Tuesday, 6 January 2026

सारथि संजय ने अर्जुन का संदेश सुनाया Mahabharat Scene B R Chopra Pen Bhakti

[संगीत] महाभारत राज सारथी संजय पधार रहे हैं [संगीत] महाराज की जय हो वहां से क्या प्रस्ताव लाए संजय महाराज युधिष्ठिर ने प्रतिष्ठित वृद्ध व्यक्तियों के लिए सादर प्रणाम और अनुज के लिए स्नेह का उपहार भेजा है महाराज काम की बात करो राज सारथी संजय धैर्य से काम लो पुत्र दुर्योधन धैर्य से काम लो मेरे धैर्य का कोश रिक्त हो चुका है मामाश्री अब मैं गदा से काम लेने की सोच रहा हूं गए उधर भी है पुत्र दुर्योधन जानता हूं पितामह किंतु यदि पांडवों ने 12 बरस के बनवास को स्वीकार नहीं किया तब तो गदा को टकराना ही पड़ेगा पहले यह तो सुन लो युवराज कि पांडु पुत्र ने क्या संदेश भेजा है आप बूढ़े लोग जिस युद्ध को टालना चाहते हैं कुलगुरु वो टल नहीं सकता क्योंकि मैं युद्ध को टल नहीं दूंगा यह पांडव केवल मेरी गधा और मेरे मित्र करण के वाण की भाषा समझते हैं सुनाओ राज सारथी उप पलव से क्या समाचार लेकर आए हो हे महाराजाधिराज मैंने आपका संदेश जेष्ठ कुंती पुत्र को दिया वहां और कौन-कौन था पांडव परिवार के अतिरिक्त विराट नरेश थे पंचाल नरेश द्रुपद थे युवराज दृष्ट दुम थे और वासुदेव कृष्ण थे र ने कहा क्या पहले मैं वो बताता हूं महाराज जो कुंती पुत्र अर्जुन ने युवराज दुर्योधन के लिए कहलवान जेष्ठ कुंती पुत्र ने उन्हें टोका तो नहीं था महाराज तो फिर बताओ अनुज पुत्र अर्जुन ने मेरे पुत्र के लिए क्या संदेश भेजा है अर्जुन ने मुझसे कहा था महाराज की हे संजय उस असभ्य सूत पुत करण के सामने दुर्योधन से कहना कि यदि उसने इंद्र प्रस नहीं लौटाया तो अपने कपट अपनी असभ्य और अपने अहंकार के कारण वो रण भूमि में किसी सूखे हुए वृक्ष की बाती कटकर गिरा हुआ दिखाई देगा इसलिए हे संजय उस मूर्ख को समझाना के शांति के मार्ग पर चलना सीखे महादेव की सुगंध जब मेरे वर्णों की वर्षा होगी तो अग्नि बरसेगी और वो अग्नि कुरु सेना और सेना पतियों को यूं जलाकर भस्म कर देगी जैसे ग्रीष्म ऋतु सख हुई घास को जलाकर राज कर देती है सारथी तुम संदेश सुना रहे हो या ज्येष्ठ गुरु पुत्र दुर्योधन को डराने का प्रयत्न कर रहे हो ज्येष्ठ गुरु पुत्र तो गंगा पुत्र भीष्म है युवराज जानता हूं कुलगुरु कि जेष्ठ गुरु पुत्र तो पितामह है मैं क्षमा चाहता हूं परंतु यह घोषणा भी करता हूं यदि पिता श्री ने किसी को मेरा उत्तर लेकर अर्जुन के पास नहीं भेजा तो मैं स्वयं उपल जाकर उसके अस खीच लूंगा और उसकी प्रत बना लूंगा धीरज पुत्र धीरज धीरज और धैर जैसे शब्द मेरे लिए नहीं बने पिता श्री वस दुर्योधन मेरी बात ध्यान से सुनो तुमने धर्म और अर्थ दोनों ही से अपना नाता तोड़ दिया है तुम ही कुरुवंश की पतन शलता का कारण हो पुत्र तुम ही और अब भी यदि तुमने अपनी आंखें नहीं खोली तो समझ लो पुत्र कि अपने महारथियों के शव देखना तुम्हारी नियती बन चुकी है हे पुत्र दुर्योधन तनिक सोचो तो तुम केवल तीन व्यक्तियों की ही बातें सुनते हो उनमें से पहला है गुरु परशुराम द्वारा शापित सूत पुत्र करण और दूसरा है यह गंधार नरेश कपटी शकुनी और तीसरा तुम्हारा दुराचार अनुज दुशासन क्या इस भरी सभा में सबके सामने य मेरी निंदा करना आवश्यक था आदरणीय पिता क्षत्रिय धर्म के पालन के अतिरिक्त और मैंने किया क्या है मैंने यही शपथ ली है ना कि मैं अपने मित्र दुर्योधन के शत्रु पांडवों का वध करूंगा और आप ही बताइए कि मैं यह शपथ नहीं लेता तो क्या करता मैं कूटनीति की मधुर भाषा नहीं जानता पिता मा क्योंकि मैं राजनीतिज्ञ नहीं हूं योद्ध हूं मैं और केवल धनुष की भाषा जानता हूं हे पितामह एक बात आप ध्यान से सुन लीजिए मेरी निष्ठा कुरुवंश के प्रति नहीं है मेरी निष्ठा केवल महाराज और युवराज दुर्योधन के प्रति है निष्ठा जैसे शुद्ध और पवित्र शब्द का दुरुपयोग ना करो अंगराज करण तुम तो जिस छतनाग और अपनी इस अनिष्ठा को निष्ठा भी कहे जा रहे हो ना भड़का अपने मित्र दुर्योधन को ना भड़का [संगीत] तुम हो ही क्या और हम सब मिलकर भी अर्जुन का सामना नहीं कर सकते उस विराट युद्ध में तुम भी थे और मैं भी था और तुम्हारा यह मित्र दुर्योधन भी था जो आज इस सभा में बैठकर य डींगे मार रहा है कि वह अर्जुन की जीवा काटकर अपने धनुष की प्रत्यंचा बना लेगा

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