्रों के विषय में बता उनके चारों पुत्रों को धर्म संस्कार सिखाने का बहुत प्रयास किया मेरी पुत्री ने किंतु उन पर असरों का प्रभाव सशक्त था इसलिए माया सुरा सई ने जो उन्हें सिखाया उन्होंने वही सीखा उसमें से एक है असुर राज माता वाह अद्भुत ये तो अति उत्तम है प्रतिशोध तो मुझे भी लेना है अपने चाचा गजमुख का मेरे बल के आगे कोई नहीं बचेगा ना ही उसका सेना नायक ना ही उसकी सेना मेरे क्रोध की अग्नि में सब जलकर भस्म हो जाएंगे यह तो अत्यंत विनाशकारी है इसका उचित प्रयोग तो अस्त्र रूप में सेना नायक के रूप में नहीं स्वामी कार्तिके मेरी पुत्री से सी मुखन को भी एक पुत्र प्राप्त हुआ है जिसका अंतर उसके बाहर से भी अधिक अंधकारे है जो ऊपर से सौम्य है किंतु भीतर से बहुत ही दूर है केवल अपनी रणनीति से ही अनेकों युद्ध जीत चुका है वो असुर सम्राट आज के युद्ध के लिए आपके अनुज महायोद्धा से मुखन का पुत्र आदि मुखम अर्थात मुझे ही जाना चाहिए नहीं तुम मेरे एकमात्र पुत्र हो तुम्ह मैं नहीं होना चाहता और यह केवल इसलिए नहीं कि मैं युद्ध कौशल में पारंगत हूं मेरे जाने का एक और भी कारण है राज माता सुरास के तीन पुत्रों में से एक चाचा गजमुख ने युद्ध में अपने प्राणों का बलिदान दिया शत्रु ने छल से उनका वध किया फिर आपके पुत्र और मेरे भता सुद मुखम को यह अवसर प्राप्त हुआ किंतु दुर्भाग्यवश कार्तिकेय दूत वीर बाहू ने उसका अंत कर दिया तोब राज माता के तीसरे पुत्र मेरे पिता से मुखन को यह दायित्व निभाना चाहिए इसलिए इनकी ओर से मैं जाने का इच्छुक हूं और विश्वास रखिए मारूंगा या मार कर मरूंगा मेरे लिए बीच का कोई मार्ग नहीं है मैंने अभी भी कुछ ना बोला तो मेरा पुत्र माता सुरास की महत्वाकांक्षा की बली चढ़ जाएगा नहीं आदि मुखम को भी नहीं भेज वो क्योंकि वो अनेकों युद्ध में अवश्य विजय हुआ होगा किंतु देवताओं के विरुद्ध एक भी युद्ध में नहीं और वो अवश्य ही किसी ऐसे योद्धा का चुनाव करेंगे जिसका देवताओं के विरुद्ध कोई अनुभव रहा हो अब चाहे वह किसी का भी चुनाव क्यों ना करें वह किसी को भी क्यों ना भेज दे हमें अपनी युद्ध की रणनीति स्पष्ट कर लेनी चाहिए तो कदाचित मुझे इस भरी सभा में मां की वास्तविकता उजागर करनी [संगीत] होगी माता माता बताओ कहां है [संगीत] वो मेरा आदेश ध्यान से नहीं सुना था तुमने मैंने अपने सभी पुत्रों को बुलाने के लिए कहा था तो भानु गोपन क्यों नहीं है यहां कहां है वो कहां है वो कहां है वो कहां है माता 11 दिन की शिव आराधना में व्यस्त है [संगीत] वह [संगीत] [संगीत] h [संगीत] ओम नम शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय उसकी कोई भी पूजा इस कार्य से अधिक महत्त्वपूर्ण नहीं अपने तप से वो शिव अस्त्र तो प्राप्त कर चुका है तो शिव की और आराधना करने की क्या आवश्यकता है भला मैं किसी की भी आहुति दे सकती हूं चाहे वो मेरे पुत्र हो या पुत्र के पुत्र अभी वो बस भानु कोपन का प्रयोग करना चाहती हैं भैया सिंह मु कब तो कुछ कहेंगे बुलाओ भानु कोपन को वो जाएगा इस युद्ध को आरंभ करने से पहले ही अंत कर देगा स्वार्थ की छाया है भैया सिंह मुख पर भी इसलिए वो कुछ नहीं कह रहे क्योंकि स्वयं उनके पुत्र का जीवन दांव पर नहीं लगा है मुझे ही कुछ कहना होगा किंतु मा इस सभा में उसी को बोलने का अधिकार है जिसे आमंत्रित किया गया था अर्थात मेरे पुत्र और पौत्र ना ही तुम आमंत्रित हो और ना ही तुम्हें बोलने का कोई अधिकार है यदि फिर भी तुमने बोलने का दुस्साहस किया तो हम तुमको फिर से ठुकरा भी सकते हैं अब आप तो मुझे ठुकराए ही क्योंकि अब आपको मेरी कोई आवश्यकता जो नहीं है आपकी महत्वाकांक्षा के यज्ञ में मात्र समिधा है हम यही तो मेरी महत्वाकांक्षा रूपी यज्ञ की समधा मात्र है इनकी आहूति ही मुझे सफल बनाएगी आपकी स्वार्थ पूर्ति के मात्र वो साधन जिनका आप कभी भी बलिदान दे सकती है भूलो मत अजा मुखी मैं तुम्हारी मां हूं मां तो है पर आपके भीतर मां की ममता नहीं है मां तो वो होती है जो अपने संतान के सुख के लिए स्वयं को न्योछावर कर देती है ना कि अपनी ही संतान को हवन कुंड में आहुति बनाकर डाल देती है बस बंद करो तुम्हारा नरल प्रलाद मां के विरोध एक शब्द और बोला तो मुझसे बुरा और कोई नहीं होगा ज्ञात नहीं मातृ भक्ति का ऐसा कौन सा पाठ सिखाया है इन्होंने उनका उद्देश्य ज्ञात होते हुए भी वास्तविकता पाने में असमर्थ हो रहे हैं आप भैया मुझे मारना चाहते हैं तो मार दीजिए भैया किंतु जिनके लिए आप मेरा अंत करना चाहते हैं उन्हें आपके अंत पर भी कोई दुख नहीं होगा इनका अपना उद्देश्य इनकी विजय इनका वर्चस्व ही इन्हे इतना प्रिय है कि इन्होंने स्वयं अपनी पुत्री का विवाह तक नहीं होने दिया रुको बस बहुत हुआ नहीं आज मुझे सत्य बताने से कोई नहीं रोक सकता मैं महेंद्रपुरी के महानतम सेनापति युद्ध सुर से प्रेम करती थी और जब मैंने यह मां को बताया तो उन्होंने उसे और उसके संपूर्ण परिवार को यहां बुलाने को कहा जिससे हमारे विवाह की बात कर स और मुझे भी उन पर उतना ही विश्वास था जितना अब सबको है किंतु उन्होंने मेरे साथ विश्वास घात किया जिसकी मैं कल्पना भी नहीं कर सकती [संगीत] आइए प्रणाम राजमाता क्या इच्छा है आपकी मैं अपनी पुत्री आपके पुत्र को सौंप दूं तो क्या वह उसके बाद प्रसन्न रहेगी हां राजमाता हमें पूर्ण विश्वास है कि आपकी पुत्री हमारे पुत्र के साथ सदैव प्रसन्न रहेंगी और हमारा पराक्रमी पुत्र आपकी पुत्री के लिए सर्वथा योग्य है और फिर वो आपका सेनापति भी है उसने अनेकों बार आपको युद्ध जिताए हैं और आगे भी जीतेगा [संगीत] तो फिर तो हमें तनिक भी विलंब नहीं करना चाहिए लीजिए इस शुभ अवसर पर मिष्ठान से अपना मुंह मीठा [संगीत] [संगीत] कीजिए रुको पुत्र [संगीत] क्यों तुम अपने हाथों से स्वयं अपने भावी पति को मिष्ठान [संगीत] खिलाओ [संगीत] मां यह क्या किया आपने किस अपराध का दंड दिया आपने इन्हे मुझे अपराध था या मूर्खता यह तो तुम्हे ही ज्ञात होगा किंतु असुर राज परिवार की पुत्री होकर तुम किसी से विवाह कैसे कर सकती हो किसी को अपना संबंधी बनाकर हमारे अधिकार और ऐश्वर्य को कैसे बांट सकती हो नहीं विवाह नहीं करना है तुम्हें अपितु ऋषि मुनियों को अपने रूप के जाल में उलझा करर उनका सब भंग करना है ताकि उनका धर्म भ्रष्ट हो जाए और हम असरों का वर्चस्व बढ़े इस प्रकार अपनी मां और अपने कुल की सेवा करनी है तुम्हे यही है तुम्हारे जीवन का उद्देश्य और यही है नियति [संगीत] अपनी पुत्री के हाथों उसके होने वाले वर की हत्या करवा दी उन्होंने फिर मुझे अपने स्वार्थ के लिए भोग की एक वस्तु बना दिया जिससे मैं ऋषियों मुनियों को पद भ्रष्ट करती रहूं और इनका साम्राज्य स्थापित रहे कैसी मां ऐसा कर सकती है इतनी निष्ठुर इतनी कठोर है ये बहन हजाम मुखी के साथ में कैसा अन्याय किया मां [संगीत] ने कल तुम्हारा होने वाला पति तुमसे दूर चला गया था आज एक मां से उसकी बेटी दूर जा रही है समय आ गया है सुरास तुम्हारे यज्ञ की अग्नि में एक और रिश्ते की आहुति देने का अजामे के अंत का महत्वाकांक्षा जब सीमा पार कर जाती है तो व्यक्ति अपना विवेक खो देता है और अपने साथ अपनों के नाश का कारण बनता है

No comments:

Post a Comment

ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...